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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
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Kirtan
Raag
Mohan mohani rasbhare .. bhonh sohan nayan ferat taahi
Part1-322
मोहन मोहनी रसभरे ॥ भोंह सोहन नयन फेरत ताहि रस में ठरे ॥१॥ अंग निरख अनंग लक्षित सके नहिं ठहराय ॥ एक हि की कहा चलै शत शत कोटि रहत लजाय ॥२॥ करत परस्पर रंग हस्तक छवि नृत्य भेद अपार ॥ उड़त अंचल प्रगट कुच दोउ कनक घट रस सार ॥३॥ तरकि कंचुकी ढरक माला रही धरणी जाय ॥ सूर प्रभु करती सखी कर नृत्य लेत उठाय. ॥४॥
Ramkali
Gragrathung thung tita kitt thringan aeka charan karason bharein juu bhalein mridang bajaabvai ..
Pustak1-341
ग्रग्रथुंग थुृंग तित किट थृंगन एक चरण करसों भरें जू भलें मृदंग बजाबवै ॥ दूसरे कर चरणसों कठताल झंझंझ झपतालमें अब घर गरि उपजावै ॥१।| कंठ सरस सुरहे गावै मोहन मधुरतान लाबै सकल कला पूरण वृषभाननंदिनी पिय मनभावै ॥ गोविंदप्रभु पिय रिि रहे मुरझाई दशन दशन धरकें रहसि उरसि लपटावै ॥२॥
Iman
Praat samein giridharjuke sunn‍mmu nikibani mangal aarti ...
NityaPad-132
प्रात समें गिरिधरजूके सन्‍्मु नीकीबनी मंगल आरती ॥। कनकथाल दीपमाल बालन के करन में जगमग जगमग जोत होत चक्र सुकुमार ती ॥१॥ झंझंझालर मधुर घंटा घननघनन बलैया कलैयाकी धुनि होत जब चमरढारती ।। मुरारीदासप्रभुकी वदनकी छबि निरखत धन्यधन्य ये निकट निहारती ॥२॥
Bibhaas
Dekho durmati yeh sansarki ||
NityaPad-359
देखो दुर्मति यह संसारकी || हरिसो हीराछांडि हाथतें बांधत पोट विकारकी ॥१॥ झूठे सुखमें भूलरहेहैं सुधविसरी करतारकी ॥ नाना विधके करमकमाए खबर नहीं शिरभारकी ।। २॥ कोऊ खेती कोउवणिज चाकरी कोऊ आशा हथियारकी ॥ अंधधुंध फिरत दशोंदिश फूटीआँख गँवारकी ॥३॥ नर्कजानके मारग चाले सुनसुन विप्र लबारकी ॥ अपने हाथ गले में डारत फांसी मायाजारकी ।।४॥ बार बार पुकार कहतहों सुनहों सजन हारकी ॥ सूरदास यह विनस जायगी देह छिनकमें छारकी ॥५॥।
Bihaag
Dhanya dhanya bridaranya kurangani..! srimukhakamal
NityaPad-316
धन्य धन्य बृदारण्य कुरंगनि॥! श्रीमुखकमल पीवत सखी सादर कृष्णसार पतिसंगनि ॥। १॥ चरणकमल कुंकुमरुषिततृण कुच अवलेप करत त्यजत आधि मनसजित पुलिंदनि ॥ गोविंदप्रभुको अमृतनाद सुन थकित प्रवाह तरंगनि ॥२॥
Adano
Houn vrajarajki dhaadhin vrajmein aiho . raani yashomatti jaayi
Part1-126
हों व्रजराजकी ढाढ़िन ब्रजमें आईहो । रानी यशोमत्ति जायी पूत सुधामतें धाई हो ॥१॥ सुंदर रूप अनूप सबै मन भाई हो । मानों उर्वशी इन्द्र अखाड़े तें आप पठाई हो ॥२॥ मंदिरमें लई बोल जहाँ नंदरानी हो । शीश नवाय अशीष दै वंश बखानी हो ॥३॥ बाजत ताल मृदंग उपंग सु बॉसरी । अंवुज नैन विशाल सु गावें गाँसुरी ॥४॥ निर्तत ताथेई ताथेई लीयें गति गोंहनी । नंदके मंदिरतें निकसी मानों मोहनी ॥५॥ रीज् जसोमति रानी सबै ब्रज सुंदरी । दीये कनक कुंडल हार दई कर सुंदरी ॥६॥ दीनी नई नकबेसर बेंदी जरायकी । दीनी है कंचन जेहार पायल पॉयकी ॥॥७॥ दई सोधे भीनी सारी कंचुकी नेहकी । कीनी है माल निहाल सो मालन गेहकी ॥<८॥ ढाढ़ी चलयौ लदि लाद सबै चित चाड़िलो । चिरजीयो चतुर्भुबदासकौ गिरिधर लाड़िलौ ॥९॥
Kafi
Kusum gulab mahel mein bethe srigiridhari syama pyaari ..
