top of page

Sheetkal Ke Pad

To get full expanded Kritan text click on any column of the kirtan row in below table.

Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Atihin nithur tiya manavati kyonhuun kyonhu manai ..| aapane jaanmein bahut bhaanti
NityaPad-327
अतिहीं निठुर तिय मानवती क्योंहूँ क्योंहू मनाई ॥| आपने जानमें बहुत भांति कर नीकी युक्ति बनाई ॥१॥ जे तुमकही कपटकी बातें अनेक यत्न करके दिखराई ।। रसिकप्रीतम आप चलियें मिलवें रसवशकीजें मोहिदीजें रीझ वधाई ॥२॥
Bihagaro
Nripati bachan yeh sabani sunaayau. muh chahee senapati keenau
Part1-169
नृपति बचन यह सबनि सुनायौ। मुह चही सेनापति कीनौ शकटासुर सुनि गर्व बढ़ायौ |१॥ दोऊ करजोरी भयौ तब ठाड़ौ प्रभु आइसु में पॉऊँ । हाँते जाय तुर्तही मारों कहौ कहौ तौ जीवत लॉऊँ ॥२॥ यह सुन कि हरख मन कीनौ तुरतही बीरा दीनौ । बारंबार सूर कहै ताकों आप प्रशंसा ॥३॥
Bilawal
Raas rachyau bunn kunwar kishori .. mandal bimal subhag boondaavan
Part1-349
रास रच्यौ बन कुँवर किशोरी ॥ मंडल बिमल सुभग बूंदावन यमुनापुलिन श्यामघन गोरी ॥१॥ बाजत वेणु रबाब किन्नरी कंकण नूपुर किंकिणी सोरी ॥ ततथेई ततथेई शब्द उघटत पीय भले बिहारी विहारिन जोरी ॥२॥ बरहा मुकुट भ्रकुटी तट आबत धरें भुजन में भामिन भोरी ॥ आलिंगन चुंबन परिरंभण परमानंद डारत तृणतोरी ॥३॥
Kedaro
Huttery baithe srigopal ..
Part2-060
हटरी बैठे श्रीगोपाल ॥ रत जटितकी हटरी बनाई हीरामोती परम रसाल॥१॥ डलाडलैया और कुल्हैया भरभर धरे पकवान रसाल ॥ पान फूल सोंथे सहित सब वांटत देदे नंदके लाल॥२॥ रामावलि प्रेमावलि ललिता चंद्रावलि ब्रजमंगल बाल॥ चलो सखी तहां पेंठ लगीहे बेचतहें जहां गोकुलपाल ॥३ ॥ सब सुंदरि आईं गृहगृहते निरखत नयन विशाल गोविंद प्रभु पिय चितचोरयों हे बंधी प्रेमकी पाल ॥४ ॥
Kanharo
Shree vallabh karuna karke mohe keeje niz daasan koo daas ..
Part3-041
श्री वललभ करुणा करके मोह़े कीजे निज दासन को दास ॥ पूरण काम है नाम तिहारो इतनी मो मन पूर हो आस ॥ १॥ तिहारी कृपा कटाक्ष तें दुर्लभ पाइये सुलभ करो ब्रजवास ॥ तिहारे सेवक जन संगत बिनु निसदिन मो मन रहत उदास ॥ २॥ श्री वृन्दावन गिरि गोवर्द्धन श्री यमुना तट करूँ निवास ॥ श्री हरि बदन चंद सु विमल यशगान करत सुर सदा अकास ॥३॥ कृपा निधान कृपा कर दीजे जो सब लोक मिटे उपहास ॥ दीजे विव्य देह गोबिंद को इन दृग निरखों अनुदिन रास ॥8॥
Hindool
Naval douu banehen margaje baage... naval kunjate chaley bhor uthh
NityaPad-138
नवल दोऊ बनेहें मरगजे बागे॥। नवल कुंजते चले भोर उठ पियपाछे धनआगे ॥१॥| छूटीलट टूटी मणिमाला अर्धघुंघट छबिलागे।। खंडित अधर पयोधर मंडित प्रफुल्लित गंड विराजत दागे।। २॥ नखशिख कुसुम विशिख की सेना रण छूटेमन पागे ॥ व्यास स्वामिनीको सुख सर्वस्व लूट्यो स्थाम सुभागे ॥३॥
Devgandhar
Ritu basant sukh kheliyen hoe aayo fagun maas ..
Part3-093
ऋतु बसंत सुख खेलियें हो आयो फागुन मास ॥ होरी डांडो रोपियो सब ब्रजजन मन उल्लास ॥ गोकुलके राजा ॥ १॥ रजनी मुख ब्रज आईयो गोधन खरिक मझार ॥ सखा नाम सब बोलकें घरघर ते देत बगार ॥२॥ बडेगोप वृषभान के आये सब मिल पोरि॥ श्रवन सुनत प्यारी राधिका चढि चित्र सारी दोरि |३॥ ऊझकि झरोखा झांकियो दोउन मन आनंद ॥ एसी छबि तब लागियो मानो निकस्यो घटातेचंद |।।8॥ वासर रेल मचाईयो नेरे आयो फाग ॥ झूमक चेतव गावही मनमोहन गोरी राग ॥४॥ नरनारी एकन्न भये घोषराय दरबार ॥ चहंंदिसते सब दौरियो भूषण वसन सिंगार ॥६॥ अगणित वाजे बाजहीं रुंजमुरज निसान ॥ डफ दुंदुभी ओर झालरी कछुबन सुनियत कान ॥७॥ पिचकाईं कर कनक की अरगजा कुंकुमघोर ॥ प्राणपिया कों छिरकही तकतक नवलकिशोर ॥ ८॥ बहुरि सखा सबदोरियो आगेंदे बलबीर ॥ युवतीजन परवरखहीं नवल गुलाल अबीर ॥९॥ ललिता विसाखा मतो मत्यो लीनों सुबल बुलाय ॥ चेरी तेरे बापकी नेंक मोहन कों पकराय ॥१०॥ तबें सुबल कौतुक रच्यो सुनों सखा एक बात ॥ इने भीतर जानदेहु बोलत जसोदा मात ॥११॥ हरेंहरें सब रेंगि चली नेरें निकसी आय ॥ सेन सबेंदे दोरियो पकरे बलमोहन जाय ॥१२॥ प्यारी को अंचल लियो और पियको पटपीत ॥ सकतहीं गठजोरो कियो भले बने दोउमीत ॥ १ ३॥ फणुवा में मुरलीलई ओर कंठ को हार।॥ श्रीराधाकों पहराईयो हसत देंदे करतार ॥ १ 8॥ मेवा मोल मंगाईयो फगुवा दियो निवेर ॥ मनभायो कर छांडियो हसत वदन तनहेर |।१५॥ यह विधि होरी खेलही ब्रजवासिन संग लगाय ॥ युगल कुंवर के रूपपें जन गोबिंद बलबल जाय ॥१६॥
Gouri
Rattan khachitkau ree palana hulrawati halaria daiy jhulaavati/
Part1-102
रतन खचितकौ री पलना हुलरावति हालरिया दै झुलावति/ बदन बिलोकत बारबार बलैया लेति जनम सुफल करि लेखति महरि मुदित मन अति सचुपावतिं ॥१॥ जगजीवन जायौ है जसोदा धन्य कूखि यों कहत गोपवधू मिलिं मंगल गावति । गिरिधरदास कल्यान नंदराय फूले फिरत आनंदित कछु सुधिहूं न आवति ॥२॥
Aasawari
Aaj janam dinn radhekau haye .. doodh nhavaay phulel ubatanau
Part1-176
आज जनम दिन राधेकौ है ॥ दूध न्हवाय फुलेल उबटनौ केसर नहवाय सोहै ॥१॥ केसरी सारी लाल अंतरी अभ्यंतरी राजी है ॥ आभूषन बहु बिधिके पैहरे काजर नैंन रच्यौ है ॥२॥ सब मिल गोपी मंगल गावत बाजत धोष गज्यो है | गाम गामतें जाति बुलाई मोतिन चौक पूरचौ है ॥३॥ जसोमति उठ नहवाई लालन उत्सवकौ बागौ पहरथौ है ॥ बल रोहिनी जस्रोमति नंद कान्हर आये बलि मोहझौो है ॥४॥ जाति पॉत सब जेंवन बैठी लाल लाड़िली संग | माथें तिलक करयौ कुमकुमकौ अच्छत पीरे रंग ॥५॥ करत आरती ध्यान धर्बौ मन यह जोरी कर देहु । द्वारकेस प्रभु दूल्हा दुलहिनि राधे बड़ो सनेहु ॥६॥
Ramkali
Harimarag jovat bhaee saanjh .
NityaPad-288
हरिमारग जोवत भई सांझ । दिनमनि अस्त भयो गोधूरकआवचत बने मंडली मांझ ॥१॥ बाजत बेनु रेनु ततमंडित वनमाला उर लोचनचारु ॥ बरुहा मुगट स्रवन गुंजामनि वनज धातुको तिलक सिंगारु ॥२॥ गोपी नेन भृंग रसलंपट सादर करत कमल मधुपान ॥ विरहतापमोचन परमानंदमुरली मनोहर रूपनिधान ॥३॥
Hameer
Mudit nissan bajaavahi vrishbhan nrishati darbar hoe . bhaadon sudi
Part1-199
मुदित निसान बजावही वृषभान नृषति दरबार हो । भादों सुदी आठे उजियारी सुभ नछन्न गुन सार हो । प्रगटी कूखि महर कीरति के श्रीराधा अवतार हो ॥१॥ गुह-गृह ते गोपी बनि निकसीं गावत मंड्लचार हो | हरखत चली बधाये कुंवरि कर लिये कंचन थारहो ॥२॥ धन्य कूखि रानी की यों कहि हँसि-हैसि लागत पाय हो । वदन विलोकि कुंवरि राधा को पुनि-पुनि लेत बलाय हो ॥३॥ यह जोरी गिरिधर सम प्रगटी उपमा को नहिं आन हो । “रामदास' विप्र भाटन कों देत राय बहु दान हो ॥४॥
Gori
Praatasmein uthh srivallabhanandanke guna gaauun ..|
NityaPad-006
प्रातसमें उठ श्रीवल्लभनंदनके गुण गाऊं ॥| श्रीगिरिधर गोविंदको नाम ले श्रीबालकृष्णजीकों शीश्ञ नाऊं॥ १॥| श्रीगोकुलनाथजीको प्रणाम करत श्रीरघुनाथजीकों देख नयनन सुख पाऊं ॥ श्रीयदुनाथ संग खेलत घनश्यामजू इनकी प्रीति हों कहांलो सिराऊं॥।२॥ यह अवतार भक्तहितकारण जो परमपदारथ पाऊं ॥| विनती कर मागत ब्रजपतिपें निशदिन तिहारो दास कहाऊं ।।३॥
Bhairav
Page 1 of 1

© 2026 All rights reserved. Vaishnav Samaj of RTP, DBA - Krishnadham-VYO 

bottom of page