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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Jaba kudyau hanuman udadhi jaanaki sudhi laine kaun .. dekhanakon | Part1-298 | जब कुद्यौ हनुमान उदधि जानकी सुधि लैन कौं ॥ देखनकों
दशमाथ अपने नाथकोौं सुख देनकौं ॥९॥ जा गिरि पर चढ़ि कुलाँच लीनी
उचकैयाँ ॥ सो गिरि दशा योजन धँसि गयौ धरनी महियाँ ॥२॥ धरनी धँस
गई पाताल भार परें जाग्यौ ॥ शेषहूकौ शीश जाय कमल पीठ लाग्यौ ॥३॥।
अरुण बदन श्वेत दशन बड़ी पीन गात है ॥ उत्तरतें दक्षिण मानों मेरु उड़चौ
जात है ॥४॥ जा प्रभुकौ नाम लेत भव जल तर जात है॥ शत योजन सिंधु
कूद्यौ तौ केतिक यह बात है ॥५॥ रामचंद्र पद प्रताप जगतमें यश जाकौ॥
नंददास सुरनर मुनि कौतुक भूले ताकौ ॥६॥ | Maru |
Srigokul rajkumarason mero munn laagi rahyo. | NityaPad-101 | श्रीगोकुल राजकुमारसों मेरो मन लागि रह्यो।
घूंघरवारे केस सांवरो अमल कमलदल नैना।
जटित टिपारो लाल काछनी अरु पियरो उपरैना ।
कुंडल अलक झलक गंडन पर हंसि बोलत मृदु बैना |
कमल फिरावत कर बनमाला नूपुर बजत नगैना ॥१॥|
काल दुपैरा बिरियाँ ए सखी इन कदमनकी और |
मोहन मंडली संग लीने हेली खेलत हैं चकडोर ।
हौं जु हुति सखियनमें ठाढी निरखी हँसे मुख मोर |
सबकी दृष्टि बचाय आली मोपै डारी नंद किशोर ॥। २॥
आज भोर गई भवन नंदके मैं ज़ु कछुक मिस कीनो।
सोय उठे राजत सिज्जा पै नंदलाल रंगभीनीौ।
लटपटी पाग रसमसे नैना मोहि देख्त्र हंसि दीनो।
पुनि अंगराय दिखाय बदन छबि चितवत चित हरि लीनो ॥ ३॥
जाकी गति मति रति लागी जासों ता बिन क्यों हून सर ही।
जैसे मीन रहे जल बाहिर तलपि तलपि जिय मर ही ।
कोऊ निंदौ कोऊ वंदौ त्रासो एकौ जीय न धर ही ।
कहे भगवान हित रामराया प्रभु नेकु हियतें न टर ही ॥४॥ | Saarang |
Aaj sakhee sapanen shree gokul sovan phoolan fulyo .. tihi samein shabd sunyo tama charko mero munn anand bhoolyo ..1.. suno hoe saheli | Part1-039 | आज सखी सपनें श्री गोकुल सोवन फूलन फूल्यो ॥ तिहि समें शब्द सुन्यो तम चरको मेरो मन आनंद भूल्यो ॥१॥ सुनो हो सहेली
गुनगहेली सपनों भावहें नीको ॥ नंद बबाजीके पुत्र भयो हें भांवतो
सबहीको ॥२। हों अपने गृहतें उठी रावर मांगत जात मथानी ॥ पहली
पोरितिं सुनि आइ ब्रज बधाई जानी ॥३॥ अरी भटू में सुन््यो नांहिनें तेरे कहाँ
सुधि पाईं ॥ भली भई विधि कूख सिरानी गोरी जशोदा माई ॥४॥ एक
सखी अब धावत आवत लें मुक््ता मनिमाल ॥ हस्त कमल सिर सोंह करत हों
भयो हे नंदजूकें लाल ॥५॥ सहज सिंगारजु जेंसें तेंसें अति आनंदित धाई ॥
अक्षत गोमय दूब सींकरज मंदिर बंधन आई ॥६॥ ओर सखी मिलि धावत
आवत अंचल सूरति बिसारी ॥ साथीपूरेकी सोंज चलोलें कर धरि कंचन
थारी ॥७॥ मधुर मधुर सुर गावत आवत गीत जसोमति भाये ॥ बिहसि
कह्यों सबसों पाय लागनों तुम असीस फल पाये ॥८॥ अति विचित्र बहु धरत
साथिये गृह मंडत बहुवेसा ॥ कंचन कलस सकल व्रज बेरंख बंदनवार
सुदेसा ॥९॥ परम उदार नंदजूकी रानी सकल सुवासनी बोली ॥ बरन
बरनके सारी लहेंगा ओर कटावकी चोली ॥१०॥ मोहन उपर वारि न्योछावर
