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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Dhanidhani nand jasomati hoe dhanya srigokulgam ..
Part3-141
धनिधनि नंद जसोमति हो धन्य श्रीगोकुलगाम ॥ धन्य कुंवर दोऊ लाडिले बलिमोहन जाको नाम ॥|१॥ छबीलेहो ललना ॥ श्रीवल्लव राजकुमार छबीले ॥ श्रीगिरिवरधारी लालछबीले तुम या गोकुलके चंदछबीले ॥श्रु०॥ सखा नाम ले बोलियो सुबलतोक श्रीदाम ॥ श्रवन सुनत सबधाइयो बोलत सुंदर स्याम ॥२॥ भेष बिचित्र बनाइयो भूषन बसन सिंगार ॥ मंदिर ते सब सजि चले बालिक बलि बनवारि ॥| ३॥ गिरिवरधर अतिरस भरे मुरली मधुर बजाय ॥ श्रवनसुनत सब ब्रजवधू जहां तहाँते चलिंधाय ॥४४॥ रुज मुरण डफ झालरी बाजे बहुबिधि साज ॥ बिचबिच भेरिजुबाजही रह्यो घोख सब गाजि ॥|५॥ पिचकाई करकनिककी अरगजा कुंकुम घोरि ॥ प्रान पिया कों छिरकहीं तकितकि नवलकिसोरि ॥६॥ एक ओर जुवत्तीभई एक ओर बलबीर ॥ कमलन मार मचाईयो रूपे सुभट रनधीर ॥७॥ उलटि आई ठाडी भई अपने अपने टोल ॥ झूमक चेतबगाबही बिचबिच मीठे बोल ॥८॥ हँसतहँसत सब आइयो लीनों सुबल बुलाय ॥ हा हा काह्दू भांतिसों नेकमोहनकों पकराय ॥॥ बोडोरि सिमिटि सबधाइयो मोहनलीनेघेरि ॥ नैनन अंजन आंजिके हँसत बदन तनहेरि ॥ १ ०॥॥ यह बिधि होरी खेलही सकल घोष संगलाय ॥ गोवर्द्धनधर रूपपे गोविंद बलि बलि जाय ॥११॥
Aasawari
Rasikan russ bharey hoe sulap sanch
Part1-344
रसिकन रस भरे हो सुलप संच गति लेतहें ग्रग्रताता थेई थेई बाजत मृदंग ॥१॥ ताल जंत्र किन्नरी कतर भेद तेसीय मिलिहें सरस उपंग ॥ गोविंद प्रभु के भू मदमाती युवती युथ ग्रथित कुसुम सिर मोतिन मंग ॥२॥
Iman
Gwal badhaai maungan aaye .. gopi goras sakal liye sanga
Part1-047
ग्वाल बधाई मौँगन आये ॥ गोपी गोरस सकल लिये संग सबही आय सिरनाये ॥१॥ अब ये गर्व गिनत नहीं काहू पाये मनके भाये । जहाँ नंद बैठे नॉदीमुख जहाँ गहनकों धाये ॥२॥ बरन बरन पट पाये ब्रजजन उर आनंद न समाये । जनभगवान यशोदारानी जियके जीवन जाये ॥३॥
Sarang
Bhojan kartahen gopal .. shuttrus dharey banaay yashoda saaje
NityaPad-077
भोजन करतहें गोपाल ॥ षटरस धरे बनाय यशोदा साजे कंचनथाल।॥। १॥ करत वियार निंहारत सुतमुख चंचलनयनविशाल ॥ जो भावेसो लेहो मेरे मोहन माधुरी मधुररसाल ।।२॥ जो सुख्र सनकादिक को दुर्लभ दुरदेखत ब्रजबाल ॥ परमानंददासको ठाकुर चिर जीयो नंदलाल ॥।३॥।
Dhanshree
Prakate shrilachhaman suta maharaj..
