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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Govardhanaki shikharpen thaado nrityat kunwar kanhaiya ..
Part3-033
गोवर्धनकी शिखरपें ठाडो नृत्यत कुंवर कन्हैया ॥ काछनि बनी हे ललित मनोहर टीपारो सुरंग धरैया ॥| १॥ चलो सखी देखनकों जइये, राधा नवल दुलैया ॥ राग बसंत आलाप गावत मधुरे मृदंग बजैया ॥२॥ नाचत मोर कोकिला कूजत रुचिर गुलाल उडैया ॥ मच्यो खेल अद्भुत अपार सखी ब्रजाधीस बल जैया ॥३॥
Basant
Maaee mero munn mohyo saanware mohi ghar angana
Part3-245
माई मेरो मन मोह्यो सांवरे मोहि घर अंगना न सुहाय ॥ ज्यों ज्यों आंखिन देखियें मेरो त्यों त्यों जिय ललचाय ॥१॥ हेली मनमोहन अति सोहनो इत व्है निकस्यो आय ॥ मोहि देख ठाडो भयो वह चितयो मुरमुसकाय ॥२॥ रूप ठगोरी डारकें चल्‍यो अंग छबि छेल दिखाय ॥ नयन सेनदे सांवरो मन ले गयो संग लगाय ॥३॥ लोक लाज कुलकान की जिय कछून ठीक ठहराय ॥ के ले चल मोहि स्यामपें के स्पामहि आन मिलाय ॥४॥ प्राण प्रीति परवसपरे अब काह्ू की न वस्थाय ॥ रसिक बाल नंदलालपें रसिक सदा बलजाय ॥९॥
Sarang
Madan mohan kunwar brishbhanu-nandini saun bhuvan
Part3-354
मदन मोहन कुँवर बृषभानु-नंदिनी सौं भुवन कुंज मधि खेलति होरी ॥ गोप बालक संग एकु दांई बने, उत सकल ब्रज बधू इकु जोरी ॥१॥ बाजत बीना मृदंग झाँझ ढ़फ किज्नारि चेत झुमकि गान करति गोरी ॥ उड़ति बंदन नब अबीर बहु कुँमकुमा अरू बिबिधि रंगनि गुलाल झोरी ॥२॥ तब सखियन मतों करि धाँईं गिरिधर गहें नील पट पीत सों गाँठि जोरी ॥ एकु सखी स्याम के सीस बैंनी गुही, एकु दृग आँजति मुख माँड़ति रोरी ॥३॥ तब हि ललिता दौरी झटकि मुरली लई, सब हि नंदलाल सौं करें ठठोरी ॥ इक नब कुँमकुमा नबल जागरि भरि आँनि कैं दोऊन के सीस ढोरी ॥४॥ तब सखी आपुनो माँगि फगुवा लयौ दई मुरली अरू गाँठि छोरी ॥ “दास गुपाल' बलि जाई यह छबि निरखति रहौं हरि चरन दृढ़ बुधि मोरी ॥५॥॥
Bihaag
Vrindavan chand laal rung bhareho vrajajan nayan
Part3-201
वृंदावन चंद लाल रंग भरेहो ब्रजजन नयन चकोर ॥ नंदलालकी नवजोबनता लियो सबको चितचोर || 8॥ वांकी पाग बदन अतिसखुंदर स्याम मनोहरगात ॥| ऋतु वसंतके वसन पडेर पिय आंखिन मांझ समात ॥२॥ कमल नयन करलई पिचकाई फेंटन पोहोष पराज ॥ अतिशोभित संगत्रिय मंडली खेलत डोलत फाग ॥३॥ किंकर बने लियें कंचनघट भर बहुरंग सुगंध ॥ इंद्रमनो देखन के लालच भर कावर लिये कंध ॥४॥ जेनवड-गरबनी उसके देखे पिय गोविंद || तिनहि छिरक छबि देख बदन की कहांते ऊग्यो अबचंद ||५॥ हरि मन मोढें रंग रंग सोहें खेल मच्यो ब्रज मांहि ॥ बड भागिनि गोकुल की ललना जेहरि देखन जांहि ॥६।॥ वाजेबहु वाजत हें अगणित सुख समूह की गाज ॥ सुन अकुलाय चलीं ब्रजसुंदरी छूटि मई सबलाज ॥७॥ बन निकसी वृषभान नंदिनी संग लिये प्रेम समाज ॥ उतवने सकल कुंवर गोकुल के मध्य सांवरो सिरताज ॥८॥ कुसुम गेंदकरलीने नवलासी मार करत ब्रजबाल ।| ग्वालन की किलकन भई भाजत हसत हैं मदन गोपाल ॥९॥ घातवनी गुलाल धूंधरमें अछन अछन आई भाम ॥ निकट जाय दौरी दामिनि ज्यों घेर लिये घनस्याम ॥१०॥ कोऊ एक चिबुक देख्यो चाहे इतचितवो नंदलाल ॥ कोऊ एक लालन गहिपायेहें कर लपटटी वनमाल ॥ १ १॥ कोऊ एक गिरिधर की सुंदरता छकी निहार निहार ॥ कोऊ एक पकरन मिसभुजभरकें वारत प्रान अधार ॥ १ २॥ भाग भरे अनुराग भरे तन चितवत आनंद कंद ॥ वनिता बदन सरोज भ्रमर हरि पीवत रूप मकरंद ॥ १ ३॥ बहु भांतन छिरक्‍्यो प्यारी राधा अपने चितको चेन ॥ नटबर वपुसोंभीजिलगेफप्ट लपटे पियाके नयन ॥१४।॥ अति रस भीने मन हरिलीने सुंदर श्याम सुजान ॥ राम राय प्रभु गिरिधर छबि पर बलकीनो भगवान ॥१५॥
Kaafi
Esein horry khele saanvaro sanga liyein vrajbal ...
