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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
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Srivallabh prabhu karna sagar jagat ujagar gaaie .. | Part3-364 | श्रीवल्लभ प्रभु करना सागर जगत उजागर गाइए ॥
श्रीवललभ कै चरन कमलकी बलि बलि जाइए ॥ १॥
वल्लभी सृष्टि समाज संग मिली जीवनकौं फल पाइए॥|
श्रीवल्लभगुन गाइए याहि तैं 'रसिक' कहाइए ॥२॥ | Basant |
Chandan bhawan mein karat haye byaru paros dharee haye kanchan thaari. | NityaPad-301 | चन्दन भवन में करत है ब्यारू परोस धरी है कंचन थारी।
हँस हँस जात देतमोहन कर बहु विंजन जसुमति महतारी ॥१॥
चंदन अंग अंग लेप किये तन लागतहै सुखकारी नंददास चरनरज सेवक तन मन डारत वारी ॥२॥ | Iman |
Otyo doodh siro curr rakhyo .. | NityaPad-305 | ओट्यो दूध सीरो कर राख्यो ॥
तामें मधुर मलाई अधिक रुचि गिरिधरलाल स्वादसों चाख्यो ॥१॥
पूछत कहां ते लाई सांझ समे धोरी दुही
राख्यो श्री बिद्डल गिरिधरनलाल' सो प्रेम प्रीतसों हँस हँस चाख्यो ॥२॥ | Kanharo |
Parav dasahara jaani jasomati laal ubati nhavaavahi .. | Pustak1-314 | परव दसहरा जानि जसोमति लाल उबटि न्हवावही ॥
सेत वागो लाल सूथन सेत कुलही बनावही ॥१॥
आभूखन पहेराये हितसों काजर : नैन लगावही ॥
नंदराय बुलाव लिये अयैयां तें आवही ॥२॥
अश्वको सिंगार लाये विप्र वेद पठावही ॥
तिलक सिर धरन जवारा यह बात घर घर जावही॥३॥
बारी तिबारी चोगनी भीतर देख हँस मुसक्यावही ॥
अश्व चढ हरे प्रेरि लाये हरखि मंगल गावही ॥४॥
आये लिवाये वधाय लीने नंद हँसि लपटावही आरती
कर माई जसोमती द्वारकेस बल जावही ॥५॥ | Poorvi |
Janam sub baatan beet gayo. | NityaPad-371 | जनम सब बातन बीत गयो।
दसबरस खेल्यो लरकाई पीछे कामनी मोहरचओ।
त्रीस भयो म्रायाके पीछे देशविदेश छयो।
चालीस वरसमें राज्यजु पाये उपजत लोभ नयो ॥
सूकी त्वचा कमर भये टेढ़े सब ठाटभयो लरिका बहू कह्मों नहीं मानें बूढों शठजु भयो ॥
नहिं हरिभजन गुरुकी सेवा नहीं कछु दान दीयो।
सूरदास मिथ्या तन बीत्यो जमने खेंच लीयो | | Bihaag |
Chalari naval nikunj mandir main bunn basant baithe | Part3-037 | चलरी नवल निकुंज मंदिर मैं बन बसंत बैठे
पिय प्यारी ॥ बागो पीत रँग बन्यों भूषन लाल रँँग छबि न््यारी ॥१॥
सारी सुरंग, सोहै छबि नीकी कँचुकी पीत प्रीति अति भारी ॥
करि दरसनसुख केलि 'सरस रंग” कुसल बिचिन्न रँजीत सुखकारी ॥२॥ | |
Phoole phooleri chalidekhanjaiye navavasant dwumveli .. | Part3-060 | फूले फूलेरी चलिदेखनजैये नववसंत द्वुमवेली ॥
नवरंग मदन गोपाल मनोहर नवराधिका नवकेली ॥ १॥ ऋतु वसंत कुसमाकर
सजनी मत्त मधुप धुनि सुनि हेली ॥ कानन मुदित जुबती मंडलमें खरजादिक
ताननमेली ॥२॥ विविध विहार विविध पटभूषन विविध भांति खेला खेली ॥
सुनि कृष्णदास सुरति रस सागर गिरिधर पिय विहरत जु पेली ॥३॥ | Basant |
Gaaven dhamaar taana tarang vaajen upang chung khelat | Part3-340 | गावें धमार तान तरंग वाजें उपंग चंग खेलत
फाग रंगे ॥ केसर चोवा गुलाल ले आईं व्रज की बाल कंचन तन विविध
बसन मोतिन भर मंगे ॥१॥ सोंधो ले मुख लगाय नयनन काजर सुदाय
परसत सब अंग सुधा सिंधु मिली गंगे ॥ वल्लभ पिय रस विलास केलि
कला सुख निवास तन मन थ्वन नोछाबर वारों कोटि अनंगे ॥२॥ | Adano |
Taruni nirakh hari prati anga.. kouu manirakh nabh | Part2-364 | तरुणि निरख हरि प्रति अंग॥ कोऊ मनिरख नभ
इंदु भूली कोऊ चरणयुग रंग॥१ ॥ कोऊ निरख नूपुर रही थक कोऊ
निरख युगजान॥ कोऊ निरख युगजंघ हरिके करे मन अनुमान ॥२॥
कोऊ निरख पटपीत काछनी मेखला रुचिकार ॥ कोऊ निरख छबि हृदय
नभकी डारत तन मन वार॥३॥ चारु रोमावली हरिकी चारू उदर
सुदेश ॥ मानों अलिश्रेणी विराजत बने एकही वेश ॥४ ॥ रही इकटक
नारि ठाढी करत बुद्धि विचार॥ सूर आगम कियो नभते यमुना
सूक्षमधार ॥५ ॥ | Sorat |
Aaj badhaai haye barsaanen | punch shabd baaje suni surmuni dekhan | Part1-190 | आज बधाई है बरसानें | पंच शब्द बाजे सुनि सुरमुनि देखन
मन तरसानें ॥१॥ कीरति कूखि चंद्रमा प्रगटी श्रीशाधाजू पग दरसानें | ललित
निर्कुज बिहारिनके उर रहे रूप सरसानें ॥२॥ | Saarang |
Vijay dashmi param suhai .. godhan aguwa diyau pathaai | Part1-315 | विजय दशमी परम सुहाई ॥ गोधन अगुवा दियौ पठाई
॥१॥ गोप सकल बैठे हैं अथाई ॥ कुशल मनावी शुभदिन माई ॥२॥
ब्रजरानी व्रजराज कुँवरकों कीरति ललिता न््योंत बुलाई ॥ आज हमा रें बड़ी पर्व
है तुम सब जेंवन आवौ धाई ॥३॥ करत सिंगार गिरिधरनलालकौ चंबेली तेल
सरस सुखदाई ॥ सुधन पीत श्वतवागौ खुल्यौ लाल पाग शिर पर पहराई ॥४॥
काजर ऑजि भौंह बिंदुका दै तृणतोरत और लेतबलाई ॥ रसिक प्रीतम प्रभु
विजय कियौ वृषभान कुँवरि मन भाई ॥५॥ | Saarang |
Mangal aarti gopalki maaee .. | NityaPad-131 | मंगल आरती गोपालकी माई ॥
नित्यप्रति मंगल होत निरख
मुख चितवन नयन विशालकी ॥१॥
मंगल रूप स्याम सुंदरको मंगल भुकुटी सुभालकी ॥
चतुर्भुजप्रभु सदा मंगलनिधिबानिक गिरिधरलालकी ॥।२॥ | Bhairav |
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