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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Bhorbhaye mukhdekh lajaane .. ratiki kellie bellirus sochat | NityaPad-046 | भोरभये मुखदेख लजाने ॥ रतिकी केली बेलिरस सोचत
शोभित अरूनयन अलसाने ॥१॥ काजर रेख बनी अधरनपर ललितकपोल
पीक लपटाने॥ मानों मधुप कंजपर बैठे उडनसकत मकरंद लुभाने ॥ २॥ हीयेहार
अलंकृत बिनगुण आये सुरत रणजीत सयाने ॥ सूरदासप्रभु पांउ धारिये जानतहीं
परहाथ बिकाने ॥।३॥ | Lalit |
Rasamse nandadulare aaye hoe uthhe bhor. aroon nathan bayne atpate | NityaPad-144 | रसमसे नंददुलारे आये हो उठे भोर। अरूण नथन बेन अटपटे
भूषण देखियत अधरन रंग भारे।।१॥
कितववाद कितकरत गुसांई जहीं जाबोहो जाके प्राण पियारे ॥
गोविंदप्रभु पिय भलेंजुभलें आये जान पाये जेसे तनस्याम
ऐसे ही मन कारे ॥ २॥ | Bibhaas |
Nartat gopal sanga gopika millie .. adbhut nutt bhekh dekh | Part1-319 | नर्तत गोपाल संग गोपिका मिली ॥ अद्भुत नट भेख देख
कोटि काम अति विशेष मुरली अधर मधुर सप्रस्वरन सों रली ॥१॥ गावत
पिक कंठ सरस परम रीझ भींझ तान भामिनी सुजान श्रीवृषभानकी लली ॥
बलय नूपुर किकिणी कटि झनकत तत थेई थेई उघटत मुख शब्दावलि ग्रीव भुज
“पिली ॥२॥ बाजत मधुरे मृदंग तताधिलाँग गति सुगंध संग लेत देत ताल रास
मंडली ॥| कोलाहल करत हंस मोर सोर चहूँ ओर भोर भये फूली मानों कंज की
कली ॥३॥ श्रीवृंदावन नवनिकुंज प्रेम पुंज भये हरख निरख तरणि त्नया तीर
चांदनी भली ॥ श्रीबल्लभ चरणारविंद पंकज मकरंद सरस करत दान मानदास
मोहना अली ॥४॥ - | Bhairav |
Mayamoko makhanamishribhave .. | NityaPad-184 | मैयामोको माखनमिश्रीभावे ॥
जो मेवापकवानदेततू मोहिनहीं रुचिआवे ॥|१॥
व्रजयुवती एक पाछेठाढी सुनत स्थामकी बात ॥
मनमनकहतकबहू मेरेघर देखोंमाखनखात ॥।२॥
बैठें जाय मथनि याकेढिंग मैंतबरहूंछिपाय ॥
पाछेआन अचा नकहरिको गहूँओचकाथधाय ॥३॥
राखों कठिनउरोजनकेबिंच तजूँ वेदकुलकान ॥।
सूरदासप्रभु अंतरयामी ग्वालिनमनकी जान ॥|४॥ | Bilawal |
Yashumatiddhimandhankarat baithivaddham ajirathaadheharihansatanenhi | NityaPad-180 | यशुमतिदधिमंधनकरत बैठीवडधाम अजिरठाढेहरिहँसतनेन्ही
देतियानछबिछाजें ॥ चितवतचित रह्योलुभाय शोभाकछुकहीनजाय
मुनिनकेमनहरनको मोहनीदलसाजें ॥९॥ यशुमतिकहेंनाचो लाल देहोंगी
नवनीतलोंदा चलत नृपुररुनझुनांत किंकिणी कलबाजें ॥ गावतगुण सूरदास
सुखछायो भूअकाश नांचत त्रिलोकीनाथ माखनकेकाजें ॥। २।। | Bilawal |
Kaanh kamini sanga raas mandal madhya yuvati naachat tarani tanyakule .. | Pustak1-337 | कान्ह कामिनि संग रास मंडल मध्य युवती नाचत तरणि तनयाकूले ॥
उदित मन््मथ भाव सरस रंजित बदन देख मुख युवति जल कमल फूले ॥१॥.
