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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Barasaane keeseem khelat rung radyohe ). chhal bal | Part3-209 | बरसाने कीसीम खेलत रंग रद्योहे )। छल बल
वानिकवान ललिता नें लाल गद्योहे || १॥ सखा श्रीदामा आदि हलधर भाज
गयेहें || गही पिचकारी हाथ जुरि चहंकोद भयेहें ॥|२|॥| कोऊन आवेपास
उतबल बहत भयोहें ॥ अधिक भई अधियारी गगन गुलाल छयोहे ॥३॥
तामधिदमकत अंग ब्रजजन रूप छटारी ॥ सारी भरी सुरंग सोहेकनक किनारी ॥४॥ जोरी वंदनधूर अबीरमिलाय लियोहे ॥ छिरक छिरक घनस्याम
सबे एक रंग कियोहे ॥५॥ लपटपरी विहवाल तरुनतमाले हेली ॥ पोहोप
लता सिरताज कोंधत ऊपर वेली ॥६॥ करत मनोरथ घेर गिरिधर सुघर
सलोनों ॥ लग्यो अरगजा गाल श्रीमुख लसत रिझोनों ॥७॥| पाग उतारत
आप श्रीवृषभान कुमारी ॥ केसखोल निरवार बेनी सरससंवारी ॥८।॥
झबीजराउजोर अग्रनिग्रंथ संबारी ॥ मांग भरी मोतिनकी पदियन ही लेपारी
॥९॥ सीस फूल सीमंत किशोरी आपुन दीनों || समझवार समझावत नयनन
अंजन कीनों ॥१०॥ मृगमद आड सुदेस करी चंद्रावलि नीकी ॥ चंद्रभगा
लेवी चल गावत पिय कोंटीकी ॥११॥ पहरावत झकझोर वेसर निरमोली
है ॥ चारूु छपेरी साज पचरंग उरचोली हे ॥१२॥ जेहर तेहर पाय विछुबन
छनिउप जायल || अनवट नूपुर चूरा रत्न खचित हें पायल ॥१३॥
नखसिखलों यह भात अभरन भीर भईहे ॥ निरख निरख यह कांति ब्रज
आनंदमईहि ॥ १ ४॥ वाजन लागे ढोल ओर डफ ताल मृदंगा ॥ गोमुख किन्नरि
झांझ बीचबिच मधुर उपंगा ॥ १ ५॥ सहचरी भई आनंद गावद गारि सुहाई ॥
दिसिदिस मोहन ओर चलत निकर पिचकाई ॥१६।॥ एक सखी बीचआई
अरणजा डारणई हे ॥ देख पलक पररेल पियजूणारी देई हे ॥१७॥ लेले
अंचल आप पोंछत अंगुरिन दलसों ॥ मुठियन चलत गुलाल आगजें पाछे
छलसों ॥१८॥ तेई घातन मधुपाय प्रान पियाकों पोखत ॥ प्रेम विवशता
हरि भर अंकवारी झोखत ।। १९॥ हो हो होरी बोलत ललिता आंगन नाचत ॥
करे प्रेमकी टोक चोख एको नहीं वांचत ॥२०।॥| नंददास खिलवार खिलारी
खेलन हारो ॥ भयो ने हमदमाद टोल दुह्ंदिस मतवारो ॥२१॥ | Kaafi |
Khel faag anurag mudit jubati jan deit assis .. | Part3-368 | खेल फाग अनुराग मुदित जुबती जन देत असीस ॥
रसिकन की रस रासि श्रीवललभ जीयो कोटि बरीष ॥१॥ घिर आई खेलन
कें कारन अबला जुरि दस बीस ॥ हरिदास के स्वामी स्यामा खेलो बसंत
जय जय गोकुल के ईश ॥२॥ | Basant |
Chatkilau putt laptaanau cutty bansibat jamunaake tata thaadhi naagar nutt .. | Pustak1-348 | चटकीलौ पट लपटानौ कटि बंसीबट जमुनाके तट ठाढी नागर नट ॥
मुकुट लटक और कुंडल चटक भ्रुकुटी बिकट तामेँ अटक्यौरी मदनभट ॥१॥
चरण लपेट आछे कनक लकुट च टकीली बनमाल कर टेकें
द्रुम डाल ठेढ़े ठाढ़े नंदलाल छबि छाई घटघट ॥
नंददास प्रभु प्यारी बिन देखें गोपीग्वाल टारी
न टरत यातैं निपट निकट आवै सौंधेकी लपट ॥२॥ | Adano |
Ariho yaa mug niksi aaya achaanak kanhkunwar thaadhe aapani pore .. | NityaPad-313 | अरीहो या मग निकसी आय अचानक कान्हकुंवर ठाढे आपनी पोर ॥
दृष्टिसों दृष्टिमिली रोमरोम सीतल भई तनमें उठीहे कींथो कामरोर ॥१॥
