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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Anand prem umagi jasoda harkhi gopal khilaavai . shiv
Part1-153
आनंद प्रेम उमगि जसोदा हरखि गोपाल खिलावै । शिव सनकादिशुकादि ब्रह्मादिक खोजत अंत न पावै ॥१॥ ताहि गोदलै जननी दुलराबति तोतरे बोल बुलावै । कबहूँ कर पल्‍्लव टेकि उठावै फूली अँग न समावै ॥२॥ मोहे सुरनर किन्नर मुनिवर रवि रथ हू न चलावै । मोहिं सब ब्रजनारी मनहीमन सूरदास यश गावै ॥३॥
Bilawal
Aaj atee neeke baneri gopal . khasako cutty banyo
NityaPad-169
आज अति नीके बनेरी गोपाल । खासाको कटि बन्यो है पिछोरा उर मोतिनकी माल ॥।१॥| पाग चौकरी सीस बिराजत चंदन सोहत भाल | कुंडल लोल कपोल विराजत कर पहोंची वनमाल ॥|२॥ धेनु चराय सखन संग आवत हाथ लकुटिया लाल। परमानंद प्रभुकी छबि निरखत मोहि रही ब्रजबाल ।। ३॥।
Hameer Kalyan
Aaj bachaayo mangal chaar ..
Part3-007
आज बचायो मंगल चार ॥ माघमास शुक्ल चोथ हे हस्त नक्षत्र रविवार ॥१॥ प्रेमसुधा सागर रस प्रणट्यो आनंद बाहयो अपार ॥ दास रसिकजन जाय बलिहारी सरबस दियो वार ॥२॥
Saarang
Aajshubhalagna tere millen koo giridharnagar gunin ganaayo ...
NityaPad-123
आजशुभलग्न तेरे मिलन को गिरिधरनागर गुनिन गनायो ॥। प्रथमसमागमतें क्षित डरपत बडेभाग्य संचित फलपायो ।॥। १।। नवनिकुंज मंडप सखी सुमति-विधाता सुहस्त बनायो।। रसिकलाल तब संग प्रमुदित कृष्णदास मंगलयश गायो ॥२॥
Bihagaro
Srigovardhan deepmalika sub dekhanakon aaye..
Part2-055
श्रीगोवर्द्धन दीपमालिका सब देखनकों आये॥ अरसपरस व्यंजन करकें सब ब्रजवासी पूजनकों धाये॥१॥ तब नंद उपनंद बुलाये ब्रजवासी सबही पहराये॥ कुंभनदास लालगिरिधरनें सब त्रजजनके हिये सिराये ॥२ ॥
Kanharo
Nandasuban sanga naachat vraj bhamini akhaaren ponchpiroja jhalkat gund mandit bhoomi ..
Pustak1-347
नंदसुबन संग नाचत ब्रज भामिनि अखारें पॉँचपिरोजा झलकत गंड मंडित भूमि ॥ जुगल रंध्र ऊठत अद्भुत गीतावली बिबिध तान फौंदा रहे झूमि ॥१॥ राग तान ताल गति रिश्वत ग्रानपति तिरप बंधान रस लेत प्रान पूमि ॥ क्ृष्णदास प्रभु गिरिधर पीयकों ऊगार पायौ तैं प्रेमानंद बंस कीयो कामदूमि ॥२॥
Kanharo
Nandrai ghar bhayau haye dhota naa hailey aavauho . baajat toor taruni
Part1-050
नंदराय घर भयौ है ढोटा ना हेली आवौहो । बाजत तूर तरुनी मिलि गावति करि करि मनमें चावो ॥१॥ श्रीफल दूब अक्षत फल रोरी कंचन थार भरावी | कदली खंभ पात नूतनके बंदनवार बँधावों ॥२॥ नामकरनके गर्ग पुरोहित तिनपै वेद पढ़ावों | जनगोविंद नंद घर आनंद बाजत अनंत बधावो ॥३॥
Sarang
Kaanh tihari sohon aaoongi..
