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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Seetal bhaye merey nena. nirakh chhabi pyaari seetal dharey seetal | NityaPad-320 | सीतल भये मेरे नेना। निरख छबि प्यारी सीतल धरे सीतल
आभूषण सीतल बोलत मीठे बेना ॥ १॥|
सीतल जमुना जल सीतल कमल दल
सीतल मधुरे वास लेना।
नंददास' प्रभु सब सीतल देखियत सीतल चंद मुख
एना ॥२॥ | Kanharo |
Laal mukh venuvaje mandmand cull | vaam | NityaPad-310 | लाल मुख वेणुवाजे मंदमंद कल | वाम
भुजापर वाम कपोल कुंडल वलगत भ्रू युग चपल ॥॥१॥ मोहित व्योम विमान
बनिता खसित नीवी सुधि न अंचल ॥ गोविंदप्रभुके तरुण मदमाते विघूर्णित
लोचन युगल ॥२॥ | Kalyan |
Palana jhoolau merey lalnan pyaare muskanki balihari houn | Part1-091 | पलना झूलौ मेरे लल्नन प्यारे मुसकानकी बलिहारी हों
तिलतिल हटन करौजु दुलारे ॥१॥ काजर हात भरीौ जिन मोहन अर हैं नैना
रतनारे । सिर कुलही पहराय पेंजनी तहीं जाहु जहाँ नंददुवारे ॥२॥ यह विनोद
धरनीधर निरखत मात पिता बलभद्रददारे | सूरनर मुनि सब कौतिक भूले देखनकों
तहाँ सूर हँकारे ॥३॥ | Ramkali |
Maaee aaju laal latpataat aae anuraage. | NityaPad-147 | माई आजु लाल लटपटात आए अनुरागे।
सोभित भूखन अंग अंग आलस भरे रैन उनीदे जागे ॥१॥
लटपटी सिर पेच पाग छूटे बंदन बागे।
सूरस्याम' रसिकराय रस बस कीने सुभाय जागे जहाँ सोई तिया बडभागे ॥२॥। | Bilawal |
Hari key anga kaun chandan laptaanon | NityaPad-242 | हरि के अंग कौं चंदन लपटानों
तन तेरे दिखियतु जैसें पीत चोली ॥ आभूषन मरगजे चंदन लपटावत छिपै न
छिपाई मानौं कृष्ण बोली ॥ १ ।। कहुं चंदन कहुँ अलक ही खसि सुरत रंग की
पोट खोली ॥ हरिदास के स्वामी स्थामा कुंज बिहारी अरुन कंठ बिच रहत
न ओली ॥२॥ | Saarang |
Ghatbhar daiho lakuti tabdehun ..| | NityaPad-269 | घटभर दैहो लकुटी तबदेहूं ॥|
हमहुं बडेमहरकीबेटी हमतुमसों नाहिं डरेहूं ॥१॥
मेरी कनकलकुटी देरी मैं भरदेहों नीर ॥
बिसरगई सुध तादिनकी तुम हरे सबनके चीर ॥२॥
यहबानी सुन विवशभई तनकी सुध बिसराई ।॥
सूर लकुटकरगिरतन जानी स्याम ठगोरी लाई ॥३॥। | Bilawal |
Banyau raas pulin madhya kalindanandini || | Pustak1-325 | बन्यौ रास पुलिन मध्य कलिंदनंदिनी ||
जल सीकरता सहित मलय वायु मंदिनी ॥१॥
कुसुमित राजीव शरद रैन चंदिनी ॥
मधुप पाँत सुभग चरणकमल बंदिनी ॥२॥
गोवर्द्धनाथकी गतिगयंदिनी ॥
क्रृष्णदास सगुण शरद चंद फंदिनी ॥३॥ | Todi |
Apane apane gharke kinwar dekein soy rahey | NityaPad-250 | अपने अपने घरके किंवार देकें सोय रहे
ऐसेमें तू क्यों न रहीरी।। सूर आयो सिर पर छाया आई पायन तर बाटके बटाउ
धूप देखके झूकेरी ॥१॥। पहेरे तन श्वेत सारी मोतिनकी मालगरे सोल्हे सिंगार
अंग क्यों न सजेरी ॥ सूरदास मदन मोहन तलफत जेसे चात्रक मीन माघकी
मध्यरात्र जेसें ज्येष्ठ की दुपहरी ॥२॥ | Saarang |
Mangeri mopein chand khilona .. | NityaPad-294 | मांगेरी मोपें चंद ख्िलोना ।।
बरज रही बरजो नहीं मानत ऐसो हठीलो जसुमतिजुको छोना ॥।१॥
लें प्रतिबिंब दिखावत जननीरें रें रें मेरे चपल दिठोना ॥
सूरदासमोहन हठ ठान्यो गिरिवरथर्यों जेसें करपर दोना ॥ २॥। | Kanharo |
Aabat lalan piyaa russ bheene.. | Part2-241 | आबत ललन पिया रस भीने॥
शिथिल अंग डगमगात चरणगति मोतिनहार उरचीने ॥१॥
पारिजात मंदारमाल लपटात मथधुप मधथुपीने॥
गोविंदप्रभु पिय तहां जाबो जहां अधरद्शन छतकीने ॥२ ॥ | Ramkali |
Nritya maan preetam sanga neeken kargan sulap urap tirap bund badan | Part1-337 | नृत्य मान प्रीतम संग नीकें करगान सुलप उरप तिरप बंद बदन
जोति थकित चंद गिडग्रिडता गिडगिडता थेईथेईथेई मिलईतान ॥१॥ दंंदंदं
ननन मृदंग धिधिकटतारावली खरजादिक सुधर विमल स्वरजात बंधान ॥ कृष्णदास
प्रभु नवरंग रसिकन चुड़ामणि इषदहास भुवबिलास रिश्यौं गिरिधर सुजान ॥२॥ | Gouri |
Aaj atee shobhit nandkishore ...| | NityaPad-061 | आज अति शोभित नंदकिशोर ॥।|
सिरपर कुल्हे टिपारो सजत बनीहे चन्द्रिका मोर ॥१॥
मललकाछ कटि बांध प्रीतपट अंग अंग छब छारे ॥
सुंदर नेन बंकअवलोकन रसिक प्राण चित्तचोर ॥२॥ | Todi |
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