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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Govardhangiripar thaade lasat.. chahundish dhenudharani dhawat taba navmurli mukhalsat... 1.. mormukut banmalmargaji kachhuk phoolsir khasat |.
NityaPad-071
गोवर्धनगिरिपर ठाडे लसत॥ चहूंदिश धेनुधरणी धावत तब नवमुरली मुखलसत॥। १॥ मोरमुकुट बनमालमरगजी कछुक फूलसिर खसत |। नवउपहार लिये वल्‍लभत्रिय निरख दृगंचल हसत ॥। २।। छीतस्वामी वशकियो चाहतहें संग सखागुण ग्रसत॥ झूठे मिष कर इतउत चाहत श्रीविट्ठल मन बसत ॥ ३॥।
Aasawari
Subal sridama kahyo sakhanso arjun shankh bajaiye ..
NityaPad-276
सुबल श्रीदामा कह्यो सखनसो अर्जुन शंख बजैये ॥ घर जैवेकी भई है बिरियां श्रीगिरिधरलाल जगैये ॥१॥ ठौर ठौरते मधुरी धुनिबाजे मधुरमधुर स्वरगैये ॥| कुंजसदन जागे नंद नंदन मुदित बीरा फल लैये ॥॥२॥ हरिदासवर्यके पूरे मनोरथ गोकुल तापन शैये ॥| लटकत आवत कमल फिराबत परमानंद बढेये ॥३॥
Nat
Virajat vanmalaju garein bahut bhaant kusuman soun
Part2-358
विराजत वनमालाजू गरें बहुत भांत कुसुमन सों गूँथी गुंजत भ्रमर आरें॥९ ॥ इंद्रधनुष की उपमा राजत ठाड़े कुंजतरे॥ रामदास प्रभु नटवर काछें मुरली अधर धरें ॥२॥
Sorat
Atihin nithuratriyamaanavati kyonhuun que‍yonhuun manai ..
NityaPad-124
अतिहीं निठुरत्रियमानवती क्योंहूँ क्‍्योंहूँ मनाई ।। आपने जानमें बहुतभांत करनीकी युक्ति बनाई ॥१॥ जे तुमकही कपटकी बातें अनेकयत्न करके दिखराई।। रसिकप्रीतम आप चलियें मिलवें रसवशकीजें मोहिदीजें रीझ बधाई ।।२॥
Bihagaro
Charankamal bandon jagdish jey godhanke sanga dhaaye .. jey
Part1-083
चरनकमल बंदों जगदीश जे गोधनके सँग धाये ॥ जे पदकमल धूर लपटाने कर गहि गोपिन के उर आये ॥१॥ जे पदकमल युधिष्टिर पूजत राजसूयमें चलि आये || जे पदकमल पितामह भीषम भारत देखन ते आये ॥२॥ जे पदकमल शंभु चतुरानन हृदय कमलके अंतर राखे ॥ जे पदकमल रमा उर भूषन वेद भागवत जे भाखे ॥३॥ जे पदकमल लोकत्रय पावन बलि राजाकी पीठ धरे ॥ ते पदकमल दास परमानंद गावत प्रेम पियूष भरे ॥४॥
Kanharo
Kunjan maanjh birajat mohan, radhika sunder shyam kii jory ..
