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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
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Mandal madhi chhaiyaan kadamki chhaak arogat ruchi upajaai .. | NityaPad-209 | मंडल मधि छैयां कदमकी छाक अरोगत रुचि उपजाई ॥
विंजन बांट सबनको दीने अद्भुत स्वाद मुख बरन्यो न जाई ॥१॥ जानत वार
जेबनकी मैया ताही बेर दई छाक पठाई ॥| तेसीय भूख लागी तेसी ले दीनी
हाथ छाक ले आई ॥२॥ अधिक अघाने कहत सखा सब एसो स्वाद हम कब
हुन पायो ॥ चत्रभुज' प्रभु गिरिधरके जेंबत आनंद मन हिये हरख बढायो।। ३ ॥ | Saarang |
Nrityat rasranga rasikaras bharey hoe .. | Pustak1-346 | नृत्यत रासरंगा रसिकरस भरे हो ॥
सुलप संचगति लेत ग्रग्रततततथेईथेई बाजत मुदंगा ॥१॥
ताल झाँझ किच्नरि कतर भेद तैसीये मिली सरस सुर उपंगा ॥
गोविंदप्रभुके रस माते युवती यूथ मधि खसित कुसुम शिर मोतीनमंगा ॥२॥ | Kanharo |
Rung hoe hoe horiyaan .. ita baney naval kishore | Part3-197 | रंग हो हो होरियां ॥ इत बने नवल किशोर
ललन पिय उत बनी नवल किशोरियां ॥१॥ ये नब नील जलद तन सुंदर
वे कंचन तनगोरियां ॥ उनके अरूण बसन तन राजत इनके प ीत पटोरियां
॥२॥ फेंटन सुरंग गुलाल विविध रंग अरगजा भरीहें कमोरियां छलबल
करि दूरि मुख लपटावत चंदन बंदन सेरियां ॥३॥ राखीहें करन दुराय सबन
मिल केसर कनक कमोरियां ॥ सन्मुख दृष्टि वचाय धाय जाय स्याम सीस
तें ढोरियां ॥४॥ वाजत ताल मृदंग मुरज डफ मधुर मुरली ध्वनि थोरियां ॥
नाचत गावत करत कुलाहल परम चतुर ओर भोरियां ॥५॥ एकन कर
गेंदुक नवलासी ओर फूलन भरि झोरियां ॥ भाजत राजत भरत परस्पर
परिरंभन झकझोरीयाँ ॥६।॥ येहीरस निवहो निसवासर बवंधीहें प्रेम की
डोरियां ॥ माधुरी के हित सुख के कारन प्रगटीहढे भूतल जोरियां ॥७॥ | Kaafi |
Aaj barsaanen bajat badhaai . shrivrishbhanrayjuki raani | Part1-175 | आज बरसानें बजत बधाई । श्रीवृषभानरायजूकी रानी
कुँवरी अ नूपम जाई ॥१॥ घर घरते सब चलीं बेग दे नाचत गावत धाई ।
गोपीन सहित चली नँदरानी नंदीसुरतें आईं ॥२॥ ताल पखावज ढोल दमामा
बिच बिच भेरि सुहाई । यह विधिसों नँंदरानी पोहोंची मुख निरखत सुख
पाई ॥३॥ हरद और दि छिर्की परस्पर धरनी कीच मचाई । युवती चहूँ
दिश करत कुलाहल तनकी सुधि बिसराई ॥४॥ भीर भई जित तिततें रावल
अति ब्रज शोभा छाई । श्यामदास यह लीला लखिकें गोकुल आनि सुनाई ॥ | Devgandhar |
Chapal chala rasikani piya bulaaven.. | NityaPad-327 | चपल चल रसिकनी पिय बुलावें॥
विमलरजनी वहिजात सुंदर सुधरपहरिले नीलपट यही सुहावें ॥१॥ भेटकारि
कुचकठिन चित्त कोमल करहि काहेकों भामिनी भ्रोंह चढाबें || रठटत तुव नाम
धरध्यान सूरजप्रभु खोल मुख दरसदे येहि भावे ॥ २ | Bihagaro |
Vasanahare sabakdamb chadhaaye .. | NityaPad-034 | वसनहरे सबकदंब चढाये ॥
सोलेसहस्त्रगोपकन्यनके अंगआभूषणसहित चुराये॥| १॥
