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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Soney kii gagar laike paniyan bharan chully
NityaPad-271
सोने की गागर लैके पनियां भरन चली यमुना के नीर तीर धुन सुन अटकी ॥ नंद को दुलारी प्यारौ मुरली बजावें ठाड़ौ दुगन की चोट मेरे हिये मांझ खटकी ॥१॥ एक घरी उ्हे जु भई तन की सुध न रही ठगोरी सी ठाड़ी भई देखन रूप चटकी ॥ धोंधी के प्रभु प्रेम कौ प्रवाह चाल्यौ लोक कुल लाज काज सब दियौ पटकी ॥२॥
Saarang
Bhogshungarayashodamaiah srivitthalnathke haath koo bhaaven ..
NityaPad-154
भोगशुंगारयशोदामैया श्रीविद्डलनाथके हाथ को भावें ॥ नीकेंन्हायशुंगाककरतहै आछीरुचिसों मोहिपागबंधाबें. ॥१॥ तातेसदांहौउहां हीरहतहों तूडर माखन दूधछिपावें ॥ छीतस्थामीगिरिधरन श्रीविद्धल निरखनयना त्रयतापनसादें ।। २।।
Bilawal
Dekho gopaljuki leela thhaati . suur brahmaadik acharaj haye
Part1-141
देखो गोपालजूकी लीला ठाटी । सूर ब्रह्मादिक अचरज है हे जसुमति हाथ लिये रजु साँटी ॥१॥ ये सब ग्वाल़ प्रगट कहत हैं श्याम मनोहर खाई माँटी । बदन उघार भीतर देख्यों त्रिभुवन रूप बैराटी ॥२॥ केशवके गुन वेद बखाने शेष सहस मुख साटी लाटी । लख्यी न जाय अंत अंतरगति बुधि न प्रवेश कठिन यह घाटी ॥३॥ जन्म कर्म गुन श्यामके बखानत समुझ न परे गूढ़ परपाटी | जाके शरन गये भय नॉँहीं सो सिंधु परमानंद दाटी ॥४॥
Ramkali
Chhoto sou kanhaiya murali madhur chhoti chhote chhote gwal baal chhoti
Part1-161
छोटो सो कन्हैया मुरली मधुर छोटी छोटे छोटे ग्वाल बाल छोटी पाग सिरकी ! छोटे छोटे कुंडल कान मुनिन हूके छूटे ध्यान छोटे पट छोटी लट छूटी अलकन की ॥१॥ छोटी सी लकुट हाथ छोटे छोटे बछवा साथ छोटे से कान्हें देखनि गोपी आई घरनकी । 'नंददास' प्रभु छोटे भेदभाव मोटे मोटे रवायो है माखन सो शोभा देखि बदन की ॥२॥
Todi
Maanon yaakebaavaakihaikoucheri ..
NityaPad-193
मानों याकेबावाकीहैकोऊचेरी ।। ढीठोदेतसंकनरहिंमानत मारंगआवत घेरी ॥१॥ कंचुकीगहत डरतनहींमनमें कही अपनपोटेरी । यामेंसबसमुझरी यशोदा चितवदेख गतमेरी ॥।|२।। कबलग लाजवासकी कीजेकान्ह गुसाइन तेरी ॥। परमानंदप्रीति अंतरगत दरशनमिस कर फेरी ॥।३॥
Bilawal
Myrie sthamsundar bhorbhavan aagenvhai aave.. kabahu mukh mandahas
NityaPad-135
माईरी स्थामसुंदर भोरभवन आगेंव्है आवे।। कबहू मुख मंदहास मेरे सखि सुखकी रासि कबहूं बेन कबहुं नयन सयनही जनावे ॥१॥ मेरी दधि मथन वार उनकी उठनी सवार रई नेत माट समेत सकलहो विसरावें ॥ चतुर्भुज प्रभु गिरिधर अंग अंग कोटि मदन मूरति हसत चलत वनको सबहिनके चित्तही चुरावे ॥२॥
Bibhaas
Paheren tunn chandanko bago baithe sheetal kunj ..