NityaPad-231
कुंजन मांझ बिराजत मोहन, राधिका सुन्दर श्याम की जोरी ॥ तेसे ये सुंदर श्याम अनुपम तेसीहे सुंदरराधेजु गोरी ॥१॥ गोपी ग्वाल सखा संग लीने मधुर मुरली स्वर बाजत थोरी ॥ सूरदास प्रभु मदनमोहन पिय चिरजीयो नवल किशोर नवल किशोरी ॥२॥
Saarang
Vrajnari suta palana jhulaavai | aachho mukh chumbat lalankau
Part1-095
व्रजनारी सुत पलना झुलावै | आछो मुख चुंबत लालनकौ अति रस मंगल गावै ॥१॥ निरखि निरखि सुंदर आनन तन फिरि फिरि लै 'उर लावै । श्रीविद्वलगिरिधर नंद नंदन ब्रजजन के मन भाव ॥२॥
Ramkali
Saanche boll tihaare saanjhake .. rajani anat jaage nandanandan
NityaPad-148
सांचे बोल तिहारे सांझके ॥ रजनी अनत जागे नंदनंदन आये निपट सवारे ॥१॥ आतुरभये नीलपट ओढे पीरे वसन विसारे ॥। कुमनदासप्रभु गिरिधरन भलेजुभले वचन प्रतिपारे ॥ २॥।
Bilawal
Dekh sakhee hariko mukh chaaru .. maanon chhudaay leo
Part2-367
देख सखी हरिको मुख चारु ॥ मानों छुडाय लियो नंदनंदन वा शशिकों सतसार॥ रूप तिलक कच कुटिल किरण छबि कुंडल कला विस्तार॥ पत्रावली पर वेशसुमन शशि मिल्यो मानों उद्दुदार ॥२ ॥ नयन चकोर विहंग सूर सुन पिय तन पावत पार॥ अब अंबरसो लगत है ऐसे जैसे जूठोथार ॥३ ॥
Sorat
Dekh vrajasundagi mohan banakeli .. uns uns baahu diyein kishore
Part1-324
देख ब्रजसुंदगी मोहन बनकेलि ॥ अंस अंस बाहु दियें किशोर जोर रूप राशि तर तमाल अरुझ रही सरस कनक बेलि ॥१॥ नव निकुंज भ्रमर गुंज मंजु घोष प्रेम पुंज गान करत मोर॑ पिकन स्व॒रसों स्वर्मेलि )| मदनमूर॒ति अंगअंग बीच बीच स्वर तरंग पल पल हरिवंश पीवत नयन चक्रित झेलि ॥२॥
Todi
Gopiho nandrai ghar mangan faguwa aaeen ....8.. daras paras piya atisaya sundari sub laptai .. kuchbhuj weach kichamchi
Part3-111
गोपीहो नंदराय घर मांगन फगुवा आईं ॥॥८॥ दरस परस पिय अतिसय सुंदरि सब लपटाई ॥ कुचभुज वीच किचमची अतिश्रम की झपटाई ॥९॥ मंडित करहिं कपोल एक ले काजर आई ॥ आलिंगन चुंबन रस नहीं सुरझत सुरझाई ॥ १०॥ अंचल सों पटजोरें रीक्ि सकुच सिरनाई ॥ दंपति सौभग संपति कोऊ पीवत न अघाई ॥१ १॥ यह लीला अति ललित सोतो नंदरानी भाई ॥ हरषित उदित मुदित सबहिन की करत बडाई ॥१२॥ पटदुकूल आभूषन चोली दिव्य माई ॥ जसुमति अति प्रफुलित मन सुंदरि सब पहराई ॥६ ३॥| यह मेरे आंगन ग्रह आवोरी नितमाई ॥ नेन श्रवन सुखभयो लालजूकी कीरति गाई ॥१४॥ निकसी देत असीस जियो तेरो मोहनराई ॥ यड्ट ब्रज माधोदास रहो नितनंद दुहाई ॥१५॥ प्रमुदित करहिं कुलाहेल गावत गारि सुहाई ॥ १॥ अबला एक अगमनी आगे दईहे पठाई ॥ जसुमति अति आदरसों भीतर भवन बुलाई ॥२॥ तिनमें मुख्य राधिका लागत परम सुहाई ॥ खेलो हंसो निसंक संकमानों जिनकाई ॥३॥ बहुमोली मनिमाला सबन देहूं पहराई ॥ मनिमाला ले कहाकरें मोहन देह दिखाई ॥४॥ बिनु देखेंसुंदर मुख नाहिन परतहाई ॥ मात पिता पति सुतग्रह लागतरी बिषमाई ।॥।५॥ सुनिके प्रेम बचन दामोदर दई दिखाई ॥ घरमेतें घ्रनश्याम भुजा भरि भामिनि लाई ॥६॥ नवसिख सुंदरसींबा रूपलावन्य अधिकाई | रही ब्रजबधू निहारि रंकमानो निधिपाई |॥9॥| अरगजा चंदन वंदन चहुंदिसतें लेधाई ॥ भरति भांवते लाले करन कनिक पिचकाई
Bilawal
Kunwar kaanh chhaando hoe aisee batiyaan kitab karat bariaai..
Part1-255
कुँवर कान्ह छाँड़ो हो ऐसी बतियाँ कितब करत बरिआई॥ ज्यों ज्यों बरजत त्यों त्यों होत आगरे डगरमें रोकत नारि पराई ॥१॥ दूध दहीकौ दान कान कबहूँ न सुन्यो तुमही यह नई चाल चलाई ॥ गोविंदप्रभुसों कहत प्यारीकी सखी अब ये बातें तुम्हेंई फबिआई ॥२॥
Kalyan
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