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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Laal tum kinn sotan birmaaye ..
NityaPad-056
लाल तुम किन सोतन बिरमाये ॥ कोन त्रिया ऐसी तुम पाई रति धन बहुत कमाये ॥१॥ श्याम सुंदर तुव मुख उपर चुंबन चिन्ह जमाये ।। रसिक प्रीतम पिय जाओ जहां तहां आनंद उर न समाये ।२॥।
Malkos
Naval vasant naval vrindavan navlahi phoole phool ..
Part3-058
नवल वसंत नवल वृंदावन नवलही फूले फूल ॥ नवलही कान्ह नवलवनी गोपी निर्तत एकहीतूल ॥१॥ नवल गुलाल उडे रंग बूका नवल वसंत अमूल नबलही छींट बनी केसरि की मेटत मनमथसूल॥२॥ नवलही ताल पखावज बाजत नवल पवनके झूल ॥ नवलही बाजे बाजत श्रीभट कालिंदी के कूल ॥३॥
Basant
Nahaat nand sudhi karat sutanaki laavo boll kanhabalram ...
NityaPad-076
नहात नंद सुधि करत सुतनकी लावो बोल कान्हबलराम ॥। खेलत बडीवारक्यों लागी ब्रजभीतर काहुके धाम ॥ १॥ बैठे आय दोऊ मेरे संग विनभोजभयो निकाम ॥ यशुमति सुनत चली अतिआतुर ब्रज घरघर टेरत ले नाम ॥२॥ आज अवार भई कहुं खेलत बोललेहु हरिकों कोऊ वाम ॥ ढुंढफिरी नहिं पावत हरिकों अतिअकुलानी चितवत धाम ।।३॥| वार वार पछितातयशोदावासर बीतो भये युगयाम ।। सूरस्यथामकों कहूं न पावत बहुबालक देख्योइकठाम ॥॥४॥
Dhanshree
Murali aap swardhin naar .. taaki hari prateet karat hain
Part1-287
मुरली आप स्वारधिन नार ॥ ताकी हरि प्रतीत करत हैं जीत न जानत हार ॥१॥ ऐसे वश भये हरि वाके कहा ठगोरी डार ॥ लूटत है अधरनको अमृत खात देत हैं ठार ॥२॥ को बक मरे बनी है जोरी तृण तोरत हैं वार ॥ सूर श्यामकों भलें कहत हीं देहुँ कहा अब गार ॥३॥
Dhanashri
Maan manaayo radha pyaari radha pyaari ..
NityaPad-263
मान मनायो राधा प्यारी राधा प्यारी ॥ का ।कहियत मदन दहन को नायकपीर प्रीतिकी न्‍्यारी ॥३१ ॥्रु . ॥ तुजू कहत ही कबहु न रूसों अवधों कैसें रूसी ॥ विनहीं शिशिर तनक तामसतें तुबमुख कमल विदूसी तेरे ॥२॥ विरहरूपरसनागरि लीने पलट कछूसी ॥ तैरें हुती प्रेमकी संपति सो संपति किन मूसी ॥। ३ ।
Khamaj
Darsan dey nikasi atamente ..
Part3-382
दरसन दे निकसि अटामेंते ॥ उमा, रमा, ईद्राणी, भवानी, जाके निकसी है नख चंद्र छटामेंते ॥१॥ राधेजू निकस अटा भई ठाडी मानो निकस्यो है चंद घटामेंते ॥ पुरुषोत्तम प्रभु की छबि निरखत मानो माखन निकस्यो मठा मेंते ॥२॥
Hori-Kafi
Jayati aabheer nagri prananathe ..
NityaPad-026
जयति आभीर नागरी प्राणनाथे ॥ जयति ब्रजराज भूषण यशोमति ललन देत नवनीत मिश्री सुहाथे ।१॥| जयति पातपर भात दधि खात श्रीदाम्मा संग अखिल गोधन वुंद चरें साथें।। ठोर रमणीक बुंदा विपिन शुभ स्थलसुंदरी केलि गुण गूढ गाथें ॥२॥ जयति तरणि तनया तीर रासमंडल रच्यो ततताथेईथेई ताथे ॥ चतुर्भुजदासप्रभु गिरिधरन बोहोरि अब प्रकट श्रीविद्डलेशब्रज कियो सनाथे ॥।३॥
Ramkali
Aaj vasant badhaayohe srivallabh rajduvar .. shree
Part3-039
आज वसंत बधायोहे श्रीवल्लभ राजदुवार ॥ श्री विह्डलनाथ कीयो हे रचिरूचि नव वसंत को सिंगार ॥१॥ वललभीसृष्टि समाज संग सब बोलत जय जयकार ॥ पुष्टि भावसों पूजत हें मिलि बाढ्यो है रंग अपार ॥ प्रेम भक्ति को दान करन श्रीवलल्‍लभ परम उदार ॥ कृपादृष्टि अवलोकि दासकों देत हैं पान उगार ॥ ३॥ श्रीवललभराजकुमार लाल ब्रजराज कुँवव अनुहार ॥ एसो अद्भुत रूप अनुपम रसिक जात बलिहार ॥४॥
Hindool
Horry khele savro manmohan jaako naam ..
