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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Radha harike garvabhari .. sarbrayanko aagam jabjanyo baithirahi | NityaPad-150 | राधा हरिके गर्वभरी ।। सरब्रयनको आगम जबजान्यो बैठीरही
खरी॥१॥ उतब्रजनार संग जुरकें बिहसत करत परहास्य ।। चल्यो नजायदेखियेरी
वा राधाकोआस्य ॥२॥ कैसो वदन शुंगार कौनविधि अंगदशाभई कैसी ॥।
सूरस्याम निशरसवशकीये निधरक व्हेकें वैसी ॥।३॥। | Bilawal |
Natarlila hoti junie .. | Part2-308 | नातरलीला होती जूनी ॥
जोपें श्रीवल्लभ प्रकट न होते वसुधा रहती सूनी ॥१ ॥
दिनप्रति नईनई छबी लागत ज्यों कंचननग चुनी ॥
सगुणदास यह घरको सेवक यशगाबत जाकोमुनी ॥२॥ | Gouri |
Queyon bethi raadhe sukumari .. | Part2-251 | क्यों बेठी राधे सुकुमारी ।।
बूझतहे ब्रज जानके महेरी क्यों जेंबत बाबाकीथारी ।॥१॥।
आज हमारो गोरी व्रत ताकी बिध ताहीपे पाउं ।।
सुंदर सुभग सलोनों ढोटा ताको पूज बहों हाथजीमाउं।। २।।
ऐसो ढोटा नंदरायको ताकों अबही ले आउं ।।
तुम जानोरी सयानी मैया बेग चलो हों चरन शिरनारऊँ ।।३।।
सुनरी जसोमति कुंवर आपुनों बेगपठेहों नोतन आई ।।
परमानंदस्वामी सब जानत देख देखतें सब निश्व पाई ।॥४॥॥ | Saarang |
Terisonsunsunarimiya .. | NityaPad-194 | तेरीसोंसुनसुनरीमिया ॥
याकेचरित्र तूनहींजानत बोलबूझसंकरषण भैया ॥१॥
व्याईगाय बछरुवाचाटत होपीवत होप्रातखनघैया ॥
याहिदेख धोरीबिझुकानी मारनकोंदौरी मोहिगैया ॥।२॥
दैसींमनकेबीचपर्यो मैं तहांरखवारों कोऊनसहैया ॥
तेरोपुण्यसहायभयोहै अब उबरूयो बावानंददुहैया ।। ३॥
यहजोउखटपरीहीमोपै भाजचली कहिदैयादैया ॥।
परमानंदस्वामी कीजननी उरलगाय हँसलेतबलैया ।॥।४॥। | Bilawal |
Hailey hilagaki pahichaan |. jopein hilag hiyemein hoti tou kahaa | NityaPad-097 | हेली हिलगकी पहिचान |। जोपें हिलग हियेमें होती तो कहा
करे कुलकान ॥। १॥ हिलग करी ज्यों पतंग दीपकसों तन सोप्योहै आन ॥| शंकत
नहीं जरत ज्वालामें सही प्राणकी हान ॥२॥ हिलग करी ज्यों चकोर चंदसों
पावक चुगतजु जान ॥ ऐसेंही कुरंग नाद मृदु मोहे हने पारधी वान ॥३॥
हिलगनहींसोव्धें सते त्यजमधुप कमल हित जान॥ ऐसी हिलग लालगिरिधरसों
सूरदास पहिचान ॥॥४॥। | Ramkali |
Rangrasi madhurasi srivallabh shree lachhman grih aaye hoe. | Part2-289 | रंगरासी मधुरासि श्रीवल्लभ श्री लछमन गृह आये हो।
विविध मथुरन प्रत िपल वपु धरि सिंगार सघनता बेनुरंध्र मधि पाये हो ॥१ ॥
ब्रजजन विरह अग्रफल लुब्यित अति आतुर उठि धाये हो ।
उत गिरिधरमुख इत प्राकट्यसुख श्रीभट दुहुँ विधि गाये हो ॥२ ॥ | Aasawari |
Myrie neenken laagai dulahe dulhani slelati fagu .. | Part3-130 | माइरी नींकें लागै दुलहे दुलहनि स्लेलति फागु ॥
जाकों नाम राधिका गोरी ताकों नित सुहाग ॥१॥ बाजें ताल मृदंग झांझ
ढ़फ गाबैं राणिनि राग ॥ अद्भुत तान जम्यों सुर टोडी उरप तिरप गति
लाग ॥२॥ अगर जवाद कुँमकुमा चोवा छिरके चंद्रावलि ललिता || बहुत
सुगंध कहाँलों बरनौं उमैंगि चली रस सलिता ॥३॥ मुक्ता हार उरज कुच
अंतर घन दामिनी की छबि छलिता ॥ रस भरि “गोविंद' प्रभु सँग खेलति
मदन नृपति की सेना दलिता ॥४॥ | Todi |
