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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Seet tunn laagat haye atibhari ..
NityaPad-038
सीत तन लागत हे अतिभारी ॥ देहों बसन सांबरे प्रीतम देह कंपत है सारी ॥१॥ नेक दया नहीं आवत नंदनंदन अतिदुःख्तरित ब्रजनारी ॥ गोविंदप्रभु करो मनोरथ पूरन हम तो दासी तिहारी ॥२॥।
Ramkali
Dekhan nand kaanh atisobat .. bhookhe bhaye aap vann bheetar yahakahikahi mukhjovat .....1..
NityaPad-345
देखन नंद कान्ह अतिसोबत ॥ भूखे भये आप वन भीतर यहकहिकहि मुखजोवत ।॥॥१॥ कह्यो नहीं मानत काहुको आपहठीले दोऊबीर ॥ बारवार तनपोंछत करसों अतिहि प्रेम की पीर ॥| २।। सेज मगाय लई तहां अपनी जहां स्थाम बलराम ॥ सूरदास प्रभु के ढिंगसोई संगपोढ़ि नंदवाम ॥३॥
Bihaag
Bolat kaanh bulawat gaiya ..
NityaPad-201
बोलत कान्ह बुलावत गैया ॥ 'गिरिगोवर्धन ऊपर ठाढे कर पीतांबर लैया ॥१॥ लागीभूख पियो चाहत है याको पय मथघैया ॥ धारकर देत सबही ग्वालनकूं तब ही छाक पठैया ॥२॥ तिहिं अबसर ग्वालिन बन आईदधिओदन बिधिठैया ॥ भोजन करत सुरत जबकीनी प्रियदयाल बल जैया ॥३॥
Saarang
Bolat dhenu govardhan giri chadh ..
NityaPad-298
बोलत धेनु गोवर्द्धन गिरि चढ़ ॥ मोहन मुरली धुनि सुन श्रवनन काजर गांग गुरनी हरनी मुर धाई प्रेम बढ ॥१॥ आसपास सब घेर रही वह वापर वह वापर चंढि ॥। गोविन्द प्रभु हस्त कमल परस कियो तातें अति दूने दूध चढ़ी ।।२॥।
Poorvi
Laal tere mukh oopar vaari . bali keshav merey nayanan laagai
Part1-159
लाल तेरे मुख ऊपर वारी । बलि केशव मेरे नयनन लागै रोग बलाय तुम्हारी ॥१॥ सुंदरता कौ पार न पावत रूप देखि महतारी । उर अंतर आनंद बढावत हँसत देत किलकारी ॥२॥ अल्प दशन तुतरात बोल बिंब तहाँ न जात बिचारी । सूर सिंधुमें बूंद भई मिलि मनसा मगन हमारी ॥३॥
Dhanashri
Mahari poot tero
NityaPad-311
महरि पूत तेरो कैसेहुं बरज्यो न माने ॥| बलमोहनकी जोरी और बालक संग लिये मरकट घेर फेर पाछे पाछे ते लूटत घर मेरो ॥ १॥। दह्यो दूध घृत माखन तनक न उबरत कैसेक वास होय हमकेरो ॥ गोविंदप्रभुके बालविनोद सुनत नंदरानी मनहीमन मुसुकानी सांची कहत अनेरी ॥ २॥
Iman
Subhag sez shobhit kaushalya ruchir ramshishu godaliyen..
