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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Mantaj bauri nandlalason .. | NityaPad-321 | मानतज बौरी नंदलालसों ॥
वे बहुनायक एतेपर राजकुमार मेरो कह्यो मान प्यारी तु जिन लाओ ओरी ॥१॥
किसलयदल कुसुमन की शब्यारचि तुव मगचितवत दौर दौरी ॥
गोविंदप्रभुसों तू यों राजेगी ज्यों दामिन घनसोरी ॥२॥ | Iman |
Mukutki chhaanh manohar kiye . | NityaPad-264 | मुकुटकी छांह मनोहर किये ।
सघन कुंजतें निकसी सांवरो संग राधिका लिये ॥१॥
फूलन के हार सिंगार फूलन खौर चंदन किये ।
परमानन्ददासको ठाकुर ग्वाल बाल संग लिये ॥२॥ | Saarang |
Jaake munn basey sthaamghan maadho | | NityaPad-362 | जाके मन बसे स्थामघन माधो |
सो सुंदर सोधनीदक्ष सोई सोई कुलीन सोई साधो ॥१॥
सो पंडित सोगुणपुंज सोई जो गोपाल कहिगावे।॥।
कोटिप्रकार धन्य सोई नर जो नहिं हरि विसरावे ॥२॥
सो नर सूर वेदविद्यारत सो भूषति सोई ज्ञानी ॥
परमानंद धन्य सोई समरथ जिहिं लाल चरण रति मानी ॥३॥ | Bihaag |
Aalas uneede nayana aavat ghoomat jhuk kaise neeken laagat | NityaPad-049 | आलस उनीदे नयना आवत घूमत झुक कैसे नीकें लागत
अरूणवरन ॥ जानतहों सुंदरस्थाम रजनीके चारों याम नेक न पाये पलक
परन ॥।१॥ अधरन रंग रेख उरही चित्र विशेष-शिथिल अंग डगमगात चरण ॥।
चतुर्भुजप्रभु कहां बसन पलटआये सांची कहो गिरिराजधरण ।।२॥ | Lalit |
Lalco meethi kheer joe bhaave .. bella bhar bhar lawat yashoda | NityaPad-078 | लालको मीठी खीर जो भावे ॥ बेला भर भर लावत यशोदा
बूरो अधिक मिलाव ॥|१॥| कनिया लियें बशोदा ठाढी रुचिकर कोर बनावे |
ग्वालबाल वन चरनके आगें झूठे हाथ दि खावे ॥२॥ ब्रजरानी जो चहूंधा चितवत्त
तनमन मोद बढावे ॥ परमानंददासको ठाकुर हसहस कंठ लगावे ।।३॥ | Dhanshree |
Larlataksohe lalke .. jaanoghanmein vidhumandalrajat | NityaPad-159 | लरलटकसोहे लालके ॥ जानोघनमें विधुमंडलराजत
करनवनीत गोपालके ॥१॥ स्थामगातपर दश्चिकेछींटा उड्डुगणछबि
नयनविशालके ।। आसकरनप्रभु मोहननागर प्रेमपुंज व्जबालके ।। २॥। | Bilawal |
Tum joe manawat soee dinn aayou . apanon boll karo kinn | Part1-047 | तुम जो मनावत सोई दिन आयौ । अपनों बोल करो किन
जसुमति लाल घुटुरुवन धायौ ॥१॥ अब चलिहै पॉयन ठाढ़े द्ै महरि बजाय
बधायोौ । घरघर आनंद होत सबनके दिन दिन बढ़त सवायोौ ॥२॥ इतनों
बचन सुनत नंदरानी मोतिन चौक पुरायो। बाजत तूर तरुनी मिलि गावत लाल
पटा बैठायो ॥३॥ परमानंद रानी धन खरचत ज्यों विधि वेद बतायौ । जादिनकों
तरसत मेरी सजनी गहि अंगुरियन लायौ ॥४॥ | Sarang |
Aage bhakt paachhe bhakt ita bhakt uta bhakt bhaktammein | Part2-331 | आगे भक्त पाछे भक्त इत भक्त उत भक्त भक्तममें
सोहे प्यारे दुलहे दुलहनि। भक्तनसों मंडप छायो बललभके मन भायो
स्थाम तमाल कनक बेल सोभा बनि ॥१ ॥ पांडे जब बोले बोल अंतर पट
लियो खोल मिले दोऊ आपसमें कहत न बनी। दुलहे दुलहनि सोहे
सबनको मन मोहे नभसों सुरगण करे पहोपवृष्टि घनी ॥२ ॥ | Poorvi |
