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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Aavaben maaee vrajalalana dukhmochan .. godhansang | NityaPad-105 | आवबें माई ब्रजललना दुःखमोचन ॥ गोधनसंग
क्वाणितकरमुरली शरद कमलदल लोचन॥। १॥। कटितट लालकाछिनी काछें
ओढें पीत पिछोरी ॥| आपन हसत हसावत ग्वालन राग अलापत गोरी ।।२॥।
तुलसीके पत्र पहुपकी मालागुहि ग्वालन पहिरावें ॥। बालगोपाल नंदजूकेढोटा
प्रधुरिसी वेणु बजावें ॥३॥ बरषत कुसुम देवमुनिहरषत मोही ब्रजकीनारी ॥।
कृष्णदासप्रभु रसिकमुकुटमणि लाल गोवर्धनधारी ॥।४॥ | Gori |
Horry khelati hain vraj nand ladaiton laal .. | Part3-126 | होरी खेलति हैं ब्रज नंद लडैतों लाल ॥
चोवा चंदन अरू अरगजा कंठ सौहैं मोतिन माल ॥ १॥ कोऊ गुलाल केसरि
भरि लीये कोऊ कंचन थाल ॥ एकु नाँचति एकु मृदंग बजावति गावति
गीत रसाल ॥२॥ छिपति फिरति हैं कुंजन महियाँ हा हा करति भई बिहाल ॥
“चतुरभुज' प्रभु पीय गरे लगाई लै रीझि दे उर माल ॥३॥ | Bilawal |
Bharoso shrivallabhahiko bhaari .. | NityaPad-349 | भरोसो श्रीवल्लभहीको भारी ॥
काहे कोरें मनभटकत डोलत जोचाहत फलकारी ॥। १॥|
श्रीविद्दलगिरिधर सबबालक जगत कियो उद्धारी ।।
पुरुषोत्तमप्रभु नाममंत्रदे चरणकमल सिरधारी ॥२॥। | Bihaag |
Barrin baansuri toy bajat naan aavai laaj .. jalthal anil | Part1-285 | बैरिन बाँसुरी तोय बजत न आवै लाज ॥ जलथल अनिल
थकित भये तें पायौ है सुखराज ।!१॥ इतनौ सो पौंगा बाँसकौ री निकस्यो
घरती फोरि ॥ जो मैं ऐसौ जानती तोय डारती तोर मरोर ॥ बैरिन.॥२॥
इतने तें इतनी भई री सींच सुधा रस नीर ॥ तोहि दया आवै नहीं री तू निपट
कठिन बेपीर ॥बैरिन.३॥ और न या मुखकौं लगैरी तू जो रही मुख
लागि॥ दीजै कहा उराहनौ हेली आपुस में की आगि ॥बैरिन.॥४॥ मेरे
पीयसीौं क्यों रची क्यों अधरन रस लेहि ॥ हों वारूँ तेरे नेहकीं मेरे कंत बिसारयौ
गेह ॥बैरिन.॥५॥ तपसी तप खंडन भये री सुरनर मुनि आधीन ॥ तीन
लोक थुनि है रही तैं कठिन दुहाई दीन ॥बैरिन.॥६॥ कामनगारी बॉँसुरी
तैं मोहे त्रिभुवनराय ॥ कामहीन सब तैं किये दीये अचल चलाय
॥बैरीन.॥७॥ अनहद नाद बजावहीं री बिन फंदा बिन डोर ॥ खग मृग
सब पिंजर किये तें लीयौ चिते चितचोर ॥बैरिन.।८॥ मारग राख्यो रोकिकें
जल जमुना उलट बहाय ॥ जो न भई सो तैं करी तैं सिंघ निकट प्याई गाय
।बैरिन.॥९॥ सुरनर सब विथकित भये री तो बाजनके चाय ॥ टेढे है
रहे रासमें हरि ठाड़े एकही पाय ॥बैरिन.॥१०॥ जो मैं ऐसी जानती तोही
सों अनुराग ॥ मोय खेद या बात कौरी तोय लगन न देती लाग
॥बैरिन.॥११॥ सप्त सुरन बसी बजी कालिदी के तीर ॥ श्रवनन सुनत
सब गोपिका सुर मुड़त न जान्यो चीर ॥बैरिन.॥१ २॥ पतिव्रता पति छांड़िकें
री उलट बसन तन आनि ॥ एक छाँड़े एक सँँग लीयें इक मारें मनसिज बानि
॥बैरिन.॥१ ३॥ क्ृष्णदास प्रभु राखियो श्रीगोवरधन बाम ॥ मुरली तू
मुख पाटवी तैं मोहे सुंदरश्याम ॥बैरिन.॥१४॥ | Bilawal |
Naan jaano kinn kaana bhareri sakhee preetam anat dhareri .. rasake | NityaPad-113 | नां जानो किन कान भरेरी सखी प्रीतम अनत ढरेरी ॥ रसके
समय कहें जोमोसो तेहूं बोल विसरेरी ॥९॥॥ केसें कर सचुपावें प्राण ए विरही
अनल जरेरी ॥ रसिक प्रीतम अबमिलवों केसें ओरनके पालेजु परेंरी ॥ २।। | Kedar |
