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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Manini maan nihori ..
NityaPad-120
मानिनी मान निहोरी ॥ हों पठई तोहि लेन सांवरे चलरी गर्वकर थोरो ॥१॥ कुंजमहल ठाढे मनमोहन चितवत चंदचकोरो ॥ हरी दासके स्वामी श्यामा कुंजविहारी चलोरी होतहें बोरो ॥२॥
Kedaro
Jaakon tum angikar kiyo tinake koti vighn
Part2-333
जाकों तुम अंगीकार कियो तिनके कोटि विघ्न हरिटारे अभयदान भक्तनकों दियो ॥१ ॥ बहु सनमान दियो प्रल्हादे सवही निशंक जियो॥ निकसे खंभफारकें नरहारि आपुन राखलियो ॥२॥ दुर्वासा अंबरीष सतायो सो पुन शरणगयो ॥ प्रतिज्ञा राखी मनमोहन फिर उनहीपें पठयो ॥३ ॥ मृतक भये हरि सबे जिवाये दृष्टिहू अमृत पियो॥ परमानंद भक्तवश केशव उपमा कोन बियो ॥४ ॥
Kanharo
Hailey navanikunj lilarus pureet reet srivallabh tunn munn
Part2-314
हेली नवनिकुंज लीलारस पुरीत रीत श्रीवललभ तन मन मोरे॥ अंगअंग विपिन छबि निधान घन दुति फल फल प्रती दोरे ॥१ ॥ करत प्रवेश बिरह बन्ही सुत भूतल बहोत ईकठोरे ॥ पद्मनाभ मथुरेश विचारत लक्ष्मणभट सुत ओरे ॥२ ॥
Hameer
Tuu gopal bollie chala begg mrugalochani nutber girirajdharan mudit rasarange ..
Pustak1-358
तू गोपाल बोली चल बेग मृुगलोचनी नटबर गिरिराजधरन मुदित रासरंगे ॥ सप्तस्वरन बेणुनाद अद्भुत झपताल मिल्यौ गावत केदारो राग युवति यूथ संगे ॥१॥ सुरत दैनकौं कुमारि नागरी बिचित्र नारि और नॉही त्रिभुवनमें मोहनी सुधंगे ॥ माचत पिय मुरजादिक लेत तान तत थेई नाहिंन रस सच्यौ जात बीना उपंगे ॥२॥ उरप तिरप लेत मान निरख थके सुर विमान सघन चंद बिथकित भयौ रूप भान भंगे ।। कृष्णदास स्वामिनी मनोज भेख राधिका रसिक कंठ लाय लई सुखद अंगअंगे ॥२॥
Kedaro
Sriballabh devko bal merein.. oranate huun neck naan
Part2-285
श्रीबल्लभ देवको बल मेरें॥ ओरनते हुं नेक न डरिहों परि रहों इनके पद नेरें॥१ ॥ एक बल मोहि आनि त्योहें जे श्रीवल्लभ के चेरे ॥ श्रीवल्लभ सम भयो न व्हेहे श्रीवल्लभ कहे टेरे ॥२ ॥
Bilawal
Pratham samaaj aaj vrindavan vimharatlal
Part3-012
प्रथम समाज आज वृंदावन विंहरतलाल बिहारी ॥ पांचे नवल वसंत वृंदावन उमगि चलीं ब्रजनारी ॥१॥ मंगलकलश लियें ब्रजसुंदरि मधि वृषभान दुलारी ॥ फलदलजुर नवनूतमंजुरी कनिक कलश सोभारी ॥२॥ गावतगीत बजावत वाजे मेनसेन अनुहारी ॥ दरसपरस मनमोद बढावत राजतछबि भरभारी ॥३॥ उडत गुलाल अबीर कुंकुमा भरिकेसरि पिचकारी ॥ छिरकत फिरत छबीले गातन रूप अनूप अपारी॥४॥ विविध बिलास हास रस भीने इत प्रीतम उतप्यारी ॥ हित हरिवंस निरखि मुख सोभा अखियां टरत न टारी ॥५॥
Basant
Srivrajrajken hoe anand mangal bheer . dess deske jaachak
Part1-132
श्रीव्रजराजकें हो आनंद मंगल भीर । देस देसके जाचक आये पढ़त बिरद आभीर ॥ध्रु.॥ एक ढाढ़ी सारों पाली । बोलन सीखई मानो आली । खेचरी चरुवा जस गायों । उन लियोौ है आपन मन मायौ ॥१॥ एक मैना मोद बढ़ावै | जसुमति की कूख मल्हावै । वे नंदराय भवन भावें । वे दान बोहोत विधि पार्वें ॥२॥ एक सूवा हाथ पढ़ायौ । जसुमति हों सुजस सुनायी । वह नंदराय मन भायौ । सुक कंचन चोंचु मढ़ायो ॥३॥ एक मोर नचावत आये । उन कुहुकि कुहुकि जस गाये । वे व्रजपति निकट बुलाये । वे दान बोहोत बिधि पाये ॥४॥ एक तुरंग नचावत आये । गोपनकों सुजस सुनाये । वे नंद गोप मन भाये | मणिमाला तिनहिं दिवाये | एक गज चढ़ि ढाढ़ि आये । वे नाचत अति मनभाये । वे बेस अनुपमा पाये । नख शिखलों पहिराये ॥६॥ एक मृगछौना गृही आन्यौ | नखशिखलों छबिसों बान्यों । वह नंद चरन पर लोटें । सबगोपनके मनमोटें ॥७॥ एक कटिजरकसी पट बांधे । बनचर थरि लायौ काँधे | वह लै बलाय तृन तोरें | सब गोपनके मन मोरें ॥८॥ एक हंस नचावत आये । वे ढाढ़ी परम सुहाये । वे हँसिकेँ निकट बुलाये । गजमोति तिनहिं चुगाये ॥९॥ एक नाचत तंबक तंबे । डग धाई धरत पग लंबे । वे नंदराय मन भाये । करटोडर तिनहिं दिवाये ॥१०॥ एक नट विद्या बहु खेलें | गरें डारि भुजा भुज मेलें | वे नंदराय मन भाये । गजहस्ती तिनहिं दिवाये ॥११॥ एक बरसानेतें आये । वे ढाढ़ी परम सुहाये । चिरजीबहु लालकी मौसी वे देत दान बहु होंसी ॥१२॥ जिन यह जसगाय सुनायो । जाके मनमें यह आयो । यह किसोरीदास मन भायौ । दूंदावन वास बसायौ ॥१३॥
Bilawal
Sumro natnagar varr sunder gopallal ..
