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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Banyau raas mandal aho yuvatin youth madhya naayak naayen gaaven .. | Pustak1-327 | बन्यौ रास मंडल अहो युवतिं यूथ मध्य नायक नायैं गावें ॥
उघटत शब्द तत थेई ता थेई गतमें गत उपजावें ॥१॥
बनी श्रीराधाबल्लभ जोरी उपमाकों दीजै कोरी लटकत हैं बाँह जोरी रीझरिश्ञावें ॥
सुर नर मुनि मोहे जहाँ तहाँ थकित भये मीठी मीठी त्ञानन लालन वेणु बजावें ॥२॥
अंग अंग चित्र कयें मोरचंदा माथें दियें काछनी काछें पीतांबर शोभा पावें ॥
चतुरबिहारी प्यारी प्यारे ऊपर वार डारी तन मन धन यह सुख कहत न आवें ॥३॥ | Saarang |
Srivallabh shrilakshman grih prakat bhaye maaee.. | Part2-296 | श्रीवल्लभ श्रीलक्ष्मण गृह प्रकट भये माई॥
काहेकों सोच करत कर्मन निधि पाई ॥१ ॥ ब्रजजनकी रासमूरति भाग्यन
दईहे दिखाई ॥ दैवीसृष्टि आपुनीकर आसुरते बचाई ॥२॥ लीला सब
प्रकट करी सेवक जनन बताई॥ हरिसों हठकर श्रीभागवतकी टीका
प्रकटाई॥ भाग्यनके पूरेजे तिनने कौरति गाई॥ रसिकसदा लक्ष्मणसुत
सेवो सुखदाई ॥४ ॥ | Sarang |
Khelat horry laal sanga liyein vrajkulke baal .. | Part3-322 | खेलत होरी लाल संग लियें ब्रजकुलके बाल ॥
ब्रजकी पोरी खोरी व्रजराज की दोरी सबहिन कों छिरक कर फेंट गुलाल
॥१॥ ब्रजकी नारी मारी देंदे गावत हँसत गुवाल ॥ यह विध ब्रज रंग छायो
सुंदर रसिक रसाल ॥२॥ | Kalyan |
Naachat vrishbhan kumri girivardhar laal sanga jamuna pulin | Part1-356 | नाचत वृषभान कुमरि गिरिवरधर लाल संग जमुना पुलिन
सरद रैन रास रंग रेई ॥ उरप तिर॒प तानमान परम मुदित करत गान गिडगिडता
गिडिगिडि तक थुंग थुंग थेई ॥१॥ दां दां दननन मृदंग तितीकट तारावलि
तनन तनन नननन आन आन लेईं ॥ धिकतां धिकतां धिधीकट धीकीटतक
थुृंग गावत केदारो राग अद्भुत सुरसेई ॥२॥ ब्रह्मादिक शिव सुजान मोहे सब
सुर बिमान निरख थक्यौ सघन चंद उडुगण पग देई ॥ धौंधीके प्रभु नट नागर
राधिका के कंठ बाहु कोक कला निपुन नागरि गिरिधर सुख देई ॥॥३॥ | Kedaro |
Shobhitsthamatan peetajhguliya .. . kulhilal | NityaPad-164 | शोभितस्थामतन पीतझगुलिया ॥ . कुलहीलाल
लटकनछविबघना चलनसिखावत मैया ॥|९॥ डगमगातपगधरतमनो हर
अतिराजतपैंजनियां | यशुमतिमनप्रफुल्लित अति आनंदसों लेतबलैयां
पुनपुनियां ॥॥॥ किलककिलक करलेतखिलौना प्रेममगनहुलैसैया ॥
अरबरायदेखत फिरपाछे चलत घुटुरुबन धैया । ३॥ गोपवधू मुखकमलनिहारत
लालन सब सुखदेया | ब्रजलीलाब्रह्मादिक दुर्लभ गावतदाससदैया ॥४।। | Dhanashree |
Hoe hoe hoe hoe horry bolein .. nandkunwar vraj veethan | Part3-287 | हो हो हो हो होरी बोलें ॥ नंदकुंवर ब्रज वीथन
डोलें ॥१॥ नवल रंगीलो सखा संगलीनें | राजत अंगअंग रंगभीनें ॥२॥
रंगीली भांत रंगीलो जहां || चोबा चंदन कीचमची तहां ।|३॥ ताल मृदंग
मुरज डफ वाजे ॥ ढोल ढमक नवघन ज्योंगाजे ॥४॥ सुन ब्रजवधू आनंद
अतिवाढी ॥ निकस निकस सब खोरन ठाडी ॥|५॥ अंजुली अबीर छूटत
छबि पावें || पंकज मनो पराग उडावें ॥६॥ पिचकारिन रंग छूटत भारी ॥
उड्यो गुलाल रंगे अटा अटारी ॥|७॥ जबलग लाल भरत पिचकारी ॥ तबलग
भाभिनि भाजत भारी ॥८॥ जो कोऊ नवल बधू || भरभागे ॥ मोहन ताके
गोहन लागे ॥९॥ तिनहिं धायकें भरत छबीलो ॥ जाहि भरे तहां रंग रंगीलो
