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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Ulati phir aavatahi nijaddawar ..
NityaPad-160
उलटी फिर आवतही निजद्दवार ॥ गृहआंगनसुहात नतबतेदेख्योनंद-कुमार ॥ १॥ सुंदरस्थामकमलदल लोचनसुंदरताजु अपार ॥ तादिनतें आतुरयहमनतन चितवत बारंबार ॥ २॥। भोरभवनते निकसेमोहन चलत गयंदसुढार ॥ चतुर्भुजप्रभु गिरिधरनमिलनकों करत अनेक विचार ॥। ३॥।
Aasawari
Palana jhulaavati jasoda maiya . kamalnain houn vaari mukhpar
Part1-095
पलना झुलावति जसोदा मैया । कमलनैन हों वारी मुखपर लाड़िले कुँवर कन्हैया ॥१॥ दूध दही पकवान मिठाई और पिवावी थैया । विविध खिलोना लेहु मेरे प्यारे बंगी भौर चकैया गावत गीत रुचिर मूदु बानी अति प्रफुलित मन मैया | बालकेलि सुख निरखत गोविंद पुनि पुनि लेत बलैया ॥३॥
Ramkali
Haa haa karat ghokh kumari ..
NityaPad-044
हा हा करत घोख कुमारी ॥ सित तें तन कंपत थर धर बसन देहो मुरारी ॥१॥ मनही मन अति ही भयो सुख देख के गिरधारी ॥ पुरस ईसबरी अंग देखे कहेते दोसन भारी ॥ २॥ नेक नही तुमैं छोह आवत गई हा सब मारी ॥। सूर प्रभु अतही निठुर हौ नंदसुत बनबारी ॥।३॥।
Ramkali
Mohan jhoolat badhyo anand ..
Part3-372
मोहन झूलत बढ्यो आनंद ॥ एक और वृषभान नंदिनी एक और ब्रज चंद ॥१॥ ललिता बिशाखा झुलवत ठाडी कर गहि कंचन डोल ।। निरख निरख प्रीतम अरू प्यारी बिहस कहत मृदु बोल ॥२॥ उड़त गुलाल कुंकुमा बंदन परसत चारु कपोल ॥ छिरकत तरूणी मदन गोपाले आनंद ह॒दें कलोल ।। ३॥ कडाकहों रस बढ्यो परस्पर त्रिभुवन बरन्यों न जाय ॥| कुंभनदास लालगिरिधर की बानिक अधिक सुहाय ॥४॥
Devgandhar
Laalan ayeri anat ratimani bhaleju aaye merey geh alsaane
NityaPad-147
लालन आयेरी अनत रतिमानी भलेजु आये मेरे गेह अलसाने नेन बने तुतरात ॥ अधरन अंजन पीक लीक सोहे काहेको लजात जूठे सोहें खात ॥|१॥ पाग बनावत पेचन आवत तापें तिरछे नेन चलावत उमंग अंग न समात ॥ नंददास प्रभु प्यारी जियमें बसतहें, भूले नाम वाहीको निकस जात ॥२॥
Todi
Putra bhayo haye aaj srivrajraje . pratham yathaamati barnahi houn
Part1-036
पुत्र भयो है आज श्रीव्रजराजे । प्रथम यथामति बरनही हों पुष्टि मारग रसरूप । भूतल प्रगट भये आयकें हो श्रीगोकुलके भूष । श्रीत्रजराज के दूर गये दुश्ख भाज ॥ श्रीव्रजराजके. ॥१॥ व्रजवासी सब सुनतही हो आवत चहुंदिश धाय । लै काँवर दूधकी हो तनकी सुधि बिसराय ॥ श्री. ॥ जिन छांड दिये घरकाज ॥ श्री.!२॥ हरद दूधदधि अक्षत कुमकुम देत परस्पर सींच । भीर भई नंदद्वारमें हो आंगन माची कीच ॥ श्री. ॥ तिन तजी लोककी लाज ॥ श्री. ॥३॥ नंदभूप कर नचावहींहों देह दशा गये भूल । मंगल स्नान करावहीं मन पुत्र जन्मकी फूल ॥ श्री. ॥ सुत सबहिनके सिरताज ॥श्री.॥४॥ गर्ग परासर बोलकें हो जातकर्म कर नंद । श्रुतिपुरान गुन गावहीं हो प्रकटे आनंद कंद ॥श्री.॥ करत वेदधुनि गाज ॥