Part3-200
एसें होरी खेले सांवरो संग लियें ब्रजबाल ॥। पहेलेंहीं आपुन बने ओंर तापाछें सब ग्वाल ॥ १॥ यमुनाकूल सुभाय आपने मानोहो मंडली मराल ॥ सुनकें धाई सब ब्रज नागरि चलत हें गजगति चाल ।॥|२॥ नखसिखते बनिके ब्रज बनिता गावत आंई गारि ॥ एकत स्याम सखा भये ठाड़े एक लीने राधे संग नारि ॥|३॥ वीना वेणु उपंग बांसुरी बाजत ताल मृदंग ॥ पटह निसान बाजत चहुंदिशतें होत परस्पर रंग ॥४॥ तारी देंदे ज्वाल हँंसतहें अंचल अंचल जोरि ॥ अबीर गुलाल अरून भयो अंबर भरत अंक झकझोरि ॥५।॥ चोलीतरकि हसी अरू चितवनि उपजत अंग सुभाय ॥ एकले सोंधो भरत स्याम कों एकन मुरली छिनाय ॥६॥ कैसरके रंग कुंकुम वंदन भुजगहि भरहि अपार ॥ गावत फागके गीत सबे मिल घुमड रह्यो नंदद्वार ॥७॥ चतुरसखी नयनन की सेनन मिल मन मतो उपाय ॥ कर गहि वंस गोपी ले धाईं लेत निसान पलाय ॥८॥ श्यामा सोंह दई ललिताकों हलधर पकरे अन आविन मांडि वेनी गुही माथें अंजन लावे नयन ॥९॥ नारिन में वृषभान नंदिनी ज्यों उड्शगनमें चंद ॥॥ ताको रूप नयन निरखतही मगन भये नंदनंद ॥ १ ०॥ नारि गारि ऐसी गावत मानो कोकिल बोले अंब ॥ भीजे वसनअंग ऐसे लागत मानो कनक के खंब ॥ १ १॥ फगुवा दीनो नंदजसोदा मेवा बहुत पकवान ॥ गावत सबे मिल ब्रजवासी चलेहें यमुना जल नहान ॥१२॥ पोहोपन की वरषा सब सुरकरें इकटक ध्यान लगाय ॥ हरिको फाग परम रसलीला जनहरिया मुख जाय ॥१३॥
Kaafi
Sharad suhai hoe yamini bhamini raas rachyau .. bansibat
Part1-351
शरद सुहाई हो यामिनी भामिनी रास रच्यौ ॥ बंसीबट यमुनातट शीतल मंद सुगंध समीर सच्यौ ॥१॥ बाजत ताल मृदंग राधा संग मोहन सरस सुधंग नच्यौ ॥ उरप तिरप गति लेत सुलप अति बिथकित लज्ित मदन लच्यौ ॥२॥ कोक कला संगीत गीत रस रूप मधुरता गुणन बच्यों ॥ भूकुटी बिलास हास रस बरखत ब्यास परम सुख नयन जच्यौ ॥३॥
Kedaro
Ghar vrishbhaanken hoe raajat rung badhaai . nandbhavan gopinke guh
Part1-182
घर वृषभानकें हो राजत रंग बधाई । नंदभवन गोपिनके गुह ब्रजलोक सकल सुखदाई ॥१॥। कुँवरि प्रगट भई अति सुँदारि रूपरसिक मृगनैंनी। तरुणी तिलक त्रिभुवन की शोभा चंदमुखी पिकबैनी ॥२॥ घरघरते सुनि सुनि सब गोपी ग्वाल मुदित मन आवें | बालक बिरध अरु तरुन घोषजन हँसि हँसि मंगल गावें ॥३॥ एक नाचत एक करत कुतूहल अरस परस मिलि खेलें । मुखजु कहत चिरजीयौ लड्ैती पुलकि प्रेम रस झेलें |४॥ बंदीजन मागध सूत आँगन जाचक बहु यश भाखें । परमउदार भये कीरतिपति देत कोटी अरु लाखें ॥५॥ सुरभि हेम रतन पट भूषण द्विज जनकों बहुदीनें | जयजयकार भयौ त्रिभुवनमें सबै फिरत रंगभीने ॥६॥ ढोल दमामा भेरि सहनाई ताल पखावज बाजे । आनंद बढ़यौ अनूपम व्रज में नादहीते भरगाजे ॥७॥ जोरी बनी लालगिरिधर हित यह मन सबै विचारी । श्रीराधा पदपंकज पर जन गोकुल के बलिहारी ॥८॥
