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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Tritiya bilas kiau syamaju praveen | khelankau uchchaah sakhee | Part1-306 | तृतीय बिलास कियौ स्यामाजू प्रवीन | खेलनकौ उच्छाह सखी
एकत्र कीन ॥१॥ तिनमें मुख्यसखी विशाखाजू ऐन ॥ चलीनिकुंज महेलमें
कोकिला ज्यों बैंन ॥२॥ भोग धरि सँवार बासोंधी सनी ॥ कुसुमरंग अनेक
गुही कामिनी ॥३॥ गानस्वर कियौ बनदेवी बिहार ॥ नव त्रियाकी वेष
कोटि काम वार ॥४॥ ढिंग आसन कराय प्यारीकों बैठाय ॥ दोउ एकत्र
कीन निरखत लेत बलाय ॥५) यह लीलाकौ ध्यान मम हृदय ठहराय ॥
देखत सुरनर मुनिभूले रसिक बलबल जाय ॥६॥ | Malav |
Aajbhorhi radhikayashumati grihaai .. maharikahmohans | NityaPad-179 | आजभोरही राधिकायशुमति गृहआई ॥ महरिकह्मोहँस
दक्षिमथो-वृषभानदुहाई ॥१॥ सुनआयुस ठाडीभई करनेतिसुहाई ॥ रीतेमांट
विलोवही चितजहांकन्हाई ॥२॥ उनकीगतिहों कहा कहों जिनदृष्टिचुराई ॥
वछरानोबेवृषभसो गैयाविसराई ॥३॥ देखदुहुंनकी यह दशा यशुमतिमुसकाई
सूरदास दंपतिकथा मोपेंबरणि न जाई ॥४॥। | Bilawal |
Vious teree soney chonch madhaaun... sagun bichaar praan | Part2-349 | वायस तेरी सोने चोंच मढाऊं।॥ सगुन बिचार प्रान
प्यारे को तब तोहि बहुत रिझाऊं ॥१ ॥ फरकत भुजा नैंन रतनारे किथों
गाय सुनाऊं॥ 'मुरारीदास' प्रभु भोर भये सपनो सों भये जाग परे गुन
गाऊं॥२॥ | Suha |
Aisee kaun nagri jinn kunjamen basaaye .. aroon uday tamcharko | NityaPad-143 | ऐसी कौन नागरी जिन कुंजमें बसाये ॥ अरूण उदय तमचरको
बोलसुन काहेको अरबराय उठ धाये ॥१॥ सुधिकर देख कहां पीयरो पट
सुभगकुंकुम उर लपटाये॥। पीठ बलयके चिन्ह विराजत ढांपलेहु जोआछे बनि
आये॥२॥ वदन बिंदु सुबशको टीको सुरत जीत रणधीर कहाये ॥। कृष्णदासप्रभु
गिरिधर नागर पोढरहो निश बहुत जगाये ॥३॥ | Bhairav |
Raag kanharo tum hii pai suniyat suni vrishbhan nandani raadhe.. | Part1-346 | राग कान्हरो तुम ही पै सुनियत सुनि वृषभान नंदनी राधे॥
तान बंधान अनूपम गतिसौं करत सुंदरी मो मन साथे ॥१॥ कोक कला संगीत
निपुन री उघटत शब्द ताताथेई ताधे ॥ कृष्णदास गिरिधरन प्रशंसित कहा कहों
रस सिंधु अगाथे ॥२॥ | Kanharo |
Radha mohan khelat horry nandanandan brishbhan kishori | Part3-298 | राधा मोहन खेलत होरी नंदनंदन बृषभान किशोरी
सुख सागर जुरे बृंदावन वरण वरण बन संपति मोरी ॥१॥ एकन चोवा
चंदन बंदन एकन लेकें केसर घोरी ॥ रत्न खचित पिचकाई छिरकत यों
सु खपावे गोरी ॥ २॥ छलबल कर पकरे नंदनंदन इनहीं छुडावे ताहि बंदोरी ॥
आंख आंज मुख मांड मनोहर करन कह्मो सोह मह्ि कियोरी ॥३॥ ऋतु
बसंत विहरत नंदनंदन भीज्यो पीतांबर पीत पिछोरी ॥। हरिनारायण स्यामदास
के प्रभुषें फगुवा लियो युगयुग जीवो राधावर जोरी ॥४॥ | Gouri |
Gujariya bawri bhaee kaiee bair gaee daan maar .. aaj gahan | Part1-241 | गुजरिया बावरी भई कैई बेर गई दान मार ॥ आज गहन
पाई नंदकी सों लैहों दिनदिनकौ निरवार ॥१॥ जो कबहूँ आइहै यहि मारग
सपत लीजै हौ ल्ालन नातर बूज्नियै जू मेरे सेंगकी आगें जात गुवारि ॥ सब
सखियनमें गहि राखी गोविंद प्रभु मन मनाय लीजै जान दीजै नारि पनार ॥२॥
| Saarang |
Aaj bajaai murali manohar sudhi naan rahee ree kachh | Part2-340 | आज बजाई मुरली मनोहर सुधि न रही री कछ
मो तन मन में । हो जल जमुना भरन जात ही सो वे कान्ह ठाढे श्रीवृंदावन
में ॥१ ॥ मोर पुकद माथे अति राजत कनक कुंडल सोहत कानन में॥
