top of page
Sheetkal Ke Pad
To get full expanded Kritan text click on any column of the kirtan row in below table.
Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Shyam muralika key manahin dharey .. karpallove taakon baithaarat karat deva muni gandharv tey curr maanat bhaag ..2.. banamen rahat arrie koo jaane kaba | Part1-281 | श्याम मुरलिका के मनहिं ढरे ॥ करपल््लव ताकों बैठारत करत देव मुनि गंधर्व ते कर मानत भाग ॥२॥ बनमें रहत अरी को जाने कब
आनी धीौं जाय ॥ सूरजपुरकी बड़ी सुहागिन उपजी सौत बजाय ॥३॥
आपुन रहत खरे ॥१॥ बारंबार अधर परसावत उपजावत अनुराग ॥ जे वेश | Ramkali |
Subhag mahurat vijayadashmikau pratham samagam piya hulas .. | Pustak1-318 | सुभग महूरत विजयदशमीकौ प्रथम समागम पिय हुलास ॥
दूति विनती करत प्यारीसों बेग पधारो पियके पास ॥१॥
मंजन कर आभूषण धासे कनक अंग पटचीर सुबास ॥
धीर धरौ वृषभान नंदिनी पूरन करौ प्रीतम की आस ॥२॥
नवनागर संगम नवनागरि नवसंगम बरनत हरिदास ॥
श्रीवललभ पदरज कृपाकों नित्यही नवल हृदय प्रकाश ॥३॥ | Saarang |
Chhavbariyaan boski foolen phool bharee .. kabahunk cutty parr kabahunk | Part1-276 | छवबरीयाँ बॉसकी फूलें फूल भरी ॥ कबहुंक कटि पर कबहुंक
कर पर, कबहुंक सीस धरी ॥१॥ ढॉक टॉक लई नीके पीयरे पट, शोभत
जात न डरी ॥ धोंधीके प्रभु बोलन आवत, काहु बात अचगरी ॥२॥ | Gori |
Kunj mahal bunn baithe dulhaiya nava dulhani brakhbhan kishori .. | NityaPad-267 | कुंज महल बन बैठे दुल्हैया नव दुलहनि ब्रखभान किशोरी ॥
पीत पागपर फूल सहेरो फूल वागो छुटे बंद सोरी ॥१॥
फूलन हार बन्यो अति शोभित फूलन गजरा फूल बन्योरी ॥
पुरबत गावत गिरिधर की रति कृष्णदास प्रभु संग ठग्योरी ॥२॥ | Kanharo |
Baat naheen sutlayaliyo ..| tabaloddhimathjanani yashodamakhankar harihathdiyo ..1.. | NityaPad-179 | बात नहीं सुतलायलिय ो ॥| तबलोदधिमथजननी यशोदामाखनकर हरिहाथदियो ॥१॥
लैलैअधरपरसकर जेंवतदेखत फूल्योमातहियो ॥ आपुहिखात प्रसंसत आपुषि मांखनरोटी बहुतप्रियो ॥॥२॥
जोप्रभुशिवसनकादिक दुर्लभसुतहित वशभयेनंदत्रियो | यहसुखनिरखत सूरप्रभुको धन्य धन्य पलसुफलजियो ॥। ३॥। | Bilawal |
Sakhirihon jeevataharimukhaheren .. | NityaPad-090 | सखीरीहों जीवतहरिमुखहेरें ॥
कोऊमेरोसग्योनहोंकाहूकीकहत-सबनसोटेरें. ॥१॥
जोईयह हठसोईभलेंकरहोकहा भयोकरहेतेरें ॥
परमानंद हिलगकी बातेनिवरत नाहि निवेरें॥२॥ | Bilawal |
Myrie rangilo monhanakumar srimiridhwar khele faag | Part3-288 | माईरी रंगीलो मोंहनाकुमर श्रीमिरिध्वर खेले फाग
॥ध्रु०॥ जिहिंजिहिं मारग तिहिंतिहिं जलीहों निकसत तिहिंतिहिं बार ॥
