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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Gwalin joban garv gaheli .. sriradha key sanga kadamb saheli .. 1..| kesar ubat kunkuma ghori .. anga sugandh chadhaay kishori
Part3-294
ग्वालिन जोबन गर्व गहेली ॥ श्रीराधा के संग कदंब सहेली ॥ १॥| केसर उबट कुंकुमा घोरी ॥ अंग सुगंध चढाय किशोरी ॥२॥ दक्षण चीर छिपेरी लहेंगा ॥ पहरें विबिध पटमोल महेंगा ॥|३॥ कबरी कुसुम मांग मोतिन भर ॥ केसर आडरची भृकुटी पर ॥४॥ काजर रेख नयन अनियारे ॥ खंजन मीन मधुप मृगहारे ॥५॥ श्रवणन कुंडल रवि शशिजोती॥ नकवेंसर लटके गजमोती ॥६॥ दशन अनार अधर बिंबमानो ॥ चिबुक मध्या मूंचो मदजानो ॥७॥ कंठ कपोत मुक्तावलि हारा ॥ जानो युगगिरी विच सुरसुरी धारा ॥८॥ कुचचकवा मानो शशि भ्रम भूले ॥ बैठे बिछुरे दोऊ अनुकूले ॥९॥ कर कंकण चूरो गजदंती ॥ नख मणि माणिक मेटत कांती ॥१०॥ नाभि मदन हिये हाटक वरणी ॥ कटि मृगराज नितंबनि तरुणी ॥१ १॥ कदली जंघचरण कमल नूपुर ॥ गमन मराल करत धरणी पर ॥ १ २॥ भूषण अंग सजे सत नौरी ॥ जावत फाग नंदजूकी पौरी ॥8३॥ सुन सुंदर बर बाहिर आये ॥ हलधर ग्वाल गोपाल बुलाये ॥१४॥ खेल मच्यो ब्रज के बिच भारी ॥ एक पुरुष एक भई नारी ॥१५॥ चंगमृदंग बांसरी बाजे ॥ पकरत एक एक गहि भाजे ॥१६॥ कुंकुम केसर अरगजा घोरी॥ हाथन पिचकारी गहें गोरी || १ ७॥ उडत गुलाल अरुण भयो अंबर ॥ कुंकुभकी चमची धरणीपर । १ ८॥ तब राधा मन मतो उपायो ॥ हलधर अपनी भीर बुलायों ॥ १ ९|| कान लाग स्यामा समझायो || संकरषण गहि स्यामहि लायो ॥२०॥ हरिजू के हाथ गड्ढे चंद्रावलि ॥ कज्जल ले आई संजावलि ॥२१॥ ललिता लोचन आंजन लागी ॥ चंद्रावलि मुरली ले भागी ॥२२॥ भामा लियो पटपीत छुडाई ॥ राधा राखत कृष्ण बडाई ॥२३॥ एक ले लावत हरद कपोलन एकले पोंछत मृदुल पटोलन ||२४॥ एक कहे मोहन मुख मांडो ॥ एक कटे फगुवा ले छांडो ॥२५॥ एक आलिंगत एक अवलोकति ॥ चुंबनदेत परस्पर दंपति ॥२६॥ मगन भई आपुन न संभारत ॥ लालभुजा अपने उर धारत ||२७॥ यद्यपि गुरुनन सब कोऊ देखें ॥ तिनकों तरूणी तृणभर लेखें ।२८॥ कमलनमार मचीकर आडे ॥ ग्वाल टिके पगतोउन छाड़े ॥ २९॥ स्यामा स्याम सु गह गहि लाये ॥ श्रीदामा तन श्रीहरि चाये ॥३०॥ सगरे सखा छुडावन आये ॥ उन दिये जीत के ढोल बजाये ॥३१॥ बल कियो बीच ग्वाल समुझाई मोहन मिश्री मोल मंगाई ॥३२॥ फगुवा ले लालन छिटकाये ॥ हँसत गोपाल सखा तहां आये ॥३३॥ तबही स्याम हलधर पकराये ॥ करत तरुणी अपने मनभाये ॥३४॥ नयन आंज कज्जल मुख लावें ॥ हरद कलश हलधर शिरनावें ॥३५॥ बहुत भरे बलराम सबनमहि || धोरा गिरिमानो धातु चली बहि ॥३६॥ न्हान चले यमुना दुह्ुं टोलन ॥ केलि करत नरनारि कलोलन ॥३७॥ अतिरस बाढ्यो हो हो होरी ॥ सारद कहा वरनें मतिथोरी ||३८।| गिरिधर यश कृष्णजन गावे ॥ लीला सिंधु पार नहिं पावे ॥३९॥
Gouri
Raas vilas rachyo naagar nutt ..