ब्रह्मदास' प्रभु मोहि लई हो गावत राग सुरन में ॥२ | | Kalyan |
Hoe pyaari horry khele rasbhare vraj yuvatinake | Part3-265 | हो प्यारी होरी खेले रसभरे ब्रज युवतिनके
संग री प्यारी ॥ एकत आय सबै जुरी सोंधेभीने अंग री प्यारी ॥ १॥ केसर
कंलस जु लिये धरे कटि गुलाल सुरंग री प्यारी ॥ पिचकाई नगन जराय
जरी खेलत होरी अनंग री प्यारी ॥२५॥ कोऊ कंचनसों थारें छोरत देख
सुकंठ री प्यारी ॥ केसर आड लिलाट करे कोऊ लेत उछंग री प्यारी
॥३॥ कोऊ बजावत किन््नरी कोऊ उठाय मृदंग री प्यारी ॥| कोऊ ओंचका
हँस परी तोरत तान तरंग री प्यारी ॥७॥ लायक नारी बनायके झूठी नाम
कराय री प्यारी ॥ घूंघट अधिक तनायके नारिन में ले जाय री प्यारी
॥५॥ कोऊ कुलवधु जनायके कहत बात मुरझाय री प्यारी ॥ नेंसकु लाय
मनायके नीके खेल खिलाय री प्यारी ॥६॥| जबही चरन गनायके धरत
चोंप चित लाय री प्यारी ॥ पोछे तें सिर नायके हँसत कंठ लपटाय री
प्यारी ॥७॥ कोऊ झूमत नायके देत अबीर उठाय री प्यारी ॥ अरगजा
अधिक सनायके वदन पानि परसाय री प्यारी ॥८॥ मिलि आईं सब भामिनी
पकरी लिये चहूँ ओर री प्यारी ॥ उलट लगी मानो दामिनी रह्यो बीच
घनधोर री प्यारी ॥९॥ एक कहे ये कामिनी लेहो अपनी कोर री प्यारी ॥
विसवासी गजगामिनी बाँध छोरे सो छोर री प्यारी ॥१०॥ तब धाई सुख
धामिनी राजत रूप मरोर री प्यारी ॥ ज्यों उजियारी यामिनी एक एकतें
जोर री प्यारी ॥ १ १॥ आई हैं अभिरामिनी झटक लयो कर जोर री प्यारी ॥
है तुम्हरो ये स्वामिन सोच करों किन और री प्यारी ॥१२॥ हंस ग्रीवा
भुज भेलही कोऊ उठत अति गाज री प्यारी ॥ अंस बाँह धरि पेलही कोऊ
जात गहि भाज री प्यारी ॥१३॥ केतेके रूप नवेलही सोहत खरी बिराज
री प्यारी ॥ केतेक वेस नवेलही निरख रहत कामलाज री प्यारी ॥१४॥
इह्ि विधि होरी खेलही मनमथ सेना साज री प्यारी ॥ तेरे तो अलबेली
ही कहा रही जिय लाज री प्यारी ॥| १ ५॥ मदनमोहन पियके लही रससागरकी
राज रीं प्यारी ॥ यह सुन चली अकेली हेली धाय कंठ मधि राजरी प्यारी
॥१६॥ श्रीविद्डलपदपद्म की जैबे बलि बलिहार री प्यारी ॥ गोकुलपति
सुखसदनकी गावत सरस धमार री प्यारी ॥६७॥ | Sarang |
Prakate srivallabh twizroop .. purushottam mukh | Part2-316 | प्रकटे श्रीवललभ ट्विजरूप ॥ पुरुषोत्तम मुख
कमलमनोहर आनंद कंद उद्धरण स्वरूप ॥१ ।॥ श्रीलक्ष्मण पुत्र पी मूरति
जनमत जगमें जयजयकार॥ वदिवैशाख कृष्णएकादशी इलंमा
कूखकुमार ॥२ ॥ भामिनी मंगलगावत आवत द्वारें द्विजवर ताकीभीर ॥
दान मान पावत मनवांछित बाजत भेरि निशान गंभीर ॥३ ॥ देवीजनके
भाग्य अपरिमित रीझे श्रीगोवर्धननाथ ॥ मौतिनचौक पुराये गोकुल पुष्टि भक्त सब भये सनाथ ॥४॥ | Kanharo |
Laal nenk bhawan hamaare aavo.. joe maangon sou dehon | Part2-243 | लाल नेंक भवन हमारे आवो॥ जो मांगों सो देहों
मोहन ले मुरलीकल गावों ॥१॥
मंगलचार करों गृह मेरे संगके सखा बुलावो ॥
करो विनोद सुंदर युवतिनसों प्रेम पियूष पिवाबो ॥ २ ॥
बलबल जाऊं मुखारविंदकी ललित त्रिभंग दिखावो |
परमानंद सहचरी रसभर ले चली करत उपावो ॥३ ॥ | Saarang |
Murali tou naan maun dharey | harikar kamal yugalpar podhi | Part1-294 | मुरली तोउ न मौन धरे | हरिकर कमल युगलपर पोढी
कर गेंदुवा अधरें ॥९॥ कोलमकर अंगुरिन चांपत चरणन हरि हहें हरें ॥
शंका अतुल रहत उर अंतरमतियह जागपरें ॥२॥ स्वेद सहित सीतल अलकन
हरि मंद वियार करें ॥ ब्रजपति अधरसुधा रसमातीपै नेंकन सुध विसरें ॥२॥ | Kalyan |
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