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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Nartat raas rung aeye pyaaro .. | Pustak1-344 | नर्तत रास रंग ए प्यारो ॥
रसिकन रस भरे हो सुलप संच गति लेतहें ग्रग्रताता थेई थेई बाजत मृदंग ॥१॥
ताल जंत्र किन्नरी कतर भेद तेसीय मिलिहें सरस उपंग ॥
गोविंद प्रभु के भू मदमाती युवती युथ ग्रथित कुसुम सिर मोतिन मंग ॥२॥ | Iman |
Jaya shrilakshman rajkumar .. srivrindavan badan | Part2-270 | जय श्रीलक्ष्मण राजकुमार ॥ श्रीवृन्दावन बदन
इन्दुतें प्रकटित भाव शुृंगार ॥१ ॥ आनंदरूप स्वरूप आनंदमें आनंद नधि
आनंदसार॥ आनंद दानदेत आनंदकों आनंद इलंमागार ॥२॥
दासगोपाल कहांलों वरनों मनोरथपूरे नंद दुलार॥ श्रीवल्लभ नंदन उभय
आनंद कर भक्तन भावविचार ॥३॥ | Devgandhar |
Karatshungar maiyamanbhawat || | NityaPad-153 | करतशूंगार मैयामनभावत ||
सीतलजल उष्ण करराख्योलेलालन को बैठ न्हवावत ॥|१॥
अंगअंगोछ चौकीबैठारत प्रथमहीले तनिया पहरावत ॥
देखोमेरेलाल औरसबबालक घरघरतें कैसे बनआवत ॥२॥
पहरोलाल झगाअतिसुंदर आंख आंजके तिलकबनावत ॥
सूरदासप्रभु खेलतआंगन लेतबलैया मोदबढावत ।॥।३॥ | Devgandhar |
Sou yeh dinn kaisen nibahego maan tero aayo | Part3-360 | सो यह दिन कैसें निबहेगो मान तेरो आयो
फाल्णगुन मास कह्मो तू मान॥ तज हठ कपट हठीली नागरि सुनि सांची
जिय जान ॥१॥ आयेरी लाल मनावन तोकों भाग आपुने ऊर आनि ॥
ऊठ चलि हिल मिल हरिदास के स्वामी सों अब मोहें जिन तान ॥२॥ | Bihag |
Shrilakshmansut nenkahun gaave .. damla prabhudas | Part2-294 | श्रीलक्ष्मणसुत नेंकहूं गावे ॥ दमला प्रभुदास
बडभागी त िनकों पुनपुन न आप सिखावे ॥१ ॥ प्रेम विवश होय श्रीवल्लभ
प्रभु नयनन सेंनन अर्थ जनाबे ॥ प्रकट प्रसिद्ध यशोदानंदन रसिक शोभा
मय सकल जनावे ॥९ ॥ वृन्दावन रमणीक रमणअति उर संपुटकी कोउ न
पावे पद्मनाभ गिरिधर रसलीला वेणुनादकी बतीयां भावे ॥३ ॥ | Sarang |
Chali bunn bahati mund sugandh seetal, malay sameerai .. | Part3-355 | चलि बन बहति मंद सुगंध सीतल, मलय समीरै ॥
तुव पंथ बेठि निहारति सखी हरि, सूरजा तीरै ॥१॥ चहूं दिस फूल लता
हुम हरसित सरीरै || तुव बरन तन स्याम सुंदर धरति पट पीरै ॥२॥ विविधि
सुर अलि पुंज गुंजति मत्त पिक कीरै ॥ तुब मिलन हित नंद नंदन हैं अति
अधीरे ॥३॥ “दासकुंभन' प्रभु करति बन बहु जतन सीरै ॥ तुव विरह ब्याकुल
गोवरधन उद्धरन धीरै ॥४॥ | Basant |
Giridhar dekhehinsukhhoy .. | NityaPad-225 | गिरिधर देखेहींसुखहोय ॥
नयनवंतको यही परम फल येही विधि मोहे त्रैलोय ॥१॥
महामरकतमणि नीलअंबुजको रूपलियो है निचोय ॥
कृष्णदासनि नाथ नवरंग मिलेहें विरह॒ दुखखोय ॥२॥ | Saarang |
Khelat laal apane rasmagana .. | NityaPad-058 | खेलत लाल अपने रसमगना ॥
गिरगिर उठत घुटुरुबन टेकत किलककिलक जननी उरलगना ॥|१॥
पायपैजनी ओर पनसूरा कटिकिंकिणी पहुंची जरीकंकना ॥।
हारहमेल हसली ओर दुलरी कंठ सिरी लटकन छब्िबघना ॥२॥।
कुलही ला ल ओर पीत झगुलिया रिंगन करत नंदजू के अंगना॥
निरखत दासजायबलहारी चिरजीयो यशोदाको छगना ॥ ३॥। | Dhanshree |
Janm phal maanat yashoda maay .. jaba nandlal thoori | Part1-003 | जन्म फल मानत यशोदा माय ॥ जब नंदलाल थूरि
