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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Gharee aeka chhando taat vihaar .. | Part2-041 | घरी एक छांडो तात विहार ॥
रामकृष्ण तुम दोऊ भैया आवो बैठों करो शृंगार ॥१ ॥
यशोमति कहतहे आज अमावस दीपमालिका मंगलनाम॥
घरघर बालक सबे शूंगारे सुनो श्यामधन राम ॥२ ॥
खेलेंगी गाय गुवाल नाचें सब गोपी गावें गीत ॥
परमानंद दास यह मंगल वेद पुराण पुनीत ॥३ ॥ | Bilawal |
Gwalini meethi teree chhaachhi .. kahaa doodhamen melli jamaayo souchy | Part1-243 | ग्वालिनी मीठी तेरी छाछि ॥ कहा दूधमें मेलि जमायो सॉची
कहै किन बाछि ॥१॥ औरे भाँति चितैबो तेरी भौंह चलत है आछि ॥ ऐसी
टकझक कबहुँ न देख्यौ तू जो रही कछि काछि ॥२॥ रहसि कान्ह कर कुचगति
परसत तू जो परति है पाछ ॥ परमानंद गोपाल आलिंगी गोपबधू हरिनाछ।।३॥ | Saarang |
Rijhavat rasik kisorakon kheltari pyaari | Part3-155 | रिझवत रसिक किसोरकों खेलतरी प्यारी
राधाफाग ॥ पहरे नवरंग चूनरी अंगियारी आछे अंगलाग ॥९॥ कनिक
खचित खुभियावनी दुलरीरी मोतिन बिचलाल ॥ किंकिनी नूपुर मेखला
लोचनरी सुभसुखद विसाल ॥२५॥ गौरगातकी कहाकहूं बेसरि रही कच
अरुझाय ॥ सब सुंदरि मिलि गावही देखत हूं ममनमथ हिलजाय ॥३॥
मृदुमुस॒कनि मुखपट दयो पिचकाई करलई हे दुराय ॥ वंदनबूका अंजुली
नागरि ले दई है उडाय ॥४॥ मीडत लोचन नागरि पकरयथयो पीतांबर धाय ॥
सबे सखी जूरि आय गई धघेरेहो मोहन बलिआय ।।५ ॥ मुरलीछीनि चुंबनदीयो
कीनों अधरामृतपान ॥ कमलको सज्यों भृंगकों छांडतनही बिनभये विहान
॥६॥ मानो बहुरंग विकसत कमल मधुकर मनमोहनलाल ।। नयनन स्वाद
सबे गहे पीवत मकरंद रसाल ॥७॥ क्रतु वसंत वन महगद्यो कुंजत शुकपिक
अलिमोर ॥ तानमान गति भेदसों गावत गिरिधर पियजोर ॥८॥ वेन झांझ
डफझालरी गोमुख ताल मुरज मुखचंग ॥ युवती यूथ बजावही निर्तत
मधिसाल अंग ॥९॥ त्रिगुनसमीर तहां बहे सुंदर कालिंदी कूल ॥ सुरसुरपति
सुरअंगना डारत जयजय कहि फूल ॥ १ ०॥ निरखि निरसि सचुपावही हमन
भये खगमृण ब्रजबास ॥ श्रीवललभ पदरज प्रतापबल गावत विष्णुदास
रसरास ॥१ १॥ | Dhanashri |
Jhoolat daul douu anuraage .. | Part3-367 | झूलत डौल दोऊ अनुरागे ॥
केसर और गुलाल सों मीजे चोवा लपटे वागे ॥ १॥॥
ललितादिक मिल झुलवत गावत एक एकते आगें ॥
वाजत ताल पखाबज आवज मुरली संग सुहागें ॥२॥
देत असीस चली ब्रज सुंदरि फिर खेलेंगे फागें ॥
कृष्णदास प्रभु की छबि निरखत रोम रोम रस पागें ॥३॥ | Devgandhar |
Khelein piya radha gori .. nand nandan vrishbhan | Part3-246 | खेलें पिय राधा गोरी ॥ नंद नंदन वृषभान
नंदिनी बोलत हो हो होरी || ६॥ कंचन की पिचकारी लीयें अबीर भरें भर
झोरी ॥ छुटत मुठी गुलाल लाल की भरत नयन की कोरी ॥२॥ पकरे
लाल भई झक झोरन प्रणटी प्रीति की चोरी।। आंख आंज कपोलन मीडत
लाज तृणकसीतोरी॥ ३॥ केसर अगर गुलाल अरगजा सोंघधें भरी कमोरी।।
हँसत लसत ओर भरत परस्पर गांठ दुहंन की जोरी॥४॥ विहस विहस
सब लेत बलैया ॥ अविचल भूतल जोरी ॥ माचोदास प्रभु लाल लाडिले
नवल किशोर किशोरी ॥५॥ | Sarang |
Kanakkatora pratahiddhighritmithai .. | NityaPad-189 | कनककटोरा प्रातहिदधिघृतमिठाई ॥
खेलतखात गिरायदेत झगरतदोउभाई ।। १॥।
