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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Jasumati atee anandason graavati .. lait naam | Part1-007 | जसुमति अति आनंदसों ग्रावति ॥ लेत नाम
गिरिधरनलाल सुखकी बेलि बढावति ॥१॥ आपुसमें जो नंदजुकी रानी हँसि
हँसि सबन बुलावति । यह दिन बरसगांठिको क्योंहूँ सबके पुन्यन पावति |२॥
देखि देखि मुख सुत अपनेको अनगिनति सब बारति ॥ श्री विद्रलनगिरिधरनलालपै
गायन दान दिवाबतिं ॥३॥ | Devgandhar |
Mero munn bawaron bhayo .. larka | NityaPad-092 | मेरो मन बावरों भयो ॥ लरका
एकइहांहुतोठाढो ताहीकेसंगगयो ॥ १॥। जानोंनहीं कोनको ढोटाचित्रविचित्र
ठयो॥ पीतांबरछबि निरख हरच्ोो मनपढकछु मोहिदयो ॥२॥ ग्वालनी
एकपाहुनी आई ताकी यहगति कीनी ॥ परमानंदप्रभुहसतसेनदे प्रेमणाणिगहि
लीनी ॥।३॥ | Dhanshree |
Aajbanyonvarang piaro .. vrajavanitamil kyonniharo ..|1.. | NityaPad-157 | आजबन्योनवरंग पियारो ॥ ब्रजवनितामिल क्योंननिहारो ॥|१॥
लटपटीपाग महावरपागे। कुंवरमनावत अतिबडभागे।॥। २॥।
मीलांबर नखरेखजोसोहे ॥ देखतमन्मथको मनमोहे ॥ ३॥
कहूंचंदन कहूंवंदनकी छबि ।। अंगरागबहुभांतिरह्मोफबि ॥|४॥
मदनमोहनपिय यहविधदेखों ।। दासगोपाल जीवनफल लेखों ॥५।। | Bilawal |
Banaabanken byaahan aayo kirati sutaa badan dekh harkhaiya .. | NityaPad-267 | बनाबनकें ब्याहन आयो किरति सुता बदन देख हरखैया ॥
पीतांबर मुक्तामाल सुभग उर सोहे लाल फूलको सहेरो शिर ढरकैया ॥१॥
मकर कुंडल कान मानों उदयो भान नखशिख बने सुजान सरस सुहैया ॥।
रसिक रसीले मेरे मन में ठसीले दास कुंभन छबि पर बलजैया ॥२॥ | Kanharo |
Hansat kahaa kachhu leaney moll .. tum hamain jaanat humm tumain jaanat | Part1-242 | हँसत कहा कछु लीनी मोल ॥ तुम हमैं जानत हम तुमैं जानत
बिन समुझे कित बोलत बोल ॥ समुझत हो तब माँगत हैं ठाढ़े यहि ठौर दान
लगत हमारी ॥ लैहें दैहें ऐसी ये जानी तुमकूँ चमकत गोद पसारी ॥२॥
दान लगत गोदही के ऊपरसों तुम कहे देत हों नारी ॥ श्रीविद्लगिरिधर तुम
हमसों जीतिही नाहीं ऐसी बात हमारी ॥३॥ | Saarang |
Aaj dashahara shubh dinn neekau jaware paharat giridharlal .. | Pustak1-316 | आज दशहरा शुभ दिन नीकौ जवारे पहरत गिरिधरलाल ॥
आसपास सब व्रजके बालक मध्य मनोहर बाल ॥१॥
करत आरती मात यशोदा बारत मोतिन माल ॥
आसकरन प्रभु मोहननागर प्रेंम पुंज ब्रजबाल ॥२॥ | Saarang |
Abla tere bal haye naan aur... | NityaPad-307 | अबला तेरे बल है न और।॥
बेधे मदनगोपाल महागज कुटिल कटाक्ष नयनकी कोर ॥ १॥॥
यमुनातीर तमाल लताबन फिरत निरंकुश नंदकिशोर ||
भ्रूह बिल्तास पास वशकीने मोहन अंग गहे तें जोर ॥२॥
ले राखे कुच बीच निरंतर शुंखल सुखद प्रेमकी डोर ।।
यह उचित होय ब्रज सुंदर परमानंदप्रभु चपलचितचोर ॥३॥। | Kalyan |
Dekhridekh nava kunjghan saghantar thaade girivardharan rangbhine ... | NityaPad-175 | देखरीदेख नव कुंजघन सघनतर ठाडे गिरिवरधरन रंगभीने ।॥
मुगट शिरलटकि कटिकाछनि बेनुकरराधिका संगभुज अंसदीने ॥१॥
मकरकुंडडलअवनझलक अंगपर रहि।॥ मानो चंदनसीतल अंगखोरकीने।। निरख
गोविंद छबी सघन नंदनंदन की बारत नतमनदोउ प्रेमरसभीने ॥। २।। | Saarang |
Jasumati sutkau palana jhulaavai | parasi chibuk moodu bachan | Part1-099 | जसुमति सुतकौ पलना झुलावै | परसि चिबुक मूदु बचन
बुलावै ॥१॥ मोसों ललन कही मेरी मैया । ऊँचे टेरि बुलावी गैया ॥२॥
बोलि सुनावी तोतरी बतियाँ | शीतल करो लाल मोरी छतियाँ ॥३॥ बोलि
