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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Baari merey latkan pug dharau chhatiyaan | kamalnain balijaaun | Part1-103 | बारि मेरे लटकन पग धरौ छतियाँ | कमलनैन बलिजाऊँ
बदनकी शोभित नेंन्ही नेंन्ही द्ै दूधकी दतियाँ ॥१॥ यह मेरी यह तेरी यह
बाबा नंदजूकी यह बलभद्र भैयाकी यह ताकी जो झुलावै तेरी पलना ॥ इहाँते
चली खरखात पीवत जल परिहरों रुदन हँसी मेरे ललना ॥२॥ रुनुक झुनुक
पग बाजत पैंजनियाँ अलवल कलबल बोलौ मूदुबनियाँ । परमानंद प्रभु त्रिभुवन
ठाकुर जाय झुलावै बाबा नंदजूकी रनियाँ ॥३॥ | Aasawari |
Kadamb vanvidhin karat vihaar .. | NityaPad-314 | कदंब वनवीधिन करत विहार ॥
अतिरसभरे मदन मोहनपिय तोरयो प्रिया उर हार ।। १।॥।
कनक भूमि विथुरे गजमोती कुंजकुटीके द्वार ॥
गोविंदप्रभु श्रीहत्त कर पोवत सुंदर ब्रजराजकुमार ॥३॥ | Adano |
Merey kahey manini | NityaPad-331 | मेरे कहे मानिनी
प्रान निवारिये ॥ हों पठई तोहि लेन सांवरे कुंजकुटी पाउं धारिये ॥१॥ हँसि
लालन मोसों कह्यो प्यारी अपने जिय म ें विचारिये ॥। करि मनुहार बोहोरी हों
पठई अंग सुगन्ध संवारिये ॥ २॥ जासो कैसो रुसनो आली तासो जाते हारिये ॥।
सूरदास मदनमोहन की छबि पर अपनो सर्वस वारीये ॥ ३॥ | Kedaro |
Raasmein piya sanga naachat lait gati dhruvataalaki .. | Pustak1-335 | रासमें पिय संग नाचत लेत गति ध्रुवतालकी ॥
राग त्ान सुर अलापत मिलबत बेन रसालकी ॥१॥
वाम अंस धरें सुशीतलबाहु मदनगोपालकी ॥
कहें कृष्णदास रसिक मनमोहन केलि गिरिधरलालकी।॥२॥| | Malav |
Madhthurapati jiya adhik daranau sabhaa maanjh asuranke aagein | Part1-088 | मधथुरापति जिय अधिक डरानौ सभा माँझ असुरनके आगें
बारबार शिर धुनि पछितानौ ॥१॥ ब्रजभीतर उपज्यौ मेरी रिपु मैं जानि यह
बात । दिन ही दिन वह बढ़त जात है मोकों करी है घात ॥२॥ दनुजसुता
पूतना पठाई छिनक माँझ संघारी खटदिन कौ बालक भयौ तानें पय पीवत ही
मारी ॥३॥ अबहीतें यह हाल करत है दिनदिन होत प्रकास । सेनापति सुनाय
बात यह नृप मन भयौ उदास ॥४॥ ऐसौ कौन मारी है ताकों मोंहि कहै सौ
« आई । वाकों मारी अपनपौ राख सूर ब्रजहि सों जाई ॥५॥ | Saarang |
Maat pitaa guna kaheen bujhaay .. abb inahuunke guna suna laihi | Part1-287 | मात पिता गुण कहीं बुझाय ॥ अब इनहूँके गुण सुन लैही
जाते श्रवण सिराय ॥१॥ उनके बेगुण निठुर कहावत मुरलीके गुण देखो ॥
तब याकौ तुम अवगुन मानों जब कछु अचरज पेखौ ॥२॥ जाकुलतें उपजी
ता कुलकौं जार करत है छार ॥ तनहीं तनतें अग्नि प्रकाशत ऐसी जाकी
झार ॥३॥ वह जो श्याम सुने श्रवनन भर करते दैहें डार ॥ सूरदास प्रभु
धोखें याके राखत अधरन धार ॥४॥ | Dhanashri |
Nayanan aisee baan purry.. bindekhe giridharanlalmukh yugbhar | NityaPad-098 | नयनन ऐसी बान परी॥ बिनदेखे गिरिधरनलालमुख युगभर
जात घरी ॥१॥ मारग जात उलटतन चितयोमोतनदृष्टि भरी ॥ तबहींते
लागीचटपटी इकटक कुलमरयाद टरी ॥२॥ चतुर्भुजदास छुडावनको हठ में
बिधि बहुत करी ॥ तब सर्वस्व हरमन हरिलीनो देहदशा विसरी ।।३॥ | Aasawari |
