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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Khelat vall‍labh faag lalana horry rung rahyo
Part3-042
खेलत वल्‍लभ फाग ललना होरी रंग रह्यो ॥ध्रु०॥ ललना श्रीगोकुल गाम सुहाबनों श्रीयमुनाजीके तीर || ललना सीतल मंद सुगंध बहे तहां हिताचित समीर ॥९१॥ बजावत ताल पखावज सारंगी मुखचंग ॥ गावें जीत सुहावने उपजत तान तरंग ॥२५॥| उडत अबीर गुलाल तहां मानो ऋतु वरस्योमेह ॥ केसर घस नवकुंकुमा छिरकत नौतन नेहें ॥३॥ ओर कहां लग वरनिये उपजत अतिआनंद ॥ खेलेहीं वलल्‍लभ वलल्‍्लभी भाखे वृंदावनचंद |।४॥
Sarang
Janmaliyo shubh lagan vichaar | krishnapaksh bhaadon nishi aahein
Part1-065
जन्मलियो शुभ लगन विचार | कृष्णपक्ष भादों निशि आहें नक्षत्र रोहिनी और बुधवार ॥१॥ शंखचक्र गदा पद्म बिराजत कुंड मनि उजियार। मुदित भये बसुदेव देवकी परमानंददास बलिहार ॥२॥
Nayaki
Dinmani srivallabh udayo.. shrutipath kiyo
Part2-286
दिनमणि श्रीवललभ उदयो॥ श्रुतिपथ कियो प्रकाश अवनीतल माया तिमिर गयो॥१॥ विदुषवृन्द उडडुगण नहीं देखियत त्रास तिमिर अलग भयो॥ रासरसिक लीलामृत सागर आप दिखाय दयो॥२॥ कर करुणा निज उद्धारणको भक्तनेम दिखाये।॥ अनल कृपातें मधुकर हरि भाव मधुपान कराये ॥।३ ॥
Bilawal
Horry aaee ray kanhai .. joe kachhu munn mein hii
Part3-350
होरी आई रे कन्हाई ॥ जो कछु मन में ही सोई भई विधि यह बात बनाई ॥ १॥ तब सकुचन हों खेल न सकती अब खेलों तोसों धाय ॥ सखी सहेली तोसों सब खेलेंगी कहा करेगी माय ॥२॥ गुरुजन यत्न करो बहू तेरो कोटिक करो उपाय ॥ अब तोरे तो सों मन लाग्यो तो बिन रत्यो न जाय ॥३॥ केसर ओर जवाद कुंकुमा छिरकूं तोहि बनाय ॥ हों हं भरोंगी तुही भरेगो नयनसो नयन मिलाय ॥४॥ लोक बेद तृण ज्यों तोरी देऊ॑ कुल कान वहाय | निरमल सुत प्रभु नंदनंदन कों राखोगी कंठ लगाय ।।५॥
Bihaag
Khelan dey moye horry rasiya .. jaane naan veungi
Part3-229
खेलन दे मोए होरी रसिया ॥ जाने न वेउंगी गही राखुंगी ॥ मेरी काहेकुं बहीयां मरोरी ॥१॥ सखी सब मिलि होरी खेले ॥ में कहा कीनी चोरी ॥२॥ चोवा चंदन और अरगजा ॥ केसर गागर भरि ढोरी ॥३॥ “कृष्ण जीवन लछीराम' के प्रभु सौं ॥ फणग॒ुवा लीयो भरि भरि झोरी ॥४॥
Kafi
Bhor nikunj bhavanate bhamini | aavtahai latkat gajgamini .. 1..
NityaPad-142
भोर निकुंज भवनते भामिनी | आवतहै लटकत गजगामिनी ॥ १॥ अलक सुकंध सगमगी छूटी ।। निशके उनीदे नयना बीरबहूटी | २॥ पलटत रशन वसनमणि भूषण ॥ शोभा अंग अंग प्रति दूषण ॥३॥ गुणनिधान वृषभान दुलारी॥ दासगोपाल लालजूकी प्यारी ॥४॥॥
Bhairav
Adhar benn madhur madhur gaabat gopalrai adbhut sur taana
Part1-347
अधर बेंन मधुर मधुर गाबत गोपालराई अद्भुत सुर तान मान परम मुदित करत गान ॥ जुवती सत जूथ मिलि गतिही झप ताल लेत बोलत ततथेईथेई थोंग थोंग परतमान ॥१॥ नहंदंद्रंनननि मृदंग गति तिकटे तालावली धीधीधीधीधीधीधीधीधीधीधीधी सुर भाँति विधान ॥ कृष्णदास प्रभु नवरंग रसिक चूड़ामनी ईषद हास भुुवबिलास रिझये गिरिधर सुजान ॥२॥
Kanharo
Mund mund murali dhuni baajai nirtat kumar kanhaiya ..
Pustak1-343
मंद मंद मुरली धुनि बाजै निर्तत कुमर कन्हैया ॥ जैसीय निरमल शरद चाँदनी तैसीय बनी उुल्हैया ॥१॥ चंदन की खोर करैं बनमाला कंठ धरें कंचन की बेली मानों सरस ऊल्हैया ॥ कृष्ण जीवन लछीराम के प्रभु प्यारे दोऊ कर लेत बलैया ॥२॥
Iman
Abahi dardere induria merrie pachrang
NityaPad-269
अबही डारदेरे ईंडुरिया मेरी पचरंग पाटकी ॥ हाहाखात तेरेपैयापरतहों इतनोंलालचमोहि मथुरानगर के हाटकी ॥॥१९॥ जो न पत्याउ जाय किनदेखो मनमोहन हैंजु डाटकी ॥ मदनमोहनपिय झगरो कौन बद्यों सोदेखेंगी लुगाईं वाटकी ॥२॥
Bilawal
Abb kachhu naee chaal chalaai . tumhou nandke laadile mohan
Part1-234
अब कछू नई चाल चलाई । तुमहौ नंदके लाड़िले मोहन छाँड़ो यह लरिकाई ॥१॥ घाट बाट गिरि गहवर कंदर सदा अटक तोहि भावै। गोकुल भये हठीले दानी मारग चलन न पावै ॥२।| चोली चीर निहारत अंचल छाँड़ि लाल यह हॉसी । परमानंद प्रभु छाँड़ि अटपटी एकगामके वासी ॥३॥
Bilawal
Kheli faag ghar aayo ladillo jasomati karat
Part3-368
खेलि फाग घर आयो लाडिलो जसोमति करत बधाई ॥ विविध भांति उपहार लीयें सब ब्रजजन मंगलगाई ॥१॥ कनक थार भरि मुक्ताफल लै आरती उतराई ॥ नंदनंदन की या छबि ऊपर सूरदासबलिजाई ॥२॥
Basant
Vrajbanita madhya ransik radhika bunny sharad kii raati hoe ..
Part1-335
ब्रजबनिता मध्य रंसिक राधिका बनी शरद की राति हो ॥ नृत्यत तत थेई गिरिधर नागर गौर श्याम अंग कांति हो ॥१॥ एक एक गोपी विचबिच माधौ बनी अनूपम भांति हो ॥ जयजय शब्द उच्चारत सुरमुनि कुसुमन बरख अधातिहो ॥२)| निरखि थक्‍्योौ शशि आयी शीश पर क्यों हूँ न होत प्रभात हो ॥ परमानंद प्रभु मिले यह अवसर बनी है आजकी बात हो ॥३॥
Malav
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