लेहु बाबा कहि ताते । भैया कहि रामहिं मुसिकाते ॥४॥ बचन सुनन ब्रज
युवती ठाड़ी । तोसें सहज प्रीति अति बाढ़ी ॥५॥ ऊँचे सुर मधुरे किन गावौ।
बाजत नूपुर शब्द सुनावी ॥६॥ हँसत जाय ढिंग चुटकी बजावै । करिकरि
कंठ गुलगुली हँसावै ॥७॥ देखौ मेरे सुत हों फिरकी फिराऊँ । झुनझुना ले
कर नीके बजाऊँ ॥८॥ कबहुँरू दरपन कर लै दिखावै । अँगुरी गहि यह कौन
कहावै ॥९॥ हँसत बदन लखि लेति बलैया । जिन लागौ लालै दीठि भेरि
दैया ॥१०॥ कबहुँक दृग मींड़त दोऊ करसों । पोंछति जननी छोर अँचरसों
॥११॥ कबहुँक कर लै अँगूठा चूसें | ब्रजजनकी तन मन थन मूसे ॥१२॥
कर पोहोंची फुंदना मुख मेलें | बदन जुूंभाय मुग्ध ज्यों खेलें ॥१३॥ चरन
कमल दोऊ कर कर धरे | ध्वनि सुनि श्वन मन हरे ॥१४॥ करवट लेत
किंकिनी बाजै । श्रवन सुनत कोकिल मन लाजै ॥१५॥ लाल तेरे मित्र
बुलावन आये । तिनके संग खेली मन भाये ॥१६॥ तेरे ढिंग धरी मेवा
मिठाई | मुखमें मेलौ जो मन भाई ॥१७॥ बैठि सबनमें तोहि सिंगारों ।
भूषन बसन विविध तन धारों ॥१८॥ भरी तबकड़ी धरे खिलौना । खेलों
हँसी मेरे श्याम सलौना ॥१९॥ लाल तेरे पलनाकी पंचरंग डोरी | लटकत है
फूँदनाकी जोरी ॥२०॥ विविध कुसुमकी बंदन माला । बाँधीहैं तेरे पलना
लाला ॥२१॥ ऊपर उडैंक्यौ पटोरो पीरो । पलना जड़ंयो रतन नग हीरो
॥२२॥ गोरोचनकौ तिलक संभारों | बिच मुक्ताफल बिंदु सुधारों ॥२३॥
भोंह निकट मसि बिंदुका सोहै | डीठि न लगै दई मन मोहै ॥२४॥ दि मंथू
नवनीत निकारों । मुखमें मेलि अपनपौ बारों ॥२५॥ आवोौ गोद प्राननके
प्यारे । आँगन बैठि खिलाऊँ ला रे ॥२६॥ छतियाँ लगावति चुंबत मुखकों।
करत हेत जसुमति सब सुखकों ॥२७॥ जसोदा अपनो भाग्य सराहै । बालक
लीला मन अवगाहै ॥२८॥ बोलौ कछु देखूं दोऊ दतियाँ | अबही तनक दूध
उपजतियाँ ॥२९॥ लाल तेरी मुरली ढिंग राखी । उठो बलि जाऊँ बैन
सुभाखी ॥३०॥ दूरि भयौ है ब्रज अँधियारी । श्याम सुंदर मेरी जग
उजियारी ॥३१।। कब मेरी ढोटा पॉयन चलिहै । बलि संग लै बैरी दल मलि
है ॥३२॥ इहि विधि कहति जननी ब्रजरानी | रसिक प्रीतम बोले
मूदुबानी ॥३ ३॥ | Bilawal |
Dekhari dekh kundal jhalak || nayan yeh chhabi dharein | Part2-359 | देखरी देख कुंडल झलक || नयन यह छबि धरें
कैसे लागत नाहीं पलक ॥१॥ ललित चारु कपोल दोऊ बिच जलज
लोचनचार ॥| मुख सुधाशर मीन मानों मकर संग बिहार ॥२॥ कुटिल
अलक स्वभाव हरिके भुवन पर रही आय॥ मानों मन्मथ फांदी फंदन
मीन विविध त्रसाय ॥३ ॥ लता तन चपल कुंडल चपल भृकुटी बंक ॥
सखी व्याकुल देखवे कूं बनत नाहिं निसंक ॥४॥ सूरप्रभु नंदसुबनकी
छबि कापें वरणी जाय॥ निरख गोपी निरख बिथकी विधिषै अतिही रिसाय ॥५ ॥ | Sorat |
Jahaan tahaan dhara parat dharaare mohan tere nayan .. jey nikharat tinake | NityaPad-113 | जहां तहां ढर परत ढरारे मोहन तेरे नयन ॥ जे निखरत तिनके
मन वशकर सोपतहे ले मेंन ॥१॥ छिनसन्मुख छिनहीं होत टेढे एके अवस्था
कबहुं नऐंन ॥ रसिक प्रीतम ताकें विनदेखें छिन नहीं मनमें चेन ॥ २॥। | Adano |
Bhagyan balallabh bhootal aaye. curr karuna | Part2-268 | भाग्यन बलल्लभ भूतल आये। कर करुणा
लक्ष्मणगृह कलिमें त्रजपति प्रकट कराये ॥१ ॥ चिंता तजो भजो इनके पद
महा पदारथ पाये।। दास जननके सकल मनोरथ पूरेंगे मनभाये ॥२ ॥
साधनकर जिन देह दुखाबो ये फलरूप बताये ॥ रहो शरणपर दृढ मनकर
सब अब आनंद बधाये ॥३ ॥ तनमनधन न्योछावर इनपर कर क्यों न देहो
उडाये॥ रसिक सदां बडभागी ते जे श्रीवल्लभगुण गाये ॥४ | | Devgandhar |
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