अरसपरसचुटिया गहेदोउ बरजतहैंमाई | महाढीठमानतनहीं कछुलोहोरबडाई ।॥। २॥
अल्प-स्वल्पदशनावलि सुंदरकिलकाई ॥
देखतबोली रोहिणी यशुमति मुसकाई ॥३॥
घरघरतेव्रजसुंदी देखनकोआईं ॥ महास िंधुआनंबद्यो गृहसुधि बिसराई ॥४॥।
गोविंदकेचरणारविंद तजअनतनजाई ॥ धरणीधरश्रीजगन्नाथ माधोबलजाई ।।५॥॥ | Bilawal |
Millie mangal gaavo maaee . aaj laal kau janmayo sahai baajat | Part1-073 | मिली मंगल गावो माई । आज लाल कौ जन्मयो सहै बाजत
रंग बधाई ॥१॥ आँगन लीपी चौक पुरावौ विप्र पढ़न लागे वेद । करो सिंगार
श्याम सुंदरकौ चोवा चंदन मेद ॥२॥ आनंदभरी नंदजूकी रानी फूली अंग न
समाई । परमानंददास तिहीं औसर बोहोत न्योछावरि पाई ॥३॥ | Dhanashri |
Sajisen palano madanrai .. abalay parr kopyohai | Part3-048 | सजिसेन पलानो मदनराय ॥ अबलय पर कोप्योहै
रिसान ॥१॥ कुंजरद्रम मदगज पलास ॥| भयभीत भयो नेकअति उदास ॥२॥
मोर महावत चढेहें धाय || ललित लाल पाखर बनाय ॥३॥ अंबसुभट
पहरें सनाय ॥| बट बेरीया अंजानदाय ॥४॥ त्रिविध पवन चंचल तुरंग ॥
उडिरजपरत झुकि अतिउत्तंग ॥५॥ कदलीदल बेरख फरहरात ॥ सहचरीयां
चालक धरपिपात ॥६॥ कमलनैन कोकिला अतिअनूप ॥ तूपकदार शुक
कपट रूप ॥७॥ बाजे गाजे निर्शर निशान ॥ भ्रमर भेरि मिलि करत गान
॥८॥ ऋषिकेशके प्रभु बिनुगोपाल ॥ कैसें बिहाय यह कठिन काल ॥९॥ | Basant |
Pyaareeke mahal tein uthchale bhor . sakhivund avalok | NityaPad-148 | प्यारीके महल तें उठचले भोर । सखिवुंद अवलोक
अग्रस्थित ढकत नीलकंचुकी पीतपट छोर ।।१॥ राधाचरित्र विलोक परस्पर
ते जुहास इतउत मुखमोर ॥ गोविंदप्रभु लेचले दगादे नागरनवल सभाचित
चोर ॥२॥। | Bilawal |
Yeh mangongopijanavalabh.. manushjanma aur hariseva vrajabasavodijai mohisullabh ..1.. | NityaPad-356 | यह मांगोंगोपीजनवललभ॥ मानुषजन्म और हरिसेवा व्रजबसवोदीजै मोहिसुल्लभ ॥१॥
श्रीबल्लभकुलकोहोंहूँचेरो वैष्णवजनकोदास कहाऊं।।
श्रीयमुनाजल नितप्रतिन्हाऊं मनक्रमवचन कृष्णगुण गाऊं॥२।॥
श्रीभागवत अश्रवणसुनूंनित इनतजचित्तकहूँं अनत न लाऊं॥
परमानंददास यह मांगत नितनिरखोंकबहूं न अघाऊं।॥ ३॥ | Bihaag |
Jaani parav sankranti nand-ghar gargaadik milli aaye hoe. | Part2-236 | जानि परव संक्रांति नंद-घर गर्गादिक मिलि आये हो।
देखि तहां ब्रजराज मुदित मन भीतर भवन बुलाये हो ॥१ ॥
दोऊ कर जोरि किये पद बंदन करि सनमान बैठाये हो।
सबहि विप्र मिलि वेद मंत्र पढि सब आसीस सुनाये हो ॥२॥
महरि जसोदा अति हरखित मन लालन उबटि नहवाये हो।
करि सिंगार दे विविध सामग्री मेवा गोद भराये हो ॥३॥
कहति जसोदा दोऊ भैया मिलि दान देहो मन भाये हो।
आज परव संक्रांति को दिन खेलो सखन बुलाये हो ॥४ ॥
यह सुनि बचन हरखि बल-मोहन धाय महर पै आये हो |
देखि मुदित 'ब्रजराज' हुलसि के लीने कंठ लगाये हो ॥५ ॥ | Aasawari |
Purohit aayo nrip key dwaare. jagsumati atee anand mudit munn | NityaPad-085 | पुरोहित आयो नृप के द्वारे। जगसुमति अति आनंद मुदित मन
आसन पै बैठारे।। पिता-सदन कुल- प्रोहित मानति दोऊ कर चरन पखारे। तेल
लगाइ दंतधावन करि नहाड़ बसन तन धारे ॥ कर्यो पाक प्रोहित अपनी रुचि
विंजन विविध नियारे। करि सामग्री भोग समरप्यो बात करत हरि बारे ॥ | Aasawari |
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