अतिबिस्तारनीप तरुतामेलेलेजहांतहांलटकाये
मणिआभूषण डारडारन प्रति देखत छबिमनहींअटकाये ॥२॥
नीलांबरपार्टबरसारी श्वेतपीतचूनरी अरुणाये ॥
सूरस्याम युवतिन ब्रतपूरणको कर्दंबडारफलपाये ॥। ३॥। | Ramkali |
Manawat haar pariri maaee .. tuu chataten mathot narathe houn hari laine | NityaPad-123 | मनावत हार परीरी माई ॥ तू चटतें मटहोत नराथे हों हरि लेन
पटाई।॥। १॥ राजकुमार होयसो जाने के गुरुहोय पढाई ।। नंदनंदनको छांड महातम
अपनी राखबडाई ॥ २॥| ठोडीहाथचलीदेदूतती तिरछी भ्रोंह चढाई ।। परमानंदप्रभु
करोगगी दुल्हैया तो बावा की जाई ॥३॥ | Bihagaro |
Dekh sakhee nava chhel chhabilo chitey leo mero chita chor | NityaPad-066 | देख सखी नव छेल छबीलो चिते लियो मेरो चित चोर
अरविलो आनत ऐंडानी ओर आकृति नेननकी कोर ।। १॥
शोभा अंग प्रति रूप माधुरी शीश दुमालो अति छबछोर।
कुंडल लोल कपोलन झांई अरुन उदेमानो किरन चहुं ओर॥२॥
कहत न बने देखही बन आवबे सदा बसो मन नंदकिशोर |
चत्रभुज प्रभु गिरिधरन लाल पर रीझ डारत त्रन तोर ॥३॥। | Bilawal |
Rasmondal mein baney giridharan laal .. | Pustak1-331 | रासमंडल में बने गिरिधरन लाल ॥
सुभग यमुनापुलिन प्रफुलित कदंब बन शरदरैन शशि देख थकित ब्रजबाल ॥१॥
भूषण बसन अंग अंग नौतन सखी कंठटधर बॉँह करें अधर मधुर मधुपान ॥
बनी गौर श्याम छबि शोभा कहा कहै कवि कोटि काम मोहै कुंभनदास जीय जान ॥२॥ | Poorvi |
Tum kaun hoe kinn thaadhi rahau .. tumhe aiso sou kahaa kaaj haye | Part1-247 | तुम कौन हो किन ठाढ़ी रहौ ॥ तुम्हे ऐसो सो कहा काज है
हम कोऊ हैं तुम डगर गहौ ॥१॥! काम नृपंत वृषभाननंदिनी दियौ दानको
बाधि कहौ | ऐते राजकाज में दियो दूध दहीकौ दान न हो ॥२॥ दान
हमारो सब दिन लागत तुमहु ज ानि बूझि करहो ॥ परमानंद गोपाल हठीलौ दान
लिया अरू डगरी गहौ ॥३॥ | Saarang |
Jharokhan deepak dekhiyat heheri pangat raaje.. | Part2-066 | झरोखन दीपक देखियत हेहेरी पंगत राजे॥
घृत परिपूरण सवारी राखे प्यारी कर प्रीतम बदन अवलोकन कारण स्फटिक मणिमय छाजे ॥९ ॥
दंपति पोढे रसबतियां करन लागे अनुरागे प्रेमपागे रतिरन जीतवेको मानो मेनदल साजे ।
“'नंददास' प्रभु सौभाग्य सीमा रति रंभा जगदंबा बरह्माणी रमा सची तेहु पीवत है लाजे ॥२ ॥ | Bihag |
Shobha sindhu naan anat rahiri .. nandbhavan bhari upati sakhiri vrajaki veethin firat bahee ..1.. dekhan aaj gaee huti sajani bechan gokul | Part1-020 | शोभा सिंधु न अनत रहीरी ॥ नंदभवन भरि उपटि सखीरी व्रजकी वीथिन फिरत बही ॥१॥ देखन आज गई हुति सजनी बेचन गोकुल
मांझ दही ॥ कहा कहि कहीं चतुर सखीरी कहत न मुख शशि हू न लही ॥२॥
जसुमति उदर अगाधि उदधित्ते उपजी यह जू कही ॥ परमानंद प्रभु इंद्र नीलमणि
ब्रजजुबवतिन उर लाय लई ॥३॥ | Bilawal |
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