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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Naachat govind sanga sakhaa mill aavat nandan anand heeye. | NityaPad-061 | नाचत गोविंद संग सखा मिल आवत नंदन आनंद हीये।
उड़पति निरख नयन छब लाज्यो पाय पयोध स्वरूप किये ॥१॥
कोउ मूर्दंग कोउ ताल कोउ जंत्र कोड रबाब मृदुल गान कीये।
तीन ग्राम सुरभदे जनावत नंदकुमार कर वेनु लीये ॥ २।
कमल बरन सिर बन्यो टिपारो काछनी पीत कटि बंदक सीये।
मानीक दूती सभरन उपरेना कनक खचित मनि पदिक हीये ॥।३॥
उर वन मास मधुप झंकारत सुरन देत मधु स्वाद लीये ।
कृष्णास लीला लालगोवर्धनधारी वुजजन पीय रसीये ।॥४॥ | Todi |
Sohat laal paradani jheeni taapar aeka adhik chhabi dekhiyat jalsut paant bunny cutty chheeni .. 1 .. | NityaPad-255 | सोहत लाल परदनी झीनी तापर एक अधिक छबि देखियत जलसुत पांत बनी कटि छीनी ॥ १ ॥
उज्ज्वल पाग बनी सिर राजत अलकावली मधुप मधुपीनी।
चतुर्भुनदास लाल गिरिधर पिय चपल नैन चितवन बस कीनी॥२॥ | Saarang |
Gokulraj sadanki daaee shree vrajrani juu pathaai hoe. aeye hoe kunwari | Part1-183 | गोकुलराज सदनकी दाई श्री ब्रजरानी जू पठाई हो। ए हो कुँवरी
मुख देखन आई || बजे इन्द्रगज धुनि सुनि उपजी मनमें आतुरताई जू। तन पाछे
मन आगे ऐसे आनंद मांझ बधाई जू ॥१॥ बोली लई वृषभान घरणि आदर दे
निकट बिठाई जू। “जगन्नाथ” स्वामिनी प्रगटी है पाई मैं बहोत बधाई जू ॥२॥
| Dhanashri |
Pooja sunat bahut sukhakeenon .. bhalee curry hamakon sudhadinon ..1 .. | Part2-067 | पूजा सुनत बहुत सुखकीनों ॥ भली करी हमकों सुधदीनों ॥१ ॥
यहबानी सब मुखतें कीनों॥ बडोदेव सबइनकों चीन्हों ॥२॥
इनहींतें त्रजबास वसीनों॥ हमसब अहीर जाति मति हीनों ॥३ ॥
पूजाकी विधि करत सबे मिली॥ जैसी भांत सदां तेसी चलि ॥४ ॥
बिदा मांग नंदसों गृहआये ॥ घरन घरन यह बात चलाये ॥५ ।
सूरदास गोपनकी बानी ॥ ब्रज नरनारि सबन यह जानी ॥६ ॥ | Bilawal |
Rivaabat sutakon nandrani.. | Part2-038 | ऋवाबत सुतकों नंदरानी॥
मानत पर्व रूपचोदसको तिलक उवटनो कर हरखानी ॥१ ॥
वस्न लालजरी आभण घण पहरावत रुचिसों मनमानी ॥
मेवा ले चले गाय सिंगारन द्रजजन देखदेख विहंसानी ॥२ ॥ | Devgandhar |
Sohat lalpardani atijhini.. | NityaPad-254 | सोहत लालपरदनी अतिझीनी॥
तापर एक अधिक छबि उपजत जलसूुत पांति बनी कटी छीनी ॥ १ ॥
उज्ज्वलपाग स्याम सिर शोभित अलकावली मधुप मधुपीनी ॥
कुंभनदास प्रभु गोवरधनधर चपल नयन युवतीन बस कीनी॥२॥ | Saarang |
Sikhwat chalan yashoda maiya . arbarai curr paan gahawat | Part1-146 | सिखवत चलन यशोदा मैया । अरबराय कर पान गहावत