क्वणित मधुर मुरलिका धकित मृगलोचनी शिधिल कटितट नीवी वर दुकूले ॥
कनक बेलि मानों नव तमाल बिलसत रही लपटाय आनंद मूले ॥२॥
कोटि कंदर्प लावण्य प्रकटित रूप संगीत सुरत हिंडोल झूले ॥
कृष्णदासनिनाथ लालगिरिधवरन निरख नभ सघन उड्डराज भूले ॥३॥ | Gori |
Hari hii bulaavo bhojan karat... khelat vaar bhaee manmohan giri | NityaPad-084 | हरि ही बुलावो भोजन करत।॥ खेलत वार भई मनमोहन गिरि
गोवर्द्धनधरन ॥ १॥। बेठे नन््द बाट चाहत हे ताती खीर स िराय ॥| बालक सकल
संग ले आयो कहत जसोदा माय ॥३॥ आज दूध रंधन अधिकाई सुनहो कुंवर
कन्हाई ॥ परमानन्द प्रभु बल समेत तुम बेग चलो उठ धाई ॥ ३ | Dhanshree |
Sukhad yamuna pulin sukhad navkunjamein sukhad syama syaam karat byaru sukhad . | NityaPad-302 | सुखद यमुना पुलिन सुखद नवकुंजमें सुखद स्यामा स्याम करत ब्यारु सुखद ।
सुखद चंदन अंग सुखद लेपन करि सुखद भूषण कुसुम पहेरि दोउ तन सुखद ।॥।१॥
सुखद बिजना ढुरत मलय चहुँ दिश सुखद सुखद गावत अलि कोकिलादि सुखद ।
सुखद गिरिधरन रुचि सुखद पयपात्र भरि सुखद लाई
सुखद ललित ललिता सुखद ॥। २।। | Kanharo |
Muralike aise dheng maaee .. jabatain shyam parey bush vaake hamahin | Part1-287 | मुरलीके ऐसे ढेंग माई ॥ जबतैं श्याम परे बश वाके हमहिं
सबन बिसराई ॥१॥ अपनौ गुन यह प्रगट करायौ निदुर काठकी जाई ॥
अपनी आग दहै कुल अपनो सो गुण गुन पछिताई ॥२॥ जैसी निटुर आपने
गा औरन की क्यों माने ॥ सूर बड़ी यह आप स्वारथी निपट राग कर
गानें ॥३॥ | Dhanashri |
Baithi rahee raadhe sakumari . | Part2-251 | बैठि रही राधे सकुमारी ।
बूझति है वृषभानु की महरी क्यों न जेंवति बाबा की प्यारी ॥१।।
आजु हमारें गौरी को ब्रतु ताकी विधि तोही पें पाऊं।
सुंदर सुभग सलौनौ ढोटा ताकों पूजि हों हाथ जिंबाठँ ॥२ ॥
ऐसौ ढोटा नंदराई को ताकों हों अबही ले आऊं। तुम जानों सयानी मईया !
ब्ेगि चलहु चरननि सिर नाऊँ॥३ ॥
सुनि री जसोमति ! कुँवर आपनो बेगि पठै हों न््योंतनि आई।
'परमानंद' स्वामी सब जानत देखि-देखि तिहि सब निधि पाई ॥४॥ | Saarang |
Bhojanko bolat mehtari | balsamet aao merey mohan baithe | NityaPad-075 | भोजनको बोलत महतारी | बलसमेत आओ मेरे मोहन बैठे
नंदपरोसी थारी ॥ १॥ खीर सिरात स्वाद नहिं आवे वेग ग्रास तुम लेहो मुरारी |
हितवत चित्तनीकें कर जेंबो पाछें कीजे केलि विहारी ॥२॥ अहो अहो सुबल
अहो श्रीदामा बैठो नेक करो मनुहारी ॥ परमानंददासकी जीवन मुख्यव्यंजन दे
जाहुँ बलहारी ॥। ३॥। | Dhanshree |
Sheetal khaskhaano suhavano munn manyo amrit roop adhar aanyo taa madhya baithe balkrishna | NityaPad-248 | शीतल खसखानो सुहावनो मन मान्यो अमृत रूप अधर आन्यो ता मध्य बैठे बालकृष्ण
सुनत राग वास बरसानो । छूटत हें फुहारे नाना विध होद भरे बादर की छबि
कारे कारे जामें वर्षा निर्तत मोर अखारे कोकिला सोर करत सुख बरखानों ॥।९॥
अतर और गुलाब अरगजा लाग्यो सुगंध समीर बहत मंद्र मंद विजना करत
सखी सब साज लिये नेनन सरसानो । कबहुक जल ले ले छिरकत शीत लगत
मानों केलि करत फिरत गावत दोउ तान तरंग ब्रजाधीश प्रभु तन मन धन हरखानो ॥२॥ | Saarang |
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