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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Bhagyan valallabh janm bhayo shubh veshakh | Part2-268 | भाग्यन वलल्लभ जन्म भयो शुभ वेशाख
कृष्णएकादशी बी विधु उदयो ॥१।॥
संतन मन मायामत्तको अति गहबर तिमिर गयो॥
रसस्वरूप ब्रजभूप सबनकों रूप प्रकाश दयो ॥२ ॥
सेवक नयन चकोर सदा सेवाघृत रसअचयो॥
वचन किरण कर पुष्टिभक्तिसस सब जगमांझ छयो ॥३ ॥
भावरूपको भावरूपही भजनपंथ जतयो ॥
सब सिरावो नयन आपने दुर्लभ पायलयो ॥४ ॥
रस शृं गार एक उदबोधक विरहताप नशयो॥
रसिकनके मन वसो दिवस निश प्रभु आनंदमयो ॥५ ॥। | Devgandhar |
Aaj bhattu dekhe useer mahal mein byaru karat gopal .. | NityaPad-302 | आज भट्ु देखे उसीर महल में ब्यारु करत गोपाल ॥
ताती दारभात घृत सान््यों जेंबत जोरी रसाल ।॥।१॥
मठरी जलेबी गुंजा बाबर घेबर लाइ ब्रज वधू थाल।॥।
कुंभनदास प्रभु गोवर्धनधर रसभरे गिरिधरलाल ॥।२॥ | Iman |
Karat vichaar chalyo sanmukh dnaj.. latpataat pug dharat dharanigaj ..1.. | Part2-090 | करत विचार चल्यो सन्मुख द्नज॥ लटपटात पग धरत धरणिगज ॥१॥
कोटि इंद्र जाके रोमन रज॥ ब्रज अवतार लियो माया तज ॥२ ॥
उतर गगन पोंहोंमी पर आये ॥ मनमन सोच करत डरलाये ॥३॥
चक्रत भये मन श्रवण भ्रमाये! येथों कोन कहांते आये ॥४॥
कहत सुनी लोगन मुखवात॥ एहीहे सुरपति सुर ज्ञात ॥५ ॥|
देख सेंन ब्रजलोग संकात ॥ ये आयो कीने कछ घात ॥६ ॥
सूरश्यामकों जाय सुनायो॥ सुरपति सेन साजि व्रज आयो ॥७ ॥ | Bilawal |
Shyam anga sakhee heim chandan kau neekau sohe bago ..| | NityaPad-319 | श्याम अंग सखी हेम चंदन कौ नीकौ सोहे बागो ॥|
चंदन इजार चंदन को पटुका बन्यौ शीश चंदन को पागौ ॥१॥
अति छबि देत चंदन उपरना बीच बन्यौ चंदन कौ तागौ ।।
सब अंग छींट बनी चंदन की निरखत सूर सुभागौं ॥ २॥ | Adano |
Bunny mohansir paag sankare pechan chokri .. kulhai surang kusum | NityaPad-167 | बनी मोहनसिर पाग सांकरे पेचन चोकरी ॥ कुल्है सुरंग कुसुम
भरी और सेहरो चंपकभरी छबि लाग।॥।१॥
सूथनलाल पीतवरुनी और अरगजा मौजें शोभित स्थाम सुभाग ॥
गोविंदप्रभुकों ब्रजवासिन प्रति छिन छिन नव अनुराग ॥२॥ | Bihaag |
Saanware anga sukhaki khaan.. jagamage tunn joti | Part2-365 | सांवरे अंग सुखकी खान॥ जगमगे तन जोति
दूनी रूपरसिक निधान॥१॥ भृूकुटी अलकें सोहनी मुख कमलपर
रहीफैल ।| मधुप मधुमकरंद पीवत रहे सुख झेल ॥२॥ भश्रोंह बांकी
धनुषकी छबि भालरेखा बान॥ निरख मोहे ं कामिनी हरें मानिनी को