Arrie sakhee nikse mohanlal .. khelan vraj mein | Part3-182 | एरी सखी निकसे मोहनलाल ॥ खेलन ब्रज में
फागरी ॥ रंग हो हो हो होरियां ॥ एरी सखी घुमड्यो अबीर गुलाल ॥
मानो उनयो अनुरागरी || १॥ शोभित मदन गोपाल || कटि बांधे पट सोहनों ॥
काछनी काछें लाल ॥ लालनिचोय रंगीमानों ॥२॥ मोर मुकुट छबिदेत ॥
बंक दृगनहँसि देखनों ॥ सब ही को मनहर लेत ॥ एनमेन मानो पेखनों
॥३॥ पट आबज सुरबीन अनाघात गतिगाजही ॥ ताल मृदंग उपंग रुंज
मुरजडफ वाजही ॥9॥ घिरआईं ब्रजनारि मृगनयनी जजगामिनी ॥ रोके
हैं सावरेलाल घनघेरञओओ मानो दामिनी ॥५॥ छिरकत पियनंदनंद ॥ त्रियपट
ओट बचावहीं ॥ मानो घन पूरनचंद ॥ दुरनिकसें पुनि आवहीं ।६।| बने
हैं त्रियन के अंग छिरकछींट छबिछेलकी || मानो फूली रंग रंग॥ ललितलता
जनुप्रेमकी ॥॥७॥ बढ्यो परस्पर रंग ॥ उमग उमग रस भरनमें ॥ निरख
भई मतिपंग ॥ पीतांबर फरहरनमें ॥८॥| जब गहि रंगन भरे ॥ मोहन मूरति
सांवरे ॥ हर हर हर हँसि परे ॥ मुनि मन ू्हे गये बावरे ॥९॥ भई सरस्वती
मतिबोर ॥ ओर खेल कहां लोकहें ॥ रस भरे सांवलगौर ॥ नंद दास
केहियरहें ॥१०॥ | Kaafi |
Raheri douu vadan nihaar nihaar .. saanjhi poojat syaam sakhee | Part1-278 | रहेरी दोऊ वदन निहार निहार ॥ सांझी पूजत स्याम सखी
इत उत्त राधा सकुमार ॥१॥ लता सघन में द्वै गई इत उत्त सकेन कोऊ
निरवार॥ नागरीया मिल नैन दोऊनके बड़े ठगन ठगवार ॥२॥ | Jangalo |
Tereri nava jovan key angarangse laagat param suhaaye.. jagmag | NityaPad-115 | तेरेरी नव जोवन के अंगरंगसे लागत परम सुहाए।। जगमग
जगमगहोत मनोमृदु कनक डंड पर ललित नग लगाए ॥१॥ तामें तू कुंवरि
करउरजनकी प्रीति निरख यातें मोमन भोए ।। नंददासप्रभु प्यारीके अंतरठोर दे
बाहिरनिकस आये ॥। २॥ | Adano |
Dekhari dekh piya bhawan sukhakaari .. foolanason | NityaPad-259 | देखरी देख पिय भवन सुखकारी ॥ फूलनसों
रचिपचि कीनेहें श्रीवृषभान दुलारी ॥१।| लालगुलाब के खंभ मनोहर छाजेनकी
छबिभारी ॥ चंपक बकुल गुलाब निवारों कीनीहे चित्रसारी ॥२॥ कुंदमालकी
बनी तिबारी विविध पोहोषकी जारी ॥| सुमन यूथके कलशा शोभित ता पर
बंदनवारी ॥३॥ झूमरहे चहूंदिशा झूंमकी गेंदनकी छबिन्यारी ।॥| खेलत तामें
लाललाडिली मुदित भरत अंकवारी ॥४॥ फूलनकी पाग फूलनके चोलना
फूलन पटुकाधारी ॥ फूलनके लेहेंगा सारी मध्य फूलन अंगिया कारी ॥५॥
फूलनकी सेज फूलनके बंधना फूलनकी चौकी मनहारी ॥ फूलन बने गेंदुवा
तकिया चहूंदिश फूलरही फूलवारी ॥६॥ फूलन पंखा करलियें ठाडी फूल
रही ब्रजनारी ॥ गोविंदप्रभु फूले अति झोभित रसफूले श्रीमोवर्द्धनधारी ॥॥७॥ | Saarang |
Khelat raas rasik rasnagar .. | Pustak1-357 | खेलत रास रसिक रसनागर ॥
मंडित नव नागरी निकर वर रूपकौ आगर ॥१॥
बिकसत बन बनिता राजत जानों शरद अमल ॥
राका सुभग सरोवर मानों फूले हैं कमल ॥२॥
नबल किशोर सुंदर सांबल अंग कंचन तन ब्रजबाला ॥
मानों कंचनमणि मर्कतमणि बुंदाबन पैहेरी माला ॥३॥
या छबिकी उपमा कहिबे को ऐसोौ कौन पढ़चऔ है ॥
नंददास प्रभुकौ कौतुक लखि कामकों काम बढदयो है ॥॥४॥ | Bihaagro |
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