जिहिंजिहिं मारग तिहिंतिहिं गली मोकों रोकत आय अगवार ॥१॥ पहलें
गेंद चलायकें पेठत धाम में धाय || तापाछें हसयों कहे नेंकदे मेरी गेंदबताय
॥१॥ मे गेंदुक करते दियो छिरकत कुंकुमनीर ॥ गह्ि भुजत बदन सांवरी
मांड्यो बदन अबीर ॥३॥ संगसखा सब जोरकें आंगन चाचरमेल ॥ सब
न सुनत मोसोंयों कह्मों नेक तू मेरे संग खेल ॥४॥ डों सकुची डरपी जिय
मोंहि राखी अंग आगोर ॥ वचन रचन कहि सांवबरे मोसों लई सकत रतिजोर
॥५॥ श्रीगिरिवरधारीलाल को मोपें खेलन वरन्यों जाय ॥ तृण तोरें सहचरी
सबेहो लघुगोपाल गुनगाय ॥६॥ | Gouri |
Dwiteeya bilas kiau shyamaju khel samasya keaney .. taaki | Part1-306 | द्वितीय बिलास कियौ श्यामाजू खेल समस्या कीनी ॥ ताकी
मुख्य सखी ललिताजू आनंद महारस भीनी ॥१॥ चली संकेत बिहार करन
बलि पूजा साजि संपूरन ॥ बहु उपहार भोग पायसलै बाँह हलावत मूर ॥२॥
मंदिर देवी गान करत यश आय मिले गिरिधारी ॥ मनकौ भायौ भयौ सबनकौ
काम वेदना टारी ॥३॥ श्यामा कौ शृंगार श्याम कौ ललिता नीवी खोली ॥
लीला निरखत दास रसिकजन श्रीमुख श्यामाबोली ॥४॥ | Malav |
Merau daan laagat ihi thhaam .. neeken samujhaihaun vrajasundari tumahi | Part1-248 | मेरौ दान लागत इहि ठाम ॥ नीकें समुझैहौं व्रजसुंदरि तुमही
बतावत सो है नाम ॥१॥ भलें भें तोहि बह ुत देठँगी दानकी कहि पकरो
माल ॥ दान लगत मालनके नीचें सो तुम हमसों कहत हौ बाल ॥२॥
बोलौ सँभारि अहो नैंदनंदन बोलत दान हमारी देहु ॥ श्री विदलगिरिधरनलाल
हम दैहैं तुमकों जोई लेहु ॥३॥ | Nat |
Khelati faag baney gopal atee rung bheene .. | Part3-083 | खेलति फाग बने गुपाल अति रंग भीने ॥
मुरली धरे हो हो कहि बोले कोटि मदन छबि छीने ॥ १॥ हाथन बनी कनक पिचकाई ग्वाल बाल सँग लींने ॥ तकि तकि छिरकति फिरति गोपिन कों
गोकुल सदन अरुन कीने ॥२॥ रंग रंगीली ब्रज की ललनाँ निरखति स्याम
ही मन दीने ॥ “राम राई' प्रभु सोभा सागर हित भगवान नैन मीने ॥३॥ | Lalit |
Daan maangat kunwar kanhai .. bahut berry chori dathi bechyo abb | Part1-246 | दान माँगत कुँवर कन्हाई ॥ बहुत बेरी चोरी दथि बेच्यो अब
कैसे जान पाई ॥१॥ जासों रीती लरी मृगनैनी नहीं सयानी बात दिखाई ॥
लेहु निबेरि आजु सब दिनकी जानन देहु व्रजराज दुहमई ॥२॥ मोहनलाल
गोवरधनधारी हरि नागर बातन अरुझाई ॥ परमानंद प्रभु बतरस अटकी दान
लियो अरु डगर बताई ॥३॥ | Saarang |
Aeye aaj kaun bunn charaai yeti gaiyaan kahaan dhon lagaai etee bair.. baithe | NityaPad-109 | ए आज कौन बन चराई येती गैयां कहां धों लगाई एती बेर॥ बैठे
ब कहा सुध लेहो नेन ओसेर ॥॥१॥ एक बन ढूंढ सकल बन ढूंढी तोउ न पाई
गायनकी नेर ॥ तानसेनके प्रभु तुम बहोनायक दे हो कदमचढ टेर ॥२॥ | Gori |
Page 1 of 1
bottom of page