धूसरबपु रहत कंठ लपटाय ॥१॥ गोद बैठि गहि चिबुक मनोहर बातें कहत
तुतराय ॥ अति आनंद प्रेम पुलकित तन मुख चुंबत न अघाय ॥२॥ आरति
चित्त विलोकि बदनविधु पुनिषुनि लेत बलाय ॥ परमानंद मोद छिनछिन कौ मोपै
कह्यो न जाय ॥३॥ | Devgandhar |
Sundermukh parr bavaaro tona .. benibarankimuduvena ..1.. | NityaPad-157 | सुंदरमुख पर बवारो टोना ।। बेनीबारनकीमूदुवेना ॥१॥
खंजननयनन अंजसो हे भ्रोहनलोयन लोना ॥
तिरछीचितवनयों छबिलागे कंजपलन अलिछोना ॥२॥
जोछबिहे वृषभानसुतामें सोछबिनाहिनसोना ॥
नंददास अविचलयहजोरी राधास्थाम सलोना ॥।३॥ | Bilawal |
Khelat faag laal rung bheene .. tesei sakal | Part3-323 | खेलत फाग लाल रंग भीने ॥ तेसेई सकल
सुघर लरका बने बलदाऊ संग लीने ॥१॥ बाजे बजत विविध बहु भांतन
ताल मृदंग झांझ कठताल ॥ आबज रुंज मुरज डफ बीना सुर मंडल मुख
बेणु रसाल ॥२॥ दुंदंभी मदन भेरि सहनाई पंच शब्द मिल घुरत निसान ॥
मह॒वर ढोल सहनाई घोरवसु नियत कान ॥३॥ इतनायक ब्रजराज लडेंतो
उत्त चंद्रावलि नारी ॥ कोकिल स्वर मिल गावत झुंडन रीझ देत चोंखन
सों गारी ॥४॥ सुंदर बनी कनक पिचकाई आरगजा के सर कुंकुमा घोरी ॥
मृगमद मलय कपूर आदि सोंधो जवाद छिरकत मुख मोरी ॥५॥ सुरंग
गुलाल उडाबत झोरी ग्वाल सखा समूह इकठोरी ॥ हो हो हो हो होरी
बोलत देख देख लालन की ओरी ॥६॥ ब्रज सुंदरी मतो मत्यो आपस
में क्यों हूं लालन लीजे घेरो ॥ जब दोरी सब मिल एकत्र व्हे सेनन प्यारी
के नयनन हेरी ॥७॥ पकरे जाय यसोदा नंदन झकझोरत मोतिन दयो हार ॥
मुरली झटक प्यारी कर पीवत मुखसों मुख मधु धार ॥८।॥ रस वशभये
रसिक दोऊजन सुध न रही कछु तिहिं अवसर तन ॥ अंग अंग प्रति अमित
माधुरी वे जाने के ऊनहीं को मन ॥९॥ तब चंद्रावलि काजर ले के आंजे
पियके नयन संभार || शोभा निरख एक टक व्हे तन मन धन कियो बलहार
॥१०॥ यह भांतन जू सकल ब्रजसुंदरि करत आपने मनको भायो ॥ प्रेम
मुदित अखिल गुण पूरण रसिक राय तहां रसही पायो ॥ ६ १॥ फगुवा लियो
दियो सर्वस्व तहां प्रफुल्लित मन तहां देहि असीस ।। जसोदा नंदराय व्रजभूषण
लाल चिरजीबो कोटि बरीस ॥१२॥ सोंधे सब फब रह्यो मनोहर तेसो ही
शोभित सावल अंग ॥ मानो मदगज घस रंग संभारच्ो करिणी यूथ लिये
अपने संग ॥१३॥ यह विध खेलत सब मिल ब्रजमें आनंद सिंधु बढ्यो
चहुँओर ॥ प्रेम ममन निरखत लालनकों नहीं जानत कीने निस भोर ॥१४॥
अतिही उत्साह भरी ब्रजरानी करत आपही बहु सनमान ॥ मागन देत
अमोलिक भूषण पट अंबर कंचन मणिदान ॥ १ ५॥ क्यों वरनें मन हीन छीन
बल लीला जल निधि परम रसाल ॥ गिरिधर पिया वल्लभ श्रीविद्ठल चरण
कमल रज प्राण आधार ॥१६॥ | Kalyan |
Pahale herry gaay sunai ..! | Part2-051 | पहले हेरी गाय सुनाई ॥!
ता पाछें महुबवर सुर मंडल मुरली मधुर बजाई ॥१॥
ठठक रहे सब ठाठ गायन के भीर खिरकमें नाही समाई॥
सिखवत गीत हाथ ऊँचोकर हरखत श्रीत्रजराई ॥२॥
बाहरतें सब कुक सुनाई हुँक-हुँक फिर आतुर आई॥
रहे बछरुवा धोरी विफरी ताक ताक परछाई ॥|३ ॥
खेल मच्यो है बडे खिरक में शोभा कहियन जाई ॥
अटाअटारी जुंडन वारी सब ब्रजजन देखन आई ॥४॥
पुलक रहो है धैन रंधन सब ऐसो बडो कन्हाई ॥
एक बार दोऊ हुंकारी
7री जब मीज भुजा उठाई ॥५॥
गरज उठे घंटा कंठन में दुहुं और सो छाई ॥
नंददास प्रभु सोई सुनसुन जशुमती लेत बलाई ॥६ ॥ | Sarang |
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