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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Tumakon maiya chhaak pathaai.... | NityaPad-199 | तुमकों मैया छाक पठाई।॥।
टेरत फिरत ग्वालनंदलाल क्ित तुम दोऊ भाई ॥१॥
नईनई भांत नये डबरनमें अपने सिर धर आई ॥
नेक कहत सुनिहो भ्रवणनसुख पावत ताही ठौर बुलाई ॥।२॥
बानी समझ हँस सुखपावत ताही ठौरहि धाई॥
श्रीविद्डनगिरिधरनलाल को अद्भुत रुचि उपजाई ॥३॥ | Saarang |
Karwat laee pratham nandanandan . taakon mahari mahotsav maanat | Part1-136 | करवट लई प्रथम नंदनंदन । ताकों महरि महोत्सव मानत
भवन लिपायौ चंदन ॥१॥ बोलीं सकल घोषकी नारी तिनकौ कियौ बंदन ।
मंगल गीत गवावत्त हरखत हँसत कछू मुख मंदन ॥२॥ यह बिधि भई घड़ी
द्वै चारिक तब कुँवर उठि जागे । भूलि गई संभ्रममें सुतकों कछु एक रोमन
लागे ॥३॥ दई लात गिरि गयौ शक्ट थैंसि तब ही सै उठि दौरे । विस्मय
भये विलोकत नैनन भल्रे से कछु बौरे ॥४॥ लिये उठाय कुँवर व्रजरानी रहसि
कंठ लपटाई । प्रेम बिबस सब आपुन सँभारत परमानंद बलि जाई ॥५॥ | Ramkali |
Barsaanen tein kunwari radhika horry khelani | Part3-148 | बरसानें तें कुंवरि राधिका होरी खेलनि
आँई हो ॥ सँग सखी बूंद लीए बहु नागरी उड़गन चंद सुहाई हो ॥१॥
गावति गारी बनीं ब्रजनारी नंद भुवन में आई हो ॥ पकरि लये स्याम सुंदर,
घन दामिनि देति दिखाई हो ॥२।॥| तब सखी भेख बनाई मोहन को सारी
सुरंग सुहाई हो ॥ अति बहु मोली अरणजा चोली केसरि रैंग रैंगाई हो
॥३१॥ नख सिख भेख बनाई स्यथाम कौं उपमा कहत न जाई हो ॥ जुबति
बुंद में जुबति भेख धरि बैठें कुंवर कन्हाई हो ॥४॥ तब नंद रानी अति
सरसानी मेवा बहुत मँगाई हो ॥ चिरजीयो नट नागर जुग जुग 'सरस
रंग” गुन गाई हो ॥५॥ | Aasawari |
Nand nandan vrishabhaanu-nandini baithe phool-mandani raaje . | NityaPad-262 | नंद नंदन वृषभानु-नंदिनी बैठे फूल-मंडनी राजे ।
फूलन ि के खंभ फूलनि की तिवारी फूलनि के परदा अति छबि छाजें ॥
फूलनि के चौक, फूलनि की अटारी, फूलनि के बंगला सुख साजें ।
ता पर कलसा फूलनि के फूलनि के फोंदना विराजें ॥
फूल सिंगार प्यारी तन सोहत मदनगोपाल रीझिवे काजें ।
“छीत-स्वामी गिरिधर छबि निरखत, रमा-सहित, रतिपति जिय लाजें ॥ | Saarang |
Mohiddhimthanade balgai .. jaauun balbalkamalmukhpar chhaand mathanirai ..1.. | NityaPad-183 | मोहिदधिमथनदे बलगई ॥ जाऊं बलबलकमलमुखपर छांड मथानीरई ॥१॥
देहुँगीनवनीतलोंदा आडकित तुमठई ॥ अतिआनंदित होतयशोमति प्रेमपुलकित भई ॥। २॥
लिये उछंगलगायउरसों प्राणजीवन जई ॥ बालकेलिगोपालहरिकी आसकरन नित्यनई ॥३॥ | Ramkali |
Shyam tere dahadahe nain kamal phoole bimal amal sarovar | Part1-347 | श्याम तेरे डहडहे नैन कमल फूले बिमल अमल सरोवर
अंतर ॥ शोभित तारे कारे कजरारे मानों बीच बसे री मधुकर ॥१॥ ढुरन
मुरनि चितबनि हँसोंहीं लजोहीं अँखियनमें मनहरनी छबि आप रीझ बस कीये
