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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
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Kirtan
Raag
Radha-mohan rung bharey hain, khel machyau vraj khori .
Part3-224
राधा-मोहन रंग भरे हैं, खेल मच्यौ ब्रज खोरि । नागरि संग नारिगन सो हैं, स्याम ग्वाल-संग जोरि॥ हरि लिय हाथ कनक पिचकारी, सुरंग कुंकुमा घोरि | उतहिं माट कंचन रंग भरि-भरि, लै आई तिय जोरि ॥ आतुर है धाई उत नागरि, इत बिचले सब ग्वाल । घेरि लईं सब खोरि साँकरी, पकरे मदन णुपाल ।। गह्मौ धाई चंद्रावलि हँसिके, कह्यौ, भले हो लाल | जनि बल करी, नैंकु रह ठाढ़े, जुरि आईं ब्रज- बाल ॥ आईं हंसति कहति, हरि येइ, बहुत करत है गाल । क्यों जू खबरि कह्ौौ, यह कीन्हीं, करत परसपर ख्याल ॥ काह्ू तुरत आई मुख चूम्यौ, करसों छुयौ कपोल । कोउ काजर, कोउ बंदन माँड़ति, हरषहिं, करहिं कलोल ॥ कोउ मुरली लै लगी बजावन, मन-भावन मुख हेरि | किनहूं लियौ छोरि पट कटिते, वारत तन पै फेरि ॥ खबननि लागि कहति कोउ बातैं बसन हरे तेइ आप | काल्हि कह.॥औ करिहौ कह मेरौ, प्रगट भयो सोइ पाप ॥ कोउ नैननि सौं नैन जोरिकें कहति, न मो-तन चाहु | अबहीं तुम अकुलात कहा हौ, जानहुगे मन लाहु ॥ घेरि रहीं सरघा की नाई, करतिं सबै मन लाह । इक बूझति इक चिबुक उठाबति, बस पाए हरि नाह ॥ पीतांबर मुरली लई तबहीं,जुबती-स्वांग बनाई ॥ देखत सखा दूरि भै ठाढ़े, निरखत स्याम लजाई ॥ नख-छत-छाप बनाई पठाए, जानि मानि गुन येहु । 'सूर श्याम' हमकौं जनि बिसरौ, चिन्ह यहै तुम लेहु ॥
Kafi
Kunjan maanjh birajat mohan, radhika sunder sthaam kii jory .. tese yeye sunder
NityaPad-230
कुंजन मांझ बिराजत मोहन, राधिका सुंदर स्थाम की जोरी ॥ तेसे ये सुन्दर स्थाम अनुपम तेसीहे सुन्दर राधेजु गोरी ॥।॥९॥ गोपी ग्वाल सखा संग लीने मधुर मुरली स्वर बाजत थोरी ॥ सूरदास प्रभु मदनमोहन पिय चिरजीयो नवल किशोर नवलकिशोरी ॥२॥
Saarang
Anand soun srilachaman suta raaje hoe..
Part2-288
आनंद सों श्रीलछमन सुत राजे हो॥ निजजन गुण गावत सुख देख मैन लाजे हो ॥१ ॥ केसरी ज्यों चिकुर फेल रहे एसे चंद रवि किरनसों अभिषेक होत जेसे हो॥ कृपादृष्टि देखे जब दरसन तब पावे एसे श्रीवल्लभकों द्वारकेश भावे हो ॥२ ॥
Aasawari
Banate baney aavtal madangopal .. nrityat
NityaPad-280
बनते बने आवतल मदनगोपाल ॥ नृत्यत हँसत हँसावत किलकत संग मुदित ब्रजबाल ॥१॥। वेणु चंग मुर॒ज उपंग चलत विविध स्वर ताल ।। बजत अनेक बेणु रव सो मिलक्वणित किंकिणी जाल ॥२॥ यमुनातट बट निकट नवल रस मंद समीर सुढाल ॥ राका रेणुबिमल शशि क्रीडत नंदरायके लाल ॥३॥ स्याम सुभग तन कनक कपिश पट उरलंबित वनमाल परमानंदप्रभु चतुर शिरोमणि चंचल नयनविशाल ॥|४॥
Gori
Raani tere lalson kahaa kahon . jey jey karm nainbhari dekhati
Part1-145
रानी तेरे लालसों कहा कहों । जे जे कर्म नैनभरि देखति हों अचंभे रहों ॥१॥ तोस्यौ शकट पूतना मारी तृणावर्त बध कीनौ । सात दिवस तेरेई ढोठा एक हाथ गिरि लीनौ ॥२।| जबते दाम उलूखल बाँधे तरवर तोरि गिराये । कालिंदी जल निर्विष कीनौ गो सुत मृतक जिवाये ॥३॥ है कोऊ यह बड़ो देवता कै ब्रह्मा कै शंभु । परमानंददासका ठाकुर तिहुँ लोककौ खंभु ॥४॥
Ramkali
Aaj nandgrih kautik sunirke jaachak kai hoe aaye juu ..