लालपाग झुक रही भ्रोहनपर स्थाम गातकिये चंदनकी खोर ॥।
सूरदासप्रभु सर्वस्व हरके चलें मनमें आवत कैंधो मिलोरी दौरी ॥१॥ | Iman |
Kilak hasein giridhar trajarai .. | Part2-044 | किलक हसें गिरिधर त्रजराई ॥
भाज्यो सुबल लियें गोद बछरा पाछें धोरीधाई॥१॥
मधुमंगल ;ंगल ले मोर पखोवा दोर आय अहोटाई ॥
तोक ताक तक मोहनके ढिग भली विधि थेनु खिलाई ॥२ ॥
खोल भवन भूषण पहरें सब परवी भली मनाई |
लियो लपेट लालगेहनेमें सब ब्रज देखन आई ॥३ ॥
श्याम जलद गंभीर गरजसों मोहन टेर सुनाई ॥
वह वापर वह बापर गैया शोभा कही न जाई ॥४॥
सोनेसींग घंटा अरु कठुला पीठ पत्र समुदाई॥
परमानंद आनंद भर खेलत मुरली तबहि बजाई ॥५ ॥ | Sarang |
Govardhan lino uchchakaai .. dekh vickle narnari kanhai ..1.. | Part2-085 | गोवर्द्धन लीनो उच्चकाई ॥ देख विकल नरनारि कन्हाई ॥१॥
अपने सुख श्रज जन वितताये॥ बूंद बहुत ब्नजपर वरखाये ॥२॥
वे डरपत ओर हरघत मनमन॥ जहांतहां सब ब्रजजन ॥३ ॥
घरके देख मनहिं सुखदीनों॥ वामभुजा गिरिवर कर लीनों ॥४॥
सूरश्याम गिरि करधर राख्यो॥ धीरज बचन सबनसों भाख्यो ॥५ ॥ | Bilawal |
Lalansang khelan fagchali .. chova chandan aggar | Part3-045 | लालनसंग खेलन फागचली ॥ चोवा चंदन अगर
कुंकुमा छिरकत घोषणली ॥१॥ ऋतुबवसंत आगम नवनागरि जोवन भार
भरी ॥ देखन चली लाल गिरिधरकों नंदजूके द्वारखरी ॥। २॥ रातीपीरी चोली
पहरें नौतन झूमक सारी ॥ मुखहिं तंबोल नेन में काजर देत भामती गारी
॥३॥ बाजत ताल मृदंग बांसुरी गाबत्त गीत सुहाये ॥ नवल गुपाल नवल
ब्रजवनिता निकसि चोहंटे आये ॥|४॥ देखो आई कृष्णजुकी लीला विहरत
गोकुल माहीं ॥ कहतन बने दास परमानंद यह सुख अनतजु नाहीं ॥५॥ | Basant |
Ulato jhagaa ulati haye soothan kahat banyo nikori maiya . | Part1-314 | उलटो झगा उलटी है सूथन कहत बन्यो नीकोरी मैया ।
पांय पनैया नंदबाबा की सीस पाग पहली बांध बूझत बलि मो मे को सुंदर है
भैया ॥१॥ कटि फेटा और बडी कटारी थकि ढरकि ठोडी तर आय कहूं
लपटानो पैया । 'क्रष्णजीवन” हरि प्रभु कल्यान की ये छबि निरखत नंदजसोदा
भये फिरत गाडी कैसे पैंया ॥२॥ | Bilawal |
Syamaju horry khelan aanee .. lalita chandrabhaga | Part3-348 | स्यामाजू होरी खेलन आंई ॥ ललिता चंद्रभगा
चंद्रावलि सखी अनेक सुहाई ॥१॥ जब यह बात सुनी जसोदा जु अरध
पामड़ें दीनें ॥ लाल भामती जोरी लख मन मांझ बधाई कीनें ॥२॥ फूली
फूली फिरत सखी सब पकरन मदन गोपालें ॥| फिर फिर कहत रोहिणी
अब जिन भरो नंद के लालें ॥३॥ यह सुन ललिता ओर चंद्रावलि बलदाऊ
गहि लीनें ॥ मृगमद आड संवार मांड मुख भौंपै बिंदा दीनें ॥४॥ भीजी
नाना विधि के रंगन बोलत हो हो होरी ॥ अब गहि लेह्ु चलो मोहन कों
यों दुर कहत किशोरी ॥५॥ चली दौर चहूंदिश तें सुंदर चढ गई अटा
अटारी ॥ बैठे हुते जहां मन मोहन घेर लिये चित्र सारी ॥६॥ पकरद्यो
प्यारो प्यारी छलकर भेख सखी को कीनो ॥| आंख आंज केसर मुख मांड्यो
मृगमद बेंदा दीनों ॥ ७ एक सखी कुसुमन सों कबरी नाना विधि जु संवारी ॥
सिंदूर मांग भरी ता ऊपर मोतिन की लर न्यारी ॥८॥ नीलांबर पहरायो