NityaPad-133
सुमरो नटनागर वर सुंदर गोपाललाल ॥ सबदुख मिटलजेहें बे चिंतित लोचन विशाल ॥॥१॥ अलकन की झलकन लख पलकन गति भूलजात भुवविलास मंदहास रदनबदन अति रसाल ॥ निंदित रवि कुंडल छबि गंडमुकुर झलमलात पिच्छ गुच्छ कृत अवतंस इंदु मिल बिंदु भाल ॥२॥ अंग अंगजित अनंग माधुरी तरंगरंग विमद मद गयंद होत देखत लटकीली चाल ॥।| हसनलसन पीतवसन चारू हार वर शूंगार तुलसी रचित कुसुम खचित पीन उर नवीनमाल ॥।३॥ ब्रजनरेश वंश दीप श्रीवुंदावनवरमहीप श्रीवृषभानमानपात्र सहज दीनजन दयाल ॥ रसिक भूप रूपरासगुणनिधानजान राय गदाधर प्रभुयुवती जनमुनि मनमानस मराल ॥४॥
Bhairav
Barsaanen vrishbhan gopaken anand kii nidhi iju . dhanya
Part1-182
बरसानें वृषभान गोपकें आनंद की निधि आईजू । धन्य धन्य कूखि रानी कीरतिकी जिन यह कन्या जाई ॥१॥ इंद्रलोक भुवलोक रसातल देखी सुनी न गाई । सिंधु सुता गिरिसुता सची रति इन समान कोऊ नॉई ॥२॥ आनंद मुदित जसोदा रानी लालकी करों सगाई । प्रभु कल्यान गिरिधर की जोरी बिधिना भली बनाई ॥३॥
Dhanashri
Khelat gopal nava sakhin sanga .. navnav anbar
Part3-028
खेलत गुपाल नव सखिन संग ॥ नवनव अँबर रंगरंग ॥भ्रु०॥ मुरलीवेन डफनये चंग ॥ मधिनईकुहूक बाजे उपंग ॥ सुर समूह नई नई तरंग ॥ जहां नईनई गति उपजत मृदंग ॥१॥ मृगमद लपटे चंदन सुगंध ॥ केसरि कुंकुम मलय मकरंद ॥ हुलसि जुबतिवर वृंदबृंद ॥ लीने लपेटि आनंदकंद ॥२॥ उडी परस्पर अरून रूदि ॥ दुरत भरत मुखनेंनमूंदि ॥ घूंघट में मुखलसतमंद ॥| मानों अरुन जलधि में दुरेचंद ॥|३॥ सखी एक तव कियोवंद ॥ चतुर बोलि सिखयोसुछंद ॥ पियनाम टेरि कह्मो नंदनंद ॥ रहो रहो भरोजू नागर नंद ॥७॥ हाथ झारि हरिकों दिखाय ॥चोली में सोंधो दुराय ॥ त्रियन अंक हसिके बताय ॥ गहेत वही सब परीहें धाय ॥५॥ कोऊ निखरत लोचन अघाय ॥ कोऊ आनद्रग आंजतसिराय ॥ कोऊ मुखपकरि रोरी फिराय || कोऊ कहत भले हो स्यामराय ॥| ६॥ विवसप्रेम बश स्यामलाल || मन भायो सब करत बाल ॥ भरत अंक भरिभरि गुपाल ॥ सूरदास तहां कामपाल ॥७॥
Basant
Tum cone key vas khele hoe rangeele hoe hoe horiyaan ..
Part3-083
तुम कोन के वस खेले हो रंगीले हो हो होरियां ॥ अंजन अधरन पीक महावीर नेन रंगे रंग रोरियां ॥१॥ बारंबार जुंभात परस्पर निकसि आईं सब चोरियां ॥ नंददास प्रभु उहांई वसो किन जहां बसेवे गोरियां ॥२॥
Lalit
Merein tou giridhar hii gungan ..
NityaPad-307
मेरें तो गिरिधर ही गुनगान ॥ यह मूरति खेलत नयननमें यही हृदयमें ध्यान ।। १॥॥ चरणरेणु चाहत मन मेरो यही दीजिये दान | कृष्णदासकी जीवन गिरिधर मंगलरूप निधान ॥।२॥।
Kalyan
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