top of page
Sheetkal Ke Pad
To get full expanded Kritan text click on any column of the kirtan row in below table.
Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Kaun patyaay tihari jhoonthimeethi batiyaan .. | NityaPad-335 | कौन पत्याय तिहारी झूंठीमीठी बतियां ॥
तैसेंई सांवलतन तैसेंई होमन मैंजाने कुंवर सबभतियां ॥१॥|
मुखकी हमसों मिलवत जीयकी औरनसो तियमारनकों भलेपढे घतियां ॥
नयननसों नयन मिलत मान छूटगयो
गोबिंदप्रभु प्यारी लायलईउर छतियां ॥ २॥ | Bihaag |
Teree shrohki marorantein lalitbribhangibhaye anjanade chitayo | NityaPad-113 | तेरी श्रोहकी मरोरनतें ललितब्रिभंगीभये अंजनदे चितयो
भयेजू स्यामवाम |) तेरी मुसकान देख दामिनीसी कोंधजात दीनव्हे याचत प्यारी
लेत राथे आधोनाम ॥।१॥। ज्यों ज्यों नचायो चाहो तैसेहरि नाचत बल अबतो
मयाकीजे चलिये निर्कुजधाम ॥ नंददासप्रभु बोलोतो बुलायलाऊ उनकोतो
कलपवीतें तेरीघरीयाम ॥।२॥ | Adano |
Bunn bunn terat firat gwalni leeje hoe sunder vraj naayak .. | NityaPad-219 | बन बन टेरत फिरत ग्वालनी लीजे हो सुंदर ब्रज नायक ॥
आज अबार भुली हों मारग पावत नहि सुखदायक ॥।१॥ चंदन कुंजमें मिलि
बैठे त्रज बालक संग लिये ब्रज नायक ॥ चतुर बिहारी गिरधारीजु लेहो किन
पाछे जेंहों घर सास रीसायक ॥२॥ | Saarang |
Balibali jaauun chhabile lalki . dhusar dhoori ghuturuvan tekat | Part1-167 | बलिबलि जाऊँ छबीले लालकी । धूसर धूरि घुटुरुवन टेकत
बोलत बचन रसालकी )॥१॥ कछुक हाथ कछू मुख माखन चितवनि
नैनविशालकी । मोतन हँसत नासिका नथुनी कंठबधन बनमालकी ॥२॥
छिटकि रहीं चहूँ दिशा लटुरियाँ लर लटकन सोहै भालकी । सूरदास स्वामी सुखसागर
निमिष न तजें ब्रज बालकी ॥३॥ | Iman |
Uddapati khasit paschim dess .. maan timir naan ghata terau | Part1-358 | उड्डपति खसित पश्चिम देस ॥ मान तिमिर न घट तेरौ
कुटिल काम.बिसेस ॥१॥ लाल गिरिधर लता ग्रह स्थित मदन मोहन बेस ॥
आकुलता तुव संग कारन समन मनमथ सेस ॥२॥ कुनित पद मंजीर धुनि
सुनि जीत लै सुरतेज ॥ कृष्णदास निनाथ भजि तजि बक्रता लबलेस ॥३॥। | Kedaro |
Chand badan parr chandani sohat ghoonghat koo putt maano swet saaree .. | NityaPad-069 | चंद बदन पर चांदनी सोहत घूंघट को पट मानो स्वेत सारी ॥
पिय द्रग दोड चकोर पीवन को सोमानोविध सुहस्त संभारी ॥ ९।। प्रगट होत तब
हीते पिय हिय गई बिरह उजियारी ॥ अंचर दूरि करि गरे व्हे बाँहधर भेट रसिक
पिय प्यारी ॥२॥ | Lalit |
Karo kaleu kahati jasauda, sunder merey | Part3-021 | करो कलेऊ कहति जसौदा, सुंदर मेरे
गिरिधरलाल ॥ दूध, दही, पकवान, मिठाई, माखन, मिसिरी, परम-रसाल
॥१॥ पाछैं खेलनि जाऊ लड़ैते, संग लेह सब ब्रज के बाल ॥ चोवा, चंदन:
अगर, कुंमकुमा, फैंटन भरौ अबीर गुलाल ॥२॥ कीयो कलेऊ मन कौ
भायौ, हलधर संग सकल मिलि ग्वाल ॥ कीयौ बिचार फागुन खेलनिकौ 'परमानँंद' प्रभु नैन-बिसाल ॥भ॥। | Basant |
Aavat ree yamuna bhar paani .. saanware varan dhota kaunkori maaee baaki chitwan | NityaPad-273 | आवत री यमुना भर पानी ॥ सांवरे वरण ढोटा कौनकोरी माई बाकी चितवन
मेरी गैल भुलानी ॥१॥ हों सकुंची मेरे नयनहु सकुचे इन नयनन के हाथ
बिकानी ॥ परमानंदप्रभु प्रेमसमुद्र में ज्यों जलधरकी बूंद समानी ॥॥२॥ | Saarang |
Sundari subhag kunwari aeka jaaee | kahaa kahon yeh guna roop prem | Part1-194 | सुंदरि सुभग कुँवरि एक जाई | कहा कहों यह गुन रूप प्रेम
पोट भरि लाई ॥१॥ फूलि गये जित तित सब ब्रजमें सुखकी लहरि जु बढ़ाई।
धनि लहनों वृषभान गोपकौ भागि दशा चलि आई ॥२॥ धनि आनंद
जसोदारानी अपने भवन खिलाई । वृंदावनमें सखी यह प्यारी भागि अधिक
सुखपाई ॥३॥ यह गिरिधर कहत फिरि फिरि कें हमारे भागिन माई । उदैभान
नंदनी प्रगटी परमानंद बलिजाई ॥४॥ | Saarang |
Dhori dhumar pealy peehar kaaree kaajar kahakah tair .. | Part2-052 | धोरी धूमर पीली पीहर कारी काजर कहकह टेर ॥
बामभुजा मुरलीकर लिये दक्षिण कर पीतांबर फेरत ॥१ ॥
सुंदर नागर नट कालींदी तट लकुट लीये गायन को हिरत ॥
हुंक-हुंक एक वार गज शब्द धाई चत्रभुज प्रभु गिरिधारी न वेरत ॥२॥ | Purvi |
Dekhan deit naan barrin palaken .. | NityaPad-283 | देखन देत न बैरिन पलकें ॥
निरखतवदन लालगिरिधरको बीच परत मानों ब्रजकीसलके ॥।१॥
बनतेजु आवत बेणु बजावत गोरज मंडित राजत अलकें ॥
माथे मुकुट श्रवण मणिकुंडल ललित कपोलन झांई झलकें।॥।२॥
ऐसे मुखदेखनकों सजनी कहा कियो यह पूत कमलकें ॥ नंददास
सब जडनकी यह गति मीन मरत भायें नहिं जलकें ॥३॥ | Gori |
Savaareni houn aayhon .. babakison abahi jaay ghar dahmau bhalo | Part1-243 | सवारेंई हों आयहों ॥ बाबाकीसों अबही जाय घर दह्मौ भलो
_ जमायहीं ॥१॥ रुचिदायक गोपालही लायक आएछी जुगति बनायहीं ॥
कनक मटुकिया शिर धर दि भर श्याम सुंदरपैं लायहों ॥२॥ होत अवार
च॒तुर्भुज प्रभु मोहि बोहोरि घोष कब जायहों ॥ गिरिधर नागर सकुचत अँचरा
नाहिंन सकत छुडायहों ॥३॥ | Saarang |
Page 1 of 1
bottom of page