Nartat gopal sanga gopika millie .. | Pustak1-319 | नर्तत गोपाल संग गोपिका मिली ॥
अद्भुत नट भेख देख कोटि काम अति विशेष मुरली अधर मधुर सप्रस्वरन सों रली ॥१॥
गावत पिक कंठ सरस परम रीझ भींझ तान भामिनी सुजान श्रीवृषभानकी लली ॥
बलय नूपुर किकिणी कटि झनकत तत थेई थेई उघटत मुख शब्दावलि ग्रीव भुज “पिली ॥२॥
बाजत मधुरे मृदंग तताधिलाँग गति सुगंध संग लेत देत ताल रास मंडली ॥|
कोलाहल करत हंस मोर सोर चहूँ ओर भोर भये फूली मानों कंज की कली ॥३॥
श्रीवृंदावन नवनिकुंज प्रेम पुंज भये हरख निरख तरणि त्नया तीर चांदनी भली ॥
श्रीबल्लभ चरणारविंद पंकज मकरंद सरस करत दान मानदास मोहना अली ॥४॥ - | Bhairav |
Yaamen kahaa ghatego tero ... | NityaPad-352 | यामें कहा घटेगो तेरो ॥।
नंदनंदन कर घर को ठाकुर आप होय रहो चेरो ॥१॥
भलीभई जो संपति बाढी बहुत कियो घर घेरो ॥
सुत बनिता बहुयूथ संकेले वैभवभयो जु घनेरो ॥२॥
कहूं हरिकथा कहूं हरि सेवा कहूं भक्तनको डेरो ॥
सूर समर्पणकरो स्थामको यह,सांचो मत मेरो ॥३॥ | Bihaag |
Aaj laltipare chhabi adhik bunny .! | NityaPad-062 | आज लालटिपारे छबि अधिक बनी ।!
बिचबिच चारुसी खंड बिचबिच मंजूरीन्यू त बिराजनी ॥१॥
धेनुरेणु रंजित अलकावलि सगमगात सोथे सनी ॥|
मधुप यूथ उडकें बैठत सखी पारिजात अव तंसनी ॥२॥
अंगद वलय करमुद्रा खच्चित नग कटितटपीत काछें काछनी ।॥। ३॥|
श्रीवत्सलछाउरहा विशद सखी कंठलसत कौस्तुभमणी ॥४॥
त्रिभंगभवरी लेत सूखग्रग्रताधिमिधिमिकटि धुंग्धुंगनि ग्वाल ताल गत उघटनी ॥
गोविंदप्रभु त्रैलोक विमोहत नृत्यत रसिक शिरोमनी ॥।५॥॥ | Gori |
Pariva praan samaan radha juu jory bunny ree .. | Part3-115 | परिवा प्रान समान राधा जू जोरी बनी री ॥
दूज दमन अति लाल अधर प्रवाल सनी री ॥१॥ तीज तुलनी है गुपाल परम सिंगार धरे री ॥ चौथ चमर जू धाई और फूल गुल भरे री ॥२॥
पाँचे पंचक बैन नैन कौं रंग रचे री ॥ छठे छले बनमाल राधा सेज सचे
री ॥३॥ सातैं सुंदर श्याम नटबर भेख धरें री ॥ आठौं अंग लगाबो बाकी
सामल देह री ॥8॥ नौमी नवल किसोर न आयो चं द धरै री ॥ दसमी
दसो अवतार घर-घर बाजि रहे री ॥५॥ एकादसी मोतिन हार लटकन
लटकि रहे री ॥ द्वादसी तिलक लिलाट हीरा लाल बने री ॥६॥ तेरस
तरुनी गुवाल अंगो अंग चीर दए री ॥ चौदस लीऐ लीर सब नंद भवन
गए री ॥७॥ पून्यों होरी लाल खेले तन-मन स्याम लए री ॥ नंद जू दे
बहु दान जसुदा चीर दए री ॥८॥ मन में अति आनंद सबन तन साज
सजे री ॥ जन 'परमानंददास” हरि के चरन भजे री ॥९॥ | Bilawal |
Harirabhisarati vahati madhupavane .. kimparmadhiksukh | NityaPad-330 | हरिरभिसरति वहति मधुपवने ॥ किम्परमधिकसुखं
सखिभवने | १॥ माधवे मा कुरु मानिनि मानमये ॥।ध्रु.। तालफलादपि गुरुमति-
सरसं किंविफली कुरुषे कुचकलशं ॥२॥| कतिनकथितमिदमनुपदमचिरं ॥। मा
परिहर हरिमतिशयरुचिरं ।। ३॥ किमिति विषीद ससि रोदिषि विकला ॥| विहसति
युवति सभा तब सकला |।४॥ मृदुनलिनीदल शीतलशयने ॥ हरि मवबलोकय
सफलयनयने।।५।। जनयसिमनसि क्िमिति गुरुखेदं॥ श्रुणु मम वचन मनीहित-
भेद ॥६।। हरिरुपयातु वदतु बहु मधुरं । किमितिकरोषि हृदयमतिविधुरं ।।७॥।
श्रीजबदेवभणित मतिललितं ॥ सुखयतु रसिकजन हरिचरित ॥८॥ | Bihagaro |
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