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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Srivallabh avtaar bhayo bhuv.. shribhagavat goodh
Part2-283
श्रीवल्लभ अवतार भयो भुव॥ श्रीभागवत गूढ सर्वरस प्रकट कियो भुव श्रीलक्ष्मण सुव॥१॥ बाजेबजत विविध मंगलके ध्वनि तिनकी तिहुलोक रही छुव ॥ पुष्टिभक्ति मारग अब निजकर प्रगट्यो यह सुन संत मुदित भुव॥२॥ सहज भावते किये कृतारथ जे आये सब छांड शरण तुब॥ निजजन लीला जलनिधि यह अब आये अनुपम शशि हुव ॥३ ॥ श्रीवल्लभ प्रभुकी निरख यह रीति देत अशीश _ वृद्ध बारे युव॥ हरि जीवन प्रभु श्रीवल्लभकी रहो राजधानी अविचल ध्रुव ॥४ ॥
Bilawal
Gopke bhekh gopal gaayan hetaa drigan sukh deit |
NityaPad-064
गोपके भेख गोपाल गायन हेटा दृगन सुख देत | शिर सुभग फेंटा सखि परच रहो भ्रों पर पेच पचभास ढर लागत सोहावनो। दाहेंनो ऐंठा सख्ि॥१॥ लेत आकसि चितवन चारू चलन गती गोपीजन मन बसन आनन अमेंठा सखी। धाय सन्मुख जाय दास परमानंद चाह क्षित करत यो करिये भेंटा सरिब्रि॥२॥
Bilawal
Aage krishna paachhe krishna ita krishna oota krishna jita dekho tita tita
NityaPad-173
आगे कृष्ण पाछे कृष्ण इत कृष्ण ऊत कृष्ण जित देखो तित तित कृष्णमई री। मोर मुकुट धरें कुंडल करन भरें मुरली मधुर ध्वनि तान नई री ।।१॥ काछिनी कांछे लाल उपरेना पीट पट तिहिंकाल शोभा देख थकित भई री । छीतस्वामी गिरिधर बिट्डलेश प्रभुवर निरखत छबि अंग अंग छई री ।२॥
Poorvi
Yuvati aavat dekhe shyam ..
NityaPad-268
युवती आवत देखे श्याम ॥ द्रमकी ओट रहे हरिआपन यपम्ुनातट गई बाम ॥१॥ जलहिलोरे गागरभर नागर जबहीं सीसउठायो ॥ घरकोचली जाय तापाछें सिरते घट ढरकायो ॥२॥ चतुरग्वार करगह्यो स्थाभमको कन कलकुटिया पाई।।
Bilawal
Aaj aalee acharaj suna merein preetam aae manaavan ..
NityaPad-125
आज आली अचरज सुन मेरें प्रीतम आए मनावन ॥ तूं जोनहिन दुहुनसमझावत रूसगए मनभावन ॥१॥ जांकी चरणरज ब्रह्मादिक सुरमुनि पशुपंछीगन पावन ।। तबतें नबिसरत मोहि सखीरी रसिकराय मुखलावन ।।२॥
Bihagaro
Prakati suraj sutaa adham udharanakon koo kahey
Part2-252
प्रकटी सूरज सुता अधम उधारनकों को कहे महिमा जाकी॥ छठी उजियारी चैत्रमासकी उपजी बेलि सुधाकी ॥१॥ पटरानी प्यारी श्रीयमुना श्रीत्रजराजललाकी रास बिलास महा सुखदेनी अद्भुत केल कलाकी॥ इच्छाराम गिरिधरकी जीवन शोभा श्रीमधुराकी ॥२ ॥
Bilawaal
Horry key dinan mein tuu joe naveli mati nikse
Part3-076
होरी के दिनन में तू जो नवेली मति निकसे बाहिर घर तेरी ॥ तू जो नई दुलही नवजोबन रहे घर बेठि मान सिख मेरी ॥ १॥| डगर बगर और बाट घाट कान्हकर तनित चरचा तेरी ॥ जादिन तो हिलखे घनआनंद तादिन होय कौन गति तेरी ॥२॥
Bhairav
Tum chalo sabey milli jaany khelan horiyaan ..