रीझ पहराई मणिमाला ॥ स्यामा याको नाम धर्यो है यों कहत मुदित ब्रजबाला
॥९॥ सब सहचरी मिल लाई त्ाकों नंदरानी के पास॥यह सुंदर हमलाई
हैं जु घनस्याम मिलन की आस ॥१०॥ देख रूप ललचाय जसोदा करत
बहुत मनुहारी ॥ बार बार नोंछावर कर कें पीवत है जलवारी ॥११॥ जब
यह भाव लख्यो सब ही मिल सखत्री भेख हे कीनों || नाना विध पटवार
ओर मन मान्यो फगुवा दीनों ॥१२॥ भये दूहुंन के भाये मनके पिय प्यारी
रस भीने ॥ जे जे हुती कामनां मन में जैसी विधि सुख दीनें ॥१३॥ छाय
रहो अनुराग परस्पर कहा वरनें कवि कोन ॥ देव विमानन फूलन वरखत
शोभित हे नंद भोन ॥१७॥ चतुर सखा श्रीदामा तब एक भेष सखी को
लायों || सखी यूथ में आय मिल्यों यह भेद न काड्डू पायो ॥१५॥ मिली
दौर चंद्रावलि तासों भट् भट् कहि टेरी ॥ आलिंगन दे ढिंग बैठारी मुदित
बदन तन हेरी ॥१६॥ जान गई यह भेख कपट को सकुच रही मनही में ॥
विहँस मिली प्यारी प्रीतम सों ज्यों दामिनि घनही में ॥१७॥ स्यामा श्याम
दोऊ सुख विलसत प्रेम बुद्धि अरुझने ॥ 'सूरवास' ब्रजवासिन के वश
ओर कछू नहिं जानें ॥१८॥ | Bihaag |
Maharitum vrajchaahat kachhuor .. | NityaPad-193 | महरितुम व्रजचाहत कछुओर ॥
बात एक मैंकहतनाहीं आपलगावत झोर ॥१॥
जहांबसे पतनहीआपनी तजनकहोसोठौर ॥ सुतकेभयेंबधाईपाई लोगनखेदत होर ॥२॥
कान्हपठायदेत घरलूटन कहँतकरयोयहगोर प्रजघरसमुझलेहोमरेंठी हाहाकरतकरजोर ।। ३॥। | Bilawal |
Anand badhaavano nand maharjooke dhaam | badbhagin jasumati | Part1-065 | आनंद बधावनो नंद महरजूके धाम | बड़भागिन जसुमति
जायौ है कमल नैन घनश्याम ॥१॥ बजत निशान मृदंग ढोल रव मंगल गावत
गावत बाम । देत दान कंचन मणि भूषण थेनु बसन ले ले नाम ॥२॥ देत
असीस सकल गोपीजन व्रज जन मन अभिराम ॥ हरिनारायन श्यामदासके प्रभु
भाई प्रगट हैं पूजन काम ॥३॥ | Nayaki |
Jwal hanse mukh herikain, atee baney kanhai .. | Part3-213 | ज्वाल हँसे मुख हेरिकैं, अति बने कन्हाई ॥
हलघर कौं लिय टेरि, आजु अति बने कन्हाई ॥ हो हो करि करि कहत
हैं, अति बने कन्हाई ॥ रहे चहूंधा घेरि, आजु अति बने कन्हाई ॥ ऐसेहिं
चलिये नंद पै, अति बने कन््हाई ॥ बल की सौंह दिवाई, आजु अति बने
कन्हाई ॥ भुजा गहे तहैं लै गए, अति बने कन्हाई ॥ वह छबि बरनि न
जाई, आजु अति बने कन्हाई || इत जुवती मन हरत है, अति बने कन््हाई ॥
उतहि चले हैं भोर आजु अति बने कन्हाई ॥ और सखी आईं तहाँ, अति
बने कन्हाई ॥ करि-करि नैंन चकोर, आजु अति बने कन्हाई ॥ महर हंसे
छबि देखि कैं, अति बने कन्हाई ॥ सुनि जननी तहँ आई, आजु अति बने
कन्हाई ॥ हँसि लीन्हौ उर लाइके, अति बने कनन््हाई ॥ आनंद उर न समाई,
आजु अति बने कन्हाई ॥ कछुक खीझि कछु हँसि कह्यो अति बने कन्हाई ॥
किन यह किन्हों हाल आजु अति बने कन्हाई ॥ लेति बलैया वारिकै अति
बने कन्हाई ॥ ये ऐसिय ब्रजबाल, आजु अति बने कन्हाई | रंग-रंग पहिराबनि
दई, अति बने कन्हाई ॥ जुवतिनि महर बुलाई, आज अति बने कन््हाई ॥
यह सुख प्रभु कौ देखिके, अति बने कन्हाई ॥| सूरदास, बलि जाई, आजु
अति बने कन््हाई ॥ | Todi |
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