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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Raas mein russ bharee radhika aavai ..
Pustak1-339
रास में रस भरी राधिका आवै ॥ बाहु पिय अंस धरि हंस गति लटकती कुच कनकघट रसिक मन सुहावै ॥१॥ तिरप तांडव लास्य उरप सुलपनि भेद निर्तत पीय संग मधुर कल गावै || लोल कटि देश मूरति रत्न मेखला नूपुर क्वणित हस्तक दिखाबै ॥ चपल मोहे नैन रुचिर मुसिक्यावनी रूप गुनरासि प्रानपति रिझ्ञावै ॥ वृषभान नंदिनी गिरिधरन नंदसुत चरन रेणु नित तहाँ कृष्णदास पावै ॥३॥
Gori
Jarr jaori laaj merein aisee cone kaaj aavein kamalanayan neeke
NityaPad-113
जर जाओरी लाज मेरें ऐसी कोन काज आवें कमलनयन नीके देखन न दीनें। वनतें आवत मारग में भेटभई सकुच रही इन लोगनके लीनें ॥ १॥ कोटि यतन कर रहीरी निहारवेकू अंचराकी ओट देदे कोटि श्रमकीने | नंददासप्रभु प्यारी तादिनतें मेरे नयना उनहींके अंगसंग रंगरस भीनें ॥ २।।
Adano
Piya sanmukh gavanat gaj gamini ..
Pustak1-340
पिय सन्मुख गवनत गज गामिनी ॥ साज सिंगार पहर पट भूषण नखसिख अंग अंग अभिरामिनी ॥ यमुना पुलिन सुभग वृंदावन तैसीय सुभग शरद की जामिनी ॥ कुंजकुंज प्रफुलित द्वमवेली देखत प्रेम मगनभर भामिनी ॥२॥ अति उदार गिरिधरन रसिक पिय भुजभर भेंटत वह कामिनी॥ चत्रभुज प्रभु गिरिधर ऐसे शोभित मानों नवधन में दामिनी ॥३॥
Rayso
Douu coole khambh tarang seedhi sriyamuna jagat baikunthanishreni ..
NityaPad-009
दोऊ कूल खंभ तरंग सीढी श्रीयमुना जगत बैकुंठनिश्रेनी ॥ अति अनुकूल कलोलनके भर लियें जात हरिके चरणन सुखदेनी ॥१।। जन्मजन्मके पाप दूरकर काटत कर्मधर्मधारपैनी । छीत-स्वामि गिरिधरजूकी प्यारी सांवरेअंग कमलदलनैनी ।।२॥॥
Bibhaas
Srivallabhaki houn balihari.
Part2-297
श्रीवल्लभकी हों बलिहारी। सबहिनकों बचनामृत सींचत कहि अंतर दुखहारी ॥१ ॥ नवनिकुंज मंदिरकी लीला नित्य विहार विहारी॥ रसिक मनकी आसा पूजी होंतों शरण तिहारी ॥२ ॥
Sarang
Khele nandako nandan horry apane rangeele vraj mein ..shru0..
Part3-274
खेले नंदको नंदन होरी अपने रंगीले ब्रज में ॥श्रु०॥ बनेहें ग्वाल बाल संग जनु अनेक मेन ॥ आपन मदन मोहन सोहन कहा कहुं छबि अन ॥१॥ उतते आईं युवती बुंद चंदमुखी एक दांई ॥ चंचल तन की दमकजनु दामिनि पट झांई ॥२॥ जुरेहें कंचन चोहटें अपने अपने टोल ॥ आनंदघन ज्यों गाजत राजत बाजत दुंदुभी ढोल ॥३॥ सुरमंडल किन्नरी डफ बाजत रंगभीने ।। बीचबीच बसुरियावीस कीनेहे मनदीने ॥४॥ बजत चटसों पटतार ग्वार गाबत संग ॥ नाचत हैं मधु मंगल संगीत बढ्यो है अतिरंग ॥५॥ कुंकुम चंदन बंदन साख मृगमद मथिघोरी ॥| छबिसों छबीलो भरत डोलत बोलत हो हो होरी ॥६॥ रंग रंग की छींटन भरी सोहत त्रियनवेली ॥ वरन वरन फूलन मानो फूली आनंद वेली ॥७॥ घुमडकर गुलाल को तामें दुरदुर आवे ॥ भरभागत हरिकों भामिनि दामिनी सी छबि पावे ॥८॥ घेरलियें हैं नवल त्रियन सांवरे सिर्मोर ॥ यह छबि सों भ्रमत जेसें कमल कोश भोंर ॥९॥ पकरें हें छबिसों आन मोहन राधिका वरजोरि ॥ कहीन परे प्रेमकी छबि छाईं झकझोरा झकझोरि ॥१०॥ न्हे ठाडे विवश सबे काइून रही संभार ॥ छूटी हैं छबिसों अलकलर टूटेहें मुक्ताहार ॥ १ १॥ वा लुकत लाजपें अति प्रेमकी उरेंड ॥ नंददास निधिन रुकत बारू की ड॥8२॥
Maru
Bhojan karat shyam kunjanmein .. gwalan chhaak awaar bhaee tou hoo sakuch naan aaeen manmein ..1.. jamuna
NityaPad-208
भोजन करत श्याम कुंजनमें ॥ ग्वालन छाक अवार भई तो हु सकुच न आईं मनमें ॥१॥ जमुना जल भरते भई देरी चली थार ले दोऊ करनमें ॥ सुंदर पाक सिद्ध कर लाई लेहो लाल भुजनमें ॥२॥ भली भांति भोजन करवायो जल भर दियो घटनमें ॥ ओक मांड जल पीवत 'रसिकराय_ दई सेनन नेननमें ।३॥
Saarang
Shwet paradani.. aajati shobhit haye
NityaPad-254
श्वेत परदनी॥ आजअति शोभित हे ब्रजनाथ॥ श्वेतपरदनी अरु उपरना चंदन लाग्यो गात॥।१॥ मोतीन माल बिराजत उरपर लिये कमलदल हाथ।॥ सूरदास उपमा कहा बरनों गिरि गोवरधननाथ |
Saarang
Sohilo suhaayo aaj..
