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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
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Kirtan
Raag
Nand badhaavan chali prajavanita || dagmagi chaal chalat taruni
Part1-016
नंद बधावन चलि प्रजवनिता || डगमगी चाल चलत तरुनी सब सुंदर रूप बनी अति ललिता ॥१॥ बनघन फूल रहो चहुँ दिसतें उमगि उछंग चली ज्यों सरिता ॥ सरस रंग श्रावन जैसें उमड्यो व्रजजन मन आनंदित हरिता. ॥२॥
Bhairav
Shyam naval naval badhu kunjan madhya naval keli chand naval raas rachit sharad sharvari ..
Pustak1-342
श्याम नवल नवल बधू कुंजन मध्य नवल केलि चंद नवल रास रचित शरद शर्वरी ॥ ताल धरनि एक मृदंगनि एक रवाब बजावै उपंगन मध्य नायक नॉचत गावत जोरी कर्वरी ॥१॥ तट तरंगन निकट तरुणी कटितट मृदु चंपक बरणी बाम दक्षिण प्रीति भाव करत गर्व री ॥ गिरिवरधर भदनमोहन भूलि रहौ सकल गगन मगन कृष्णदास कहत बहुत प्रेम पर्व री ॥
Iman
Vrishbhan kunwari radha namini . pragati haye mangal munny vraj
Part1-203
वृषभान कुंवरी राधा नामिनी । प्रगटी है मंगल मनी ब्रज जीवनकी प्राण संजीवनी अदभुत अभिरामिनी ॥१॥ व्रजदेवी सुरनर मुनि सेवी परम प्रेमनीकी स्वामिनी । “नंददास” रस रास रसीली वृन्दावन धामिनी ॥२॥
Kedaro
Laal tum maangat daan caso .. chhando baat humm jehein mohan rokat
Part1-265
लाल तुम मांगत दान कैसो ॥ छांडो बाट हम जेहें मोहन रोकत हों मगर ऐसो ॥१॥ दूध दहीं को दान सून्यो कहीं देहों कहा कहोजू तैसों ॥ नंददास प्रभु गिरिधर सुत क्यों बोलत बोल अनेसो ॥२॥
Nat
Dhana tuu dhana dhana dhana tero jovan dhana teroi
NityaPad-334
धन तू धन धन धन तेरो जोवन धन तेरोई जन्म कर्म गुन॥ राजदुलारी रूप सांचे ढ़री सब सखियन में उठ चल बन बन ॥। १॥॥ हों जु मनावत नहीं मानत छांडव देरी आली ठन गन॥ तानसेन के प्रभु वे बहुनायक तोहि बुलाबत हेरी छिन छिन ॥२॥।
Lalit
Dwijkul prakate srihari sundartaki raas.. param
Part2-318
द्विजकुल प्रकटे श्रीहरि सुंदरताकी रास॥ परम पुनीत एकादशी धन्य धन्य माधोमास ॥१ ॥ लग्न नक्षत्र बल शोधकें बेठे ह्विजवबर आय ।॥ श्रीलक्ष्मणभट मनमोदसों दीनी बहुविध गाय ॥२ ॥ फूले द्रम ओर बेली फूली सरस बनराय ॥ निजजन फूले निरखकें रहसि बधाई गाय ॥३॥
Raayso
Aaj praatahi tutaraat baat kahat bali kanhaiya ! jaise shuk
Part1-154
आज प्रातहि तुतरात बात कहत बलि कन्हैया ! जैसे शुक पीक बोलतहैं अरसपरस सुनसुन सुखपावत लावत नंद यशोदा मैया ॥१॥ बचन रचन कहत समझ परत नहीं कछु बिच बिच दाब जीभ कहत मेरी मैया । रीझ् रीझ् पुलकि पुलकि उर लागत चुंबत मुख बारबार कहत यह लेत पुनि बलैया !।१॥ बहु बिध पकवान पय खीर नीर माखन मधुमेवा मिश्री ले प्यावत मथ पैया | बलबल ब्रजवनिता जहाँ दामोदर हित चित नित हरत लरत भूखन पट नटवर दोऊ भैया ॥३॥
Bilawal
Raag kanharo tum hii pai suniyat suni vrishbhan nandani raadhe..
Pustak1-346
राग कान्हरो तुम ही पै सुनियत सुनि वृषभान नंदनी राधे॥ तान बंधान अनूपम गतिसौं करत सुंदरी मो मन साथे ॥१॥ कोक कला संगीत निपुन री उघटत शब्द ताताथेई ताधे ॥ कृष्णदास गिरिधरन प्रशंसित कहा कहों रस सिंधु अगाथे ॥२॥
Kanharo
Bhuliriddhimanthan karvo .| dekhtarsiknandanandanko dagamagaatpagadharvo ..1...
NityaPad-181
भूलीरीदधिमंथन करवो ।| देखतरसिकनंदनंदनको डगमगातपगधरवो ।।१॥। रहिगई चितैचित्रजेसे एकटक नयन निमेषनपरवो ॥। चतुर्भुज प्रभुगिरिधरन जनायो काहेतेंमोमनमाणिकहरवो ॥।२।।
Bilawal
Arey munn srivallabhagun gaay ..
NityaPad-351
अरे मन श्रीवल्लभगुण गाय ॥ वृधाकाल काहेकों खोवत वेदपुराण पढाय ॥। १॥| श्रीगिरिराजधरण पैवेकों नाहिन और उपाय ॥ रसिक सदा अनन्यहोयके चित इत उत न डुलाय ॥२॥
Bihaag
Sub gwal naachen gopi gaavai .
Part1-046
सब ग्वाल नाचें गोपी गावै । प्रेम मयन कछु कहत न आवै ॥१| हमारे राय घर ढोटा जायौ । सुनि सब लोक बधाये आयोौ॥२॥ दूध दही घृत काँवरि ढोरी । तंदुल दूब अलंकृत रोरी ॥३॥ हरद दूध दथि छिरकत अंगा । लसत पीतपट बसन सुरंगा ॥४॥ ताल पखावज दुंदुभि छोला। हसत परस्पर करत कलोला ॥५॥ अजिर पंक गुलफन चढ़ि आये । रपटत फिरत पग न टहराये ॥६॥ वारिवारि पट भूषन दीने । लटकत फिरत सहारस भीने ॥७॥ सुधि न परे को काकी नारी । हँसिहँसि देत परस्पर तारी ॥८॥ सुर विमान सब कौतिक भूले ) मुदित्त त्रिलोक विमोहत फूले ॥९॥
Sarang
Gopal maaee khelat hein chogan.. vraj kumar
Part2-235
गोपाल माई खेलत हें चोगान॥ ब्रज कुमार बालक संग लीने वृन्दावन मैदान ॥१ ॥| चंचल बाजि नचाबत आवत होड़ लगावबत आन ॥ सबही हस्त ले गेंद चलावत करत बावा की आन ॥२॥ करत न शंक निशंक महाबल हरत नृपति कुलमान॥ परमानंद दासको ठाकुर गुन आनंद निधान ॥३ ॥
Dhanashri
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