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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Khelanjahu gwalsbutterat .. yahasunkanhabhayye atiatur
NityaPad-190
खेलनजाहु ग्वालसबटेरत ॥ यहसुनकान्हभय्े अतिआतुर द्वारेतनफिरफिरजबहेरत ॥|१॥॥ बारबार हरिमातहिबूझत कहिचौगानकहाँहै ॥ दश्धिमथनीकेपाछेदेखो लेमैंथरूयो तहांहे ॥ लेचौगान आपनेकरप्रभु आयेघरतेंबाहर ॥| सूरस्यामबूझतसबग्वालन खेलेंगेकिहिठाहर ।। २।॥।
Bilawal
Naachat gawat vanate aavat laal tiparo sees rahmo fabi ..
NityaPad-062
नाचत गावत वनते आवत लाल टिपारो सीस रह्मो फबि ॥ घनतन वसन दामिनी मानों कुंडल किरण निरख मोहे रवि ॥१॥ हित हरिबंस और शोभानिधि गौरज मंडित अलकनकी छबि ॥ श्याम धाम सरस्वती सकुच रही या बानिक वरणत को कवि ॥।२॥
Poorvi
Saanware mohi rung mein borrie .. baiyaan pucker merrie sir
Part3-072
सांवरे मोहि रंग में बोरी ॥ बैयां पकर मेरी सिर की गगणरीया छीनके सिरतें ढोरी ॥ रंगमें लालन रसबस कीनो डारी गुलाल की झोंरी ॥ गावन लाग्यो मुखते होरी ॥ १॥ आय अचानक मिल्योरी डगरमें तब निरख्यो नंदकोरी || भर भुजले मोहि पकरकें जीवन ने वरजोरी ॥ माला मुतियन की तोरी ॥।२॥ मर्यादा मेरी कछूना राखी कही एक बात ठगोरी ॥ तब इनकों में आंख दिखाई मत जानो मोहि भोरी ॥ जानू तेरे चितकी चोरी ॥३॥ मेरो जोर प्रभु कछुन चलत है कंचुकी की कसतोरी ॥ सूरदास प्रभु तिहारे मिलन कूं रसियाने रंग में बोरी ॥ गई में नंदकी पौरी ॥४॥
Kafi
Patihaaye naina kahein deit rawre kaisen chori durey .. tum mukrat
Part1-345
पतिहाये नैना कहें देत रावरे कैसें चोरी दुरे ॥ तुम मुकरत हो ये आनन चंढ़ि गरजत गाजि बादर करत कैसेंधीं मुख मुरे ॥१॥ सोचे न झूठे करत इन बातन साह भयो चहत असि विधि तुमहीकों फुरै ॥ चतुरबिहारी गिरिधारी जानि पहचाने जू तूमसों झगरौ कौन करे ॥२॥
Bihaag
Mero pyaaro rangan bheenon | khele yeh khel naveenon
Part3-204
मेरो प्यारो रंगन भीनों | खेले यह खेल नवीनों ॥१॥ संण समाज सुहावे ॥ बहुविध बाजे बजावे ॥२॥ खेले गोकुल की गली ॥ त्रिया देखन कों चली ॥३॥ पीतरंग केसर लाई ॥ छिरकत नेह खुहाई ॥४॥ सोंघो अनुराग लगावें ॥ लालन के संग सुडावें ॥५॥ प्यारीकों कंठ लगाई ॥ फूलीजो माल सुहाई ॥६॥ परस्पर रीक्षि रिझाये ॥ जो जेसे मन भाये ॥७॥
Kaafi
Kalindike ghaat maano thadoi rahatsada merrie maaee ..