Part2-254
सोहिलो सुहायो आज॥ घरघर मंगल होत अवधपुर भयेहें मनोरथ काज ॥१॥ फूली फिरत सुवासिन दाई अति आनंद महाराज॥ रघुकुल तिलक भानुव्हे॑ आये तुलसीदास शिरताज ॥२ ॥
Bilawaal
Birajat douu usirmahal chhootat fuhaare aagein neeke .. lalitaadik sakhee gaaven
NityaPad-246
बिराजत दोऊ उसीरमहल छूटत फुहारे आगें नीके ॥ ललितादिक सखी गावें बजावें रसकी चहलपहल ॥१॥ जबप्यारी फल ले धरत धारपर थिरहवे रहत मानी चहल ॥ चतुर बिहारी गिरिधारी प्यारीकी सखी भूली विजनाकी टहल ॥२॥
Saarang
Rawal radha pragat bhaee . shrivrishbhan gope guru way kull prayati
Part1-194
रावल राधा प्रगट भई । श्रीवृषभान गोप गुरु वे कुल प्रयटी अति आनंद भई ॥१॥ रूपरासि रसरास रसिकनी नव अंकुर अनुराग नई । चिरजीवो चतुर चिंतामणि प्रगटी जोरी पुन्यमई ॥२॥ गुण निधान अति रूप रसिकनी करत ध्यान गिरिधरन सई। च॒तुर्भुजप्रभु गिरिधर यह जोरी त्रिभुवन शोभा तोलि लई ॥३॥
Saarang
Namo devi yamune namo devi yamune harr krishna
Part2-339
नमो देवी यमुने नमो देवी यमुने हर कृष्ण मिलनांतरायं।। निजनाथ मार्ग दायिनि कुमारी काम पूरिके कुरु भक्तिराय॑ ॥ ध्रु. ॥ मधुपकुल कलित कमलावलीव्यप देश धारित श्रीकृष्ण युत भक्त हृदये। सततमति शयित हरिभावना जाततत्सारूप्य गदित हृदये ॥ १ ॥ निजकूल भव विविध तरु कुसुमयुत नीर शोभया विलसदरलि बृन्दे ॥ स्मारयसि बम सरसमीशव पुरानंद कंदे॥२॥ उपरिवलदमल कमला परिमलित जल भटेणामुना॥ ब्रज युवति कुचकुंभ कुंकुमारुणमुरः स्मारयसिमार पितुर ध्ुना॥३ ॥ अधिरजनि हरि विहतिभीक्षितुं कुवलवाभिधसुभग नयनान्युशति तनुषे ॥ नयनयुगमल्पमिति बहुतराणि च तानि रसिक तानिधि तयाकुरुषे ॥४ ॥ रजनिजा गरज नितं राग रंजित नयन पंकजै रहनि हरिमीक्षसे॥ मकरंद भव मिषेणा नंदपूरिता सततमिह हर्षाश्रुमुंचसे ॥५ ॥ तटगतानेकशुक सारिका सुनिगण स्तुत विविध गुण सीधु सागरे॥ संगता सततमिह भक्तजन तापहति रासरस सागरे ॥६ ॥ रतिभर श्रमजलोदित कमल परिमल ब्रजयुवतिजन विह्ृति मोदे ॥ ताटंकचलन सुनिरस्त संगीतयुत मद मुदित मधुपकृत विनोदे ॥७॥ निज ब्रजजनावनायत्त गोवर्धने राधिका री ह कमले ॥ रतिमतिशयित रस विट्ठुलस्थाशु कुरुवेणु निनदाव्हन सरले ॥८ ॥
Kaafi
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