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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Sir soney key sootan sohat pagpenchan oopar nug lagey .. ratnare | NityaPad-112 | सिर सोने के सूतन सोहत पागपेंचन ऊपर नग लगे ॥ रतनारे
भारे ढरारे नयनन देखत मूर्छित मेंनजगे ॥९॥ मुखकी मंजुलताई बरनी नजाई
चंचलता देखि दूर भगे ॥ नंददास प्रभु नंदरानी छबी निरखत वार पीवतपानी
जिन काहुकी दृष्टि लगे ॥२॥ | Kanharo |
Bhadonki ashtami aadhi raajmein kaanh bhayo sabke munn bhaayo.. | Part1-072 | भादोंकी अष्टमी आधी राजमें कान्ह भयो सबके मन भायो॥
जोरि बटोरि धर्यों धन सोरीमेंसोरी जसोदाजु लुटायो ॥१॥ मोदसों गोद लिये
हुलरावत प्रान पियारे को प्रान सो पायो रोहनी में भयो मोहनी मूरति नंददास लखि
हि. पोसिरायो ॥२॥ | Bibhaas |
Jhoolat jhoodol harakh harakh gawat .. nirakh nirakh | Part3-381 | झूलत झूडोल हरख हरख गावत ॥ निरख निरख
छबि परसरूपर नवल दोऊ सचु पावत ॥|६।॥| रसिकराय विहारी प्यारी सरस
मृदुल मधुर तान रीझ रिझावत्त ॥ माधो प्रभु गिरिधरण नागर नागरी प्राण
पिया मिल भावत ॥|२॥ | Sarang |
Leeje beeri param udaar.. | NityaPad-222 | लीजे बीरी परम उदार।।
लाई स्वच्छ समार मनोहर अति सुगंध सीतलता डार॥१॥
निरख निरख छबि मन आनंदे लीनी सुहस्त पसार ॥
सूर निरख नंद तन मन धन बारत मुक्ताहार ॥२॥ | Saarang |
Phoolanaki choli phoolanke cholana foolmaathen phool haath | NityaPad-260 | फूलनकी चोली फूलनके चोलना फूलमा्थें फूल हाथ
कानन में फूल ॥ फूलनकी सेज नीकी फूलनकें चंदुवा फूलनके वींजना फूलन
'फोंदा फूल ॥९ ॥ फूलनके तकीया फूलनकी गालमसूरी फूलनके झबा शब्या
आगें पाछें फूल ॥ फूलनके मेहे ल फूलनकी चित्रसारी परदा परमानंद प्रभु
राधामाधव फूल ॥२॥ | Saarang |
Dolat atee phoole sub gwal .. curry curry chaau singarat | Part1-008 | डोलत अति फूले सब ग्वाल ॥ करि करि चाऊ सिंगारत
गायन भयौ नंदके लाल ॥१॥ फिरि फिरि आय नंदग्रह आंगन गहत महरिकि
पाय ॥ भलौ पूत जायौ नंदरानी गोकुलकों सुखदाय ॥२॥ देत बधाई बिनु
मर्यादा जो जाके मन भाव ॥ अ्रीविहलगिरिधरन देखिके आनंद उर न
समाय ॥३॥ | Devgandhar |
Joee joee bhaave soee soee leeje ... | NityaPad-298 | जोई जोई भावे सोई सोई लीजे ॥।
तुम्हारे काजें करकर लाई मेरो सुफल श्रम कीजे | ॥
अरुण मलाई माखन मिश्री और ओट्यो पय पीजे ।|
ओदन व्यंजन स्वाद सबे रस भोजन छिनछिन लीजे ॥।१॥
जेंबो बेग खेलियें पाछे भोजन में मन दीजे |।
देहों विविध खिलोना तुमकुं मेरो कह्यो पतीजे ॥ ३॥
अलक सवारबीजना ढोरूं पाछे बिंदु लगीजे ॥
रसिक प्रीतम जननी संग जेंबत बाललीला रस भीजे ॥।४॥। | Iman |
Nikasamaamke gwende .. ekann bhaye ..| sub vrajwasi | Part3-300 | निकसमामके ग्वेंडे ॥ एकन्न भये ॥| सब ब्रजवासी