Part3-160
होरी खेले सावरो मनमोहन जाको नाम ॥ फाग सकल ब्रजरमरह्यो रसभीजि रह्यो सब गाम ॥ १॥ नटवर भेष उतारिकें विप्रभये गोपीनाथ ॥ जिनके नयनन कौतिक वारे तेइ ब्रजके लरिका साथ ॥श॥ नव तरूनी ओर रूप बतीहें हरिताकी बाखर जात ॥ चितबवत अति अनुरागसों ओर कहत भेद की बात ॥३॥ गोपी कह्ढे अह्ो बिप्रजू हम कछु पूछत तुमसों ।। हमारी प्रीति हरिसों लागी कछु हरिहूकी हमसों ॥8॥॥ कहत हों बाके जियकी तुमसों तुम सुनों हितू कोह़ेत ॥ जो कछू करत तुम कारनें हरि चाहत सदा संकेत ॥५॥ पियकी हँसि चितवनिलखी ओर सोभा रही निहारि ॥ री्ि रीजझि सब संग लगी लोक लाज डरडारि ॥६॥ श्रीराधा मंत्र जपत चले हरि जहां कीरति वृषभान || कह्िन सकत चाहत कहा दानन में कन्‍्यादान ॥७॥ करणगहिकें डफ लाडिली आई गावत सखियन संग ॥ कड्ि भगवान हित रामराय प्रभु भई नयन गतिपंग ॥८॥
Dhanashri
Hari janamatahi anand bhayau .. navavidhi pragat bhaee naindware
Part1-062
हरि जनमतही आनंद भयौ ॥ नवविधि प्रगट भई नंददद्वारे सब दुख दूरि गयौ ॥१॥ वसुदेव देवकी मतौ उपायौ पलना बॉस लयौ । कमलाकांत दियौ हुंकारों यमुना पार दयौ ॥२॥ नंदजसोदाके मन आनंद गर्ग बुलाय लयो । परमानंददासकौ ठाकुर गोकुल प्रकट भयौ ॥३॥
Kanharo
Gwatrini daan hamari deejai. atee munn mudit hoy vrajasundari
Part1-221
ग्वात्रिनि दान हमारी दीजै। अति मन मुदित होय ब्रजसुंदरि कहत लाल हँसि लीजे ॥१॥ दीजे मन मेरौ अब प्यारे निरखि निरखि मुख जीजै । अतिरस गलित होत वह भामिनि मनमानें सो कीजे ॥२॥ चल न सकत अति ठठक रहत पग रूपरासि अब पीजै | श्रीविद्डलगिरिधरनलालसों नवल नवल रस भीजे ॥३॥
Devgandhaar
Vrajmein adbhut thaadhi aayee | phooli gaye sub gope magan munn
Part1-118
ब्रजमें अद्भुत ठाढ़ी आयी | फूलि गये सब गोप मगन मन जबहिं बधायौ गायौ ॥१॥ कोऊ कहें इंद्र कुबेर वरून है कोऊ कहे रति पति जैसो । कोऊ कहें लोकपाल दिगपाल है कोऊ कहें होई न ऐसी ॥२॥ भाखत विरद जो प्रेम मगन मन गोप सब जुरि आये । अष्टसिद्धि नवनिधि देंनकों मनमें धनद लजाये ॥३॥ हों ढाढ़ी सुरराज ईशकौ ताहि ईशहि जाचों | और देव नरदेवनकों जस मनमें नेंकु न राचों ॥४॥ एक बेर दसरथ मैं जाच्यौ राम पुत्र भयौ जाके । गर्ग महामुनि मोसों भाख्यौ सो सुत भयौ जसोदाके ॥५॥ ढाढ़ी कहै व्रजईशसों मेरे धन बहुत हैं। रामकृष्णकी दरसन पैहों तब ठाढ़ी घर जैहें॥६॥
Dhanashri
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