Buddy buddy ankhiyaan neendbhari .. | NityaPad-056 | बडी बडी अँखियां नींदभरी ॥
लाल लाल डोरे कजरारी कोरे पियहिय माँझ गडी ॥।१॥
सोचत रेन चेनकी बातें पीक लीक छबि छाप गडी ॥२॥
गोविंदप्रभु पिय बचन क हतहें बहुबिध लाड लडी ॥३॥ | Malkos |
Rasik fagu khelai naval nagari saun saras barr | Part3-276 | रसिक फागु खेलै नवल नागरि सौं सरस बर
ऋतुराज की ऋतु आई ॥ पवन मंद अरविंद औरू कुंद बिकसे विषद चंद
पीय नंद सुत सुखदाँई ॥९१॥ मधुप टोल मृदु बोल सँग-सँँग डोले पिकन
बोल निरमोल ख्रुति चारू गाईं ॥ रचित रास सौं बिलास जमुना पुलिन
में सघन ब्रिंदा विपुन रही फूलि जाई ॥२॥ कनक अंग बरनी सुकिरनी
बिराजे गिरिधर नव जुबराज गजराज राई ॥ जुबती हँसगामी मिले 'छीत
स्वामी” क््वनित बैनु पद रैनु बड़भाग पाई ॥३॥ | Malshree |
Arie yeh cone chhabilo yaa key sheesh pagaa .. saanware varan anga anga | NityaPad-162 | अरि येह कोन छबीलो या के शीश पगा ॥ सांवरे वरन अंग अंग
सुंदर धरच्ो हे शीश पगा ॥१॥ कुटिल अलक बदन पर राजत कुंडल जटित
नगा॥ मेरो मन अटक्यो वा मूरति बांध्यो प्रेम तगा ॥२॥॥| श्याम समें गायन के
पाछें सखा मंडली संगा ॥ कृष्णदास गिरिधर जुकी बानिक दिनदिन नव नव
रंगा ॥ ३॥ | Gori |
Bhor bhayein bal jaauun jaago nandananda .. tamchar khaga karat ror | NityaPad-017 | भोर भयें बल जाऊं जागो नंदनंदा ॥ तमचर खग करत रोर
अवनीपें होत सोर तरणिकी क्विरण तपें चंद भयो मंदा ॥१॥
भयो प्रात रजनीगई चकवी आनंद भई वेग मोचन करो सुरभीकुल फंदा )।
उठो भोजन करो मुकुट माथें धरो सखिन प्रति दरस देहो रूपनि धि कंदा ॥२॥
त्रिया दधिमथन करें मधुरे स्वर श्रवण धरें कृष्णगुण विमल यश कहत आनंदा ॥
निजजननयन आधार जगजीवनगुणन गुणकथनकों कहत श्रुति छंदा ॥। ३॥। | Bhairav |
Maan tajou bhajau kanta ritu vasant aayou .. vann | Part3-356 | मान तजौ भजौ कंत ऋतु वसंत आयौ ॥ वन
सोभा निरखि निरखि पथिकन सुख पायौ ॥१॥| फूल बनराई जाईं मधुकर
लपटायौ॥ अँब मोर ठोर ठोर ब्रिंदाबन छायौ ।| २।। अति सुगंध बह॒ति वायु बस
पराग उडायौ || उनमद झंकार करति विरही जन डरायौ ॥३॥ तिहारै हित
कारन मैं यह सब्द सुनायौ॥ 'रसिक' प्रीतम जाई मिलो जुवतीन मनभायौ ॥४॥
| Basant |
Dekho dharkan nava rung pagki .. | NityaPad-226 | देखो ढरकन नव रंग पागकी ॥
वामभाग वृषभान लाडिली चितवन अति अनुराग की ॥ १॥ सुखसागर गिरिधरन
छबीलो मूरति परम सुहागकी ॥ मदनमोहन राधेजूकी जोरी गोपालदासके
भागकी ॥२॥| | Saarang |
Aaj vrajrajkau lalan thaadho sakhee lalit sanket butt nikat | Part1-327 | आज ब्रजराजकौ ललन ठाढ़ो सखी ललित संकेत बट निकट
सोहै ॥ देखरी देख अनिमेष या भेखकों मुकुटकी लटक त्रिभुवनहिं मोहै ॥१॥
स्वेदकन झलक कछु झुकीसी पल्रक प्रेमकी ललक रस रास कीये ॥| धन्य बड़भाग
वृषभान नृप नंदिनी राधिका अंस पर बाहु दीये ॥२॥ मनि जटित भूमि पर
रही नवलता झूमि कुंज छबि पुंज बरनी न जाई ॥ नंदनंदन चरन परसि ह ित
जानकें मुनिन के मनन मिलि पाँति लाई ॥३॥ महा अद्भुत रूप सकल रस
भूप यह नंदनंदन बिना कछु न भावै ॥ धन्य हरिभक्त जिनकी कृपातें सदा
कृष्णणुन गदाधर मिश्र गावै ॥४॥ | Khat |
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