लोग ग्वाल एकत्र भये ॥ मध्य बलराम गोपाल ॥ करन फाग को भोग
॥१॥ सीस न फेंटा ऐंठ बांध ॥ दुहंदिस टोराडार ॥ नवल छैल बानिक
बनबन ॥ मनमें मतोविचार ॥२॥ अगणित माट भराय रंगन ॥ सोंघो बहुत
मंगाय ॥ सुरंग गुलाल अबीर संग ॥ लीने सकट भराय ॥३॥ नंद गामते
जुरसबे ॥ लईं वरसाने की गेल ॥ मन्मथ सेना सज मानो ॥ चले करनकों
सेल ॥४॥ धरें अधर मुरली मोहन ॥ जावत गोरी राग ॥ वरसाने के निकट
जाय ॥ प्रगटे प्रेम अनुराग ॥५॥ म्वेंडें्ड वासर विते ॥ उदित भये राकेश ॥
मदन महोत्सव करनकों ॥ कीनों नगर प्रवेश ॥६ ॥ पोंहोंचे जाय समाजसों ॥
वृषभान गोप की पोर ॥ सुनसुन श्रवणन ब्रजबधू | आई देखन दोर ॥७॥
बगर बणरतें जुरसबें ॥ टिके चोहोटें जाय ॥ सेना बेनी करतबने ॥ लीनों
सुबल बुलाय ॥८।॥ मोहनसों कही जायकें | वदो बदनदे कोल || जीतेसो
कहा पावहीं ॥ वेगें बोलो बोल ॥९॥ सुन हस मोहन यों क्यो ॥ हम हार
अपनपों देंहिं ॥ उत उड़गण में चंद्रमा ॥ हम जीतें तो लेहिं ॥१०॥ सुन
ब्रज नारी मुदित तबे ॥ झंडा रोप्यो आय ॥ नायक सहित निसंक व्है ॥
जीते सो ले जाय ॥|१ १॥ तब बाजे बहुविध वजे || डिंम डिम ढोल मृदंग ॥
वीणा जंत्र पिनाक ताल ॥ डफ मह॒वर मुखचंग ॥१२॥ ओरों अगणित
बाजही ॥ वरण सके कवि कोन ॥ कोलाहल सुन ब्रजबधू रहीन कोऊ भोन
॥ १ ३॥ रत्नजटित पिचकारी ले | छिरकत गोपकुमार || तमक तमक तरुणी
तबे ॥ वंसनकीनी मार ॥ १४॥ नवकुंकुम जल घोरकें || युवती यूथमें जाय ॥
जे यूथनमें नायका ॥ तिनके सिरदये नाय ॥ १५॥ छूटत जोर जल जंत्रइते ॥
लगे त्रियन उरजाय ॥ पंचबाण के बाणज्यों || लगत उठत अकुलाय ॥ १ ६॥।
तब युवती सब उमग कोपि ॥ देत गुलाल उडाय ॥ उतते उडत अबीर
सघन ॥ गयो घुमड नभछाय ॥१७॥ रातकुहकीयों लगे ॥ सघन घटाको
लाग ॥ कमल वरण बादरनतें ॥| मानो वरखत अनुराग ॥१ ८॥ तब ललिता
एक छलकियो ॥ कुसुम दामलेपानि ॥ मोहन को पहराइकें || हलधर पकरे
आनि ॥१९॥ युवती वृंदमेंलें गई || सबकी दृश्टिबिचाय ॥ श्रीमुख मृगमद
मांडकें ॥ चोवा अंग लगाय ॥२०॥ नयनन काजर आंजके ॥ मांगत फगुवा
देह ॥ जो तुम देनन पूजर्ड ॥ मधुर बचन सुनलेह ॥२१॥ मन भायो फगुवा
॥ आये अपने खेत || निरख सखा प्रमुदित भये ॥ सबे बलैया लेत
॥२२॥ चंद्रावलि ललिता तबे ॥ चली सबन देसयन ॥ रवक रंगीली
राधिका ॥ गहे कमल दल नयन ॥२३॥ निरख सखी प्रमुदित भई ॥ सब
आलिंगन देहिं ॥ सुफलम मनोरथ मानकें ॥ अधर सुधारस लेहिं ॥२४॥।
मृगमद साख जबादमेद ॥ एकन्र कर लेआय ॥ मोहन मुख लपटायकें ॥
पुजब॒त मनके भाय ॥२५॥ हस चंद्रावलि यों कहे ॥ सुनो हमारी बात ॥
अबजो हमारे वसपरे || लेजु चलो एकांत ॥ २६॥ तब ललिता भुजगहिलई ॥
गई कुंजके द्वार प्यारी पें पोंहोंचायकें || कीनों फिर सिंगार ॥२७|॥ स्याम
कंचुकी खुभिरही ॥ अरूकटि लहेंगा लाल ॥ तन सुख सारी अतिलसे ॥
आंजे नयन बिशाल ॥२८॥ आभूषण नख सिख सजे ॥| चले मत्त गजचाल ॥
