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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
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Aatho bhadaunki ujiyari . raavalmein vrishbhan gopke pragati | Part1-201 | आठो भादौंकी उजियारी । रावलमें वृषभान गोपके प्रगटी
श्रीराधा प्यारी !१॥ श्रुति स्वरूप सब संग करि लीने व्रजपति हेत बिचारी !
दास गोपाल बलल््लभजूकी स्वामिनी वश कीने गिरिधारी ॥२॥ | Kanharo |
Rasnayak kunwar sanga lait atisudhange .. kaachhani cutty shir | Part1-337 | रासनायक कुँवर संग लेत अतिसुधंगे ॥ काछनी कटि शिर
टिपारी नई नई गति रंगे ॥१॥ जोरी अति सौभग सीमा समर मान भंगे ॥
कृष्णदास प्रभु विलसत युवति यूथ संगे ॥२॥ | Gouri |
Maaee aajato badhaai baajai nand goparayaken .. jaadon kull | Part1-060 | माई आजतो बधाई बाजै नंद गोपरायकें ॥ जादों कुल
जादोंराय प्रगटे हैं आइकें ॥१॥ आनंदे सब गोपी ग्वाल नाचतहैं दे दे ताल
अतिहि हुलास भयो जसुमति मायकैं ॥२॥ कृष्ण पक्ष मास भादों गोकुलमें
दधिकांदों मोतिन बधावे भामा महलमें जाइके ॥!३॥ सिरपर दूब दि भेटें
बावा सभामधि द्विजनकों दीनी गाय बहोत मेंगायके ॥४॥ ठाढ़ी और ढ ाढ़िन
गावें मृदंग झाँझ बजावें हरखि असीस दीनी मस्तक नवायकें ॥५॥ गरें मुक्ता
मनिमाल हीरा जराये लाल भिक्षुक भूपति भये महा दान पायकें ॥६॥ मॉग्यौ
जिन जोई जोई दियौ ताहि सोई सोई दीनी जन सूरको तब भक्ति मेंगाइकें ॥७॥ | Jejvanti |
Kaho tou kadam tarr abb hii chhaak leey | NityaPad-209 | कहो तो कदम तर अब ही छाक ले
आऊं ॥ बहुत अवार भई मनमोहन सांझ होत अब विनति कर घर जाऊं ॥१॥।
जसोमति पूछत लाल कहां है उनको कहा बताऊं ॥ कहियो जाय हम बसे
कुमुदवन बहुत भांत तृण जल सुख पायो यांही गाय चराऊं ॥२॥ ग्वालिन
जाय कही जसुमति सो लाबों छाक लालको पहोंचाऊं ॥ पूछत जननी लाल
कहां है तब कही लाल जाय बसे कुमुदबन उर आनंद न समाऊं ॥३॥ ले गई
छाक स्याम आगे धर हरि मुसकाय कहत बलदाऊ ॥ आवो भैया सब
छाक खाय अब सब गायन बछरन वन छोडो चरेंगी जाय बनलोऊ ॥|४॥
बैठे लाल परोसी पातर खात खवबावत हँसत सखाऊं ॥| जूठो कौर मुख देत
स्यथाम के 'रामदास या बदन कमल पर निरख निरख बलि जाऊं ॥॥५॥ | Saarang |
Aavat hain aagede gaiyaan ..1.. | NityaPad-282 | आवत हैं आगेदे गैयां ॥१॥
सुबल सुबाहु श्रीदामा संगी क्वणितवेणु नितहीकी नैयां ॥१॥
एकवेपेज करतहै ठाढे धाय छुब॒त वे स्थामकी छैयां ॥
हम आगें तुम पाछेंपरसें ग्वाल परस्पर करत बडैयां ॥२॥
घेर रहे सब करत कुलाहल देत गोपालहि नंद दुहैयां ॥
औरहु ग्वाल करत बहुक्रीडा रामदासप्रभुके मन भैयां ॥३॥ | Gori |
Vrajke birahi loga vichaare | | NityaPad-361 | ब्रजके बिरही लोग विचारे |
बिना गोपाल ठगे से ठाडे अति दुरबल तन हारे १॥
यह मथुरा काजरकी रेखा जो निकसे सो कारे॥
जो कोई कान्ह कान्ह कहि बोलत अखियन बहत पनारे ॥२॥|
मात जस्रोदा पथ निहारत निरखत सांझ सघारे।॥
परमानंद स्वामि बिन एसे जेसे चंद्र बिन तारे ॥ ३॥ | Bihaag |
Latpati paag bunny sir aaj. tedhhi dharee chandrika sunder bhaee | NityaPad-168 | लटपटी पाग बनी सिर आज। टेढी धरी चंद्रिका सुन्दर भई