करत प्रान बलिहारी ॥ पाय लागी मुख चूंबि गोदलें खगुवावों रख
गुवारी ॥११।! आंखि अजावन नंद सुहागिन पाई हे नूपुर झारि ॥ साथीयरेकी
सोंज चलो लें करमहि कंचन थारी ॥१२॥ हसि व्रजराज खिरकमें आये जहां
सुरभिन की ठाटी ॥ दिये घूमरि घोरीके खेला ओर पियरे मुखपाटी ॥१३॥
शत्रु मारि भुवभार उतारे जन साधुनके काजा ॥ वुंदारण्य बिहारी हूजो सकल
लोकके राजा ॥१४॥ उर अंचल लें देत असीसा बिनती सुनहु बिधाता ॥
सकल भोग नंदराय भोगवें जुग जुग उरकु सराता ॥१५॥ दास गुपाल साथ
यह लीला गुन गोविंद जुके गावें । हरिभक्तकों होऊ कृपानिधि सकल पदारथ
पावें.. ॥१६॥ | Jethsri |
Vrishbhan puraten dhaadhani aaee bhanki | deit assis balaiya lait | Part1-124 | वृषभान पुरतें ढाढ़नि आई भानकी | देत असीस बलैया लेत
है कान्हकी ॥१॥ या मेरी बहोत बड़ाई तिहारी भाग है | लीजे दान सोड़
माँगी तिहारो लाग है ॥२॥ मेरी महरी सुभामिनि कन्या जो जनें । तेरे पुत्र
संजोग सगाई को बनें ॥३॥ बोले बोले कुँवर कर राखी बाँधीकें । चली सकल
सुख पाय सगाइ नॉधिके ॥४॥ दानमान ले बहुरी बहोत उलासमें । करि हों
बहोत बड़ाई बारिन बासमें ॥५॥ तेरी रसिक मनी लाल होय चिरंजीवनो ।
किशोरीदासकौ सेवक अपनौ करि गिनौ ॥६॥ | Jetashri |
Mukur mahalmein maan likhyo mohniko vinay bachan boli sukumarike . | Part2-058 | मुकुर महलमें मान लिख्यो मोहनीको विनय बचन बोलि सुकुमारीके ।
कितेक कौतक निहार प्यारी नेन लर स्वेत जरी जोत जानो चित्र चित्रसारी के ॥९ ॥
सरस सुहागनि है सरद सोहाई रितु रसिक बिहारी संग पिय प्यारी के।
मानो मदन व्योम चढ़े मान गढ़ लेन अली बान बरखत दीपत दीप यों दिवारीके ॥२ ॥ | Bihag |
Brinda bipin naval basant khelati tarun nabal | Part3-062 | ब्रिंदा बिपिन नवल बसंत खेलति तरुन नबल
बलबीर ॥ ब्रज बधू संग मुदित नाचति तरनि तनया तीर ॥१॥ अरून तरू
मुकलित मनोहर विविध द्वुम गंभीर ॥ मधुप बिहंग करत कुलाहल, मलय
बहै समीर ॥२॥ अगर कुँमकुम बहुत सौरभ, लसत भुषन चीर ॥ “कृष्ण
दास' बिलास सुखनिधि गिरिधरन गुन गंभीर ॥३॥ | Basant |
Chandan sugandh anga lagaay aaye merey grih hamahi mug jovat laal tiharohe .. | NityaPad-277 | चंदन सुगंध अंग लगाय आये मेरे गृह हमही मग जोवत लाल तिहारोहे ॥
ढीले ढीले पग धरत घामके सताये लाल बोलहु
न आवे बैन कोनके बचन पारेहो ॥१॥
बैठो लाल सीतल छांह श्रमहुको निवारन होय सीतल जल यमुनाको अनेक भांति पीजिये ॥
नंददास प्रभु प्रिय हमतो दरसकी प्यासी ऐसी नीकी करों कृपा-मोहि दरस दीजिये ॥२॥ | Saarang |
Sirdhare pakhauja morke.. | NityaPad-224 | सिरधरे पखौजा मोरके।।
गुंजाफछ फूलनके लटकन शोभित नंदकिशोरके ॥१॥
ग्वाल-मंडलीमध्यविराजत कौतुक माखनचोरके ॥|
नाचत गावत वेणु बजावत अंस भुजा सखा औरके ॥२॥
तैंसेई फरहरात रंग भीने छबि पीतांबर छोरके ॥
परमानंददासको ठाकुर मन हरत नयनकी कोरके ॥३॥ | Saarang |
Khelati nand mahari koo dhota thaadau sinh dubari | Part3-068 | खेलति नंद महरि को ढोटा ठाड़ौ सिंह दुबारि
होरी ॥ बालक सँग बुलाई घोष के कीन््हें बिबिधि सिंगारि होरी ॥॥१॥