॥१०॥ जाय परत ललना मंडल जब ॥ घेरलेत करतारीदे तब ॥१ १॥ अंग
भर भुज भर हियें भरलालें ॥ छांटत छबीली मदन गोपालें ॥१२॥ कहत
न बनें बढ्यो रंग भारी ॥ नंददास तहां बल बल हारी ॥१३॥ | Gouri |
Maiya daha dey chhaak pathaai .. badey badey maat badey dabran mein apane | NityaPad-206 | मैया डह दे छाक पठाई ।। बडे बडे माट बड़े डबरान में अपने
सिर धर ल्याई ॥९ ॥ गुंजा माट जलेबी लड़॒आ बहुर्यो बहुत मिठाई ॥ सद्य दूध
दोहन कीनो हे ऊपर बहुत मलाई ॥।२॥ बेसन के बिंजन बहुतेरे संधानो सुखदाई ॥
जोर मंडली जेबन बैठे हषघीकेस बलि जाई ॥३॥ | Saarang |
Deepdaande huttery baithe naballal govardhandhari | | Part2-059 | दीपदानदे हटरी बैठे नबललाल गोवर्द्धनधारी |
दोहरी पांत बनी दीपनकी त्रजशोभा लागत अति भार ी ॥१ ॥
तैसेही बने नंदके नंदन तैसी बनी राधिकारानी ॥
गृहगृहतें आईं ब्रजसुंदरि मात यशोदा देख सिहानी ॥२ ॥
भांतभांत पकवान मिठाई लेले गोद सबनकी नाबत ||
आरति करत देत नोछावर फिरफिर मंगल गीत गवावत ॥३ ॥
उठ कर लाल खरिकमें आये टेरटेर सब सखा बुलाये॥
श्रीविद्डलगिरिधरनलालनें सब गायनके कान जगाये ॥४ ॥ | Kanharo |
Kaahai jhagarini mein badbhagini nirakhyau haye nandjuko laal | | Part1-086 | काहै झगरिनि में बड़भागिनि निरख्यौ है नंदजूको लाल |
जाकौ दरस देव नहिं पावें मैं पायो है इहि काल ॥१॥ यह औसरेमें कैसें पायौ
कौन पुन्य कोने जान्यौ । प्रभुकी कृपा बिना कछु पावत लैहों अब अपनों मन
मान्यो ॥२॥ जातिन छोटी करमनि मोटी देव निकट कोऊ बैठन पावै ॥ मैं
अपने हाथन करि लिनों नारछेदनकों मोहि बुलावै ॥३॥ अपनी जनम सुफल
करि मार्नेत दुर्लभ दर्शन सुलभ पायौ। सगुनदास तिन सब कछु पायौ जिहि पारस
ते लोह मिटायौ ॥४॥ | Bilawal |
Way dekho barat jharokan deepak hari podhe oonchi chitrasari ... | NityaPad-338 | वे देखो बरत झरोकन दीपक हरि पोढे ऊँची चित्रसारी ॥।
सुंदरवदन निहारन कारण राख्यो है बहुत यतन कर प्यारी ॥ १॥ कंठलगाय भुजदे
सिरहाने अधर अमृत पीवत सुकुमारी ॥ तनमन मिलिरी प्राण प्थारेसों नौतन
छबि बाढी अतिभारी ॥२॥ कुंभनदास दंपति सौभगसीमा जोरी भली बनी
एकसारी ॥ नवनागरी मनोहर राधे नवललाल श्रीगोवर्द्धन धारी ॥३॥ | Bihaag |
Gaay khilawat madan gopal .. | Part2-051 | गाय खिलावत मदन गोपाल ॥
कुम-कुम तिलक अलंकृत तंदुल पुलक रहो अंग-संग विशाल ॥१ ॥
नखसिख अंग भुखन कि रचना उरमन झन बन माल।॥
बसन दसन पर शुद्र पोरीया दियो दिठोना माल॥२॥
भीर बहोत सखी बडे रिरक में कुक देत सब श्वाल ॥
हिहिहिहि सुन श्रीमुखते मोह रहि सब ब्रज कि बाल ॥३ ॥
दावन छोर बंधे दोड कटी दमकत जंघा रसाल ॥
मेहा अटक सकल अंग जाई चहु दिस शोभा जाल ॥४ ॥ | Sarang |
Shyamashyam sukhad yamunajal nirbhay karat | Part2-343 | श्यामाश्याम सुखद यमुनाजल निर्भय करत
बिहार॥ श्वेतकमल इन्दीवर पर मानो भोरही भईहे निहार॥९१॥
श्रीराधाकर अंबुज ज भरभर छ िरकत वारंवार॥ अतसी कुसुम कलेबर बूंदे
प्रतिबिबित नार॥२॥ कनक लता मरकत रंश्रनपर मेलत चित्र
प्रकार ॥ जोतिष चक्र गगन पर डोलत सखी सब करत विचार ॥ ३ ॥ जाय
गहत वृषभान नंदिनी मोहत सब संसार ॥ विधुत जलद सूरमुनि बिधुमिल
भ्रवत सुधाकी धार ॥४॥ | Todi |
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