मान ॥३ ॥ नयन लोल विशाल सुंदर अधिक रसराते ॥ प्रिया प्रेम विलोक
आनन नेह रसमाते ॥४॥ कुंडल कपोल विशाल सुंदर परतहे झांई॥
स्वच्छ सरोवर प्रवाह झलके सूरकीनाई ॥५ ॥ चिबुक चित्त चुरावही छबि
माधुरी मुसकान ॥ छके मुखरस देख तेसी अंगकी अलसान॥६ ॥ नरम
ग्रीवा लसत सुंदर पीतपट सोहे॥ मिटत मान जु मदनको यह रूपरस
कोहे ॥७ ॥ ध्यानधर जिय एही निशदिन सांवरे सुखसार॥ सूर शोभा
हृदय पूरण देत नंदकुमार ॥८ ॥ | Sorat |
Radha giridhar biharati kunjan aaeen hoe basant | Part3-019 | राधा गिरिधर बिहरति कुंजन आईं हो बसंत
पंचमी ॥ बन बन द्रम प्रति कोकिला कूजत मीठे वचन अमी ॥१॥ गावत
तान तरैंग अगनित गति मृदंग सौं राग जमी ॥ इहि समै हिलमिल “गोबिंद!
प्रभु सौं सब ही भाँति रमी ॥२॥ | Basant |
Srivallabhalal aangan madhya khelan.. pahale | Part2-326 | श्रीवल्लभलाल आंगन मध्य खेलन॥ पहले
प्रगट श्रीयशोदा नंदन गोपीनकों रस देनन ॥१ ॥
अबही प्रगट श्रीलक्षमण नंदन श्रीभागवत रस एनन ।। परमानंद प्रभुकी छबि निरखत सुख आवत
नही बेनन ।।२।। | Aasawari |
Pulin pavitra subhag jamuna-tata, sthamasyam birajat aaj. | NityaPad-317 | पुलिन पवित्र सुभग जमुना-तट, स्थामास्याम बिराजत आज।
फूले फूल सेत पीत राते, मधुप-जूथ आए मधु-काज ॥
तैसिय छिटकि रही उजियारी, झलमलात झाई उडु - राज ।
'छीत-स्वामी' गिरिधर कौ यह सुख निरखि हँसे विद्ल महाराज ॥ | Bihagaro |
Pyaare hoe kanhar joe tum aankhin bharoju .. | Part3-049 | प्यारे हो कान्हर जो तुम आंखिन भरोजू ॥
एसें बदि खेलों खेल अबकें वसंत मोसों सोहें जु करोजू ॥१॥ हों कहे
देत बात भूलि जिननाओ ओरके खिलायबे को हारजिनहरोजू॥ कल्यानके
प्रभु गिरिधर निधरक काहू धायजिन धरोजू ॥२॥ | Basant |
Jahinjahin nayana lagat tahintahin tasokhgat angang madhuri | NityaPad-145 | जहिंजहिं नयना लगत तहिंतहिं तासोखगत अंगअंग माधुरी
वरनिनजाई ॥ सुंदर भाल कपोल मोहन मधुरे बोल नासिका देखत मन रह्ोहै
लुभाई ॥१॥ हसत लालन मुख दशन लुनाई यह छबि कहा कहूं देख धोरीहों
आईं॥ गोविंदप्रभुकी सुंदर बानिक पर बलबलबल जाई ॥२॥। | Bibhaas |
Jamunaake teer kaanh chung udaay chhabison ramaiya.. | Part2-239 | जमुनाके तीर कान्ह चंग उडाय छबीसों रमैया॥
हों जमुना जल भरन गईरी ओचक दृष्टि पर गई दैया ॥१ ॥
ओंचन तनक मन उरझोरी व्याकुल भई कोउ धीर न धरैया॥
ब्रजाधीश घट पकरत भुली लाज कान कुल अब न रहैया ॥२ ॥ | Hameer |
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