Part2-264
सुभग सेज शोभित कौशल्या रुचिर रामशिशु गोदलियें॥ बाललीला गावत हुलरावत पुलकित प्रेम पीयूष पियें ॥१ ॥ कबहूं पोढ पयपान करावत कब राखत लाय हियें॥ वारवार विधु बदन बिलोकत लोचन चारु चकोर पियें ॥२ ॥ शिव विरंचि मुनि सब सिहातहें चितवत अंबुज ओटदियें ॥ तुलसीदास यह सुख रघुपति को पायो औरन काहू बियें॥३ ॥
Bilawaal
Yaa vraj mein horry rung badhyo .. hoe hoe sabahin
Part3-193
या ब्रज में होरी रंग बढ्यो ॥ हो हो सबहिन हिये हुलास ॥ ध्रु० || खेलत मोहन लाडिलो हो नंदराय की पोरि || हलधर सुबल सुबाहु श्रीदामा सब लरिकन संग जोरी ॥१॥ विविध भांत के भेष बनाये नाचत अतिहि सुधंग ॥ गावत गारी तारी दे दे किलकत अपने रंग ॥२॥ ढोलकी ढाल पखावज वीना झांझ संख डफ ताल ॥ भेरि दुंदुभी अगणित वाजे विच विच वेणु रसाल ॥३॥ कोलाहल सुनि सब ब्रजसुंदरि सकल सिंगार संवारि ॥ झुंडन मिल गावति आईं अत्तिह़ी सरस सुरगारि ॥४॥ दुह्ंदिशतें छूटी पिचकारी घुमड्यो अबीर गुलाल ॥ रपटत झपटत तनले धावत टूटत उर वनमाल ॥ ५॥ तिहिं छिन चपल चतुर चंद्रावलि हलधर पकरे दोर ॥ आंखि आंजि मुख मांडि कुंकुमा छोडे रंगनवोर ॥॥६॥ पोंछत नयनन खोरनीलपट तन नवीं बसन संभार || हो हो हो करि ग्वाल हसतहें वाढ्यो रंग अपार ॥७॥ तब नंदन नंदन फगुवादेनमिस प्यारी सनन्‍्मुख आय ॥ मृगमद केसर ओर अरगजा भीजे उर लपटाय ॥८॥ तब सकुची गोपी सब कोपी कनक लकुट ले हाथ ॥ पकरन थांई छबीले लाल कों खसत झीने पट माथ ॥५९॥ भागे सकल सखा संग के तब मोहन लीने घेर | अछन उठाय णई ले पियकों फिर चितबत मुख फेर ॥१० ॥ प्यारी धाय गे भुज बंधन अति आतुर अकुलाय ॥ करत मनोरथ सब ही जियके रस वस रहे अरुझाय ॥ १ १॥ एक सखी सोंधो लपटावत नावत केसर नीर पीतांबरसों गूंधि बनावत गहि राधाजू को चीर ॥१२॥ एक कह्त बलबल जोरीकी त्रिभुवन नहीं समतूल ॥ वदन निहारें ज्यों चंद चकोरी अंग समातन फूल ॥१३॥ एक कपोल परसि लपटावत केसर कुंकुम घोर ॥ एक भालरचि बेंदी बनावत हंसत सबे मुखमोर ॥ १ 8॥ एक कहे भली बनीहें सहचरी राधाजू की जोरि ॥ यह सुनिमुसकि हँसत पियप्यारी चितवत नयनन मोरि ॥ १५॥ या छबि ऊपर तन मन वारत राई लोन उतारि ॥ चिरजीयो युगयुग यह जोरी कहति यों अचरा पसारि ॥|१६॥ हरि संग करत विहार विविध रस केसें बरन्यों जाय ॥ सुरनर मुनि विधकित भयेहें रति पति रहे सिरनाय ॥१७॥ फगुवा मन मान्यों दियो सब पूजी मन की आस ॥ श्रीविद्ठुल पदरज प्रतापतें गावत्त यह यशदास ॥१८॥
Kaafi
Unidi aankhen laagat pyaari kajrari korwari ..
NityaPad-055
उनीदी आंखें लागत प्यारी कजरारी कोरवारी ॥ समगरी रेन जागी सुखसों पियाके संग तातें भई रतनारी ॥१॥ घरी घरी पलछिन झपकत मानो करखत कंजपवारी ।। नंददासप्रभुकी छबि निरखत मोहे कुंजबिहारी ॥ २॥।
Pancham
Pyaari teree pootari kaajar hootein kaaree maanon bhanwar douu oode
NityaPad-054
प्यारी तेरी पूतरी काजर हूतें कारी मानों भँवर दोऊ ऊडे बराबर ॥ चंपेकी डार कुन्द अलि बेठे लागी जीय बराबर ॥ १॥| मानो कामको कटक सखीरी जब जिय होत डराडर ॥| हरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी दोउ मिल लरत झराझर || २॥।
Malkos
Myrie sithil mekhala baandhtahi katihaun hutee apane aangan thaadhi sthaam achaanak aaye..
NityaPad-312
माईरी सिथिल मेखला बांधतही कटिहौं हुती अपने आंगन ठाढी स्थाम अचानक आये।। ठगीसी रही मोपें बोलेहु न आवे छबि निरखत कछु और न भावे यह साध मेरे जियमें रही काहु सखि बतियन न लगाये ॥१॥ हाथहुते कंकण गयो गिर तब हरि आय उठाय बनाये दुखविसरासे ।। सूरदास मदनमोहनहौं मोहि नाजाने ताछिन भरभर अँखियन देखन न पाये ॥२॥
Iman
Ruchirpad kamal shrivallabhadhishke
Part2-315
रुचिरपद कमल श्रीवल्लभाधीशके रेन ओर दिवस निज शिरसि धरियें॥ गहत दृढ बांह जिहिकान श्रीनंदसुत पत्र फल पुष्प सेवानुसरियें ॥१ ॥ प्रेममावते निकट संतत रहेत राख विश्वास ब्रततें न टरीये। श्रीविद्ठुल गिरिधरन हित प्रगट लक्ष्मणसुवन भक्तके भवनमें वास करियें॥२ ॥
Kalyan
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