Pustak1-326
रास विलास रच्यो नागर नट ॥ जुरि मंडल निर्तत व्रज बनिता नवल निकुंज सुभग यमुनातट ॥१॥ उपजत तान बंधान सप्त स्वर बाजत ताल मृदंग बीन रट ॥ सन्मुख है नाचत पियप्यारी लेत सुधंग चाल गति अटपट॥२॥ रसिक बिहार निरख शशि हास्बौ शरदनिशा भूल्यो अपनी अट ॥ क्ृष्णदास गिरिधर श्रीराधा राजत मेघ मानों दामिनी घट ॥३॥
Khat
Tatthei tatthei tattathei thei ....
Pustak1-338
ततथेई ततथेई ततताथेई थेई ॥॥ नाचत गाबत गोपी नाना नई ॥१॥ मृदंग धीधीकटि दट्ुमद्रम दई ॥ त्रिवट ताल गति लेत नई नई ॥२॥ गोवर्द्धधारी लाल रीझे अति सई ॥ कृष्णदास प्रभु प्यारी आकों भरि लई ॥३॥
Gori
Sakal kalaa guna praveen arrie aeye doondaavan rung ..
Pustak1-329
सकल कला गुन प्रवीन एरी ए दूंदावन रंग ॥ सा री गम प ध नी अलाप करत सरस उपजत अवधर तान तरंग ॥१॥ सीस टिपारों कटि लाल काछनी वनजु धात विचित्र सोहे सुभग अंग ॥ गोविंद प्रभु के अंग अंग परवारों कोटि अनंग ॥२॥
Saarang
Gopbundsang nrityat rung ..
NityaPad-063
गोपबुंदसंग नृत्यत रंग ।। सारीगमपधनी अलाप करत रसउपजत तान तरंग ॥।१॥| सीसटिपारो कटिलालकाछनी वनजु धातुचित्रित सुभग अंग॥। गोविंदप्रभु त्रैलोक विमोहत वारफेर डारू कोटि अनंग ॥२॥
Gori
Mohan neck sunavahu gori.. banate aavat kunwarkanhaiya pahopmal
NityaPad-106
मोहन नेक सुनावहू गोरी।। बनते आवत कुंवरकन्हैया पहोपमाल ले दोरी ॥१॥ नंद लाडले मुरत्ती बजाई परगई प्रीति ठगोरी || परमानंद प्रभु सुवन नंदके दुहदई धूरम धोरी ।॥।२॥।
Gori
Tumason bolweki naahin.. gharghar gaman karat sundarpiya chita
NityaPad-049
तुमसों बोलवेकी नाहीं।। घरघर गमन करत सुंदरपिय चित नाहीं एक ठाहीं ॥१॥ कहा कहों सामलघन तुमसों समझ देख मन माहीं ॥ कृष्णदासप्रभु प्यारीके वचन सुन हृदय माझ मुसकाहीं ॥॥२॥।
Lalit
Aaj dashahara shubh dinn neekau vijay karo piya pyaaripe aaj..
