top of page

Sheetkal Ke Pad

To get full expanded Kritan text click on any column of the kirtan row in below table.

Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Jaware paihairat srigovardhan naath sunder mukh nirakh sukh upjat
Part1-316
जवारे पैहैरत श्रीगोवर्द्धन नाथ सुंदर मुख निरख सुख उपजत ब्रजजन किये सनाथ ॥१॥ श्वेत जरी शिर पाग लटक रही कलगी तामें लाल॥ तनसुखकौ बागौ अति राजत कुंडल झलक रसाल ॥२॥ अंगअंग छबि कहाँलों बरनों नाहिन वरन्यौ जात ॥ चतुर्भुजप्रभु गिरिधर छवि निरखत आनैंद उर न समात ॥३॥
Saarang
Rasmondal mein baney giridharan laal .. subhag yamunapulin prafulit
Part1-331
रासमंडल में बने गिरिधरन लाल ॥ सुभग यमुनापुलिन प्रफुलित कदंब बन शरदरैन शशि देख थकित ब्रजबाल ॥१॥ भूषण बसन अंग अंग नौतन सखी कंठटधर बॉँह करें अधर मधुर मधुपान ॥ बनी गौर श्याम छबि शोभा कहा कहै कवि कोटि काम मोहै कुंभनदास जीय जान ॥२॥
Purvi
Bolat madangopal vinodi
NityaPad-328
बोलत मदनगोपाल विनोदी चलनरी नागरी छांडदे गजू।॥ मेरे जानगिरिधरन मिलनकों फूलेफूले तेरे अंगजू | १॥॥ तब उर पर युगल नारंगफलरंग छबीले स्यामरंगजू।। कृष्णदासप्रभू गिरिधर नवरंग भू चपलमन्मथ मानभंगजू || २।।
Bihagaro
Ritu vasant bundavan phooledrum bhaanti-bhaanti sobha
Part3-056
ऋतु वसंत बुंदावन फूलेद्रुम भांति-भांति सोभा कछुकही नजात्ि बोलतपिक मोर कीर ॥ खेलत मिरिधरन धीर संग ग्वाल वृंदभीर विहरत मिलि जमुनातीर बाढ़ी तनमदनपीर ॥ १॥ आईं ब्रज नवलनारि संग राधिका कुमारि कीने नवसत सिंगार साजे नववसन चीर ॥ बदन कमलनेन भाल छिरकत केसरि गुलाल बूकाचोवा रसाल सोंधो मृगमद अबीर ॥२॥ बाजत वीनामृदंग बांसुरी उपंग चंग मदन भेरि महु वरि डफ झांझ झालरी मंजीर ॥ निरखत लीला अपार भूली सुधिबुधि संभार बलिहारी कृष्णदास देखत ब्रज चंदधीर ॥३॥
Basant
Phoole firat ayodhya baasi..
Part2-255
फूले फिरत अयोध्या बासी॥ सुन्दर सुत जायो कौशल्या रामचंद्र सुखरासी ॥१ ॥ द्वारन बंदनबार साथिये मोतिन चौक पुराये॥ नाचत गावत देत बधाई मानों घर घर सुत जाये ॥२ ॥ गली गली गज बाजि जहां तहां हकलाय दिये तबेले॥ दान बहुत याचक जन थोरे कापें जात संकेले ॥३ ॥ दशरथ भूष भंडार मुक्त किये वंदी अभर भरे॥ शकट सलीताही सोहे मालन ठोर ठोर धरे ॥४॥ संत कमल मुख देखन कारन रबि उद्योत कर्यो॥ मुदित देव दुंदुभी बजावत निश्चर तिमिर हयों ॥५ ॥ देत अशीश सकल नरनारी चिरजीयो रघुवीर॥ अग्रदास आनंद अखिल पुर मिटी ताप तनपीर ॥६ ॥
Bilawaal
Aaj jagtipar jaijaykar.. ashwam uddharan
Part2-267
आज जगतीपर जयजयकार॥ अश्वम उद्धारन करुणा सागर प्रकटे अग्नि अवतार ॥१॥ गृहगृहतें सुंदरि सब आईं मोतिन भरभर थार॥। निरख कमलमुख प्राणनाथको तनमनधन बलिहार ॥२॥ करत वेदध्वनि सकल महामुनि सुंदर दृष्टि रसाल॥ विविध दान प्रेमसों दीने श्रीलक्ष्मणभट परमउदार॥३ ॥ करुणासिंधु सकल सुखदायक सकल सृष्टि आधार॥ अपने जीव कृतारथकीने दश्विध भक्ति अधार ॥४॥ परमआनंद बसत त्रिभुवनमें मुदित फिरत नरनार॥ हरिजीवन प्रमु यज्ञपुरुष श्री लक्ष्मणसुत अवतार ॥५ ॥
Devgandhar
Khlelat rangeele raadhe roop ujiyari .. piya hiye
Part3-349