Part3-194
तुम चलो सबे मिलि जांय खेलन होरियां ॥ अपनी अपनी सुरंग चूनरी मोतिन मांग भरोरियां ॥|१॥ थरहरात अधरन पर मोती अंगिया केसर बोरियां ॥ चोबाचंदन अगर कुंकुमा भरि भरि देत कमोरियां ॥२॥ अंग सों अंग गुलाल बिराजत भली बनी यह जोरियां ॥ केहरि लंक नितंब विराजत गज गति चाल चलोरियां ॥३॥ पिचकाई मोहन पर डारत बिहसी घूंघट खोलियां ॥ वाजत ताल मृदंग ओर डफ पढि पढि बोलत बोलियां ॥७॥ नयन आंज मुख मांडिं श्याम को सबमिलि करत कलोरियां ॥ सुरदास प्रभु सब सुख क्रीडत बिहरत ब्रज की खोरियां ॥५॥
Kaafi
Bal bal jaaun madhur sur gaavo .. abki vair merey kunwar
Part1-168
बल बल जाउं मधुर सुर गावो ॥ अबकी वेर मेरे कुंवर कन्हैया नंद ही नाच दिखावो ॥१॥ हेरी दे बावा के आगे परम प्रीत उपजावो॥ रतन जटित किंकिणि पग नूपुर अपुने रंग बजायो ॥२॥ कनक खंभ प्रतिबिंब आपनो ले नवनीत खवायो ॥ परम दयाल सूर के उरतें हरि चरे नहि भावो॥३॥
Kanharo
Aaj madan mahotsav radha ..
Part3-012
आज मदन महोत्सव राधा ॥ मदन गोपाल बसंत खेलतहें नागर रूप अगाधा ॥ १॥ निधिबुधवार पंचमी मंगल ऋतुकुसमाकर आई ॥ जगतबिमोहन मकरध्वजकी जहांतहां फिरीदुहाई ॥२॥ मनमथ राजसिंघासन बैठे तिलकपिता महदीनों ॥ छत्रचैंवर तूणीर संखधुनि बिकट चाप करलीनों ॥३॥ चलोसखी तहां देखनजैये हरि उपजावत प्रीति ॥ परमानंददास को ठाकुर जानतहें सबरीति ॥४॥
Basant
Taahikon sir naaiye joe srivallabhasutta padaraj rati hohi.
NityaPad-348
ताहीकों सिर नाइये जो श्रीवललभसुत्त पदरज रति होहि। कीजे कहा आन ऊंचेपद तिनसो कहासगाई मोहि ॥। १॥ जाके मनमें उग्रभरमहै श्रीविद्डल श्री गिरिधरदोय ।। ताको संग विषम विषहूतें भूले चतुर करो मति कोय ॥२॥ सारासार विचार मतोकर श्रुतिविचच गोधन लियो है निचोय ॥ तहां नवनीत प्रकटपुरुषोत्तम सहजहि गोरस लियोहै विलोय ॥॥३॥ उग्रप्रताप देख अपने चक्षु अश्मसार जैसे भिदे न तोय ॥ कृष्णदास सुरते असुरभये असुरते सुरभये चरणन छोय ॥४॥
Kanharo
Aaj pith nainbaan saja maaree |
NityaPad-065
आज पिथ नैनबान सज मारी | दृष्टि परी तबतें नंदनंदन सुरत सुध न रही हमारी । भूषन बिचित्र बन्ये सब अंग अंग लाल दुमालो सीस अतिभारी | कृष्णदास प्रभु पिय बहुनावक सकल त्रियन सुखकारी ॥२॥
Malkos
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