NityaPad-294
कान्ह तिहारी सोहों आऊंगी।। सांझ संझोखन खिरक वछरु वन स्थाम समो जो पाऊंगी ॥१॥ जो मेरे भुवन भीर नहीं हवै है तो हों तुमहि बुलाऊंगी ॥ बाल गोपाल बुलावन के मिष ऊंचे स्वरसों गाऊंगी ॥२॥ होत अवार दूर मोहि जेवो उत्तर कहा बनाऊंगी॥ कुंभनदासप्रभु गोवरधनधर अधर सुधा रसप्याऊंगी ।। ३॥॥
Gori
Nirtat raas mandal madhi rung rahee firat baanhjoti gopinamil
Part1-348
निर्तत रास मंडल मधि रंग रही फिरत बाँहजोटी गोपिनमिल कान्ह ॥ पाँइन नुपूर बजावै हस्तक भेद बतावै गिडिगिडि ताथेई ताथेई ताथेई थेई लेत उरप तिरप मान ॥१॥ मुरली धुनिनाद छायौ मनकी गति पंग भई श्रीयमुना थकित रही सुरनर मुनि टस्यौ ध्यान ॥ चिरजीयो श्रीराधा मदनमोहनजू की जोरी ऊपर जनहरिया प्रभु बारत अपनी तन मन प्रान ॥२॥
Adano
Bollie madan gopal juu .. suni maanini .. jinn
Part3-310
बोली मदन गुपाल जू ॥ सुनि मानिनि ॥ जिन करि ऐसौ सयाँन ॥ अरी सुनि मानिनि ॥ आयो सरस बसंत सुनि ॥ रह्यो न काह को मान ॥ आरी सुनि मानिनि ॥ १॥ उत्तरि गृह नीकें घर चल्‍यौ ॥ अरी सुनि मानिनि ॥ संदर दिन-मनि-पीय ॥ अरी सुनि मानिनि ॥ छांडे कछु इक मान जन ॥ सुनि मानिनि ॥ दच्छन ताछिन तीय ॥ अरी सुनि मानिनि ॥२॥ मलय पवन की आजु हीं ॥ सुनि मानिनि ॥ है गई ताती बास ॥ अरी सुन मानिनि ॥ जनु दच्छिन दिस बिरहनी ॥ सुनि मानिनि ॥ लींनीं उसास ॥ अरी सुनि मानिनि ॥३॥ जिहि इह्लि वेलिन माँन छाँडि ॥ सुनि मानिनि ॥ उलही आनि कै पेट ॥ अरी सुनि मानिनि || नाइक द्ुम के कंठ सौं ॥| सुनि मानिनि ॥ कैसें गई है लपेट ॥ अरी सुनि मानिनि ॥४॥ काम गई रजनी भई ॥ सुनि मानिनि ॥ गई रवि मंडल छाई || अरी सुनि मानिनि ॥ थिर चर ए सब रहसि कें ॥ सुनि मानिनि ॥ मिली पियनि सौं जाई।।| अरी सुनि मानिनि ॥|५॥ वह सुनि कानन कांन दे । सुनि मानिनि ॥ कोकिल की कुहूँ कांनि ॥ अरी सुनि मानिनि ॥ आंनि मनौं रत राज कौ ॥ खुनि मानिनि ॥ बज्यौ सीस पै निसांनि ॥ अरी सुनि मानिनि ॥६॥ कूजे कल कोकिला ॥ सुनि मानिनि ॥ कोमल कंठ सुजान || अरी सुनि मानिनि ॥ अटनि चढ़ी मानों मधु बधू ॥ सुनि मानिनि ॥ करति परसपर बात ॥ अरी सुनि मानिनि ॥७॥ और बिहंगम रंग भरे ॥ सुनि मानिनि ॥ करत कुलाहल भारे ॥ अरी सुनि मानिनि ॥ मनु मनमथ कुंजर छूटे ॥ सुनि मानिनि ॥ सौ परचौ बिधु-पुर सौर ॥ अरी सुनि मानिनि ॥८॥ डार डार मिलि मधुप पुंज ॥ सुनि मानिनि ॥ गुंजत सोरभ बाई ॥ अरी सुनि मानिनि ॥ मनौं रति की गत्ति जानि कै ॥ अरि सुनि मानिनि ॥ नूपुर बाजति पाँईड ॥| अरि सुनि मानिनि ॥९॥ त्रिगुन पवन चंचल तुरंग ॥ सुनि मानिनि चढ़चो तिहि राज विदेह ॥ अरी सुनि मानिनि ॥ उड़ी जु पुहप पराग तहाँ ॥ सुनि मानिनि ॥ उड़ी माँनों खुर स्वेह ॥ अरी सुनि मानिनि ॥१०|॥| खग बंदी जन बदत बिरद ॥ सुनि मानिनि ॥ मदन जहां सिस्मौर ॥ अरी सुन मानिनि ॥ तिन में कपटी कहत मानों ॥ सुनि मानिनि ॥ एके तू नह्ठि और ॥ अरी सुनि मानिनि ॥११॥ कुसुम सरासन कर धरैं ॥ सुनि मानिनि || खरे बिष भरे बाँन ॥ अरी सुनि मानिनि ॥ कौ सहि है तीछन खरे ॥ सुनि मानिनि ॥ चढ़े चंद खरसान ॥ अरी सुनि मानिनि ॥ १ २॥ ब्रिंदाबन मिलि रम्य भयौ ॥ सुनि मानिनि ॥ नव कुसुमाकर चारुं ॥ अरी सुनि मानिनि ॥ ज्यौं कुच मंडल जुबति के ॥ सुनि मानिनि ॥ मंडित मंजुल हारू ॥ अरी सुनि मानिनि ॥ १ ३॥ त्तरुन मुकट मनि बाल तू और तो बिनु रह्मौ न जाई ॥ सुनि मानिनि ॥। लाल रसिक मनिराह ।| अरी सुनि मानिनि ॥ कीजे सुफल बसंत में ॥ सुनि मानिनि ॥ “नंददास” बलि जाई ॥ अरी सुनि मानिनि ॥१४॥
Gouri
Sukhad eyama shyam
NityaPad-302
सुखद एयामा श्याम सुखद वृन्दा विपिन सुखद ब्यारू करत सुखद यमुना तीर। सुखद ओदन मांझ सान ताती दार करत मनुहार दोऊ प्रेमरत गभीर ॥।१॥ सुखद पकवान विंजन विविध भातके परोसे ललिता अंग पहेरी चंदन चीर ॥ सुखद (हरिवंस' दृग निरख चित विवस व्है करत बिजनी लिए झारी सीतल नीर ॥२॥
Kanharo
Mill jemat ladili laal douu khata vinjan chaaru sabey sarse hathh
NityaPad-084
मिल जेंमत लाडिली लाल दोऊ खट विंजन चारु सबे सरसे हठ के मनमोहन हेरि रहे निज हाथ जिमायन को तरसे ॥ १।। करकंपत बीच हि छूटि परयो कबहूंक मास मुखलों पर से मनरसको रस जो उपज्यो सुख माधुरि कुंज सदादरसे ॥।२॥।
Saarang
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