NityaPad-236
पहेरें तन चन्दनको बागो बैठे शीतल कुंज ॥ देखतही मन मोहिरहेत सखी मानो मदनके पुंज ॥१॥ लटपटी पाग बनी गिरिधरकें कियें सुधो शुंगार ॥ नेन्हीनेन्ही कली बीन अपनेकर गूंथों तुमको हार ॥२॥ यहसुन श्रवणन चली आतुरव्है कितिक दूर वह पौर ॥ श्रीविद्ठल गिरिधर नुपुरसुन बेगमिले उठदौर ॥३॥
Saarang
Maano vrajate karini chully .. madmati hoe .. giridhar
Part3-306
मानो ब्रजते करिणी चली ॥ मदमाती हो ॥ गिरिधर गजपें जाय ग्वाल मदमाती हो ॥ कुल अंकुश मानें नहीं ॥| शृंखल वेद तुराय ॥१॥ अबगाहें यमुना नदी ॥ करत तरुणी जल केलि ॥ छल सों छिरकत स्यामकों ॥ शुंड दंड भुज मेलि ॥२॥ नाग वेलि चरती फिरें ॥ मादिक मध्य कपूर ॥ साख पटा श्रवणन बहे ॥ मंडित माग सिंदूर ॥३॥ कुचकुंभ उर स्थल ऊपरें ॥ मुक्ताहाररुराय ॥ जनुजुगणिरि विच सुरसरी ॥ जुगल प्रवाह बहाय ॥४७॥ वृंदावन वीथन फिरें ॥ केस कला एजान अंचल पटवे रखउडें ॥ घूघरू घंट समान ॥५॥ घूमत गल वैयांगहें ॥ लोक लाज त्यज कान ॥ निकसत शंकन मानही ॥ प्राणएक पियजान ॥६॥ सन्मुख धावें हुलसकें ॥ केलिकला हि निधान ॥ मानो महावत पेलिकें ॥ देतसुरत सुखदान ॥७॥ मानोकरीबकरेवनी ॥ घनदामिनि अनुहार ॥ कृष्णसहित क्रीडाकरें ॥ ब्रजपति ब्रजकीनार ॥८।। होरी खेली न जाय मेरे नैनम में पिचकारी दर्ई ॥
Gouri
Srirghunath paalane jhoole kausalya guna gaave..
Part2-263
श्रीरघुनाथ पालने झूले कौसल्या गुण गावे॥ बल अवतार देवमुनि बंदित राजीवलोचन भावे ॥१ ॥ राजा दशरथ पलना गढायो नवचंदनको साज॥ हीरा जटित पाटकी डोरी रत्न जराये वाज ॥२ ॥ एते चरणकमल करराते नील जलद तनसोहे ॥ मृगमद तिलक अलक घुंघरारी मृदुल हास मनमोहे ॥३ ॥ घर घर उत्सव चारु अयोध्या राघव जन्म निवास ॥ गाबत सुनत लोक त्रेपावन बल परमानंददास ॥४ ॥ कनक रतन मय पालनो रच्यो मारु सुत्रधार॥ विविध खिलौना किंकिनी मंजुल मुक्ताहार। रघुकुल मंडनराम रामललाहोहो ॥१ ॥ जननी ऊबट नहवायके मनि भूषन सजिलीये गोद | पीढाये शिशु पालने निरख्ि मगन मनमोद।॥ दशरथ नन्दन राम रामललाहोहो ॥२ ॥ मत्त मयूरकी चंद्रिका झलके रतनन ज्योति॥ नील कमल अरू जलदकी उपमा कहें लघु होत॥ नेन सुकृत फलराम ॥३॥ लघु लघु लोहित ललितहें पदपान अधर एकरंग॥ सो छबि को कवि कहिसके नखशिख सुन्दर सब अंग ॥ राजीव लोचन राम रामलला ॥४ | पदनूपुर कटि किंकिनी कर कंकन पहोंची मंजु॥ हीयें केहरिनख अद्भुत बने मानो मनसिज मदके गंजु॥ पुरजन उरमनि राम॥५॥ लोचन नीलसरोजसे भ्रुव मसिविदु लि बिराज॥ जनु मुख विधु छबि अमीयकों रक्षक राख्यो रसराज॥ सागर राम ॥६ ॥ घुंघरारी अलकावली लसे लटकन ललित लिलाट ॥ मानों उद्डगण विधु मिलनकों चले तम बिडारकर बाट॥ जगत तिमिर हर राम ॥७ ॥ देखि खिलोना किलकहीं पद पान विलोचन लोल॥ विचित्र बिहंग अली जलजज्यों सुषमा सर करत कलोल॥। भक्त कल्पतरु राम॥८ ॥ बाल बोल बिन अरथके सुनि देत पदारथ चार॥ सो पेहन बचनानतें भये सुरनर मुनि त्रिपुरार॥ नाम काम धुक्‌ राम॥९॥ मात सुमित्रा बारहीं मनि भूषन वसन विभाग ॥ मधुर मल्हाय झुलावहीं गावें उमगि उमगि अनुराग॥ हें जग मंगल राम॥१० ॥ मोती ऊपज्यो सीपमें अरु अदिति जन्यो जगभान ॥ रघुपति कोसल्या जन्यो गुन मंगल रूप निधान॥ भुवन विभूषन राम ॥११ ॥ राम प्रगट जगमे भये गये सकल अमंगल मूल ॥ मीन मुदित हित उदित व्हे नित बैरिनके उर सूल ॥ भव भय भंजन राम ॥१२ ॥ अनुज सखा संग शिशुले खेलन चले चौगान॥ लंकामें खरभर परी हो सुरपुर बजे हें निशान॥ रिपुगन गंजन राम ॥१३ ॥ राम अहेरट कुं चले हो जब गजरथ बाजि संवार॥ दसकंधर उर धुकधुकी अबजिन धावे धनुधार॥ अरि कुल केहरि राम ॥१४ ॥ गीत सुमित्रा सखीनके सुनि सुनि सुरमुनि अनुकूल ॥ दे असीस जयजय कहें सब हरषें बरषें फूल ॥ सुरसुखदायक राम ॥१५ ॥ बाल चरित्रमय चंद्रमा यह सोलह कलानिधान॥ चित चकोर तुलसी कीयो कर प्रेम अमीरस पान॥ तुलसीके जीवनराम ॥१६ ॥
Bilawaal
Jaware pahiren girivardhari . juvati-jan-munn-taap-nivaaran
Part1-317
जवारे पहिरें गिरिवरधारी । जुवती-जन-मन-ताप-निवारन आनंद मंगलकारी ॥ सुंदर लाल माल ललित तन देखि जननी कर वारी । मनमोहन के रसिक रूप पर 'परमानैंद” बलिहारी ॥
Saarang
Chadh govardhan sikhar saanvaro bolat dhori dhen |
NityaPad-160
चढ़ गोवर्धन सिखर सांवरो बोलत धोरी धेन | पीत बसनसिर मोर चंद्रकाधर मोहन मुख बेन ॥।१॥। बन जु धात विचित्र किये हैं संग सखासब सेन ॥ कुमनदास प्रभु दोहे दोहे गैया मथ मथ पीवत धेन ॥२॥।
Bilawal
Moll linenyanki saine .. shravansunat sudhibudhisabavisari
NityaPad-091
मोल लईइननयनकी सेन ॥ श्रवणसुनत सुधिबुधिसबविसरी लुब्धीमोहनबेन ॥ १॥ कमलनयन खिरकते आवन एक जोवातकहीहंसएन ।। परमानंदप्रभुनंददुलारे मेरीगायकही दुहिदेन ॥२॥।
Dhanshree
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