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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Arrie sakhee saanmari hoe, akeli yeh vann kahaan tey aaee ..
Part1-278
अरी सखी सांमरी हो, अकेली यह वन कहां ते आई ॥ तरुन तरुन तेरो तन प्यारी श्री राधे के मन भाई ॥१॥ नंदगाव की सांमरी हो स्यामा मेरो नाम ॥ सांझी फूल कुशल सुन राधे दरशन ही को काम ॥२॥ जब ललिता जु भुज भर अपुने श्रीराधासों भेटाई ॥ नये नेह सों मिलत परस्पर बरसाने ले आई ॥३॥ कीरतजु आदर कर लीनी सोय रहो तुम यहांई ॥ श्यामा भामा संबे मिलके फूलन डलियां लाई ॥४॥ सांज्ञी भरत धरत बोहों मेवा बीरा विधिसों खवाई | पुरुषोत्तम सखी तन मन वारत सुख लुंटत सुखदाई ॥५॥
Jangalo
Aaj badhaayo mangalchar ..
Part2-241
आज बधायो मंगलचार ॥ माघ मास शुक्ल चोथ हे हस्त नक्षत्र रविवार ॥१ ॥ प्रेम सुधा सागर रस प्रगदयो आनंद बढ्यो अपार ॥ दास रसिक जन जाय बलिहारी सरवस दीयो वार ॥१ ॥
Saarang
Aadho mukhnilambarso dhampyovidhuri alke sohe ..
NityaPad-071
आधो मुखनीलाम्बरसो ढांप्योविधुरी अलके सोहे ॥ एक दिशामानों मकरचांदनी एकदिशा घनबिजरी कोंधत हसे हरें मनमोहे ॥ १॥। कबहूं करपल्‍लवसों निखारत ऊंचेले धरत जब निकसत पुर्णशशिजोहे ॥ सूरदासमदनमोहन कबके ठाढे निहारत त्रिभुवनमें उपमार्कूं कोहे ॥२॥
Todi
Horry khelat jamuna kain tata, kunjani-tarr banwari ..
Part3-262
होरी खेलत जमुना कैं तट, कुंजनि-तर बनवारी ॥ इत सखियन कौ मंडल जोरे श्री वृषभानु-दुलारी || होड़ा- होड़ी होती परसपर, देबें आनंद गारी । भरे गुलाल, कुँमकुमा, केसरि कर कंचन-पिचकारी ॥ बाजत बीन, बाँसुरी, महुबरि, किज्नरि और मुहचंगा ॥ अमृतकुंडली और सुर मंडल, आउझ्, सरस उपंगा ॥ ताल, मृदंग, झांझ, डफ बाजै, सुर की उठति तरंगा ॥ हँसत-हँसावत करत कुतूहल, छिरकति केसर रंगा ॥ तब मोहन सब सखा बुलाये, मिलिकै मतौ बतायौ | रे भैया! तुम चौकस रहियो, जिनि कोउ होउ गहायौ ॥ जौ काहूकौं पकरि पाइहैं, करिहें मन-कौ भायौ | तातें सावधान ह्लै रहियो, मैं तुमकौ समुझायौ ॥ राधा गोरी नबल किसोरी, इनहूँ मतौ जौ कीन्हौ । सखि इक बोलि लई अपने ढिंग, भैष जु बलकौ कीन्हो ॥| ताकों मिलन चले उठि मोहन काह्ू सखा न चीन्‍्ही । नैंसुक बात लगाई साँवरे, पाछे तैं गहि लीन्ही | आईं सिमिट सकल ब्रज-सुंदरि, मोहन पकरे जबहीं । हम माँगति हीं कह विधिनापै, दांव पाई हैं कब हीं ॥ तब तुम चीर हरे जु हमारे, हा हा खाई सबहीं । अब हम बसन छीनि करे लै हैं, हा हा करिहौ अबहीं ॥| एक सखी कह, बदन उठावहु, हमहूँ देखन पावैं। श्री मुख-कमल नैन मम मधुकर, तन की तृषा बुझावें ॥ एक सरिब कह आँखि आँज के माथे बैदी लाबै | एक सस्ती कह इनहिं नचावहू, हम सब ताल बजावैं । एक सखी आई पाछे तैं मोरपच्छ गहि लीन्यौ | एक सखी त्यौं आई अचानक, पीतांबर धरि छीन्‍्यो ॥ एके आँखि आऑजि, मुख माँड्या, ऊपर गुलचा दीन्यौ | मानत कौन फाज मैं प्रभुता, मन भायौ सो कीन्यौ ॥ एक कहे, बोलौ बल भैया तुमकौं आई छुड़ावैं | सवा एक पठवौ कोऊ घर कौं, जसुमति कौं लै आवैं || जानत हो कल-बल के छूटें, सो नहिं छूटन पाबैं । राधाजूसों करौ बीनती, वै बलि तुमहिं छुड़ावैं | दूरिहि ते देखयौ बल आवत, सखी बड़त उठि धाईं । कल-बल-छल जैसें तैसें करि, उनहूं कौं गहि ल्याईं ॥ किये आनि ठाढ़े इक ठौरहिं, बल-मोहन दोऊ भाई | उनहुंकि आँखि आँजि मुख मॉँड्यौ, राधा सैन बुझाई ॥ देखि-देखि ब्रह्मा, सिव नारद, मन ही मन पछिता हीं । बड़े भाग हैं श्री गोकुल के, हम मुख कहे न जाही ॥ जाके काज ध्यान थरि देख्यौ, ध्यानहु आवत नाहीं | वे अब देखे बनितनि- आगओैं, ठाढ़े जोरे बाहीं ॥ हँसि-हँसि कहत सु मोहन प्रीतम, मन मानौं सुख कीजै । छाँड़ि देहु, गृह जाउँ आपनें, पीतांबर मोहिं दीजै ॥| कर जोरे गिरिवर-धर ठवाढ़े, आणा हमकौं दीजै। जौ कछु इच्छा होई तिहारी, सो सब फगुवा लीजै ॥ तब गिरिवर-धर सखा बुलाये, फगुवा बहुत मँगायौ । जोई-जोई बसन जाहि मन मान्यौ, सोई-सोई तिहिं पहिरायौ ॥ राधा-मोहन जुग-जुग-जीबो, सब कोऊ भलौ मनायौ ॥ बाढ़ौ बंस नंद बाबा कौं, सूरदास जस गायो ।
Sarang
Aaj houn rajkaj curry aaoon. begg sanghaarun sakal ghosh shishu
Part1-089
आज हों राजकाज करी आऊँ। बेग संघारुँ सकल घोष शिशु जो मुख आइसो पाऊँ ॥१॥ मोहन मूर्छन बसीकरन पढ़ि अगनित देह बढाऊँ। अंग सुभग ड्वै मधु मूरती सजी नैनन माँझ समाँऊँ ॥२॥ घसि कंकोल चढ़ाय उरोजनि लै ले रुचिसों प्याऊँ | सूर सोच मन अबही हरि हों तो पूतना कहाऊँ ॥३॥
Todi
Dekho gopalki aavan ..|
NityaPad-279
देखो गोपालकी आवन ॥| कमलनयन स्यामसुंदर मूरति मन भावन ॥१॥ वही सुंदर सीसमुकुट गुंजामणिलावन ॥ परमानंदस्वामी गोपाल अंग अंग नचावन ॥२॥
Poorvi
Shree yamuna paan karatahi rahiye .|
NityaPad-354
श्री यमुना पान करतही रहिये ।| वुज बसवो नीको लागतहै लोक लाज दुख सहिये।॥१॥ श्री वल्लभ श्री विड्डल गिरिधर गावत सब सुख पैये।॥। व्रजपति मुख अबलोक महासुख दरसत द्रग न अघैये ॥ २॥॥
Bihaag
Nandkishore kishori kii jory hoe hoe hoe kahi
Part3-131
नंदकिशोर किशोरी की जोरी हो हो हो कहि खेलत होरी ॥ ग्वाल बजावत डफ मृदंग मोहन मुरली ध्वनि थोरी ॥१॥ इत ब्रजनारी गारीदेत परस्पर रंगबढ्यो दुहुँओरी || गिरिधरदौर आय बदन लगावत चंदन बंदन रोरी ॥२॥ वचन बांध के छलकर लाई गांठ स्याम सों जोरी ॥ तेल चढावत गीत व्याहके सबे सयानी भोरी ॥३॥ मोरमुकुट को मोर बनायो दई है चंद्रिका की मोरी ॥ दूल्हे पर्वतसेन को प्रभु दुलहनि राधा गोरी ॥४॥
Sarang
Mero piya rasiyari sunari sakhee tero dosh naheen .. naval lalco
NityaPad-110
मेरो पिय रसियारी सुनरी सखी तेरो दोष नहीं ॥ नवल लालको सब कोउचाहत कोन कोन के मन बसियारी ॥। १॥॥ एकनसों नयना जोरे एकनसो भ्रोंह मरोरें एकनसों मुख हसियारी ॥ कृष्णजीवन लछीराम के प्रभुमाई संग डोलत पूरण शशियारी ॥ २॥
Nayaki
Nirtat radha nandkishore ..
Pustak1-322
निर्तत राधा नंदकिशोर ॥ ताल मृदंग सहचरी बजावत बिच बिच मोहन मुरली कलघोर ॥१॥ उरप तिरप पगधरत धरणि पर मंडल फिरत भुजन भुज चार ॥ शोभा अमित विलोक गदाधर रीझ् रीझ डारत तृणतोर ॥२॥
Bilawal
Mohan main goojari barasaane kii moson naahak maando raar .. paanch
Part1-259
मोहन मैं गूजरि बरसाने की मोसों नाहक माँड़ो रार ॥ पाँच टकाकी कामर और तापर इतनौ गुमान ॥ गैयाँ चरावत बाबा नंदकी मो तें माँगे दान ॥१॥ रत्न जटितकी इईँदुरी और हीरा जड़िया क्रोड़ ॥ एक हीरा गिर जायगौ तेरी सब गायनकौ मौल ॥२॥ कृष्ण जीवन लछीरामके प्रभु प्यारे चरन कमल चितलाय ॥ नेंक चिते बलजाऊँ साँवरे विमल विमल दि खाय ॥३॥
Kedaro
Munrey sthamso curr hait ...
NityaPad-360
मनरे स्थामसो कर हेत ॥। कृष्णनामकी वार करले तो बचे तेरोखेत ॥१॥| मनसुवा तनपीजरा हो तासूं बांध्यो तेरोहेत ॥। कालरूपी मंझारडोले अब घडी तोहे लेत ॥२॥| विषय विषय रसछांडदेरे उतर सायर सेत ॥ सूर श्रीगोपाल भजले गुरुबताये देत ॥३॥
Bihaag
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