ख्लेलत रंगीले राधे रूप उजियारी ॥ पिय हिये वसत हो प्राण हूं तें प्यारी ॥ १॥॥ वदन शरद शशि कोटि प्रकाश ॥| नागर नयना चकोर चाहत हें प्यास ॥२॥ आभूषण तारा गण नीलांबर रेनी ॥ बेनी अलि श्रेणी किथों त्रिवलि त्रिवेनी ॥३॥ मृगमद आड़ किधों मेन की ध्वजा को ॥ भृकुटि धनुष वर मानों युग जाकों ॥|8॥ नासिका सुमन तिल स्वांति सुत सोहें ॥ घन तन चतुर चातक चित मोहें ॥५॥ नगन जटित बीरे जगमगताई ॥ कनक मुकुरसे कपोलन में झांई ॥६॥ अरूण अधर लसे दर्शन सुपांती | मानों माणिक मध्य हीरा की कांती ॥|७॥| बोलन मधुर पिक बोलन लजावे ॥ मुद्‌ मुसिकान द्युति दामिनी न पावे ॥८।| सुंदर चिबुक तामें श्याम बिंदु ऐसो ॥ मोहन को मन मानों चुभ रह्यो जैसो ॥९॥ गरें पोत गुंज की उपमा जिय मांही ॥ दीपक सरन मानों सोहे परछांहीं ॥१०॥ सुभग कंचुकी पर वर मोती हारा ॥ जानों युग शिव धरें सुरसरी धारा ॥ १ १॥ वलय मंडित भुज उपमा न आवे ॥ जिनसे सांवरो सर्वस्व दे बधावे ॥१२॥ तनु रुह रेखा नाभि एसी अनुहारी ॥ कुंदन कुंडी सें जानों सुधा की पनारी ॥ १ ३॥ कटि निरखत मृगराज घट लागें ॥ रंभान के खंभा कहा जंघन के आगें ॥१४॥ चरणन नूपुरु नख यावक निकाई ॥ त्रिभुवन छबि जहां छबि आन पाई ॥९१५॥ वरनो कहांलों प्यारी मेरी मति थोरी ॥ स्याम ललिता स्यामा खेलत होरी ॥६६॥
Bihaag
Harijuke aavan kii balihari .. vaasaranati denkhatihen
Part3-036
हरिजूके आवन की बलिहारी ॥ वासरणति देंखतिहें ठाड़ी प्रेम मुदित ब्रजनारीं ॥१॥ ऋतु बसंत कुसमितवन देखियत मधुपवृंद जसगावें ॥ जेमुनिआय रहत वृंदावन श्याम मनोहर भावें ॥२॥ नीको भेष बन्‍्यों मनमोहन राजमणि उरहार ॥ मोरपक्ष सिरमुकट विराजत नंदकुमार उदार ॥३॥ घोष प्रवेस कियोह़े संग मिलि गौरज मंडित देह ॥ परमानंद स्वामी हित कारन जसुमति नंदसनेह ॥४॥
Faguwa mogan aanee ghosh sabai vrajnari ..| chandravali
Part3-114
फगुवा मॉगन आँई घोष सबै ब्रजनारी ॥| चंद्रावलि ब्रज मंडल मधि राधिका प्यारी ॥१॥ देहु राई जु फगुवा कुँवरि सब माँगन आई ॥ जसुमति गहने देहु हमें वृषभानु पठाई ॥२॥ मिरिधर तुझहारी जु मैया आजु वृषभानु बुलाई ॥ आनँदराई बिछौना कीने सब मिलि गारी गाई ॥३॥ यह सुनि आन॑ँद राई हँसे औरु हँसि हँसि फूले ॥ फगुवा देन कों आछे आछे सँचोना खोले ॥४।। बहु मोलिक अभूषन सारी बहुत मँगाई ॥ जसुमति अति प्रमुदित मन ब्रज-तरुनी पहिराई ।॥|५॥ चिर जीबौं ब्रजराज कुँवर बलि जु गिरिधारी ॥ रानी जसुमति चिर व्है रहो, नित अबिचल भारी ॥६॥ ऐसैई फगुवा दै दै हिं सबन ऐसें पहिराबों || चंद्रावलि राधा जु कौं ऐसैई लाड़ लड़ावों ॥७॥ रतन जटित सिंघासन अपुनो कुँवर बेठायो ॥ 'श्रीविद्टल भिरिधर' कों हँसि हैँसि फागु खेलायो ॥८॥
Bilawal
Chadhe hari kanak puri parr aaj .. kanpee dharani thurr harchou umber
Part1-303
चढ़े हरि कनक पुरी पर आज ॥ कँपी धरणि थर हरचौ अंबर देख दलनकौ साज ॥१॥ असुर सबै पंछी ज्यों भाजे लक्ष्मण छूटे बाज ॥। सूरदास प्रभु लंका आये दैन बिभीषण राज ॥२॥
Maru
Poojan chully ree saujhi shubhghari shubhdin shubh mahurat raat ..
Part1-276
पूजन चली री सॉझी शुभघरी शुभदिन शुभ महुरत रात ॥ चंचल चपल चपलासी डोलत चंपे जैसा गात ॥१॥ अपने अपने मंदिर तें निकसी दीप लिऐं सब हाथ ॥ धोंधीके प्रभु तुम बहो नायक सब सखियनके साथ ॥२॥
Hameer
Aaee ritu-basant kii gopeen kiye singar ..
Part3-011
आई ऋतु-बसंत की गोपीन किये सिंगार ॥ कुमकुम बरनी राधिका सो निरखति नंदकुमार ॥१॥ आई कतु-बसंत की मौरे सब बनराई ॥ एकु न फूल केतकी औ फूली बनजाई ॥२॥ श्री गिरिराजधरनधीर लाड़िलौ ललन-बर गाइए ॥ श्री नवनीत प्रिय लाडिलौ ललन-बर गाइए श्री मदन मोहन पिय लाडिलौ ललन-बर गाइए ॥| ३॥ कुंजकुंज क्रीड़ा करैं, राजत रूप-नरेस ॥ रसिक, रसीलौ, रसभर्‌यौ, राजत श्रीमथुरेस ॥४॥ श्रीगिरीराजधरनधीर लाडिलौ ललन बर गाइए ॥
Basant
Page 1 of 1

© 2026 All rights reserved. Vaishnav Samaj of RTP, DBA - Krishnadham-VYO 

bottom of page