Part2-271
प्रकटे श्रीलछमण सुत महाराज॥ शुभवैशाख सुखद एकादसी भक्तनके सुखकाज ॥१॥ श्रीवललभ नाम सबहिनके वलल्‍लभ सुंदरवर सुकुमार॥ अति आनंदभयो त्रिभुवनमें होतहें मंगलचार ॥२ ॥ वरखत कुसुम देव मुनि हरखत बोलत जयजयकार॥ मायावाद खंड खंडनकों भूतल द्विज अवतार॥३॥ कलिके जीव कृतारथकीये भक्तिमारग विस्तार॥ अपने जान सनातन कीने दास जाय बलिहार ॥४ ॥
Devgandhar
Haan hoe hari chaley faag khelnakon ..dhru 0) sub vrajke
Part3-140
हां हो हरि चले फाग खेलनकों ॥ध्रु ०) सब ब्रजके लरिका संग लयगे ॥ भूषन वसन बनायदये ॥१॥ तिनमें सोभित बलि ओर श्याम ॥ ऐनमेन सोभा के धाम ॥२॥ हो हो बोलत ग्रहतेचले ॥ कोटि काम अभिमान दले ॥ ३॥ जायजुरे सब ब्रजजन जोरि ॥ श्रीवृषभान गोपकी पोरि ॥४॥ सखी सकल दौरी तहां गई ॥ तब प्यारी वे बोलि लई ॥५॥ खेलत ही सब गुरजन मांझ ॥ यों लागत मानों फूली सांझ ॥६॥ सखी एककी बांहगही ॥ उज्ञकि झरोखां झांकिरही ॥७॥ तब उततें चित्तये नंदलाल ॥ रहीनवाय सीस ब्रजवाल ॥८॥ त्तिहि ओसर कछु सेन दई ॥ प्यारीकी रूचि जानि लई ॥९॥ भरि भरि थार पठायेपान ॥ अति आनंदसों लागे खान ॥१०॥ द्वादश भूषन अंगबने ॥ अरुन बसन सिंगार सने ॥ १ १॥ स्लेललकी सब सोंजकरो ॥ जनजनकों सब जाय भरो ॥१२॥ उठि ठाडे हरि अपने खेत ॥ इत राधा सब सखिन समेत ॥१३॥ आयजुरे तब दोऊ टोल ॥ जोरी सरस बनी निर्मोल ॥१४।॥ विविध भांति सब बाजे बजे ॥ खेलत बीचबीच बरसजे ॥ १ ५॥ चोवा चंदन कलस भरे ॥ ढेरन सुरंग गुलाल धरे ॥१६।॥ पिचकाई सुंदर करलई ॥ उत्तबंसन की मारभई ॥१७॥ होरी खेलत रंग रहद्यो ॥ देखनकों गोकुल उमझयो ॥१८॥ जो मांग्यो फगुवासो दयो ॥ सब मनको मान्यो सो भयो ॥|१९॥ देत असीस चली सब बाल ॥ चिरजीवो व्रजको प्रतिपाल ॥२०॥ जब हरि लोचन चलेनवाय ॥ माधोढदास निरखि बलिजाय |॥२१॥
Todi
Baithe srigovardhan giri god .. mandali
NityaPad-203
बैठे श्रीगोवरधन गिरि गोद ॥ मंडली सखामध्य बलमोहन खेलत हँसत प्रमोद॥।१।॥| भई अबार भूख जब लागी 'चितये घर की कोद || गोविंद तहां छाक ले आये पठई मातयशोद ॥२॥
Saarang
Deepmalika key dinn aayo ..
Part2-057
दीपमालिका के दिन आयो ॥ नंदरायसो कहत घरनीयो यह उच्छव मन भायो ॥१॥ गोपी सकल साज सज चलीके नंदराय दरबार सुहायो॥ कंचन थार साज धरे दीपक गावत गीत मन भायो ॥९ ॥ भई भीड जशुमती के भवनमें ब्रजरानी संकल्प करायो। दीपदान की होत आरती सुरदास जश गायो ॥३ ॥
Bilawal
Mankio manini manayohu naan maane neck manhu mein soch rahee manini naan maanke ..
NityaPad-328
मानकियो मानिनी मनायोहू न माने नेक मानहू में सोच रही मानिनी न मानके ॥ उज्क पियदेखें आय चांपत चरण सखीसैन दे उठाई पिय बैठे पगपान के ॥१॥ पियको परस जान जानकेभई अजान चतुरविहारीजूसों बोली मिष आनके ॥। रहोरहो रसिकराय छिनहूंन होओ नन्‍्यारे हमतुम पौढें दोऊ एक पटतान के ॥२॥
Bihagaro
Hoe hoe horry radha khelati nand key laal saun ..
Part3-172
हो हो होरी राधा खेलति नंद के लाल सौं ॥ ब्रिंदाबन खेलनि चली गज हस्ती छूटें ढाल सौं ॥ १॥ चोवा चंदन कुँमकुमा पिचकारी भरति गुलाल सौं ॥ चंद-बदनि मृगलोचनी ढ़फ बाजति नाँचति ताल सौं ॥२॥ स्याम राधिका जोरी बनी हो उरझि रहे अनमाल सौं ॥ इत राधा बानक बने, उत मोहन बने ग्वाल सौं ॥३॥ “धोंधी” के प्रभु तुम बहु नाइक फगुवा देति खुसाल सौं ॥४॥
Dhanashri
Moson naan bolaire nandke laal teree kahaa leeyen jaat .. chhaandi dey
Part1-251
मोसों न बोलैरे नंदके लाल तेरी कहा लीयें जात ॥ छाँड़ि दे अंचल होत गहेरु जानत हौ और सी बाल ॥१॥ बैन बजावत मोहि रिज्ावत तापर गावत गीत रसाल ॥ धोंधीके प्रभु हाथ दूरि राखौ टूटैगी मोतिन माल ॥२॥
Poorvi
Aliri curr shungar sayankal chully brazabaal piya darshaveko matt dwirad gain ..|
NityaPad-313
आलीरी कर शुंगार सायंकाल चली ब्रज़बाल पिय दरशवेको मत्त द्विरद गैन ॥| मानों शिशुमार चक्र उदय होत गगन मध्य ध्रुव नक्षत्र की परिक्रमा दैन ।१॥ मानों ऋतुवसंत आई अंग अंग छबिछाई दंपति समाज मोपें कही नपरत बैन ॥ मुरारीदास प्रभु प्यारी चित्रविचित्र गति सेवक निरख पिया छबि अद्भुत ऐसी को कर रची मैन |
Iman
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