अपने बृंदमें जायमिली ॥ निरखि मोही बाल |२५॥ उतकी ओर अचरज
भयो || मोहनहूं मिले जाय ॥ दाऊकी छबि निरखकें | ताडर रहे लुकाय
॥३०॥ आपस मांझ विचारमतो ॥ दीनों सुबल पठाय ॥ ललिता बुझी
जायकें ॥ मोहन देहु बताय ॥३ १॥ सुनत वचन बोली सवे ॥ सुनों सुबल
सुबाहु ॥ हार अपनों हरिदयो ॥ हमहीं जीतले जाहु ॥३२॥ जुर आईं सब
ग्वालि तबें ॥ लगे करन मनुहार ॥ जीती हो जीती बधू ॥ हम सब मानीहार
॥३३ ॥ झंडाले सब ब्रज वधू ॥ फगुवा लियो निवेर ॥ ले बलाय तृण
तोरहीं ॥ मोहन मुख तनहेर ॥३७॥ पट आभूषण पलटकें ॥ कीनों फिर
सिंगार ॥ ले मुरली कटिपर धरें ॥ आये नंद कुमार ॥३५॥ स्याम समूह
तरंगमें ॥ ब्रजपुर सकल झकोरि ॥ मांग विदा घरकोंचली ॥ श्रीवृषभान
किशोरि ॥ ३६॥ तब सब गोपकुमार फिरे || आये नंदजू की पौरि ॥। कनकथार
मुक्ताभरे ॥ धर दीपावली जोरि ॥३७॥ आय उत्तारदगो आरती ॥ मुदित
यशोदा माय ॥ राईलोन उतारकें ॥ छत्तिया लये लगाय ॥३८॥ श्रीवललभ
कृपा कराक्षते ॥ यह अनुभव उरधार ॥ यह रस ब्रजजन मगन व्है ॥ गाई
सरस धमार ॥३५९॥ | Gouri |
Taba mukh chand sahaj seetal jaamein yaabidhuten or bhaanti .. | NityaPad-115 | तब मुख चंद सहज सीतल जामें याबिधुतें ओर भांति ॥
जाकों निशाराहु डर नाहि कलंक धर ओर नकछु दोष जाकी नित्यप्रति बढतीहें
कांति ॥१॥ अलकनके मिष जाढिंग निसदिन रहतहें मधुपन की पांति॥| रसिक
प्रीतमकों ताहीतें तो यह तज औरन सुहात ॥। २॥॥ | Adano |
Jhoothi meethi batiyaan lalan manuhar curran aaye .. | NityaPad-103 | झूठी मीठी बतियां ललन मनुहार करन आये ॥
कहा कहिये तेरे हृदयकी सुंदरताई जैसे तन श्याम तेसेई हो मन तातें ब्रजयुवतिन मनभाये ॥ १॥॥
कित सकुचत पिय खरे नीके लागत प्राणपियाके रंगछाये ॥|
धन्यधन्यहो ते त्रिया कोन सुकृत कीने ताते गोविंदप्रभु पिय पाये ॥२॥ | Nat |
Chhootat fuhaare chaaru chadhe chanduba sou laage | NityaPad-249 | छूटत फुहारे चारु चढे चंदूबा सो लागे
बूंदन की बरखा बरखा झरे लागी मानों सावन की । चलत सुगंध डोरे अरगजा
अरु चंदन की अत्तर गुलाब नीर उसीर छिरकावन की ॥१॥ बने जल भोन मे
बिछोना रचे बंगला में मच्छ कच्छ मेंडक अरु मुर॒ग नचावन की । राजभोग
आरती उत्तारत श्रीविद्ठल प्रभु सूर बलिहारी जाय नट बर मन भावन की ॥२॥ | Saarang |
Chandan paher naav hari baithe sanga vrishbhan dulariho .. | NityaPad-252 | चंदन पहेर नाव हरि बैठे संग वृषभान दुलारीहो ॥
यमुना पुलिन फूल शोभित तहां खेलत लाल बिहारीहो ॥१॥
त्रिविध पवन बहत सुखदायक सीतल मंद सुगंधाहो ॥।
कमल प्रकाश कुसुम बहु फूले जहां राजत नंदनंदाहो ॥२॥
अक्षय तृतीया अक्षय लीला संग राधिका प्यारी हो ॥
करत बिहार सबे सखीसों नंददास बलहारी हो ॥३॥ | Saarang |
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