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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Laal tum aaye raine gamaay.. rasbiti aur tamchar boley gwalan | NityaPad-050 | लाल तुम आये रेन गमाय॥ रसबीती और तमचर बोले ग्वालन
छोरी माय ॥ १॥ चंद मलीन भयो दिनमणितें कुमुदरही कुमलाय॥ अरूण किरण
कंजन पर परसत मधुप लिये मधु जाय ॥२।।| आज रेन जागत भई सगरी तातें कछू
न सुहाय ॥ सूरदासप्रभु परे प्रीतिवश मिलके बिछुरुयो न जाय ॥३॥। | Lalit |
Mamriman mero kahyo gopinath kunwar tohi | NityaPad-321 | मामरीमान मेरो कह्यो गोपीनाथ कुंवर तोहि
बोलें।| हां जो लालनसों पेंजुकर आई सो तेंजु करी ऐरी नयननहीं नहियां तातें
मोमें कछू न रह्मोरी ॥ १॥। घोषनूपति सुतहै बहुवल्लभको कौन सुकृत फल तेंजु
लह्योरी॥ गोविंदप्रभु तें सुहाग भाग वशकीने तुमतो परम विचित्र रस छिनछिन
जात वह्योरी ।।२॥ | Iman |
Kaanh kahno nandbhog lagabo.. gopmahar upanand bulabo..1.. | Part2-073 | कान्ह कह्नो नंदभोग लगाबो॥ गोपमहर उपनन्द बुलाबो॥१॥
नयन मूंद करजोर मनाबो॥ प्रेम सहित नैवेद्य चढावो ॥२॥
मनमें नेक खटक जिनराखो। दीन वचन मुखतें तुम भाखो ॥३॥
ऐसेंही गिरि प्रसन्न अतिव्हैहें ॥ सहस्न भुजा घर भोजन खेहें ॥४॥
सूरदास प्रभु आप पुजावत॥ यह महिमा केसें कोउ पावत ॥५ ॥ | Bilawal |
Shyam anga sakhee hamey chandanakon neeko sohe bago . | NityaPad-241 | श्याम अंग सखी हमे चंदनकों नीको सोहे बागो ।
चंदन इजार चंदन को पटुका बन्यो सीस चंदनको पागो ॥१॥।
अति छबि देत चंदन उपरना बीच बन्यो चंदनको तागो ।
सब अंग छींट बनी चंदन की निरखत सूर सुभागों ॥२॥ | Saarang |
Douu dhota aur nandrani badey chauk baithe vrajraj . baaje bajat | Part1-135 | दोऊ ढोटा और नंदरानी बड़े चौक बैठे ब्रजराज । बाजे बजत
सिंध द्वारे पै मंगल होत चौगुनौ आज ॥१॥ छिर्कत खरिक भरे गायन के
सौने रूपे सींग मढ़ाय । पढ़ि पढ़ि वेद असीस देत द्विज सुत चिरजीवो जसुमति
माय ॥२॥ फिरि फिरि ग्वाल गोप पहराये अरु पहराई सब व्रजनारी । आरती
करि हुलसी जसुमति मन आभूषण सब दये उतारी ॥३॥ सर्वसु वारि देत
नौछावरि दश दिनके मेरे लाल कहाये श्रीविइलगिरिधरनरायनें अति सुंदर दोऊ नाम
धराये.. ॥४॥ | Saarang |
Khelat hein vraj mein hari horry .. gwal baal lalana | Part3-340 | खेलत हें ब्रज में हरी होरी ॥ ग्वाल बाल ललना
संग लीने देत कूंक मिलब्रज की खोरी ॥१॥ अरणजा वाद कुंकुमा केसर
चंदन बंदन रोरी ॥ सरस फुलेल अबीर अरणजा सुरंग गुलाल लियें भर
झोरी ॥|२॥ सुर मंडल मुख चंग परवावज विच मुरली मधुर ध्वनि थोरी ॥
श्रवण सुनत आईं ब्रज सुंदरि संग लियें वृषभान किशोरी ॥ ३॥ गावत फाग
राग केदारो नाचत रंग भरे दुहुं ओरी ॥ तिहिं अवसर पकरे श्रीदामा आंजत
