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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Suvaran kalash dhwaja paurinpai aachhi bhaanti sanbhaare | harad dahee | Part1-136 | सुवरन कलश ध्वजा पौरिनपै आछी भाँति सँभारे | हरद दही
रोरीतें छिरके सब गोपिनके द्वारे ॥१॥ भीर रहत नरनारिन की गृह गावत गीत
बधाये । काहू नहीं सुहात कछू अब ललन भामते पाये ॥२॥ आनंदमें बीतत
सगरी दिन इन ढोटाके जाये । श्रीवि्रलनगिरिधरन प्रगटिके बोहोत बड़ाई
गाये ॥३॥ | Saarang |
Pragate srivaman avtaar .. nirakh aditi mukh karat prashansa | Part1-216 | प्रगटे श्रीवामन अवतार ॥ निरख अदिति मुख करत प्रशंसा
जगजीवन आधार ॥१॥ तन घनश्याम पीतपट राजत शोभित हैं भुज चार ॥
कुंडल मुकुट कंठ कौस्तुभभणि उर भृगुरेखा सार ॥३॥ देखि बदन आनंदित
सुस्मुनि जयजय करें निगम उच्चार ॥ गोविंदप्रभु बलि वामन छैके ठाड़ै बलि के
द्वार ॥३॥ | Saarang |
Sundarmukhaki houn balbal jaauun .. | NityaPad-224 | सुंदरमुखकी हों बलबल जाऊं ॥
लावण्यनिधि गुणनिधि शोभानिधि देखदेख जीवत सब गाऊं ॥१॥
अंगअंगप्रति अमितमाधुरी प्रकट रु चिर ठांई ठाऊं।॥
तामे मूदु मुसकाय हरत मन न््यायकहत कवि मोहन नाऊं।। २॥
सखा अंसपर वाम बाहुदिये या छबिपैं बिनमोल बिकाऊं ॥
परमानंद नंदनंदनकोंनिरख निरख उर नयन सिराऊं ॥३॥ | Saarang |
Aage gaay paachhe gaay ita gaay uta gaay | NityaPad-279 | आगे गाय पाछे गाय इत गाय उत गाय
गोविंद को गायन में बसबोई भावे ॥
गायन के संग धावे गायनसों सचु पावे
गायन की खुर रेणु अंग लपटावें ॥१॥
गायनसों ब्रज छायो वैकुंठ विसरायो
गायन के हेत कर गिरिले उठाबे ॥
छीतस्वामी गिरिधारी विट्ठलेश बपुधारी
ग्वारिया को भेखधरें गायन में आबे ॥२॥ | Poorvi |
Aaj amavas deepmalika badee parvani haye gopal.. | Part2-053 | आज अमावस दीपमालिका बड़ी पर्वणी हे गोपाल॥
घर-घर गोपी मंगलगावें सुरभी वृषभ सिंगारो लाल॥१९ ॥
कहत यशोदा सुनो मनमोहन अपने तातकी आज्ञालेहु ॥
बारो दीपक बहुत लाडिले कर उजियारों अपने गेह ॥२ ॥
हँस व्रजनाथ कहत मातासों धौरी धेनु सिंगारों जाय॥
परमानंददासको ठाकुर जाय भावतहें “निशदिन गाय ॥३ ॥ | Kanharo |
Mohan mohani ghaali sirpar joee mohi rahat sadai ..... | NityaPad-102 | मोहन मोहनी घाली सिरपर जोई मोहि रहत सदाई ।॥॥
निशदिन सखीरी जोलों नहीं देखियत पिय व्रजराजकुंबर ॥१॥|
यद्यपि धीरज धर रहत सखीरी तदपि मुरली ध्वनि सुनत प्राणहर ।
अबन रह ो परें मिलूं गोविंदप्रभुसों रसिककुंवर बलबल स्थामसुंदर ॥।२॥ | Nat |
Laalan nenk gaaiye praan | NityaPad-311 | लालन नेंक गाइये प्राण
पियारे | आनन कमल अधर सुंदर धर मोहन वेणु बजाइये ॥१॥ परम दुःसह
विरहानल व्यापत तन सब जरत छुराइये ॥ अमृत हास मुसकान बलैया लेहो
नयननकी तपत बुझाइये ॥२॥ उभय कर कमल हृदयसों परसके विरहनि
मरत जिवाइये ॥ छोीतस्वामी गिरिधर तुमसे पति पूरन भाग्यतें पाइये ॥३॥ | Iman |
Vilasat rangmahal rung laal .. rangras kii karat vatiyaan sanga | NityaPad-127 | विलसत रंगमहल रंग लाल ॥ रंगरस की करत वतियां संग
पोढी बाल ॥१॥ खचीत परदा परे चहुँ दिस मुंदे झरोखा जाल ॥| जगमगात
पावक अंगीठीं गान तान रसाल ॥। २॥ नवल नारी नीहारी प्रीतम व्हे रही उरमाल ॥।
नंददास प्रभु युगल छबी उपर डारो सर्वस वार ॥ ३।। | Nayaki |
Haridasanate garv naan karvo .. | NityaPad-365 | हरिदासनते गर्व न करवो ॥
यह अपराध परमपद हूंते उतर नरकमें परवो ॥१॥
हूं धनवंत कुलबंत यह भिक्षुक यह कबहूं मनमें नहीं धरवो ॥।
गजसिंहासन अश्वपालकी ताते भवसागर नहीं तरवो ॥२॥
खानपान एँडाय चलत है ऐसे कारज बहु न अनुसरवो ॥
सूरदास यह सत्य कहतहूं भक्तन संग उबरवो ॥३॥ | Bihaag |
Abahi yashoda mankhan laaee .. mein mathake abahiju nikasyon | NityaPad-028 | अबही यश्ोदा मांखन लाई ॥ में मथके अबहीजु निकास्यों
तुम कारण मेरे कुंवर कन्हाई ॥॥९॥॥ माग लेहु ऐसे ही मोपें मेरेही आगें खाहु ।।
और कहूजिन खेहो मोहन दीठ लगेगी काहू।। २॥ तनक तनकही खाउ लाल मेरे
जो बढि आजे देह ॥ सूरस्याम कछू होउ बडेसे वैरिनको मुख खेह ॥। ३॥। | Bibhaas |
Gwalin ajahuun banamen gaay ..| | NityaPad-282 | ग्वालिन अजहूं बनमें गाय ॥|
होन न देत वारदोहन की चलत सवारे ही धाय ॥१॥
ले दोहनी खिरक मिषदोहन उत्तर कहत बनाय ॥
नंदद्वारपे फिर फिर उच्ककत बात न समझीजाय ॥॥२॥
समुझतहं तुम ला ल मिलनको करतहो जो उपाय ॥
चतुर्भुजप्रभु गिरिधरनागर मनमाणिक लियोहै चुराय ॥३॥ | Gori |
Aaj baney sakhee nandkumar .. | NityaPad-313 | आज बने सखी नंदकुमार ॥
वामभाग वृषभान नंदिनी ललितादिक गाजे सिंहद्वार ।।१॥
कंचनथार लियेजु कमलकर मुक्ताफल फूलनके हार ॥
रोरीको सिर तिलक विराजत करत आरती हरख अपार ॥२॥
यह जोरी अविचल श्रीवृंदावन देत असीस सकल ब्रजनार ॥
कुंजमहल में राजत दोऊ परमानंददास बलहार ।। ३॥ | Iman |
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