Part1-317
आज दशहरा शुभ दिन नीकौ विजय करो पिय प्यारीपे आज॥ घेरी है बिकट मदन गढ़ गाढ़ें तोर मेंड्र लालन कर हो राज ॥१॥ इत्तनी बात * सुनत नँदनंदन बिहँसि उठे दल कीनों साज )| रसिकप्रभु पिय रति पति जीत्यो नुपूर किकिणी रुनुझुनु बाज ॥२॥
Saarang
Bhojankarat naval peeya pyaari ...
NityaPad-081
भोजनकरत नवल पीय प्यारी ॥। नवल मेहेल नवरंग सिंघासन बेठे नवरंग नवल बिहारी ॥१॥ नवल थार नव खट रस बीजन परोसत नवल सखी ललीतारी ॥ अरस परस भ्रकुटी चितवन पर हीत हरीबंस जाय बलहारी ॥।२॥
Nat
Houn apane lalke guna gaauun. barbar palnaaten lai leey kaniyaan
Part1-095
हों अपने लालके गुन गाऊँ। बारबार पलनातें लै ले कनियाँ ले हुलराऊँ ॥१॥ कटठुला कंठ रुचिर पोहोंची कर नाक नथुनी पहराऊँ । श्रीविदल गिरिधरनलालकों आँगन बैठि खिलाऊँ ॥२॥
Ramkali
Nirtat mandal madhya nandlal .. mormukut murali pitambar gerein
Part1-324
निर्तत मंडल मध्य नंदलाल ॥ मोरमुकुट मुरली पीतांबर गेरें गुंज बनमाल ॥१॥ ताल मृदंग संगीत बजत है तत थेई बोलत बाल || उरप तिरप तान लेत नटनागर गंधर्व गुनी रसाल ॥२॥ बाम भाग वृषभाननंदिनी गजगति मंद मराल ॥ परमानंद प्रभु की छबि निरखत मेंटत उरके साल ॥३॥
Todi
Khelani aaee nand darbar, sakal vraj gwalini
Part3-266
खेलनि आई नंद दरबार, सकल ब्रज ग्वालिनी हो ॥ध्रु०॥ एक समैं श्री राधा बैठीं सिंगार बनाई ॥ उमँगि आँई सब गोप- सुंदरी चलौ जसुमति पै जाई ॥ १॥ अपनौं अपनों मेलि अरगजा लींनें कलस भराई ॥ फगुवा के मिस सोडन के हित आँनद उर न समाई ॥२॥ आप जुबती जूथ मैं ठाड़ी आगे पठई द्वे चार ॥ नँदरानी सौं यों जाई कहीयो, सब सखियन बिस्तार ॥३॥ मुदित भई सुनि ख़बन जसोदा, लीनें सकल बुलाई ॥ आसन मानि, मनोहर बीरी, दींनी रुचिर बनाई ॥४॥ तेल, फुलेल सुगंध अरगजा उड़वति अबीर गुलाल ॥ माँनों सामन घन बरखावत बहू बिधि बूंद रसाल ॥५॥ देखति नैननि परी ठगोरी, पट भूषन गए छूटि ॥ कनक-लता मुकता निधि तामैं पायौ रंक मनौं लूटि ॥६॥ मोहन जाई अटारी ठाड़े दृष्टि परी अली नैन ॥ वर भामिनी गहि लाई भुजाबल, जोबन सब सुख देंन ॥७॥ ताल रबाब बाँसुरी बैंनु कटिकट सबद मृदंग ॥ मानों रास भयौ फिर गोकुल, पायौ है दन रति रंग ॥८॥ चंदन बंदन केसरि भरि भरि झकझोरि कीयौ ब्रज राज ॥ उमभै अँक मुख पान परम मद मैंटी सब कुल-लाज ॥।॥ चिरजीबौ जुग जुग यै जोरी असिस सब मिलि देति ॥ तन मन धन गिरधर पै बारौं 'रामदास” समेत ॥६०॥
Sarang
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