श्री.॥ ५ ॥ चंदन भवन लिपावहीं हो धरत साथिये चीति । मोतिन चौक पूरावहीं हो करी वेद विधि रीति ॥लि.| कलश लिये सब साज ॥श्री.॥६॥ उडुंदुभि देव बजावहीं हो चहुंदिशि घुरे निशान । बहुविध बाजे बाजहीं हो करत सप्तसुर गान ॥श्री.]] ग्रावत्र सहस समाज ॥श्री.।७।| देत असीस सबै व्रजनारी जसुमति कूख सिराय । मंगल साज सिंगार सुभग तन मेर धरत लै आय ॥भश्री॥ चरन नूपुर धुनि राज ॥श्री.॥८॥ जाचक जन मनि माल पैहराई विप्रन दीनी गाय । सोना मोती हीरा पन्ना दीये भंडार लुटाय ॥अश्री.॥ देत ब्रजराज ॥श्री.॥९॥ श्रीवृषभान आदि गोपनकों बोहोत करबौ सनमान । प्रकट्यी नंददासकी ठाकुर देत अभय पद दान ॥श्री.॥ तुम करो श्री गोकुलराज ॥श्री.॥१ ०॥
Dhanashri
Dekh giridharan tunn vrishbhan kii lully .. latpati paag parr
NityaPad-167
देख गिरिधरन तन वृषभान की लली ॥ लटपटी पाग पर कुलही चरन लोटत ऐ तो जीन गहरुकर बात नाहिन भली ॥।१॥ पुन्य पूरव कूले नाथ त्रैलोकबर रसिकरस रास मय समझ मनमें अली ॥। गोविंद प्रभु अंग वर लई हीये संग कर गोपीजनके जुधमें मान तज के चली ।२॥
Kedaro
Jayatikdambakinjalkaruchirvas .. meghshamal anga tunn munn
NityaPad-135
जयतिकदंबकिंजल्करुचिरवासे ॥ मेघशामल अंग तन मन सदन शभ्रुवरभंग घोखसीमंतिनी भागरासे ॥१॥ जयति युवतीमुख विधु करतपान म्रत्तचक्ोर क्वणितकर मृदुमुरली नवरस विलासे ॥ कृष्णदासनिनाथ रसिक गिरिधरकुंवर क्वणितनूपुरदिव्य रंग रासे ॥२॥
Bibhaas
Aeye douu surat sez sukh soye .. karat paan makrand priya priya
NityaPad-129
ए दोऊ सुरत सेज सुख सोये ॥ करत पान मकरंद प्रिया प्रिय अधर पानरस जोये ॥१॥ तनसों तनमन सो मन मिलवत नेंन पानरस भोहे ॥ कृष्णदास प्रभु सुखनिधि विलसत मदन मान सब खोए ॥ २॥
Bihaag
Aaj badhaai srilakshmanghar || jaayo poot ilamma
Part2-315
आज बधाई श्रीलक्ष्मणघर || जायो पूत इलम्मा माई श्रीवल्लभ सुंदरवर ॥१ ॥ बजत निशान भेरि सहनाई नाचत मुदित नारीनर॥ मागध सूत बंदीजन याचक देत अशीश उमगे आनंद भर ॥२ ॥ कर गुन गान वेद विधि सों गुण देत दान कंचनपट नग धर।॥ सगुणदास बलबल बानिकपर लेत बलेया वार फेर कर ॥३ ॥
Kalyan
Chhori khele giridharlal .. sanga bunny vrishbhan
Part3-127
छोरी खेले गिरिधरलाल ॥ संग बनी वृषभान नंदिनी गावत गारी ग्वाल ॥१॥ बाजत बीन रबाब किन्‍नरी जंत्र पखावज ताल ॥ चोवा चंदन अगर अरगजा उडत अबीर गुलाल ॥२॥ फगणुवा मन . भायो हम लैहें यों जू कहति ब्रजबाल ॥ विचित्र विहारी प्यारे तबही दीनो पीतांबर बनमाल ॥३॥
Bilawal
Tuu aaj dekhari dekh manmohan yeye balbir raajen | madanmohan
NityaPad-145
तू आज देखरी देख मनमोहन ये बलबीर राजें | मदनमोहन पिय मनमंदिरतें बैठे बनिकस आये छाजें ॥१।। लटपटी पाग मरगजी माला लपटात मधुप मधु काजें ॥ गोविंदप्रभुकेजु शिधिल अरूण दूग देखियत कोटि मदन लाजें ॥२॥
Bibhaas
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