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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
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Sub milli aao mangal gaao dhuni . aalee bhaadon maas | Part1-066 | सब मिलि आओ मंगल गाओ धुनि । आली भादों मास
सुहायो रसबूंदन अमीझर लायो व्रजरानी ढोठा जायो ॥१॥ घर घर ते गोपी
आई मिलि चावर चूरो लाई नंदरानीकी कूख सिराई ॥२॥ तिहिं बिरिया बूंद
सुहाई ब्रजकी व्रज-जीवनि पाई तहां बाजत विविध बधाई ॥३॥ आली श्याम
घन जस गावे व्रजवासीको अमृत प्यावे वृन्दावन वसियो भावे ॥४॥ | |
Thaadhiho ajir yashoda apane harihi liye chandaa dikhrabat |. | NityaPad-293 | ठाढीहो अजिर यशोदा अपने हरिहि लिये चंदा दिखराबत |।
रोवत कित बल जाऊं तुमारी देखो धोंभर नयन जुडाबत ॥।१॥
चितें रहत आप शशि तन तब अपने करलैलैजु बतावत ॥
मीठो लगत कै यह खाटो देखतअतिसुंदर मनभावत ॥। २॥
मनही मन यह बुद्धि करत हरि मातासो कहि ताहि मेंगावत ॥
लागी भूख चंद मैं खेहों देहु देहु तब कर बिरझावत ॥३॥
यशोमति कहत कहा मैं कीनो रोबत मोहन अति दुखपावत ||
सूरस्यामको यशुमति टेरतगगन चिरैया उड़त दिखावत ॥४॥ | Iman |
Cutty barni key latpataat peet putt .. | NityaPad-061 | कटि बरनी के लटपटात पीत पट ॥
शीश टिपारो मोर चंदसो मिल धात प्रवाल विचित्र भेख नट ॥१॥
पचरंग छींट उदार ओढनी लटकत चलत तरनि तनया तट ॥।
वृजभामनी के मोती हारसों उरझी रही कुंतल अलक लट॥२॥
ज्यों गजराज मत्त किरनी संग आलिंगत सुभग कनक घट।॥
कृष्णदास प्रभु गिरधर नागर विहरत वन विहार बंसीबट ॥। ३॥ | Todi |
Udee udaavan laage laal. sunder pathak baandh | Part2-240 | उडी उडावन लागे लाल। सुंदर पथक बांध
मनमोहन बाजत मोरनके ताल॥१॥ काऊ पकरत कोऊ एंचत कोऊ
देखत नैन विशाल। कोऊ न कोऊ करत कुलाहल कोऊ बजत बोहो
करताल॥२॥ कोऊ गुड गुडीसों रिझ्ल आपुन खेंचत डोर रसाल।
'परमानंद' स्वामी मनमोहन रीझ रहत एक ही ततकाल ॥३ ॥ | Adano |
Banchar kaun desh tein aayou .. kahaan hain raam kahaan hain lakshman | Part1-299 | बनचर कौन देश तें आयौ ॥ कहाँ हैं राम कहाँ हैं लक्ष्मण
कहाँ ते मुद्रिका लायौ ॥१॥ हों हनुमान रामजूकौ सेवक तुम सुधि लैन
पठायौ ॥ रावण मार लै जाऊँ तुमकों राम रजा नहिं पायौ ॥२॥ तुम जिन
जिय डरपौ मेरी माता जोर राम दल धायौ ॥ सूरदास रावण कुल खोयौ
सोवत सिंघ जगायौ ॥३॥। | Maru |
Syama tere dahahadahe nathan kamal phoole vimal sarovar antar... | NityaPad-315 | स्यामा तेरे डहहडडहे नथन कमल फूले विमल सरोवर अंतर॥।
शोभित तारे करकजरारे मानों बीच परेरी मधुकर ।। १॥ डुरनमुरन चितवन हसोईं
लजोईं चपलोर्ड अंखियन मनहर ॥। वरुनिनकी छबि आय वसी रीझवश कीये
