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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Adbhut aeka anoopam naar.. | Part2-065 | अद्भुत एक अनूपम नार॥
नेन बेन चोबीस चोगुने सोरह चरन बरन हें चार ॥१ ॥
चतुराननसों प्रीत तीनपति ताके इक्कीस दूने मेन ॥
श्याम सेत आरक्त हरित पद चलत तबे बोलत हे बेन ॥२॥
सात्विक राजस तामस निर्गुण एक युग्म दरसनकों आवत॥
मगनमये सायुज मुक्तिफल त्रिविध रूप देखत सचुपावत ॥३ ॥
यहबिध खेल रच्यो ब्रजमंडल दीप दिवारी प्रगट दिखाई॥
तुर्य रूपके यूथ बिराजत छबिपर द्वारकेश बलिहारी ॥४ ॥ | Kanharo |
Mohan tum joe badeke thhota .. kaun boojhiye rasik shiromani | Part1-244 | मोहन तुम जो बड़ेके ठोटा ॥ कौन बूझिये रसिक शिरोमनि
बनमें जो करत झझोटा ॥१॥ आवन जान बहू बेटिनकी औघरट जमुना घाट॥
मटुकी फोरत बाँह मरोरत चलन न पावै बाट ॥२॥ जो यह बात यशोदा सुनिहैं
बड़े गोप उपनंद ॥ एक पूत सो निपट लड्ैतों करत अटपटे फंद ॥३॥ सुनत
बात मनमें सुख उपज्यौ भावै हरिकी केलि ॥ परमानंददासकी जीवनि बढ़ौ
नंदकीवेलि ॥४॥ | Saarang |
Gwal kahat sunohon kanhaiya .... | NityaPad-276 | ग्वाल कहत सुनोहों कन्हैया ॥॥
घर जेवेकी भई बिरीयां दिन रह्यो घड़ी छेयां ॥ १ ॥
शंखधुन सुम उठे हैं मोहन लावो हो मुरली कहां धरैया ॥
गैयां सगरी बगदावो रे धरको टेर कहत बलदाऊपैया ॥२॥
कंदमूल फल तरमेवा धरी ओटि किये मुरकैया ॥|
अरोगत ब्रजराज लाडिलो झूंटन देत लरकैया ॥३॥।
उत्थापन भयो पहोर पाछलो वृजजन दरस दिखैया ॥
परमानंद प्रभु आये भवनमें शोभा देख बल जैया ॥।४॥ | Poorvi |
Hariju raag alapat gori . | NityaPad-285 | हरिजु राग अलापत गोरी ।
होंय बाट घाट घर तजिके सुनत बेनु धुन दौरी ॥१॥
गई हो तहाँ जहाँ निकुंजबन अरु बैठे किसलय की चोरी ।
देखी मैं पीठ दीठ द्रुम फरकत पीत पिछोरी ॥२।
लीनी हों बोलि हो म ेरी सखी री देखि बदन भई बौरी ।
'परमानंद' नंद के नंदन मोहि मिले भरि कौरी ॥३॥ | Gori |
Tum chhake chhelse dolo | manmohan tum ratyamatyaji | Part3-138 | तुम छके छेलसे डोलो | मनमोहन तुम रात्यामात्याजी
चाहे सोई बोलो ॥१॥ अनतजाय तुम धूम मचावो, हमरे बगर तुम कबहु
न आवो, रहो कहां ब्रजमोहन प्यारे जगढगढ बतीयां छोलो ॥२॥ जानी
मोहनरीत तिहारी कपटगांठ नहीं खोलो || आनंदघन होरीके ओसरको करि
राखोंओलो ॥३॥ | Todi |
Ulato jhagaa ulati haye soothan kahat banyo nikori maiya . | Pustak1-314 | उलटो झगा उलटी है सूथन कहत बन्यो नीकोरी मैया ।
पांय पनैया नंदबाबा की सीस पाग पहली बांध बूझत बलि मो मे को सुंदर है भैया ॥१॥
कटि फेटा और बडी कटारी थकि ढरकि ठोडी तर आय कहूं लपटानो पैया ।
'क्रष्णजीवन” हरि प्रभु कल्यान की ये छबि निरखत नंदजसोदा भये फिरत गाडी कैसे पैंया ॥२॥ | Bilawal |
Arrie chully jaany jahaan harivadananal bhuv aaye. | Part2-310 | एरी चली जांय जहां हरिवदनानल भुव आये।
चले श्री लछमन-गृह बाजे विविध बजाये ॥ चलि अनेक दुंदुभी मदन भेरी
तुरई सहनाई । घनमृ्दंग की घोर झालरी झांझ सुहाई ॥।टेक ॥ मुरली सुर
लिये बजे ही संख संग सरसात। घर-घर कंचन कलस-ध्वजा मानो उदित
भयो रवि प्रात ॥१ ॥ एरी चलि मृदु चंपक-तन मृदु भूषन भूषाय । एरी बर
बसन हसत लखिब अंग अनंग लजाय ॥ चाल-भुकुटी समर सरासन आसन
अलि ज्यों बैठे | कुंचित कच मिस नलिन पंख समार एंठे ॥टेक ॥ चोंचन
