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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Sakhiri lobhi merey nain . binn dekhe chatpati see laagat dekhat | NityaPad-173 | सखीरी लोभी मेरे नैन । बिन देखे चटपटी सी लागत देखत
उपजत चैन ॥१॥ मोरमुकुट काछे पीतांबर सुन्दर मुखके बैन | अंग-अंग छबि
कहि न परत है निरख््रि थंकित भयो मैन ।॥२॥ मुरली सुन ऐसी लागत है चितवे
खग मृग धैन | परमानंददासको ठाकुर बे देखो ठाडे जु ऐन ॥३॥ | Dhanashree |
Merey ladileho laal azhoon neendkaro palnaan naan sohayato godale suvaaun ..|shru. | NityaPad-130 | मेरे लाडिलेहो लाल अजहून नींदकरो पलनाँ न सोहायतो गोदले सुवाऊं ॥|श्रु।
आर छांडो गीत गाऊं हालरो हुलराउ ग्वालनके मुखकी कहानी सुनाउं ॥ १
कोनधों भवन आये काहूकी नजर लगी भोर ऋषिराज रक्षा बंधाउं ॥
मेरे व्रजईइश तुम एसी बुझो न रीस भोरहों कुंवर कान्ह झगुलीसिवाउं ॥२॥ | Bihaag |
Muraliya baajtahai bahu baan .. teen graam ikkis bhurchhana | Part1-281 | मुरलिया बाजतहै बहु बान ॥ तीन ग्राम इक्कीस भूर्छना
उगुनपचास कोटितान ॥१॥ सबै कला युत्यत्न सुघध अति या समसर को
आन ॥ अति सु ंदर गावत मन भावत रीझे श्याम सुजान ॥२॥ ऐसीसों नहीं
बैर कीजिये दूर करो रिस ज्ञान ॥ सूरश्यामके अधरन राजत सबही अंग
निधान ॥३॥ | Ramkali |
Suni ray badhaiya vegi daiho joe chaahe sou lehu | palana nandju | Part1-107 | सुनि रे बढईया वेगि दैहो जो चाहे सो लेहु | पलना नंदजू
के लालको सब छांडि मोहि गढि देहु ॥ रंगीला हो पलना ॥१॥ विश्वकर्मा
रच्यो बैठि नंदजूके द्वार ॥ घोष लोग मनभावतों मिलि मंगल गावें नार ॥
रंगीलो हो पलना |॥२॥ चून्यो किर्मची पाटसो चतुर चोकरी ल््याई | चितवत
ही चिंता हरे ताको सुर नर मुनि जस गाई ॥ रंगीलो हो पलना ॥३॥ चंदनको
पलना गढ्यो रे मनि अनूप मिलाई । तापर फूल जरायके ताकी सोभा बरनि न
जाई ॥ रंगीलों हो पलना ॥४॥ सेत बिछौना अति बन्यो हो मनु हु दुग्धको
फेनु । नील रत्नमनि सांवरो बीच बैठी लग्यो सुख देनु ॥ रंगीलो हो
पलना ॥५॥ पलना पै ललना रहे हो गोप वधु चहुं ओर | एकनिके कर
बिजना एक ढारत पवन झकोर ॥ रंगीलो हो पलना ॥६॥ लाल झुलाये
पालने हो पहिराये सब ग्वार । ब्राह्मम भाट सुहागिनि मिलि पूज्यों सब परिवार
रंगीलों हो पलना ॥७॥ पहिराये पूजा करी हो बीरा दीने हात । देत असीस
आनंदसों सुख निरखी जसोदा मात ॥ रंगीलो हो पलना ॥<८॥ हरि प्रगटे
पलना गठ्यौ हो बढ्यौ नंदजू को नाम । जिन जायो एसो सुखनिधि तामें उदयो
गोकुल गाम ॥ रंगीलो हो पलना ॥९॥ काम धाम सब छांडिके गई कुँवर
के पास । आनंद मगन फूली फिरे बलि जाय “गदाधर दास” रंगीलो हो
पलना ॥१०॥ | Aasawari |
Banyau raas mandal aho yuvatin youth madhya naayak naayen gaaven .. | Part1-327 | बन्यौ रास मंडल अहो युवतिं यूथ मध्य नायक नायैं गावें ॥
उघटत शब्द तत थेई ता थेई गतमें गत उपजावें ॥१॥ बनी श्रीराधाबल्लभ
