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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Horry khelungi shyam sanga jaay merey bhaganaten fagun aayo ..
Part3-384
होरी खेलूंगी श्याम संग जाय मेरे भागनतें फागुन आयो ॥ ये भींजवी मेरी सुरंग चुनरियां ॥ में भिजवुं याकी पाग॥१॥ चोबवा चंदन अतर अरगजा ॥ रंगकी परत फुंवार ॥ २॥ लाज निगोडी रहों चाहे जावो ॥| मेरो हियरो भर्यो अनुराग ॥३॥ आनंदघन खेलों सुघर बालमसों ॥ मेरो रहियोहे भाग सुहाग ॥॥४॥
Hori-Kafi
Neeken daan niberat hoe piya loot machawat .. jihin tteeya daav
Part1-262
नीकें दान निबेरत हो पिय लूट मचावत ॥ जिहिं त्तीय दाव पाय जुबती जन कछुक लगावत ॥१॥ कंचुकी कुच निहारि लाल गहि बाँह डुलावत ॥ करसों अलक छुवो गिरिवरधर मुख चुमि चुमावत ॥२॥ यहि मारग आवतही देखत तबही उठि धावत ॥ कृष्णदास प्रभु कर ठाढ़ी लै नाम बुलावत ॥३॥
Dhanashri
Khelongi chanchari maaee apane laalan sanga ..
Part3-161
खेलोंगी चांचरि माई अपने लालन संग ॥ सखी सब जुरजुर मोरिहें अंग ॥१॥ उतत्ते गोप बालक सुवन सबआये ॥ तिनमें सुंदर श्याम लागत सुहाये ॥२॥ उतत्ते झुंडन जुरबत्रज बधुआई ॥ तिनमें राधिका गोरी बनी एकदाईं | ३॥ उततें कनक पिचकाई छूटी ॥ इततें युवती करबंसलेटूटी ॥४॥ गोरा जवादमेद केसर घोरी ॥ छिरके परस्पर चअंदनरोरी ॥५॥ ढोल आवज ताल डफ मोंहों चंगा ॥ बीनरबाववाजे सरस मृदंगा ॥६।। बोलत हो हो होरी कर बजाबत तारी || बीच बीच धुनि राखिकें देत हैंगारी ॥७॥ तब सब मतोमति चडंदिस आई ॥ औचका तककेहीं स्याम गहिलाई ॥८।॥ अरणजा बंदनसों पिय मुख मांडे ॥| तब अपनों मन भायो करि कें छांडे ॥५॥ ललिता करते मुरली तब लीनी ॥ सदाही रहत अधरन रंग भीनी ॥१०॥ उडत गुलाल तहां भयो हे अंधेरो ॥ रति सुख केलि किये मैनचेरो ॥११॥ पीत पट अंचलसों दुहुुंगांठि जोरी ॥ यह छबि वरणि सके कवि कोरी ॥१२॥ बोहोरचों सिमिटि बलदाऊ जाय घेरे ॥ काजर नयनन आजि मुख तनहेंरे ॥ १ ३॥| फगुवा बिनादीये छूटन केसेंपेहो ॥ पीतांबर मुरली तबही भलेंलेहो ॥१४।॥ विविध भूषण पटमोल मंगाये ॥ फगुवा निवेरि ब्रजराज ढिंग आये ॥१५॥ देत असीस प्रमुदित सब गोपी | अपनपों बरन करत चोंपा चोंपी ॥१६।॥ यमुना चले न्डान जुरजूरटोल ॥ कह्दीन परत यह सोभा निरमोल ॥|१७॥ सुरनर सुनिजन वरखावत फूल ॥| कहत हैं इन की कोऊ नहीं समतूल ॥१८॥ यहविध होरी खेलें सब सुखदाई ॥ यह सुख देखि रघुवीर बलजाई ॥१९॥
Dhanashri
Sakhee barsano laagat neeko . kahaan laun kaheen yaa vrajki sobha
Part1-176
सखी बरसानो लागत नीको । कहां लौं कहीं या ब्रजकी सोभा सब ब्रज लागत फीको ॥१॥ कीरति कूख प्रगट भई कन्या भयो भावतों जीको । मंगल गावत सब ब्रजनारी करत ललीकों टीकों ॥२॥ पीत पाटकी चोली पहरे सारी सुरंग रंग ही को । “व्यास” स्यामकी स्वामिनी प्रगटी बाढ्यो प्रेम मन ही को ॥३॥
Bhairav
Pragate bhakt shiromani raay .. maghmas shukl
Part3-007
प्रगटे भक्त शिरोमणी राय ॥ माघमास शुक्ल चोथ अधिक लोक निधि आई ॥१॥ दैवी जीवके भाग्य उदय भये जिन यह दर्शन पाई ॥ करि करुणा प्रभु भूतल आये पुष्टिपथ प्रगटाई ॥२॥ महामहोत्सव होत पुर घर घर फूले अंग न समाई ॥ रसिकदास चित एही चहत है चरनकमल मन लाई ॥3॥
Saarang
Barasaane kii gopi mangan faguwa aaee .. keeyo
Part3-112