नयन कह्ठत हो होरी ॥४॥ रत्न जटित आभूषण अंबर और दई हँस पीत
पिछोरी ॥ देत असीस चलीं सब गोपी नंद सुबन युग युग जीवोरी ॥५॥
कुसुमन वृष्टि करत इंद्रादिक आये खेल फेर सिंघ पौरी ॥ गोकुल नाथ
वारत तन मन धन बल बल बल बल की नोरी ॥६॥ | Adano |
Garimatidijo mogaribanikojayohai.. | NityaPad-191 | गारीमतिदीजो मोगरीबनीकोजायोहै।।
जिततोबिगारकियो आनकहोमोसोतुम मैंतोकाहूबातनमें नाहीं तरसायोहै ॥१॥
दधिकी मटकीभरी आंगनमें आनधरीं तोलतोललीजोंभदू जेतोजाको खायोहै ॥
सूरदासप्रभुप्यारे निमिष नहूंजे न्यारे कान्ह जैसोपूत मैंतोपूरेपुन्यनसोंपायोहै ।। २॥। | Bilawal |
Hari mukh nirakhat nainn lubhaane .. jyon madhukar rubby | Part2-350 | हरि मुख निरखत नैंन लुभाने ॥ ज्यों मधुकर रबी
कमल कोस बस फिर हू तो न उडाने ॥१ ॥ कुंडल मकर कपोलनकी छबि
जानो रेनि बीहाने ॥ दृग चंचलता देखत ही मानौ खंजन मीन लजाने ॥२ ॥
अरुन अथर दुती वज्नरपात मिलि नव घन रूप संमाने ॥ 'सूरदास' यह स्थाम
पीत पट क्यों हूं न जात बखाने ॥३ ॥ | Suha |
Naanyayari tuu alak luddy .. nisivasar giridharan lalke | NityaPad-115 | न््यायरी तू अलक लडी ॥ निसीवासर गिरिधरन लालके
हृदयमेरहेत गडी ॥९॥| तोहीलों सुख जोलों समीपरहे एकनिमिष भावत नही
छड़ी ॥ कुमनदास स्वामिनी राधाहे ब्रजयुब॒तिन माझ बडी ॥२॥ | Adano |
Shyam rokat firiau aaj vrajaki galle .! laihon sanga gwal gaay | Part1-247 | श्याम रोकत फिरीौ आज व्रजकी गैल ।! लैहों संग ग्वाल गाय
बछरा चारो जाय दान कहा लेउगे करो बनकी सैल ॥१॥ किये बन धातुके
चित्र सब अंगमें भये ठाढ़े आय करत मो सौं फैल अनखटोंटी बात करौ मनहि
बिचार कोऊ ऐसो भयौ नौंहि ब्रजमें छैल ॥२।। जात हों निस दिना याही हम
गैलमें दान कोऊ ना लियौ आज पाये पहेल ॥ मदन मोहन कहैं व्यास स्वामिनि
सुनौ धरी महुकी धरनि चलौ अपने महल ॥३॥ | Saarang |
Jembat ramkrishna douu bhaiya janani jasonda jimaveri | vyanjan | NityaPad-081 | जेंबत रामकृष्ण दोऊ भैया जननी जसोंदा जीमावेरी | व्यंजन
मीठे खाटे खारे स्वाद अधिक उपजावेरी ॥१॥ करत व्यार चहुं ओर सहचरी मधुर
बचन मुख भाखेरी ॥ परमानंद प्रभुमाता हितसों अधिक परम रस चाखेरी ॥२॥ | Dhanshree |
Yeh chhabi dekh radhika bhooli.. baat kahetsakhiyanason phooli ..1 .. | Part2-074 | यह छबि देख राधिका भूली॥ बात कहेतसखियनसों फूली ॥१ ॥
आपही देवा आप पुजेरी ॥ आपही जेंमत भोजन ढेरी ॥२ ॥
अति आतुर जेमतहें भारी ॥ इक वृषभान बिलोवनहारी ॥३ ॥।
नाम ताहि बदरोला नारी॥ ताकी बलि दई भुजापसारी ॥४ ॥
उत गिरि संग खात बलिसारी॥ बदरोलाकी बलि रुचिकारी ॥५ ॥
सूरदास प्रभु जेंमनहार ॥ गिरि बपरेको कहा अधिकार ॥६ ॥ | Bilawal |
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