जोरी उपमाकों दीजै कोरी लटकत हैं बाँह जोरी रीझरिश्ञावें ॥ सुर नर मुनि मोहे
जहाँ तहाँ थकित भये मीठी मीठी त्ञानन लालन वेणु बजावें ॥२॥ अंग अंग
चित्र कयें मोरचंदा माथें दियें काछनी काछें पीतांबर शोभा पावें ॥ चतुरबिहारी
प्यारी प्यारे ऊपर वार डारी तन मन धन यह सुख कहत न आवें ॥३॥ | Saarang |
Sakhee tere tanaki sundarta .. nakhshikh angang avalokat | Part1-199 | सखी तेरे तनकी सुंदरता ॥ नखशिख अंगअंग अवलोकत
चकृतभयो करता ॥१॥ अति अनुप कृस कटि अनुप उर अनुपम सुंदरता ॥
छबि अनुप उपजत छिन छिन अनुपम उज्वलता !!२॥ परमत करत बिचार
विविध चित नांहिन रह्मो समता ॥ कुंभनदास स्वामिनी तोहि बस गोवरधन
धरता ॥३॥ | Poorvi |
Naval kadamb chhaanh tarr thaade shobhit hain nandlal .. sees tiparo | NityaPad-170 | नवल कदंब छाँह तर ठाडे शोभित हैं नंदलाल ॥ सीस टिपारो
कटिलाल काछिनी पीतांबर वनमाल ॥१॥ नृत्यत गावत वेणुबजाबत सुरभी
समूहन जाल ॥ परमानंददास को ठाकुर लीलाललित गोपाल ॥२॥। | Saarang |
Barjo naan maane aaj ree nand mahar kau chhohara .. | Part3-218 | बरजो न माने आज री नंद महर कौ छोहरा ॥
प्रेम बढ़ावत अटपटे पेचन पढ़त फिरत है दोहरा ॥ वन-वन डोलत ज्वालन
बोलत रोकत फिरत गौ गोहरा ॥ “आस करन' प्रभु गिरधर मोहन राधा
कौ मोती मनोहरा ॥२॥ | Kafi |
Syaam tum neck nihaaro motan .. | NityaPad-057 | स्याम तुम नेक निहारो मोतन ॥
ऐसे निदुर तुम कबके भये हो को त्रियनसों सो लाग्यों मन ॥१॥
में जान्यो कोऊ नवल नारने तुम्हें गहाय दीनोहे रतिधन ।।
चतुर बिहारी गिरधारी वश करके मनभर भुजदे चुंबन ॥।२॥ | Malkos |
Daas ananya mero nijroop .. | NityaPad-362 | दास अनन्य मेरो निजरूप ॥
दरशनमात्र ताप त्रय नासत छुडावै गृहबंधन कूप ।। १॥|
मेरीबांधी भक्तछुडावें भक्तकी बांधी छुटे न मोही ॥।
कबहुंक लेके मोहि कुंबांधे तहां कहाकैसे उत्तरहोही ॥ २॥
मैं निर्मल सबजगतको जीवन मेरोजीवन मेरेदास॥
परमानंद ताहिके हृदये जांके हृदये प्रेमप्रकाश ॥। ३॥। | Bihaag |
Rattan jatit pichkai karaliyen bharat lalakon | Part3-049 | रतन जटित पिचकाई करलियें भरत लालकों
भावे ॥ चोवा चंदन अगर कुंकुमा विविध वूंदवरखावे ॥ १॥ कबहंक कटिपट
बांधि निसंक व्हे ले नवलासी धावे ॥ मानों शरद चंद्रमा प्रगट्यो ब्रजमंडल
तिमरन सावे ॥ २॥ उडत गुलाल परस्पर आंधी रह्यो गगन सवछाई।॥ चत्रभुज
प्रभु गिरिधरनलाल छबि मोपे वरनी नजाई ॥३॥ | Basant |
Sakhansahit hari jenwat hain chhaak .. premasahitamaiya depthai hitason bahuvidhakeene paak ...1.. subal | NityaPad-205 | सखनसहित हरि जेंवत हैं छाक ।। प्रेमसहितमैया देपठई हितसों बहुविधकीने पाक ।॥१॥ सुबल
सुदामा संग सखामिल भोजन रुचिकर खात ॥ ग्वालन करते छाक छुडावत
मुखमें मेल सरावत जात ।।२॥ जे सुख कान्ह करत बुंदावन सो सुख तीन
लोक विख्यात ॥ सूरस्याम भक्तन वश ऐते ब्रह्म कहावतहैं नंदतात ॥।३॥ | Saarang |
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