NityaPad-254
कालिन्दीके घाट मानो ठाडोई रहतसदा मेरी माई ॥ एकन नाव चढावत माई एकनको ललचावत माई ॥१॥ सुंदर कर परसत जब मोहन कछु रस सींच सुधा बरखाई ॥ 'श्रीविड्डल गिरिधर' निहार हरि हँसि हँसि कंठ लगाई ॥२॥
Saarang
Aaj vrindavipin kunj adbhut
NityaPad-230
आज वृन्दाविपिन कुँज अद्भुत नई।। परम शीतल सुखद स्याम सोभित तहां माधुरी मधुर और पीत फूलन छई॥।१॥ विविध कंदली खंभ झूमका झुक रहे मधुप गुंजार सुर कोकिला धुनि ठई ॥ तहां राजत श्रीवृषभान की लाडिली मनो हो घनश्याम ढिंग उलही सोभा नई ॥२॥ तरनी तनया तीर धीर समीर जहां सुनत ब्रजबधू अति होय हरखित भई ॥ नंददासनी नाथ और छबि को कहे सोभा नैन पंगुगति व्है गई ॥३॥
Saarang
Jaakun neck shyamakon baano .. taake nikat naan jaay jan
Part1-083
जाकुं नेक श्यामकों बानो ॥ ताके निकट न जाय जन कोऊ कहारंक कहा रानो ॥जाकु.१॥ माला कंठ सिर तिलक विराजत अरू चंदन लपटानों । शंख चक्र गदा पद्म विराजत सो कहा रहेगो जानो ॥जाकु. २॥ रविसुत कहत पुकार पुकारी सुनके दूत अकुलानों । सूरदास कहत यह हितकी समज सोच जियजानो ॥जाकु.३॥
Kanharo
Kanhar mohe ghar zaan dailo .. hoe laal teree anga
Part3-133
कान्हर मोहे घर जान दैलो ॥ हो लाल तेरी अंग की लेहु बलाई ॥श्रु.। बहुत दिनन कौ गोकुल बसिबौ कब हु न दीनौ दान ॥ कहा जू भयो जो नंद भये नाहिन घाटि बृखभान ॥१॥ मातपिता की खरी री दुलारी श्री राधा मेरो नाम ॥ छांड दे कान्हर जान दे मो घर सुनि पायेगो वृषभान ॥२॥ पान खाय पिचकारी मारत मंद-मंद मुसिकाह ॥ “दास” बिराजत के प्रभु प्यारे इह ब्रज बसिबो न जाई ॥३॥
Kafi
Mohani madan gopallalki baansuri .. madhure shravan putt sunat
Part1-341
मोहनी मदन गोपाललालकी बाँसुरी ॥ मधुरे श्रवण पुट सुनत स्वर राधिके करत रतिराज के तापकौ नास री ॥१॥ शरद राका रजनी विपिन वुंदा सुखद अनिल तन मंद अति शीतल सुवास री ॥ सुभग पावन पुलिन भृंग सेवत नलिन कल्पतरु रुचिर बलवीर कृत रास री ॥२॥ सकल मंडल भली जहाँ हरिसों मिली बनिता बर बनी उपमा कहीं कासु री ॥ कूंज कंचन तनी लालमरकतमनी उभे कलहंस हरिवंश बलिदास री ॥श)।
Iman
Aaj nandlal pyaaro mukut dharey . swan lasat makrakriti kundal ratipati munn
NityaPad-285
आज नंदलाल प्यारो मुकुट धरे । स्वन लसत मकराकृति कुंडल रतिपति मन जु हरे ॥९॥ अधर अरुन अरु चिबुक चारू बने दुलरी मोतिन माल पीतांबर धरे। अति सुगंध चंदन की खौर किये पहोंचनि पहुँची मोतिन की लरे ।।२॥ कर मुरली कटि लाल काछनी किंकिनी नूपुर शब्द हरे । गुन निधान 'कृष्ण' प्रभु रूप-निधि राधे प्यारी निरखि-निरखि नैनन ते न टरे ॥ ३ ।।
Gori
Poojati chhathi kaanh kunwarki thaape peet lagaai | kanchanthar liye
Part1-087
पूजति छठी कान्ह कुँवरकी थापे पीत लगाई | कंचनथार लिये ब्रज बनिता रोचन देत सुहाई ॥१॥ पनवारी भरि खीर खाड घृत पापर बरा बनाये । मेवा दाख बदाम छुहारे मन मोहन मन भाये ॥२)। आँजति आँखिजु सबही सुवासिन माँगत नैन भराये । सूरदासप्रभु तुम चिरजीयौ घरघर मंगल गाये ॥३॥
Saarang
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