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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
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Kirtan
Raag
Aaj rawal mein bajat badhaai . dhanya kukhi taahi kii jinn yeh
Part1-187
आज रावल में बजत बधाई । धन्य कुखि ताहि की जिन यह कुँवरि सुलक्छिन जाई ॥१॥ निरखि निरखि फूलत गोपीजन भई हमारी भाई। पूरब सुकृत बिचारत अपनों अनायास निधि पाई ॥२॥ बोले पग शुभघरी बिचारत सोचि रहे अरगाई । अति लहनों वृषभान गोपकौ भाग्य दशा चलि आईं ॥३॥ जासीं प्रेम सुलक्छिन कहियत सो यह वेद न गाई । सूरदास स्वामीते अधिक है चली तिहुँ लोक बड़ाई ॥४॥
Saarang
Leeje mohi bulaay srivallabh ||
NityaPad-349
लीजे मोहि बुलाय श्रीवल्लभ || बहुत दिवस दर्शन भए मोकों ताते मन अकुलाय ॥१॥ निशदिन अतिही क्षीण होत तन सुधबुध गई भुलाय ॥ गोविंद प्रभु तुम्हारे दर्शनविन छिनभर कल्प विहाय ॥२॥
Bihaag
Vrajpur gharghar atee anand | pragate hain jasumatike dhota door gaye
Part1-088
व्रजपुर घरघर अति आनंद | प्रगटे हैं जसुमतिके ढोटा दूर गये दूख द्न्द ॥१॥ साज छठीको लाई वनिता गावत गीत सुछन्द । नंदराय तब छठी पूजिके दिये दान सुखकंद ॥२॥ भीतर जाय महरिपे देखे सुंदर मुख अरविंद | करत आरती अवलोकत मुख द्वारकेस मन फंद ॥३॥
Saarang
Khkelat basant varr vidlesh .. milli rasikrai
Part3-038
ख्केलत बसंत वर विद्लेश ॥ मिलि रसिकराय गोबर्धनेश ॥ध्रु-॥ मृगमद कपूर केसरि सुरंग ॥ अति सोंधो सान्‍्यों कुसुमरंग ॥ दोऊ भरि पिचकाई अति उमंग ॥ तकिभरत परस्पर सुभग अंग।॥ १॥ भरिनव अवीर नौतन गुलाल॥ अरगजा लगावत अललित गाल ॥ दोऊहसतलसत आनंद ख्याल ॥ पहराबत सवन सुगंध माल ॥२॥ चमेली फुलेल सरायवेलि || मच्यो खेल अजर रंग रेलि ॥ सब गोकुल ॥ सौरभ रहो फेलि॥ मधुमत्त मधुप रस रह्यो झेलि ॥ ३॥ तहां बाजत चंग मृदंगताल ॥ सुर मिलत मुरली गावे गुपाल ॥ ब्रजजन रीझे जिय अति रसाल || सुखदेत सबन गिरिधरनलाल ॥४॥
Hindool
Badan nihaarat haye nandrani koti kaam chhabi koti chhand chhavi
NityaPad-073
बदन निहारत हे नंदरानी कोटि काम छबि कोटि छंद छवि कोटिरविवारत जियजानी ॥१॥ सिदि विरंचि जाको पारन पावत सेस सहश्र गावत रस नारी ॥। गोद रिब्रलावत महेरि जसोदा परमानंद कीनो बलिहारी ।॥।२१।
bilawal
Bolein sub hoe hoe horry .. khele sriradha gori
Part3-198
बोलें सब हो हो होरी ॥ खेले श्रीराधा गोरी ॥९॥ सहेली संग सुहांई ॥ बनी सब एकई दांई ।॥२॥ भरेकेसर कमोरी ॥ लालनके सीसतें ढोरी ॥३॥ सोंधो बहुत मंगायो ॥ प्यारीजू के अंग लगायो ॥४॥ बाजे डफ ताल मृदंगा ॥ वीणा मुख चंग उपंगा ॥५॥ भरे फेंटन गुलाला | आये उत नंदके लाला ॥६। सबे मिलि घात सों आई || लालनकों घेरकें लाई ॥७॥ भरी रस दृष्टि निहारें॥ जुरी अनुरागकी धारें ||८।॥ गारीरस भेदकी गावें ॥ तारी दे लाल नचावें ॥९|॥ सहेली को भेष बनायो ॥ माधुरी के मन को भायो ॥६०॥
Kaafi
Nand vrishbhaanke humm bhaat . udey bhayau vraj vall‍labh kulkau
Part1-127
नंद वृषभानके हम भाट । उदे भयौ ब्रज वल्‍लभ कुलकौ मेंटि हमारी नाट ॥१॥ इंद्र कुबेर हमारें भाये ब्रजके गूजर जाट | इतनो देहु जो मोल लैहूँ हों मथुराकी सब हाट ॥२॥ भूषन बसन अनेक लुटाये और गायनके ठाट । बढ़ौ वंश हरिबंश व्यासको बास चीर के घाट ॥३॥
Maroo
Konsalya raghunathakon leey god khilaave..
Part-265
कोंसल्या रघुनाथकों ले गोद खिलावे॥ सुंदरबदन निहारकें हँस कंठ लगावे ॥१ ॥ पीत झंगुलिया तनलसे पग नूपुरबाजे॥ चलन सिखावे रामकों कोटिक छबिछाजे ।२॥ सीस सुभगकु लही बनी माथे बिंदु विराजे॥ नीलकंठ नखकेहरी कर कंकणबाजे ॥३ ॥ बाल लीला रघुनाथकी यह सुने ओर गावे॥ तुलसीदासकों यह कृपा नित्य दर्शनपावे ॥४ ॥
Bilawaal
Podhe sthaam shyama sanga || rangmahal kii lalit tibari parada
NityaPad-128
पोढ़े स्थाम श्यामा संग || रंगमहल की ललित तीबारी परदा परे सुरंग ॥ १ जगमगात पावक अंगीठी भरे रतिरसरंग ॥ नंददास दम्पति सुरत सुख जीत्यो मनमथ अंग ॥ २।।
Nayaki
Merey pachhakanso mug jhaaru ..
NityaPad-224
मेरे पछकनसो मग झारु ॥ या मग में प्यारो मेरो आवत हे तन मन जोबन वारु )।१॥ सेज सँवारु चमर ढुरावुं मधुर स्वर गाउं ।। रसिक प्रीतम पिय जो मिले मोहे हंस हंस कंठ लगाउं
Kafi
Raasmein piya sanga naachat lait gati dhruvataalaki .. raag thaan
Part1-335
रासमें पिय संग नाचत लेत गति ध्रुवतालकी ॥ राग त्ान सुर अलापत मिलबत बेन रसालकी ॥१॥ वाम अंस धरें सुशीतलबाहु मदनगोपालकी ॥ कहें कृष्णदास रसिक मनमोहन केलि गिरिधरलालकी।॥२॥|
Malav
Anand kii nidhi pragati radha . bhadonsudi aathein shubhavela nirakhat
Part1-194
आनंद की निधि प्रगटी राधा । भादोंसुदि आठें शुभवेला निरखत मिटत्‌ सकल तन बाधा ॥१॥ सिंधुसुता गिरिसुता शची रति उनहूँ ते अधिक रूप अगाधा | ब्रजपति देखि तनमन धन बारत नैंदनंदन मन पूँजी साथा ॥२॥
Saarang
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