मनन््मथ मन लाज ॥ १॥ नखसिख बानिक कहत न आजे लटपटे भूषन साज |
परमानंददासको ठाकुर नवलकुंवर ब्रजराज ॥। २॥ | Bilawal |
Aho toson nandalaadile jhagaroongi .. merey sangki doori jaati | Part1-233 | अहो तोसों नंदलाड़िले झगरूंगी ॥ मेरे संगकी दूरि जाति
हैं मट॒के पटक के डगरूँगी ॥१॥ भोरहि ठाढ़ी कित करी मोकों तुर्न झाने
कछू काज न करूँगी ॥ तुमारे संग सखानके देखत अबही लाड़ उतारि
धरूँगी ॥२॥ सूधे दान लेहु किन मोपे और कहा कछू पॉय परुँगी ॥ नंददास
प्रभु कछु न रहेगी जब बातन उपघरूँगी ॥३॥ | Bilawal |
Akshay tritiya mahamahochav chandan lepakiyen nandlal .. | NityaPad-234 | अक्षय तृतीया महामहोच्छव चंदन लेपकियें नंदलाल ॥
बीचबीच केसरक े बुंदका रुचिर बनावत ब्रजकी बाल ॥ १॥
करन फूलचंदनके शोभित ओर गुंजा वेजंयतीमाल ॥
कृष्णदासप्रभुकी यह लीला निरखत ह॒दे बसे नंदलाल ॥२॥ | Saarang |
Shyama nakvensar atee bunny chhabi kavipen varani | Part3-239 | श्यामा नकवेंसर अति बनी छबि कविपें वरनी
न जाय ॥ सोने सरस सुनार गढी हे हीरा लाल लगाय ॥१॥ आधे अधर
विराजत मोती लाल रहे ललचाय ॥ ताकी शोभा अति बाढी हे भयोगुंज
को सुभाय ॥२॥ तनसुख सारी रातो लहेंगा क्यों न श्याम मन भाय ॥
शोभाहित हरिवंस सांवरे चिते चली मुसिक्याय ॥|३॥ | Sarang |
Pralay prayodhi jaley dhratvaansivedam .. vihit vihinn charitra | Part1-082 | प्रलय प्रयोधि जले ध्रतवानसिवेदं ॥ विहित विहिन्न चरित्र
मर्खेद ॥ केशव ध्ृत मीन शरीर जय जगदीश हरे ॥|१॥ क्षिति रति विपुलतरेतव
तिष्ठति पृष्ठे ॥ धरणि धरण किणचक्र गरिष्ठे ॥२॥ केशवध्ृत्त कच्छप रूप
जय जगदीशहरे ॥२॥ वसति दशन शिखरे धरणि त्व लग्नां ॥ शशिनिकलंक
कलेवनिमग्ना ॥ केशवधुत सूकर रूप जय जगदीशहरे ॥३॥ तब कर कमल
वरे नख मद्भूत श्रृंगण ॥ दलित हिरण्यकशिपु तनु भुृंगं ॥ केशव धृत नरहरि
रूप जय जगदीशहरे ॥४॥ छलयसि विक्रमणेबलिमद्रभुत वामन ॥ पद नख
नीरजनितजन पावन ॥ केशव ध्ृत्त वामन रूप जय जगदीश हरे ॥५॥ क्षत्रिय
रुधिर भये जगदपगदपापं स्नपयसिपयसि शमित भवतापं ॥ केशवधृत भगृपतिरूप
जय जगदीशहरे ॥६॥ वितरसिदिक्षुणणे दिक््पति कमनीयं, दशमुखमौली
बलिंस्मणीयं ॥ केशवधृत रघुपति रूप जय जगदीशहरे ॥ ७) वहसिवपुषि
विषदेवसनं जलदाभं .)। हलहतिभीतिमिलितयमुनाभ ॥ केशवधुत हलधर रूप
जय जगदीशहरे ॥८॥ निंदसियज्ञ विधेरहहश्रुतिजातं ॥ सदयहदय दर्शित
पशुघातं॑ ॥ केशवधृत शुद्ध शरीर जय जयदीशहरे ॥९॥
स्लेच्डनिवहनिधनेकलय सिकरवालं धूमकेतु मिवकिमपिकरालं ॥ केशवश्ृतत
कल्किशरीर जय जगदीशहरे ॥१०॥ श्री जयदेव कवेरिदमुदित मुदारंग ॥
श्रुणु सुखद शुभदं भवसारं ॥ केशवधृत दशविधरूप जय जगदीशहरें ॥११॥ | Malav |
Aaj nandrai kain poot bhayau .. karau badhaayau mankau bhaayau | Part1-005 | आज नंदराय कैं पूत भयौ ॥ करौ बधायौ मनकौ भायौ
उरको शूल गयी ॥१॥ मंगलचार करत भवननमें आई सकल ब्रजबाल ॥
गावत आये गीत गोप सब नाचत आये ग्वाल ॥२॥ लैत बलाय रानी रायजूकी
बारत मोतिन माल ॥ हम निजकरि बसें या व्रजमैं किये तुमारे लाल ॥३॥ जा दिनको करि रहे मनोरथ सो दिन क्यौंहू पायो || श्रीविद्लगिरिधरसे ढोटा अब
विधि भाग बढायी ॥४॥ | Devgandhar |
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