सूथन लाल बागणौ सेत पणिया केसर रैंग बोर होरी ॥ फैंटनि पटका तार
जरकसी, सीस चंद्रिका-मोर होरी ॥२॥ केसर रंग निचोई भरे घट मृगमद
अतर फुलेल ॥ करन कनक-पिचकाई छिरकति कीच म्ची सब गैल होरी
॥१॥ दुंदुभि ढोल भेरि सहनाई बाजति मधुर मृदंग होरी ॥ झाँझि ताल
महुवारि किन्नरी ढफ सुर मधुरे मुख चँग होरी ॥४॥ धुनि सुनि के घर-
घर तें निकसी ब्रजनारी सिंगार बनाई होरी ॥ तिन मधि कुँवरि राधिका
राजति पिय-चित लेति चुराई होरी ॥५॥ प्रमुदित मन खेलन कौ आवति
गाबति सरस धमार होरी ॥ सैंननि सैंन मिलाई लाल सौं देति भाँवती
गारी होरी ॥६॥ छूटन अब न पाओगे मोहन बलदाऊ लेऊ बुलाय होरी ॥
फगुबा के मिस धाई गहे हरि मुरली लई छिनाई होरी ॥७॥ चंद्रावलि चोबा
चंदन लै छिरकति मदन गुपाल होरी ॥ करत मनोरथ मन के भाए बिबिधि
भाँति के ख्याल होरी ॥८॥ तब हलधर सखन लै धाई घेरीं सब ब्रजबाल
होरीं ॥ केसर कलस नवाई सीस तैं डारति सुरंग गुलाल होरी ॥%॥ तब
नंदरानी बहु बिधि भूषण मेवा दयौ मंगाई होरी || चिरजीयौ ब्रजराज लाड़िले
कहैं असीस सुनाई होरी ॥१०॥ दोउठ हाथ मुख परसि स्याम कौ, पुनि-
पुनि लेति बलाई होरी ॥ रस बस मगन भई ब्रज सुंदरि, चली संकेत बताई
होरी ॥११॥ या बिधि राज करीं दंपति नित-प्रति रास बिलास होरी ॥
श्री विड्डल पदरज प्रताप तें गावत यह जसु दास” होरी ॥१२॥ | Basant |
Dhaurikau paya peejai hoe gopal jaason teree baini badhe . sub | Part1-157 | धौरीकौ पय पीजै हो गोपाल जासों तेरी बैनी बढ़े । सब
लरिकनमें सुनि सुंदर सुत तुव शिर अधिक चड़े ॥१॥ देखि देखि और व्रजबालिक
बलि और बच्छ बड़े ॥ कंस केशी सब बैरिनके उर अनुदिन अनल दढ़े ॥२॥
छिनु अँचवत छिनुहीं छिनु टटोवत ऐसेही जचन रहे । सूरदास मुसिकाय यशोदा
शिरतें काढ़ी न कड़े ॥३॥ | Aasawari |
Khelat vasant giridharanlal .. manmohan sohan | Part3-036 | खेलत वसंत गिरिधरनलाल ॥ मनमोहन सोहन
दृगविशाल ॥।भ्रु०॥ संगसोहत सुंदर अनंग ग्वाल ॥ भीने रंगकेसरिे करत
ख्याल ॥ उडत अबीर पचरंगुलाल ॥ वाजत मृदंग डफ झांजताल ॥१॥
आईं बनिबनि मिलि ब्रजकीवाम ॥ श्रीराधा ललितादिक सुनाम ॥ गाबत
पंचम वंधीप्रेमदाम ॥ सोभा पावत भयो नंदधाम ॥२॥ रंग भरत भरावत
करत रंग ॥ रंग भरे बसन राजतसुअंग ॥ लुब्धे सुगंध भये मत्तमूंग ॥
मृुदुबोलत डोलत संगसंग ॥३॥ भरिलयो अबीर मुठीसुहेत ॥ दोऊ तज्यो
चाहत पुनिराखिलेत ॥ दूँगमूंदन चमकनि है सुचेत ॥ बाढत छबि सोगुनी
सुखनिकेत ॥४।॥ लेवरन वरन बररंग अमोल ॥ छिरकत हितुव पिय
हितकलोल ॥ फविरहीवूंद सोहतदुकूल ॥ मानों फूलि रहे बहुबरन फूल ॥५॥
भरे नवल वाम गिरिधरहि धाय ॥ रहे विविध भेद अंग्रअंग छाय ॥ जहां
निरखत सोभा कहीन आय ॥ तहां स्याम रंग जान्यों न जाय ॥६॥
भई मोहित सुर वनिता विमान ॥ मोहे गंधर्व सुनि मधुर गान ॥
रंग भर्यों पिय अति सुजान ॥ यह राखि हिये कृष्णदास ध्यान ॥७॥ | |
Aaj diwari mangal chaar.. | Part2-039 | आज दिवारी मंगल चार॥
ब्रजयुव॒ति मिल मंगल गावत चोक पुरावत आंगन द्वार ॥१ ॥
मधु मेवा पकवान मिठाई भरि भरिलीने कंचन थार॥
परमानंददासको ठाकुर पहेरे आभूषण सिंगार ॥२॥ | Bilawal |
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