रस रोचन रचे हो खंजन मृग आधीन | कबहुक रस राते माते मानों जावक
भींजे मीन ॥ २ ॥ ए चलि सब्द सदन सुठ सोहत कुंडल हीर । फूली कमल
कली जानो रूप सुधाकर नीर॥ चाल-बिम्बाधर युग अधर-दंत दमकत
रस भींजे। ओप धरे अरविन्द मध्य जनु विश्वल बीजे ॥टेक ॥ चिबुक
चारु चित चुभि रही हो जग जोतिन ऐन | मानो सरस हकार की हो घुदित
मृदु खचिहि मैन ।|३ ॥ ए चलि सौरभ-गृह पर गजमुक्ता सोहत | उर मंडित
हारन लर पन्नग गुहत॥ चाल-कटि किंकिनी जु बनी मदन-गृह बंदन
माला। पद बिछवन सुर झनक करत मद मदन बिहाला ॥टेक । तब सब
मिलि एकत्र भये हो श्री लछमनभट-गेह। मात मनोरथ पूर ही हो मानो
बरखत मेह ॥४ ॥ एं निज आँगन बेठे लछमन भट देत बधाई | लेत मगन
मन गोपगन जो जाके मन भाई॥ चाल-देत असीसन सास नाय नृत्यत
हरसाने। गोरस कीच मचाय दूधदधि माट ढुराने ॥टेक॥ निज भक्तन
चित चाय भरे हो मायिक तिमिर नसाय। श्रीवललभवर पुडंरीक पर
'दास-दास' बलि जाय ॥५ ॥ | Gouri |
Shobha dekhiri nandapgharen .. prakavyau poot sakal sukhdai pooran | Part1-015 | शोभा देखिरी नंदपघरें ॥ प्रकव्यौ पूत सकल सुखदाई पूरन
भाग भरें ॥१॥ नव सत साजे बाजन बाजैं गावत ग्वाल खरें । छिरकत हरद
दही और माखन तन सुधि सब बिसरें ॥२॥ गोरस कीच मची आँगन में पॉय
नहीं ठहरें ॥ अंक भरत तरुन वृद्ध बालक काहूसूँ न डरें ॥३॥ दान दिये
व नंदरायजू सबके दरिद्र हैँ ॥ कृष्णदास यह कौतुक लखि सुर पुहुपन वृष्टि
॥४॥ | Devgandhar |
Nava nikunj key dwaare thaade karat shringar paraspar .. swet paag or | NityaPad-069 | नव निकुंज के द्वारे ठाडे करत शृंगार परस्पर ॥ स्वेत पाग ओर
स्वेत पिछोरा मोतीनमाल विराजत उर पर ॥९॥ चंपक तन प्यारी पेहेरें स्वेत
सारी स्याम कंचुकी खुली हें अद्भुत तर | रसिक प्रीतम की वांनिक निरखत
लेत बलैया दोऊ करकर ॥२॥ | Lalit |
Dekhari dekh yeh sundartai.. chapalanayan aroo | Part2-360 | देखरी देख यह सुंदरताई॥ चपलनयन अरू
नासिका इकटक रहे ठहराई ॥१ ॥ करत विचार परस्पर युवती उपमा
अनंत्तबुद्धि अनाई॥ मानों खंजन बीच शुक बैठो यह कहिकें मन जात
लजाई ॥२॥ कछु एक तिल प्रसून की आभा मनमधुकर जहां रहो
लुभाय ॥ सूरस्यथाम नासिका मनोहर कापें वरणी नजाय ॥३ ॥ | Sorat |
Baras gaanth aaj phulat laal or vrajraj .. bethi god liyein | Part1-173 | बरस गांठ आज फुलत लाल ओर ब्रजराज ॥ बेठी गोद लियें
दोऊ ढोटठा जसोमति ओर रोहनी माय ॥१॥ बंदनवार और चौक मोतिनके
नंदने बाजे हुलस बजाय ॥ पहेले भये सुलछन बल तब अपनी पीठ पर लालन
लाय ॥२)॥ आगे हे आनंद बेठकर ए दोऊ सुत हम पुन्यन पाय ॥३॥
सोने रुपे व्होत बसनले विप्रनकों गो दान दिवाय ॥ ले लै नाम बाबा ढोटनको
गाय गाय कें सबन म्हलाय ॥४॥ तिलक करन लाये सब पुरी ओर आरती
विविध संवारी ॥ इनको सोहलो इनके वीरकों दुनी सुख मानत ब्रजनारी ॥५॥
पहेलेही पहेराये भान सब फिरकर बाल गोपाल पहेराये ॥ अरु पहेराईं सबे ब्रज
सुंदरि जेसोही जाही मन भाव ॥६॥ आदर दे नंदरानी कहेत सबनसों ऐसेही
मेरें दिनदिन आय ॥ श्रीविहलग्िरिधरन लाल पर वाहीके सदा सोहाव ॥७॥ | Saarang |
Banaa teree chaal atapati sohe .. | NityaPad-267 | बना तेरी चाल अटपटी सोहे ॥
शीश फूलनको सहेरो बन्योहै अलक विलक मनमोहे ॥॥१॥
कर सिंगार चढे घोरीपर ले दरपन मुख जोहे ॥
हरिनारायन स्यामदासके प्रभु की उपमाकों नहीं कोहे ॥२॥ | Kanharo |
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