इगमगात धरनी परें पैया ॥१॥ कबहुँक बलिकूँ टेरि बुलावत यह आँगन खेलों
दोऊ भैया । कबहुँक कुलदेवता मनावत चिरजीवौ मेरो कुँवर कन्हैया ॥२॥
कबहुँक ठाड़ी बदन निहारत मनमोहन की लेत बलैया ॥ सूरदास प्रभु सब
सुखदाता अति आनंद बिलसत नेंदरैया ॥३॥ | Ramkali |
Sahaj preeti gopale bhaave . mukh dekhein sukhhoy | Part3-024 | सहज प्रीति गोपाले भावे । मुख देखें सुखहोय
सखीरी प्रीतम नैनसों नैन मिलावे ॥ १॥ सहज प्रीति कमल ओर भानें सहज
प्रीति कुमोदनी ओर चंदे ॥ सहज प्रीति कोकिला वसंते सहज प्रीती राधा नंदनंदे ॥२॥
सहज प्रीति चान्रक ओर स्वांते सहज प्रीति धरनी जल थारे ॥
मन क्रम वचन दास परमानंद सहज प्रीति कृष्णअबतारे ॥३॥ | Basant |
Bansibatke nikat hari raas rachyau haye morr mukut arr odhi peetpat .. | Pustak1-348 | बंसीबटके निकट हरि रास रच्यौ है मोर मुकुट अर ओढ़ि पीतपट ॥
श्रीबृंदावन कुंज सघन बन सुभग पुलिन ओर यमुनाके तट ॥१॥
आलस भरे उनींदे दोउ जन श्रीराधाजू ओर नागरनट ॥
व्यास रसिक तन मन धन फूले लेत बलैयाँ कर अँगुरिन चट ॥२॥ | Adano |
Visad sujas srivallabh sutkau, praatah uthat nita anudin gaauun. | NityaPad-008 | विसद सुजस श्रीवल्लभ सुतकौ, प्रातः उठत नित अनुदिन गाऊं।
कलिमल-हरन चरन चित धरिके, उपजै परम सुख दुःख बिसराऊं ॥
भक्ति भाव अरू, भक्तनि कौ रस, जानें मान तिनहिं को ध्याऊं।
छीत-स्वामी' गिरिधारीजू के सुमिरत, अष्ट सिद्धि, नव निधि को पाऊं॥ | Bibhaas |
Bhaee abb girishwarason pehechan. | NityaPad-371 | भई अब गिरिश्वरसों पेहेचान।
कपटरूप व्हे छलवे आयो पुरुषोत्तम नहीं जान ॥१॥
छोटो बड़ो कछु नहीं समज्यों छायर॒यो अज्ञान |
छीतस्वामी देखत अपनायो श्रीविद्ठल कृपानिधान ॥२॥ | Bihaag |
Vrindaaban biharati basant chali dekhon nanda dularo .. | Part3-136 | वृन्दाबन बिहरति बसंत चलि देखों नँँद दुलारो ॥
नटवर भेष सज्यों रँग भीनों सोभित सीस टिपारो ॥ १॥ सँग सखा सोभित
रँग भीनें रंगन रणमणे ग्वाल ॥ सुनति चली उठि धाई लाडिली संग लीए
ब्रजबाल ॥२॥ साजि सिंगार बनी अति सुंदर इक बेष इक सार ॥ कोकिल
कैसें कंठ हि गावति मंगल गीत सुढार ॥३॥ बाजति ताल मृदंग झांझ
ढफ लागति परम सोहाये ॥ जूथ परस्पर टोल दोऊन के सबहिन कै मन
भाये ॥४॥ चोवा चंदन अगर कुंमकुमा छिरकति अरु छिरकाबें ॥ लाल
गुलाल अबीर धुंधरि में तन अभिलाष बढ़ावैं ॥५॥ भली भई आयो बसंत
नर नारिन अति सुख पायो ॥ आनैँद भयो गयो दुःख अब पसु पंछीन
मन सरसायो ॥६॥ गोपीजन फूले समात नहीं ब्रज सुख कहति न आबे ॥
“नंददास” ब्रज बास बसे अरू जो देखें सौं गावे ॥७॥ | Basant |
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