बरसाने की गोपी मांगन फगुवा आई ॥ कीयो है जुहार नंदजूकों भीतर भवन बुलाई ॥१॥ एक नाचत एक गावत एक बजावत तारी ॥ काहे मोहन राय दुरि रहे मैया यदि वावत गारी ॥२॥ आदर देत ब्रजरानी अबनिज भागणि हमारे ॥ प्रीतम सजनकुलवधू पायेदरस तुहारे ॥३॥ सुने कुंवरि मेरी राधे अबही जिन मुख मांडो ॥ जेवत श्याम सखन संग जिन पिचकाई छांडो ॥8॥ केसरि बहोत अरगजा कित मोहन परडारो ॥ सीतलगे कोमल तन तुमही चित्त विचारो ॥५॥ अंचल ऊपर देरही दोऊ मैया त्रनतोरी ॥ बरजत भर कुंकुमा निर्भय नवल किसोरी ॥६॥ कहत रोहिनी जसोदा ओली ओडति आगें ॥ जायभरो ब्रजराजे मोहन दीजे मांगें ॥७॥ मोहन मांगे पैयें तो दिन दसहमहिं देहो ॥ गोपकुंवर के पलटें जो चाहो सो लेहो ॥८॥ सुबल सुबाहु श्रीदामा सुनतत अचानक आये ॥ कंचन माट भरे दघ्ि लें गमोपिन सिरनाये ॥९॥ ग्वाल गुपाल सखा सब हँसत करत किलकारी ॥ दूध लीयो भीतरते छिरकीं सब ब्रजनारी ॥१०॥ जो सुख सोभा बाढी कहत कहा कहि आबे ॥ ललिता कुंबरि कुंवर को अंचल गष्ठि गहि लाबे ॥ १ १॥ भये निरंतर अंतर तजि वल्लभ ब्रजबाला ॥ गिरि गिरि परत गलिनमें हारतोरि मनिमाला ॥१२॥ प्रभु मुकुंद ब्रजवासी अटक कोनकी माने ॥ कहत भैया माधोजन चलो भरो वृषभाने ॥१३॥ इतनो मांग्यो पांऊं देहु बूंदाबन वासा ॥ कुंवर कुंवरि तहां विहरत चरन कमलकी आसा ॥१४॥
Bilawal
Jaagiye gopallal janani balzai .. utho taat praat bhayo
NityaPad-016
जागिये गोपाललाल जननी बलजाई ॥ उठो तात प्रात भयो रजनीको तिमिर गयो टेरत सब ग्वालबाल मोहनाकन्हाई ॥। १॥। उठो मेरे आनंदकंद गगनचंद मंदभयो प्रकट्यो अंशुमान भानु-कमलने सुखदाई ॥ सखा सब पूरत वेणु तुम बिना न छूटे धेनु उठो लाल तजो सेज सुंदर वरराई ॥॥२॥ मुखते पटदूरकियो यशोदाको दरसदियो ओर दथि मांगलियो विविध रस मिठाई ॥ जेवत दोऊ रामश्याम सकल मंगल गुणनिधान थारमें कछू जूठ रही मानदास पाईं ॥। ३॥।
Bhairav
Aavat jaatahin tou haar pariri ... jyojyon pyaaro vinatikar
NityaPad-325
आवत जातहीं तो हार परीरी ॥। ज्योज्यों प्यारो विनतीकर पठवत त्योंत्यों तूं गहमान चढीरी ॥९॥ तिहारेबीच परे सोई बावरी हों चौगानकीगेंद भईरी ॥ गोविंदप्रभुकों वेगमिल भामिनी सुभग यामिनी जात बहीरी॥२॥
Bihagaro
Shyam shyam praat uthhe bethe arasparas dou karat singar |.
NityaPad-155
श्याम श्याम प्रात उठे बेठे अरसपरस दोउ करत सिंगार |। लटपटी पाग सँवारत एयामा अलक सँवारत नंदकुमार ॥ १॥ एक पहेनी वाकी मोतिनमाला एक पहनी वाको नवसर हार॥ श्रीभट जुगलकिसोर द्युति मेरे आंगन करत बिहार ॥२॥।
Devgandhar
Baabaa aaj bhookh atee laagi.
NityaPad-087
बाबा आज भूख अति लागी। भोजन भयो अघानो निकेतूर्पत होय रुची भारी ॥ १ अचवन कर यमुनोदक लिनो मुर ज्ञभांत पल लागी। भोज अंत शीत लागे परमानंद दिजे मेरी आंगी | २।॥।
Dhanshree
Sikhwat harikon murali bajaavan .. saptarandhr parr dharat angureedal
Part1-346
सिखवत हरिकों मुरली बजावन ॥ सप्तरंध्र पर धरत अँगुरीदल कंध बाहु धर मधुरे गावन ॥१॥ सरसभेद जति राग कान्हरो गति बिलास वर नयन नचावन ॥ कृष्णास बल बल वैभवकी गिरिधर पियप्यारी मनभावन ॥२॥
Kanharo
Paramdhan radha naam aadhaar .
Part1-197
परमधन राधा नाम आधार । जाहि पिया मुरली में टेरत सुमरत बारंबार !१॥ वेद मंत्र अरु जंत्र तंत्र में ये ही कियौ निरधार | श्रीशुक प्रगट कियौ नहीं तातें जान सारकों सार ॥२॥ कोटिन रूप धरे नंदनंदन तोऊ न पायो पार । व्यासदास अब प्रगट बखानत डार भारमें भार ॥३॥
Goud Saarang
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