Dhanashri
Samaron mangal roop nidhan .. jaa dinaten hari gokul pragate
Part1-003
सामरों मंगल रूप निधान ॥ जा दिनतें हरि गोकुल प्रगटे दिन दिन होत कल्यान !!१॥ बैठी रहौं श्याम गुन सुमरों रैन दिना सब याम॥ श्रीभटके प्रभु नैन भर देखों पीतांबर घनश्याम ॥२॥ # राग देवगंधार ऋ आज ब्रज भयौ सकल आनंद ॥ नंदमहर घर ढोटा जायो पूरन परमानंद ॥१॥ मंगल कलश बिराजत द्वारें गावत्त गीत अमंद ॥ नाचत तरुनी और गोप सब प्रगटे गोकुलचंद ॥२॥ विविध भांति बाजे बाजत हैं निगम पढ़त द्विज छंद ॥ छिरकत दूध दही घृत माखन प्रफुलित मुख अरविंद ॥३॥ देत दान ब्रजराज मगन मन फूले अंग न माई | देत असीस जियो जसुमतिसुत गोविंद बलि बलि जाई ॥४॥
Devgandhar
Banaten aavat mohanlal. sees virajit jatit tipaaraun, nutber-bheshu gopal..1..
NityaPad-063
बनतें आवत मोहनलाल। सीस विराजित जटित टिपारौं, नटबर-भेषु गोपाल॥१॥ ग्वाल-मंडली-मध्य विराजित कूजत बेनू रसाल। सूनत स्वन गृह-गृह के द्वारें आई सब ब्रजबाल ।।२॥ निरखि सरूप स्याम सुंदर कौ मिटी बिरह की ज्वाल । छीत-स्वामी' गिरिधरन रसिकवर मुसकि चले तिहि काल ॥३॥
Nat
Aaj dekhiyat nena aalas bharey ragamage .. rainpalkanpari
NityaPad-148
आज देखियत नेना आलस भरे रगमगे ॥ रेनपलकनपरी सुरत इंनजेकरी भोर आये लाल धरत पग उगमगे ॥ १॥। तनओरे भांत कछुब कही न जात लसत अद्भुत क्रांत अंग अंग जग मगे | चत्रभुज प्रभु गिरिधर न आये भलीकरी पलट लाए बसन सोधे मील सग बगे ॥२॥।
Bilawal
Laalan antaratimaan ayehoju merey geh raseele nayan bayne tutaraat ..
NityaPad-152
लालन अनतरतिमान आयेहोजू मेरे गेह रसीले नयन बेन तुतरात ॥ अंजन अधर धरें पीक लीक सोहें तोहें काहेकोंदुराबत झूठी सोहें खात।॥।१॥ वातेंहू बनावत बातहु नआवत एतेपर रतिके चिन्ह दुरात तिरछे चितवत गात ॥ नंददासप्रभु प्यारी के वचनसुन भूले नाम वहीको निसरजात ॥।२॥।
Bilawal
Nandakahon kahaa maangen swami.. tumjanat sub antaryami ..1 ..
Part2-074
नंदकह्ों कहा माँगें स्वामी॥ तुमजानत सब अंतरयामी ॥१ ॥ अष्टसिद्धि नवनिधि तुम दीनो॥ कृपार्सिधु सब तुमरो कीनो ॥२॥ कुशल रहें बलराम कन्हाई॥ इनही कारण करत पुजाई ॥३॥ देवनकी मणि गिरिवर तुमहों॥ जहांतहां व्यापक पूरणहो ॥४ ॥ तुमहरतातुम करता बरके॥ देख थकित नरनारि नगरके ॥५॥ बडोदेवता स्याम बतायो॥ प्रकट भये सब भोजन खायो ॥६ ॥ सूरस्थामकेजो मन आवे ॥ सोड़ सोइनाना रूप बनावे ॥७ ॥
Bilawal
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