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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Aho bal jiya adhik daraat ||
NityaPad-298
अहो बल जिय अधिक डरात || गोधन किन ले आवो अबे कित पारतहो रात ॥ १॥। एकहि थारमें जेंबत दोऊ यशुमति करत वियार ॥ सुंदरस्याम देत हुंकारी जननी प्रीत विचार।।२॥| बालक कान्ह निपट भोरेहें सिखवत रही हो बात ॥। तुम अग्रज वसुदेवके नंदन जानतहो सव घात ॥३॥
Iman
Aabhushan angang teuu anuchar sanga roop bhoop leeyen raajat shobha
Part1-318
आभूषन अंगअंग तेऊ अनुचर संग रूप भूप लीयें राजत शोभा पाय ॥ नवयौवन छत्र धरें सौभगता चमर ढरें गर्व सिंहासन बैठी आय ॥१॥ मानों नयना तुरंग कवच कंचुकी कस अंग कीयौ मुकाम अनंग मैत्री मिलाबन सुहाय ॥ अंचल ढाल ढरकत गज उर पर सूरदास मदनमोहन परे हैं राधा बस रीझ दान दीजै घूदु मुसक्याय ॥२॥
Saarang
Kheli fagu anuragu mudit jubati jan deti assis ..
Part3-365
खेलि फागु अनुरागु मुदित जुबती जन देति असीस ॥ रसिकन की रस रासि श्रीबल्लभ जीयौ कौटि बरीष ॥ १॥ फिरि आईं खेलन कै कारन अबला जुरि दस बीस ॥ “हरिदास' कै स्वामी श्यामा खरेलौ वसंत जय जय गोकुल के इस ॥२५॥
Basant
Rung bheeni jory horry khelein hoe .. kabdank douu
Part3-208
रंग भीनी जोरी होरी खेलें हो ॥ कबडंंक दोऊ लटपटाय तन अंस भुजावर मेलेंहो ॥१॥ अरस परस छिरकत छिरकावत कर कर नयनन कोरें॥ ले गुलाल मुख लावत प्यारी प्रीतम को चितचोरें ॥२॥ कुंकुम ले मोहन प्यारी पर डारत हैं वड़भाग ॥ अरून कमल पर वरखत मानों नील सरोज पराग ॥३॥ निरख निरख ललितादिक बिबछबि तृनतोरत बलिजाय ॥ श्रीवल्लभ हित यह सुख निरखत उर आनंदन समाय ॥४॥॥
Kaafi
Charansharan vrajrajkunwarke ...
NityaPad-357
चरणशरण ब्रजराजकुंवरके ॥। हम विधि अविधि कछू नहिं समझत रहत भरोसे श्रीमुरलीधरके ॥। १॥॥ रहत आसरें ब्रजमंडलमें भुजाछांह श्रीगिरिवरधरके ॥ प्रभुमुकुंद माधो सुखदाई हाथबिकांने श्रीराधावरके ॥२॥
Gori
Nenk mohondo mandande hohorike khilaiya .. joe
Part3-152
नेंक मोहोंडो मांडनदे होहोरीके खिलैया ॥ जो तुम चतुर खिलार कहावत अंगुरिन को रसलेहो ।|१॥ उमडे घुमडे फिरत राबरे सकुचत काहेहो ॥ सूरदास प्रभु होरी खेलो फगुवा हमारो देहो ॥२॥
Dhanashri
Nagri nutt narayan gaayau .. taana maan bandhan sapt swarrag
Part1-330
नागरी नट नारायण गायौ ॥ तान मान बंधान सप्त स्वरराग सों राग मिलायौ ॥१॥ चरण घुंघरू जंत्र भुनन पर नीकौ झमक जमायौ ॥ तत थेई तत थेई लेत गति में गति पति ब्रजराज रिञ्ञायी ॥३॥ सकल त्रियन में सहज चातुरी अंग सुधंग दिखायौ ॥ व्यास स्वामिनी धन्य धन्य राधा रास में रैंग मचायौ ॥३॥
Saarang
Atee suvas seetal mehel usirsar chhirkat barbar atee
NityaPad-251
अति सुवास सीतल मेहेल उसीरसार छिरकत बारबार अति सुकुमारि ॥ भर गुलाब जल फुआरे छूटत दरदरीन चंदन छिरक छेल पहर एवेत सारी ॥१॥ वबारवार त्रन तोरे गोकुलचंदपर स्यथाम सलोने संग चितव॒त चोरे ॥ छीतस्वामी गिरिवरधर विट्वलेश पद प्रताप निरखत नेंन रस बस सब सिरमोरे॥। २॥
Saarang
Srivallabh kripakije mohi...
NityaPad-349
श्रीवल्लभ कृपाकीजे मोहि॥। ज्ञानभक्ति विवेक बलको आसरो नहिं कोड ॥१॥ यहवलहौं चितविचारुं छिनक दृगभर जोड़ ॥ देहो दर्शन कर निजदासनके दुखखोई ॥२॥
Bihaag
Fazuwa key missi chhalbal lalco rannan
Part3-085
फजुवा के मिसि छलबल लालको रंणन रणमगोकीजे || यह औसर होरी को गोरी सुखलेसुख किनदिजे ॥|१॥ करत सेंत को संकोच सकुचजिय इनसकुचन कहीधोंकहाकीजे ॥| धरकोछांडि धायगिरीधर पियको निधरक व्है रसपीजे ॥२॥
Sughrai
Farkat vaam nena pyaari key. aavan haar bhaye
Part2-352
फरकत वाम नेना प्यारी के। आवन हार भए मनमोहन हर्षभये सब नरनारी के ॥१॥ कसमसात अंगिया बन्ध दूटत फरहरात अज्जल सारी के ॥ लगि लगि श्रवण भ्रमर गुझ्जारत सगुन होत गिरधारी के ॥२ ॥ उडो काग आबे मनमोहन भाखत युवति वार बारी के ॥ देहो भात दूध सि पागरी जुर अद्जल अपने फारी के ॥३ ॥ होत मगन मन प्रीत शकुन शुभ भयो प्रेम मद अधिकारी के ॥ रामदास दरस मिलवे तेई चातक गति घन कारी के ॥४ ॥
Sughrayi
Srigovarthanrai laalaa .. pyaare laal tihaare
Part3-319
श्रीगोवर्थनराय लाला ॥ प्यारे लाल तिहारे चंचल नयन विशाला ॥ तिहारे उरसोहे वनमाला | यातें मोहि रही ब्रजबाला ॥ध्रु०)। खेलत खेलत तहां गये जहां पनिहारिन की वाट ॥ गागर ढोरें सीसते कोऊ भरनन पाबे घाट ॥ १॥ नंदराय के लाडिले एसो खेल निवार ॥ मनमें आनंद भररह्यौ मुखजोवत सकल ब्रजनार ॥ २॥ अरगजा कुंकुम घोरके प्यारी लीनों कर लपटाय ॥ अचकां अचकां आयकें भाजी गिरिधर माल लगाय ॥३॥ यह विध होरी खेलही दक्रज वासिन संग लगाय ॥ गोवर्धन धर रूप पर जन गोबिंद बलबल जाय ॥४॥
Kalyan
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