नंदकुमरवर ॥ मुरारीदास प्रभु तिहारे ऐसे द्रग मग सुभाव हाव कटाक्षतोचन काम
दुख मोचन अरु जीते हैं समर सर ॥२॥ | Kanharo |
Maiya mainnahinmakhankhayo .. | NityaPad-192 | मैया मैंनाहींमाखनखायो ।।
ख्यालपरे यहसखासबे लेमेरेमुखलपटायो ॥ १॥
देखतही छीकेपरभाजन ऊंचेधरलटकायो ॥
तूहीदेख नयन कर अपने मैंकैसे ंसोपायो ॥२॥
मुखदधिपोंछ बुद्धि एककीनी दोनापीठदुरायो ॥|
डारसांट मुसकाय यशोदा स्थामहि कंठलगायो ॥३॥
बालविनोदभावकरमोह्ो मातामनहिरिझायो ॥
सूरस्याम यह यशुमतिकोसुख देवनदुर्लभगायो ।॥।४॥। | Bilawal |
Maadho juu jaani deuu chully baat .. kamal nainn kaahe koo rokat | Part1-248 | माधो जू जानि देऊ चली बाट ॥ कमल नैंन काहे को रोकत
बर बट जमुना घाट ॥१॥ और सषा देखेंगे कोफ गहत सीस तें माट ॥
तुम तों कान्ह ओर परत नहीं नीयरें गोधन ठाट ॥२॥ क्यों बिकायगों गोरस
मेरो करत भोर ही नाट ॥ परमानेंद” चंद्रावली खीजति दिन प्रति यही हें
डॉट ॥३॥ | Saarang |
Naval nikunj mahel mandir meey jemban baithe kunwar kanhai. | Part2-246 | नवल निकुंज महेल मंदिर मे जेंबन बैठे कुंवर कन्हाई।
भरि-भरि डला सीस धरि अपने व्रजबधू तहाँ छांक ले आईं॥१ ॥
हरखित बदन निरखिर दंपति को सुंदरि मंद-मंद मुसकाई।
गूँजा-पूआ थरि भोग प्रभु कों 'कृष्णदास' गनगौर मनाई ॥२ ॥ | Saarang |
Russ lampat bhogi bhanwara ray tohi kahoo naan naan aghaay.. | Part2-349 | रस लम्पट भोगी भँवरा रे तोहि कहू न न अघाय॥
निस दिन भ्रमित फिरत बन बेली वासर तोहि मुखाय ॥१ ॥ जो कोई मधुप
तो अमल कमल मन को सुरताई ॥ जगन्नाथ कवि राय के प्रभु सों मनमथ
सौं अरुझाई ॥२ ॥ | Suha |
Tum merrie motin ler | NityaPad-227 | तुम मेरी मोतिन लर
क्यों तोरी ॥ रहो ढोटा तू नंदमहरकों करन कहत कहा जोरी ॥१॥ मैं जान्यो
मेरी गेंद चुराई ले कंचुकीविच होरी ॥ परमानंद मुसकायचली तब पूरणचंद
चकोरी ॥२॥ | Saarang |
Baalaa main jogi jass gaaya . dhanya jasumati tere tanakon jinn | Part1-115 | बाला मैं जोगी जस गाया । धन्य जसुमति तेरे तनकों जिन
ऐसा सुत जाया ॥१॥ गुनन बड़ौ छोटो जिन जानौ अलख पुरुष घर आया !
जाको ध्यान धरत हैं मुनिनन निगम खोज नहीं पाया ॥२॥ जो चाहौ सो
लीजिये रावल करे आपनी दाया। देहू असीस मेरे या सुतकों बाढ़े अविचल काया
॥३॥ ना हों लैहों पाट पार्टबर ना लैहों कंचन माया । अपने सुतकौ दरस
दिखावी जो मोय गुरु नें बताया ॥४॥ विनती कियें कहति नंदरानी सुनि
जोगिनके राया | देखन न देहुँ तोहि दिगंबर बालक जाय दिठाया ॥५॥ जाकी
दृष्टि सकल जग ऊपर सो क्यों जाय दिठाया। अलख पुरुष है मेरा स्वामी सो तैंने
भवन छिपाया ॥६॥ बालकृष्णकों लाय यशोदा करे अंचलकी छाया । दरसन
पाय चरनरज बंदी सिंगी नाद बजाया ॥७॥ निरख निरख मुख पंकज लोचन
नैनन नीर बहाया । देखत बनें कहत नहिं आवै नाटिक भला बनाया ॥<॥
टठाकुरदास महाप्रभु लीला महादेवलों लाया । लीला लाल ललित गुन अटक्यो चित्त
नहिं चलत चलाया ॥९॥ | Aasawari |
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