Part1-125
आज नंदगृह कौतिक सुनिर्के जाचक कै हो आये जू ॥ बसुधा लैकरि कृष्ण अवतरे यह सुनिकें उठि धाये जू ॥१॥ चातक प्यास जैये कह कैसे स्वाति बूंद नहिं पावैजू | नंद नंदन छबि निरखि निरखिकें प्रेम अनंद बढ़ावेजू ॥२॥ शिव समाधिके ध्यान न आवै जसुमति गोद खिलावैजू ! श्याम सुंदर पै वारि फेर्किं देत कनक नग दावेजू ॥३॥ क्ृष्ण जनम सुनी अपने पतिसों हँसि ढाढ़िनियों बोलीजू । चलौ कंत नंद बाबाके दान कोठरी खोलीजू ॥४॥ तुम अपने पिय अंगकौ बागौ और मोतिन भरि झोलीजू । हमहूँ कों नखशिखलो गहनो चीर सहित और चोलीजू ॥५॥ रतन जटित बहु कुंडल लीजो गैयां धूमरि धोरिजू | बिबिध प्रकार पांबरि सुंदर बहुत अमोलीजू ॥६॥| सोंज सहित एक पलका लीजो और पांननकी ढोलीजू । बीरी करिके तुम्हें खबैहों लीजो अब तंबोलीजू ॥७॥ आछे और कहारन लीजो और चढ़नको डोलीजू । सोंहनीसी एक सुंदरि लीजो टहल करनकों गोलीजू ॥८॥ जन्म जन्म जादों नहिं काहू बहु निरकाहू बोलीजू । जगगोर्विंद श्री कृष्ण जॉविकें भई अजाचिक रोलीजू ॥९॥
Jetashri
Khelatmein kau kako gusaiyan ..
NityaPad-190
खेलतमें कौ काको गुसैयां ॥ हरिहारे जीतेश्रीदामा वरबट ही कित करत हसैयां ॥ १॥ जातपाँत हमसों बडे नाहीं नाहम वसत तुम्हारी छैया ॥। अतिअधिकार जनावत याते अधिक तुम्हारे हैं कछु गैया ॥ २॥ रूटकरे तासों को खेले रहो सखासब ठाके ठैया ॥ सूरदासप्रभु खेल्योई चाहत दाव दियो कर नंददुहैया ।। ३॥
Bilawal
Rachyon khaskhaanon aaj atee taamein raaje
NityaPad-250
रच्यों खसखानों आज अति तामें राजे रावटी उसीर नीर छीरक छबीली ॥ छुटत फुहारे चार जल गुलाब भरि अपार निरख थकित छबि जोबन खीली ।॥॥९॥ अरगजा चर्चति चंदमुखी चहुं ओर ठाडी चतुर चमेली बेला राय बेली मालती कर सोहे ॥ श्वेत बसन अति सुवास बरनत छबि नंददास निपट निकट कोटि मनमथ मोहे ॥२॥
Saarang
Jamuna tata khelat gopi hoe .. nand koo laal
Part3-146
जमुना तट खेलत गोपी हो ॥ नंद को लाल गोवर्धनधारी ताके नखमनि ओपी हो ॥१॥ चल री सखी जैये जहां छिन जियरा न रहाई हो ॥ वेनु शब्द में मन हर लीनो नाना रंग बजाई हो ॥२॥ सजल जलद तन पीतांबर करमुख मुरलीधारी हो ॥ लटपटी पाग बनी मनमोहन ललना रही निहारी हो ॥|३॥ नैनसों नैन मिले करसों कर भुजा ठई हरिश्रीवा हो ॥| मधि नायक गोपाल विराजत सुंदरताकी सींवा हो ॥४॥ करत केलि कुतुहल माधो मधुरी बानी गावे हो ॥ पूरन चंद सरदकी रजनी संतन सुख उपजावे हो ॥५॥ सकल सिंगार सजे ब्रजबनिता नख सिख लों न लखानी हो ॥ लोक वेद कुल. धर्मकी नेकउ न राखत कानि हो ॥६॥ बलि जाऊँ बलके वीर त्रिभंगी संत्तन सुखदाई हो || सकल बिथा जू हरी या तनकी हरि हँसि कंठ लगाई हो ।।७॥ माधो नारी नारी माधोको छिरकत चोवा चंदन हो ॥ एसो खेल रच्यो जु परस्पर नंदनंदन जगबंदन हो ॥८॥ ब्रह्मा इंद्र देवगन गंधर्व सबै एक रस बरसे हो ॥ सूरदास गोपी बडभागी हरि मुख क्रीडा दरसे हो ॥९॥
Aasawari
Sakhee houn apani chahson aaee .. aiso dinn nandakun suniyat
Part1-018
सखी हों अपनी चाहसों आई ॥ ऐसो दिन नंदकूं सुनियत उपज्यो कुंवर कन्हाई ॥१॥ बाजत व्रज निसान सुचिकी विधि रूंझ मुरज सहनाई ॥ महरिमहर देऊ आध लुटावत आनंद उर न समाई ॥२॥ चलो सखी हमहू मिलजैये नेंक करो अतुराई ॥ कोउपहरी कोउपहरनी कोउ ऐसे ही उठिधाई ॥३॥ कंजनथार दूबदधिरोचन गावत चली बधाई ॥ भांतिभांति मुरि चली. जुवति उपमा बरनीनजाई ॥४॥ अमर विमान चढे सुख देखत जय धुनि शब्द सुनाई ॥ सूरदास प्रभु भक्त हेत हित दुष्टनके दुखदाई ॥५॥ # राग रामकली & हरिमुख देखि बावानंद ॥ कमलनेंन किशोर मूरति कला सोलें चंद्र ॥१।) सीस मुकुट जराय जगमग मोर पिछ सुरंग ॥ हसनि विगसनि लसनि मनधन ठाड़े ललित त्रिभंग !|२॥ कटे किंकिनी झनकार झनकत संगीत उठत तरंग ॥ बदनपर अलकें बिराजत मानो वलल्‍लभ अंग ॥३॥ लाल लकुटी करजु सोभित चाल हस्ति मतंग ॥| पाय नूपुर अतिहि रुनद्ुुन शब्द उठत उमंग ॥४॥ पीतपट सुभ कंध सोहे घन छटा मानो संग ॥ मुक्त गुंजमाल उर पर किधों त्रिबेनी गंग ॥५॥ ऐसी शोभा निरखि मोहनकी नर्तत सदा सुगंध ॥ रसिकराय दयाल लीला गिनत अनतन रंग ॥६॥
Ramkali
Jhoolat doll nand kishore ..
Part3-372
झूलत डोल नंद किशोर ॥ वाम भाग वृषभान नंदिनी पहिरें पीत पटोर ॥१॥ वाजत ताल पखावज आवज झालर मुरली घोर ॥ उड़तगुलाल अबीर अरगजा कुंमकुम जल चहूँ ओर ॥ २॥ वृंदाबन फूली बन बेली कुंजित कोकिला मोर ॥ झूलत स्याम झुलावत गोपी आनंद बढ्यो न थोर॥३॥ अति अनुराग भरी सब सुंदरि कर अंचर की छोर ॥ कमल नयन मुख शरद चंद्रमा युवती जन नयन चकोर ॥४॥ सुर विमान सब कौतुक भूले वरखे कुसुमन जोर ॥ 'सूरदास' प्रभु आनंद सागर गिरिवरधर सिरमोर ॥५॥
Devgandhar
Neend toy bechoongi
NityaPad-334
नींद तोय बेचूंगी आली जो कोई गाहक होय |। आये मोहन फिर गये अंगना मैं बैरिन रही सोय ।।१॥ कहा करूं कुछ बस नांय मेरौ आयो धन दियौ खोय ॥ लछीराम प्रभु अबके मिलें तौ राखूंगी नयनन समोय ॥२॥
Bihaag
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