Navallal govardhandhari aavat banaten sohe .. | NityaPad-285 | नवललाल गोवर्धनधारी आवत बनतें सोहे ॥
मणिगण भुवन अंग बिराजत छबिली चाल मन मोहे ॥१॥
मोर मुकुट काछनी कट राजत देखत मन मथ कोहे ॥
नंददास प्रभु गायन पाछे आवत चहुंधा दृष्टि करी जोहे ॥३॥ | Gori |
Houn kihin miss panghat jaaoonri merrie gellen chhaande | Part3-277 | हों किहिं मिस पनघट जाऊंरी मेरी गेलन छांडे
सांवरो ॥ हो लाज न डरपत रहों मोहि धरेन कोऊ नाउंरी ॥१॥ जित देखों
तित देखियेरी रसिया नंद कुमार ॥ इन बातन केसें भरों मोहि पलकन
करत जुडार ॥२॥ लकुट लिये आंगे चलेरी पंथ संवारत जाय ॥ मोहि निहोरो
लायकें नेंक फिर चितवे मुसिक्याय ||३॥ यमुना जल गागर भरोंरी जब
सिर धरों उठाय ॥ हों अचरा ढांकत रहों मेरो हिय रात कललचाय ।॥४॥
गागर मारे कांकरीरी एडो छिवावे लात ॥ मारण में ठाडो रहे मोहि टोके
ललचाय ॥ तब हंसमेरी छांह सों नेंक छांडे चलत छुबवाय ॥७॥ अब लग
कछु सकुचत रत्योरी प्रगट करत अनुराग ॥ अब कहो केसें छूटडूं जब
सिर पर आयो फाग |॥|८॥ घर घर ब्रज चाचरमचीरी विवश भये नरनारि ॥
मंत्र फाग दृती दियो दोऊ उमग चले डरडारि ॥९॥ जब लगमन मिलयो
नहीं री नच्यो चोंपको नांच ॥ सिरोमणि प्रभु दोऊ मिले ताते करत मनोरथ
साच |॥१०॥
आवतजात ॥५॥ केह्ू मिस हा हा करेरी लंगर मोहि निहार ॥ ओढन के
मिस ओढनी पीतांबर मोपेंबार ॥६॥ मोत न लगलागे नहींरी वाको मन | Sorat |
Maan dashkandh matimand merrie kahou jaanaki daiy mill sanga keejai.. | Part1-303 | मान दशकंध मतिमंद मेरी कह्ौ जानकी दै मिल संग कीजै॥
कोपि कर चढ़च रनधीर कौशल कुमर चरण गहि दान पिय माँग लीजे ॥श॥।
जाके ऋक्ष बानर सुभट अटक मानै नहीं कौन सन्मुख होय उनहिं बारे ॥ मेरो
कह्ौौ मान जिय जाँन साँची कहूँ शीश दस बीस भुज काट डारे ॥२॥ पवन
पावक अटल देव दानव सकल चरण गहि शरण मम नित्य आबै ॥ सुनौ रे नार
करतार थर थर करै रंक रघुबीरकी को चलाबै ॥३॥ उठे जो कुंभ जिन शंभु
सेव्यौ सदा सकल बनचर चरें भूख भागें ॥ मेरौ कह्लौ मान जिय जान साँची
कहूँ दीपक पतंग ज्यों मृत्यु आगें ॥४॥ एक हनुमान अभिमान तेरौ हन्यों
कुँवर सँहार सब लंक जारी ॥ अजहुँ रे समझ हित हेतकी बात सब अंत आयौ
कंत कहत नारी ॥५॥ शरण सुधीर रघुवीर अशरण शरण ताहिसों क्यों पिया
बाद कीजै ॥ मेरी कहाौ मान अज्ञान तज दुष्टता छाँड़ि पीयूष विष काहे कूँ
पीजै ॥६॥ मेरौ नाम रावण त्रैलोक कंटक कहै शीश दस बीस भुज चरण
नाऊँ॥ खड़ग जो कर धरों मरणते कहा डरों दीनता भाख कहा कुल
लजाऊँ ॥७॥ मनोहर दास कैलाश जीत्यौ सकल अब देख बैकुंठ पर बाथ
बाऊँ॥ धन्य मम मात अरु धन्य मम तातकों मृत्यु रघुनाथके हाथ पारऊँ ॥।८॥ | Maru |
Baithe kusum bangla | NityaPad-257 | बैठे कुसुम बंगला
लाल॥ जाई जुई गुलाब माधुरी बिचबिच कमल रसाल।॥।१॥ फूलनहीको
गहनो पहरें हरि ओर ढिंग ब्रजबाल।॥ फूलनहींकी रचीजु शब्या सुंदर
मदनगोपाल।॥ छाजत पोहोप भवन नंदनंदन शोभा बढी रसाल॥ कृष्णदास
तहां बीरी खवावत हितकर दियेहें उगार॥३॥ | Saarang |
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