नंदकुंवरबर ॥। २॥ मुरारीदास प्रभु तिहारे ऐसे दृगमृग सुभावहावकर ॥ कटाक्ष
लोचन कामदुःखमोचन अरु जीते है समरशर ।। ३॥ | Adano |
Jaiye vaake mahal jahaan soun keaney haye russ keli .. vaahi | Part2-349 | जैए वाके महल जहाँ सों कीनी है रस केलि ॥ वाही
के तुम क्यों न सिधारों आवत भूले मेल ॥१ ॥ सिधिलित बसन अटपटे
भूषन केसें दूराबत छेल ॥ पीतांबर कटि सिथिल 'रसिक' पीय जानों उरझी
हम बेलि ॥२ ।॥ | Suha |
Payan chandan lagaauun .. | NityaPad-243 | पायन चंदन लगाऊं ॥
बहो भांतिन बिजना ढुराऊं छिरकि गुलाब जल तों तन नैन सिराऊं ॥१॥
अगर कपूर घसि अंग लगाऊं मृगमद आड बनाऊं ॥ 'कल्यान' के प्रभु
गिरिधरन छबिले ले लै लाड लड्याऊं ॥२॥ | Nayaki |
Maaee aaj tere saanbarenen bansi bajaai haye.. dhakit jamunakau | Part1-293 | माई आज तेरे साँबरेनें बंसी बजाई है।। धकित जमुनाकौ
नीर बछरा न पीवें क्षीर धीर मृग मीन अचल चलाई है ॥१॥ थकित उड्डगण
पति पवन की मंदगति यही गति जादों पति जैजैवंती गायहीं ॥ सूरके प्रभुकी
बंसी बाजी अति नीकी सुनि ताकौ लाग्यौं बान सोई तन जानहीं ॥२॥ | Jejvanti |
Maaee mero munn mohjho samre abgharho mope raho | Part3-153 | माई मेरो मन मोहझो सामरे अबघरहो मोपे रहो
न जाय ॥ चपल तिरछी भोंहसों सर्बसुह्लो मेरो लियोहे चुराय ॥१॥ माईहों
गोरसले निकसी श्रीवृंदावनही मंझार || आय अचानक औचका मटुकीहोमेरी
दीनी ढार ॥२॥ गष्ठि अचरा मोसों यों कह्यो कोनबह्ूतू काकी नारि॥ केविरियां
यह मग गई दान बहू तूहमारों मारि ॥३॥ कंचुकी पटनी वीगही लई बहोते
केतिक मोल ॥| कनिक खुभीके व्याजमें परसे वहो मेरे पानकपोल ॥७॥
हंसि वीरी मुख॒में दई जीबाहो मेरे मेली बांह ॥ मिसही मिस मोहिले चले
गहबरहो अंधियारे मांह ॥५॥ जिय औरे मिसदानके बतीयनहो मेरे परसे
पाय ॥ करतब सीठी मिलनकी सनमुखरी मेरेनेन चलाय ॥६॥ ओर कहां
लगि बरनीये कहत बहो मोहि आवे लाज ॥ जन त्रिलोक प्रभु सोंरमी देखि
सखी मेरे त नकोसाज ।॥|७॥ | Dhanashri |
Aise chatur kahaa tum aaye | sub guna bharey bhaye taaheeten | Part1-236 | ऐसे चतुर कहा तुम आये | सब गुन भरे भये ताहीतें
बोहोत जतन करि मैया जाये ॥१॥ काहेकों बात बनावत ठाढ़ी सोई दैहों जो
मेरो आबै ॥ आपुन कहत कहावत इनपै सुनि सुनि बचन लाल सुख पावै॥२॥
हँसि हँसि कहत लाल सबहिनतैं अब मोपै शागस्बो नहीं जाई ॥ श्रीविद्वलगिरिधर
व्रजसुंदरि भेट करी यों जाई ॥३॥ | Bilawal |
Baaje ray aaj baaje mandilra nandrai darbar . guni gandharv | Part1-072 | बाजे रे आज बाजे मंदिलरा नंदराय दरब ार । गुनी गंधर्व
मिल मंगल गावे मालनीयां गुंथे हार ॥१) एक आवत एक भेट चढावत एक
वारत भुक्ता थार । कृष्णदासकी जींद कुरबानी वारतहें घरबार ॥२॥ | Malkoos |
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