NityaPad-262
कुसुम गुलाब महेल में बेठे श्रीगिरिधारी स्यामा प्यारी ॥ जारी भांत विचित्रता छबि कुमक बनी निवारी ॥१॥ बोहोरंग कुसुम भूषण दंपति पहेरावत चहुंदिश ब्रजनारी ॥ वृन्दावन खग मृग अति सोहे ब्रजाधीश प्रभुकी बलिहारी ॥२॥
Saarang
Houn vaari tere mukh parr . merrie drishti jinn laagon maaee mussi
Part1-146
हों वारी तेरे मुख पर । मेरी दृष्टि जिन लागों माई मसि बिंदु को देहुँ भ्रूषपर ॥१॥ सर्वसु मैं पहलें ही दीनी दतियाँ नान्‍्हीं नान्‍्हीं दू पर। अब कहा नौछाबरि करों सूर सुनि ललित त्रिभंगी ऊपर ॥२॥
Ramkali
Laal hii naanhi jagaay sakat sunason batasjani .. apane
NityaPad-022
लाल हि नांहि जगाय सकत सुनसों बातसजनी ॥ अपने जान अजहु कान मानत सुख रजनी ॥१॥ जब जब हों निकट जाऊँ रहत लाग लोभा॥ तनकी सूधि बिसर गई देखत मुख शोभा ॥।२॥ वचननको जिय बहुत करत सोच मनठाढी ॥ नयनन नयन विचार परे निरखत रूचि बाढी ॥।३॥ यह विध बदनारविंद यशुमति जियभावे ॥ सूरदास सुखकी रास कहत न बनिआवे ॥४॥
Bibhaas
Servous daaron vaari bhawan merey chala sukh deeje ..
NityaPad-303
सर्वस डारों वारि भवन मेरे चल सुख दीजे ।। सीतल धाम छिरक राख्यो मन भावे सो कीजे ॥१॥ ब्यारुकों पकवान मिठाई और ओट्यो सीतल पय पीजे ॥ कुंभनदास प्रभु गोवर्द्धनधर कहो हमारो लीजे ॥ २॥
Iman
Srigopal laal gokul chaley houn balibali tihinkal . moud bharey
Part1-069
श्रीगोपाल लाल गोकुल चले हों बलिबलि तिहिंकाल । मोद भरे बसुदेव गोद लै अखिल लोक प्रतिपाल ॥१॥ अरुन उदय जैसें तम फूटत खुलि गये कुटिल कपाट । महावेग बल छांडि आपनों दीनी श्रीयमुनादाट ॥२॥ भोर भयें जैसे कुमुदिनी मूँदत कंसादिक भये मोहे | संत जननके मन अम्बुज वन फुले डहडहे सोहे ॥३॥ बारबार फुहीं फूलसी बरखत अंबुद अंबर छायौ । अपनों निज वषु शेष जानि तहेँ बूँद बचावन आयौ ॥४॥ परम धाम जग धाम श्याम अभिराम श्रीगोकुल आये । नंददास आनंद भयौ ब्रज हरखित मंगल गाये ॥५॥
Maroo
Chali bunn nirakhi raaj samaaj kratu koun, sakal
Part3-354
चलि बन निरखि राज समाज क्रतु कों, सकल तरू मोरे ॥ यह वसंतहि जानि रति कैं कंत दल जोरे ॥१॥ विरहनी मति विकल करिवे मृगगन दौरे ॥ कोकिला कल कंठरव मिलि, काम सर छोरै ॥२॥ तरनि तनया तीर मलयज पवन झकझोरैे || गहरु तजि ब्रज भामिनि मित्रि नंद किसोरै ॥३॥
Basant
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